Friday, 2 December 2016

अल्हड

अल्हड

अभी तो तू बच्चा है
अक्ल का कच्चा है
माक्सवाद से अंजान है
बाबले बिहारी है
तू समझदार है
पढा लिखा है
नासमझ मेरे यार है
छोटा है भाई सा
ना समझ
हकीकत से आँख
न तू चुरा
कहाँ
राजा भोज
और कहाँ गंगू तेली
वो दुनियाँ का हीरा है
तेरा कोई असतित्व नही
तू भाई अभी नादान
जमाने की ठोकरो से
अनभिग्य है
जवानी का जुनून है
बावले तैरी सोच
न पर्वत से टकराने की
तू सोच
कैसे भला एवरेस्ट से तू टकरायेगा
कैसे भागीरथ बनके
गंगा की धार मोड पायेगा
छोटे
नासमझ अंजान
बहुत जरूरी है अनुभव
जवानी के जोश नाल
बाल पन ने लील
लिया हनु ने रवि
बालक से आगे
अपनी सोच आगे बढा
चल साथ सबके
कंधे से कंधा मिला
मनोहर यादव "अमृत सागर "

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव