मोहब्बत भरी मौंजों का दौर जारी है
आशियाना ए दिल में बेकरार साहिल है गले लगाने को !
बेरूखी ए महबूब से जज्बा ए मोहब्बत बढता ही गया !
दीदारे यार की चाहत में हरेक डगर छोटी हो गई !
वदा ए वफा मोहब्बत में जरूरी यार होती है
आशिकी में जाँ की बाजी लगाने को महबूब तत्पर यार होती है !
दिल की हरेक धडकन ख्वाहिशबंद दीदारे यार की है
तेरी मोहब्बत की मादक महक जिन्दगी में रंग भर देती है !
मनोहर यादव " अमृत सागर "
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