Friday, 2 December 2016

मोहब्बत - I

मोहब्बत

मेरे जिस्म की रूह एक तुम्हीं तो हो कन्हाई
मेरे दिल को तुम्हारी साँवरी सुरतिया यार भाई
दिल की हरेक धडकन है तेरे ही नाम से
साँवरिया जिन्दगी गुजर रही है तेरे ही नाम से
जिन्दगी की नौका का खेवनहार तुम्हीं हो कन्हाई
मैने अपनी जिन्दगी रूपी नौका की पतवार तुम्हें थमाई
जब तुम सा सारथी है तो खौर नजर नहीं आता
बिन तेरे मेरे महबूबे मोहब्बत अब रहा नही जाता
तेरी मोहब्बत की महक से महकती है कायनात
उमडते घुमडते है बदरिया और होती है मोहब्बत भरी शबनमी मोतियों की बरसात
चाँदनी के शबनमी मोतियों मे भी तेरा दीदार होता है
मयुर के मोहब्बत से लबरेज पंखों से मेरे महबूब तेरा सिंगार होता है
मनोहर यादव " अमृत सागर "

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव