Friday, 25 November 2016

दिल

दिल महकता है
तुम्हारे
तुम्हारी उपवन की
हरेक नव कृति
जब खिलती है
और
काव्य सरिता में
सरेशाम
मचलने लगती है

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव