Sunday, 8 January 2017

इबादते हुस्न

उनकी सादगी दिल को भाने लगी
तनहाईयों में उनकी यादें सताने लगी

हरसिंगार की मादक महक फिजा महकाने लगी
वफा ए महबूबे मोहब्बत दिल लुभानो लगी

नूरे रूखसार से रौशन हो गई जिन्दगी हमारी
उनकी मोहब्बत की महक लगती है बहुत प्यारी

उनकी मोहब्बत अब तो है जिन्दगी हमारी
जिन्दगी उन्हीं से है उन्हीं से दुनियाँदारी !

आईना ए दिल में ऩित दीदारे यार करते हैं
उन्हें मोहब्बत का रब जानकर इबादते हुस्न यार करते हैं !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव