Wednesday, 11 January 2017

नव भोर

रवि किरणों ने हरा तिमिर
लालिमा चहु दिशी है छाई
गुँज उठी पंक्छिीं कलरव
नव उर्जा जहन में है आई

माँझी साहिल छोड चले
मौंजों में नव उर्जा है आई
शमाँ की मोहब्बत में देखों
परवाने भृमर ने जाँ की बाजी लगाई !

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव