जिन्दगी की डगर बहुत काँटों भरी हमने जानी है
फिर भी हर हाल में मोहब्बत ऩिभानी है
विपत्तियों से टकराना ही जिन्दगी है हमने ठानी है
महबूबे मोहब्बत की फकत चाहत ही जिन्दगानी है
आँखों अश्के मोहब्बत जिन्दगी बितानी है
मोहब्बत की चाहत में डगर सुगम बनानी है
तेरी मोहब्बत में जाँ फकत हमने लुटानी है
ये बात दिलों दिमाग से हमने दिल में ठानी है
लबों पे शबनमी मुस्कान मोहब्बत भरी
मोहब्बत ही जिन्दगी हा ये बात हमने जानी है
दिली जजबात लबों बयाँ आज करेंगें हमने ठानी है
पाक परवरदिगार के रहमों करम से जिन्दगानी हमने बितानी है
हर हाल में अपनी माशुक को अपनी जिन्दगी बनानी है
मनोहर यादव " अमृत सागर "
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