बातों ही बातों में बातों की शुरूवात होती है
बातों ही बातों में मोहब्बत में दो धडकते हुयें दिलों की मुलाकात होती है
फूँस के उमडते घुमडते घनियारे मेघों के साये में
दो धडकते दिलों की मुलाकात होती है
जब मोहब्बत परवान चढती है फिजा यारों मचलती है
जवाँ दिलों की मोहब्बत से जमानें वालों की भौंहें यारों सिकुडती हैं
मोहब्बत करने वाले नही जमाने की संगीनों की परवाह यार करते हैं
मोहब्बते महबूब को पाने के लिये आशिक हरेक हद से गुजरते हैं !
मनोहर यादव " अमृत सागर "
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