अल्हड
अभी तो तू बच्चा है
अक्ल का कच्चा है
माक्सवाद से अंजान है
बाबले बिहारी है
तू समझदार है
पढा लिखा है
नासमझ मेरे यार है
छोटा है भाई सा
ना समझ
हकीकत से आँख
न तू चुरा
कहाँ
राजा भोज
और कहाँ गंगू तेली
वो दुनियाँ का हीरा है
तेरा कोई असतित्व नही
तू भाई अभी नादान
जमाने की ठोकरो से
अनभिग्य है
जवानी का जुनून है
बावले तैरी सोच
न पर्वत से टकराने की
तू सोच
कैसे भला एवरेस्ट से तू टकरायेगा
कैसे भागीरथ बनके
गंगा की धार मोड पायेगा
छोटे
नासमझ अंजान
बहुत जरूरी है अनुभव
जवानी के जोश नाल
बाल पन ने लील
लिया हनु ने रवि
बालक से आगे
अपनी सोच आगे बढा
चल साथ सबके
कंधे से कंधा मिला
अक्ल का कच्चा है
माक्सवाद से अंजान है
बाबले बिहारी है
तू समझदार है
पढा लिखा है
नासमझ मेरे यार है
छोटा है भाई सा
ना समझ
हकीकत से आँख
न तू चुरा
कहाँ
राजा भोज
और कहाँ गंगू तेली
वो दुनियाँ का हीरा है
तेरा कोई असतित्व नही
तू भाई अभी नादान
जमाने की ठोकरो से
अनभिग्य है
जवानी का जुनून है
बावले तैरी सोच
न पर्वत से टकराने की
तू सोच
कैसे भला एवरेस्ट से तू टकरायेगा
कैसे भागीरथ बनके
गंगा की धार मोड पायेगा
छोटे
नासमझ अंजान
बहुत जरूरी है अनुभव
जवानी के जोश नाल
बाल पन ने लील
लिया हनु ने रवि
बालक से आगे
अपनी सोच आगे बढा
चल साथ सबके
कंधे से कंधा मिला
मनोहर यादव "अमृत सागर "
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