Tuesday, 27 September 2016

बनके मनकी चाँदनी

बनके वन के उपवन की महक महकाऊ फिजा
बनके वन की मोरनी नाचू बहकाऊ हवा
बनके चाँदनी चंदा की शबनमी मोतियों से वसुन्धरा का सिंगार करू
बनके नित नई आशा वीश्वास का संचार करू
बनके वन की वनरानी नित नव सिंगार करू
बन के चंदा की चकोर महबूब मोहब्बत का एतबार करू
बनके कान्हा की बाँसुरिया गोपियों को लुभाऊ
बनके इन्दृ की सेना घनघोर वसुन्धरा पे बरसू
बनके इन्दृ धनुष सबके मन लुभाऊ
बनके चकवा की चकोर नित मन को हर्षाऊ
बनके तेरी पेृमिका वन मे तेरा इन्तजार करू
बनके तेरी राधा तेरी मोहब्बत का एतबार करू
बनके तेरी बाँसुरी लबों की शोभा नित बढाऊ
बनके खुबसूरत मयुर पँख तेरे माथे की शोभा बढाऊ
बनके मोहब्बत मेरे महबूब तेरी संसार महकाऊ
बनके तेरी गलमाला साथ हरपल तेरा मेरे महबूब पाऊ

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव