Tuesday, 14 March 2017

मोहब्बत

इनायते रब है मोहब्बत तुम्हारी !
आशियाना ए दिल में बसी सूरत प्यारी !
तुम्हारी मादक महक से महकती है कायनातों फिजा !
सबब ए जिन्दगी महबूबे मोहब्बत हमारी !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव