Monday, 20 March 2017

पेृरणा हमारी

आपकी महकती यारी
मित्रवर अनुपम पृेरणा हमारी
नूरे रूखसार से रौशन है
कायनातों फिजा सारी
जब से हुई है यारी
वफा ए मोहब्बत
खुद्दारी में बीत गई
यारों जिन्दगी हमारी
दिल से भी मस्त मस्त
तन मन अति मनभावन
जानती है दुनियाँ सारी
वो महबूबे मोहब्बत है हमारी
गर्दिशों में परखी हमने यारी
२४ केरट वफा में उतरी
मेरे यारों यारी हमारी
जल भुन गई ये दुनियाँ सारी
यारों की अपनी यारी
जैसे केशर की महकती
लरजती अनुपम क्यारी
जल भुन गई ये दुनियाँ सारी
ता कायनात महकती रहेगी
चहकती रहगी यारो यारी हमारी
शबनमी चाँदनी के मोतियों की सी
खुबसूरत मेरे यारों यारी हमारी !

मनोहर ये " अमृत सागर "

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव