बनके वन के उपवन की महक महकाऊ फिजा
बनके वन की मोरनी नाचू बहकाऊ हवा
बनके चाँदनी चंदा की शबनमी मोतियों से वसुन्धरा का सिंगार करू
बनके नित नई आशा वीश्वास का संचार करू
बनके वन की वनरानी नित नव सिंगार करू
बन के चंदा की चकोर महबूब मोहब्बत का एतबार करू
बनके कान्हा की बाँसुरिया गोपियों को लुभाऊ
बनके इन्दृ की सेना घनघोर वसुन्धरा पे बरसू
बनके इन्दृ धनुष सबके मन लुभाऊ
बनके चकवा की चकोर नित मन को हर्षाऊ
बनके तेरी पेृमिका वन मे तेरा इन्तजार करू
बनके तेरी राधा तेरी मोहब्बत का एतबार करू
बनके तेरी बाँसुरी लबों की शोभा नित बढाऊ
बनके खुबसूरत मयुर पँख तेरे माथे की शोभा बढाऊ
बनके मोहब्बत मेरे महबूब तेरी संसार महकाऊ
बनके तेरी गलमाला साथ हरपल तेरा मेरे महबूब पाऊ
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Tuesday, 27 September 2016
बनके मनकी चाँदनी
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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