अब तोहे नाहे छोडू री गुजरियाँ
आज रंगोगों तेरी चोली रे
आज धूम धाग फगुआ की बृज में आज तो खेलेंगें होरी रे !
मस्त भयो मन जब देखी गुजरिया खेलत होरी रे
झूम उठी सब कुँज गलियाँ मथूरा की रंगी रंग होरी के !
मस्त भई बरसाने की गलियाँ केशर के रंग से
झूम उठी गुजर गुजरियन और ग्वालन की टोली रे !
कान्हा की मादक मोहब्बत के रंग रंग गयों बरसानो
बिसिराय दई दिलन की रंजिश और भिगोई दामन चोली रे !
आज कायनातों फिजा रंग गई साँवरिया की मोहब्बत के रंग में
चहु दिशी गुजँत रंग रंगीली फगुआ और गुजरियन ग्वालन की टोली रे !
हेप्पी होली साथियों
मनोहर यादव " अमृत सागर "
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