Friday, 2 December 2016

शबनमी मादक हाला

शबनमी मादक हाला

जब महुए की नन्हीं कली मुसकाती है दिल की धडकन बढने लगती और फिजा मचलती है
महुए की मादक महक से
दिल में खुमारी छाती है
एसे में तनहाईयों में पृियतम तुम्हारी याद बहुत तडपाती है
पृियतम के वियोग में महुए की मादक महक अगन लगाती है विरहाग्नि को हवा मादक महक देती है सोई उमंगे जगाती है
जब महुए की मादक हाला कंठ से नीचे जाती है
पोर पोर मचलने लगता है जिस्म में जान मानो आ जाती है
फिर चहु दिसी रूप सी सुरबाला सागयमय संग नजर आती है
प्यालों पे प्यालों का दौर जब चलता है खुमारी यौवन पर आती है 
निशा यौवन पर होती है कायनात बहकने लगती है
नजरों ही नजरों में सुरबाला मादक यौवनरस हाला पिलाती है
बाला की सागरमय से यारो अविरल सागरमय छलकती है
एसे मे रूपसी सुरबाला पल पल रंग बदलती है !

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खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव