तेरी ही आस है तुझसे ही प्यास है साँवरिया
तुझसे ही मोहब्बत है तुझसे ही अरदास है साँवरिया
तुझसे ही महकती है शबनमी कायनात साँवरिया
तेरे ही नूरे रूखसार से रौशन ये कायनात है
भोर में खिलती हुई कुमुदनी से पृेमी हुआ आजाद है
मोहब्बत में दीवानगी का कितना मधूर अहसास है
चंदा की चाँदनी की तपिश अब सही नही जाय साँवरिया
तेरे और तेरी मोहब्बत के बगैर अब रहा नही जाय साँवरिया
पृियतम प्यारे दो बिरही नैना मतवारे तेरी राह निहारे
अब तो आजा नंद के दुलारे साँवरे सलोने मतवारे
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