शबनमी मोहब्बत
हर घडी हरेक पल दीदारे यार करता हूँ
ए मेरी जिन्दगी मोहब्बत बेशुमार करता हूँ
ए मेरी जिन्दगी मोहब्बत बेशुमार करता हूँ
शर्मो हया से पलके तेरी उठती नहीं
अपनी मोहब्बत का इकरार करती हूँ
अपनी मोहब्बत का इकरार करती हूँ
जालिम जमाने की बेरूखी दिल पे वार करती है
छुपाले आशियाना ए दिल में गुजारिश यार करती हूँ
छुपाले आशियाना ए दिल में गुजारिश यार करती हूँ
चाँदनी ने शबनमी मोतियों की चादर सजाई है
ऐ मेरे महबूबे मोहब्बत तेरा इन्तजार एतबार करती हूँ
ऐ मेरे महबूबे मोहब्बत तेरा इन्तजार एतबार करती हूँ
ख्वाबगाह मे तनहाईयों में दीदार करता हूँ
तुम्ही तो हो मेरी जिन्दगी मेरी मोहब्बत इकरार करता हूँ
तुम्ही तो हो मेरी जिन्दगी मेरी मोहब्बत इकरार करता हूँ
मनोहर यादव " अमृत सागर "
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