मोहब्बत
मेरे जिस्म की रूह एक तुम्हीं तो हो कन्हाई
मेरे दिल को तुम्हारी साँवरी सुरतिया यार भाई
मेरे दिल को तुम्हारी साँवरी सुरतिया यार भाई
दिल की हरेक धडकन है तेरे ही नाम से
साँवरिया जिन्दगी गुजर रही है तेरे ही नाम से
साँवरिया जिन्दगी गुजर रही है तेरे ही नाम से
जिन्दगी की नौका का खेवनहार तुम्हीं हो कन्हाई
मैने अपनी जिन्दगी रूपी नौका की पतवार तुम्हें थमाई
मैने अपनी जिन्दगी रूपी नौका की पतवार तुम्हें थमाई
जब तुम सा सारथी है तो खौर नजर नहीं आता
बिन तेरे मेरे महबूबे मोहब्बत अब रहा नही जाता
बिन तेरे मेरे महबूबे मोहब्बत अब रहा नही जाता
तेरी मोहब्बत की महक से महकती है कायनात
उमडते घुमडते है बदरिया और होती है मोहब्बत भरी शबनमी मोतियों की बरसात
उमडते घुमडते है बदरिया और होती है मोहब्बत भरी शबनमी मोतियों की बरसात
चाँदनी के शबनमी मोतियों मे भी तेरा दीदार होता है
मयुर के मोहब्बत से लबरेज पंखों से मेरे महबूब तेरा सिंगार होता है
मयुर के मोहब्बत से लबरेज पंखों से मेरे महबूब तेरा सिंगार होता है
मनोहर यादव " अमृत सागर "
No comments:
Post a Comment