Friday, 9 September 2016

हमें हक़ है मोहब्बत का

 हमें हक़ है मोहब्बत का
तुम स्वीकार करो
या न कारों
जिससे चाहो तुम महब्बत मेरे
सरकार करो हमारी मोहब्बत हो तुम
हमारा प्यार हो
तुम जिंदगी की बाहर हो तुम
मेरी मोहब्बत
मेरा एतबार हो तुम
जिंदगी जीने की कला
जिंदगी का एतबार हो तुम
तुम मानो या न मानो
मेरी पहली मोहब्बत
मेरा पहला प्यार हो तुम

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव