Thursday, 30 March 2017

बसंत

सखी बसंत आयो
मुस्काई चंचल मोरनी
अमुआ के बोर ने मन भरमायों
खिलत नित नव कोपल
अंग अंग है भरमायो
सखी सुन बसंत
सिर पे पाव धरके आयो
मनवा मा उमंग उठी
पिय मिलन की सखी
बैरी हिय को दरद बढायों
काम वेदना अब सही नही जाय
बसंत ने जे कैसो रोग लगायो
हियरा में सखी शूल चूभत है
बेदर्दी ने जे कैसों रोग लगायो
पलाश ने वसुन्धरा की मांग सजाई
दुगनो रोग भडकायों
महुआ की मादक महक ने
हियरा में अगन लगायो
मोहे एसो भान होत है
काम रति ढिंग
वसुन्धरा पे सखी आयों
सखी बसंत आज आयो !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

आदमी

जमाने की कारगुजारियों में खो जाता है आदमी
अपने अपनों के हाथ का खिलौना बन जाता है आदमी
खामोशी से तनहाईयों में खो जाता है आदमी
जमाने के चलते खुदगर्ज हो जाता है आदमी
माटी का पुतला गर्दिशों के जाता भाव शुन्य हो जाता है आदमी
महबूब की मोहब्बत में जमाने को भुलाता है आदमी
आदमियत की शाख को दाव पे लगाता है आदमी
अहंकार के चलते परवरदिगार को भुलाता है आदमी
खाली हाथ आया था खाली हाथ लौट जाता है आदमी
जमाने की दौलत के जंजाल खुद को भरमाता है आदमी
अपने विवेक से काम लेकर विवेकानंद बन जाता है आदमी
अपनी मर्यादाओं में रहकर मर्यादा पुरूषोत्तम कहलाता है आदमी
भीष्म पृतिग्या में बंधकर भीष्म पितामाह कहलाता है आदमी !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Tuesday, 21 March 2017

मोहब्बत

मोहब्बत भरी मौंजों का दौर जारी है
आशियाना ए दिल में बेकरार साहिल है गले लगाने को !

बेरूखी ए महबूब से जज्बा ए मोहब्बत बढता ही गया !
दीदारे यार की चाहत में हरेक डगर छोटी हो गई !

वदा ए वफा मोहब्बत में जरूरी यार होती है
आशिकी में जाँ की बाजी लगाने को महबूब तत्पर यार होती है !

दिल की हरेक धडकन ख्वाहिशबंद दीदारे यार की है
तेरी मोहब्बत की मादक महक जिन्दगी में रंग भर देती है !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Monday, 20 March 2017

पेृरणा हमारी

आपकी महकती यारी
मित्रवर अनुपम पृेरणा हमारी
नूरे रूखसार से रौशन है
कायनातों फिजा सारी
जब से हुई है यारी
वफा ए मोहब्बत
खुद्दारी में बीत गई
यारों जिन्दगी हमारी
दिल से भी मस्त मस्त
तन मन अति मनभावन
जानती है दुनियाँ सारी
वो महबूबे मोहब्बत है हमारी
गर्दिशों में परखी हमने यारी
२४ केरट वफा में उतरी
मेरे यारों यारी हमारी
जल भुन गई ये दुनियाँ सारी
यारों की अपनी यारी
जैसे केशर की महकती
लरजती अनुपम क्यारी
जल भुन गई ये दुनियाँ सारी
ता कायनात महकती रहेगी
चहकती रहगी यारो यारी हमारी
शबनमी चाँदनी के मोतियों की सी
खुबसूरत मेरे यारों यारी हमारी !

मनोहर ये " अमृत सागर "

Saturday, 18 March 2017

महकती चाँदनी

हम तो दीवानगी के आलम में खो गये
कसम तुम्हारी मोहब्बत में जिन्दगी हम खो गये !

चंदा की चाँदनी ने दिग भृमित हमको किया
रवि के नूरे रूखसार में सरेआम हम खो गये !

पूनम की मादक महकती चाँदनी की राह तकते तकते
आशियाना ए मोहब्बत में जिन्दगी हम खो गये !

दीदारे यार की चाहत दिल में लिये चाँदनी
अमावस्या की स्याह निशा के दामन में हम खो गये !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Tuesday, 14 March 2017

मोहब्बत

इनायते रब है मोहब्बत तुम्हारी !
आशियाना ए दिल में बसी सूरत प्यारी !
तुम्हारी मादक महक से महकती है कायनातों फिजा !
सबब ए जिन्दगी महबूबे मोहब्बत हमारी !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Monday, 13 March 2017

फगुआ

अब तोहे नाहे छोडू री गुजरियाँ
आज रंगोगों तेरी चोली रे
आज धूम धाग फगुआ की बृज में आज तो खेलेंगें होरी रे !

मस्त भयो मन जब देखी गुजरिया खेलत होरी रे
झूम उठी सब कुँज गलियाँ मथूरा की रंगी रंग होरी के !

मस्त भई बरसाने की गलियाँ केशर के रंग से
झूम उठी गुजर गुजरियन और ग्वालन की टोली रे !

कान्हा की मादक मोहब्बत के रंग रंग गयों बरसानो
बिसिराय दई दिलन की रंजिश और भिगोई दामन चोली रे !

आज कायनातों फिजा रंग गई साँवरिया की मोहब्बत के रंग में
चहु दिशी गुजँत रंग रंगीली फगुआ और गुजरियन ग्वालन की टोली रे !

हेप्पी होली साथियों
मनोहर यादव " अमृत सागर "

होलिकोत्सव


हमें पिचकारी की धार पसंद है
रंगों का त्यौहार होलिकोत्सव पसंद है
तुम्हारे जैसी शबनमी यार पसंद है
चाँदनी के जैसा महकता परिवार पसंद है

होलिकोत्सव की पावन बेला जीवन में आये हजार
शेफाली और केसर की महक से महकता रहे आपका घर संसार
मुबारक हो मेरे सनम रंगों का हँसी त्यौहार
हरेक जनम मेरे यार में पाऊ तुम्हारी मोहब्बत और असीम प्यार
मोहब्बत में धडकते दिल की यही है दरकार
कभी न भुलाईयों मेरी मोहब्बत जिन्दगी भर लुटाईयो प्यार !

जिन्दगी रंगों से भरी रहे ,
मिले खुशियाँ तुम्हें अपार
यश सम्मान सत्कार तुम पाओं
मोहब्बत में मन सदा हर्षाओं
दुश्मन पर गाज बनके गिरों
महबूबे मोहब्बत में जाँ की बाजी लगाओ !

होलिकोत्सव की हार्दिक शबनमी शुभकामनाएँ !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Wednesday, 8 March 2017

तुम्हीं मेरे धडकन दिल की धडकन


तुम्हीं मोहब्बत हो मेरी
तुम्हीं जिन्दगी हो मेरे यार
तुम्हीं से तो दुनियाँ जहाँ है जिन्दगी
तुम्हीं से ये वसुन्धरा और आसमाँ है
जिन्दगी की मादक मौंजे हो तुम
तुम्ही तो साहिल भी हो जिन्दगी
तुम्ही तो आरजुए जिन्दगी
तुम्हीं रब की इबादत हो जिन्दगी
तुम्हीं वीणा के सप्त मधुर स्वर
तुम्हीं तानसेन की मधुर तान हो
तुम्हीं से महकती है वसुन्धरा जिन्दगी
तुम्हीं से लरजती ये कायनातों फिजा जिन्दगी
तुम्हीं इनायते रब हो जिन्दगी
तुम्हीं सेफाली की मदहोश करने वाली मादक महक हो जिन्दगी
तुम्हीं एतबार ए खुदा , तुम्हीं इकरार हो
तुम्हीं मेरी पहली ख्वाहिश तुम्हीं तो इझहार हो
आय लव यु जिन्दगी तुम्हीं मेरा आखिरी प्यार हो !
आय लवयु जिन्दगी तुम्हीं मेरा आखिरी प्यार हो !
आय लवयु जिन्दगी तुम्हीं मेरा आखिरी प्यार हो !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Tuesday, 7 March 2017

नारी " ममता की मूरत "

नारी से दुनियाँ जहाँ है
वसुन्धरा और आसमाँ है
जननी है सारे जहाँ की
इबादत की हकदार है
नातों रिश्तों में जकडा
ये संसार है
नारी जहाँ की धडकन
जिन्दगी का नारी ही सार है
मोहब्बत की मूरत है वो
बेकरार दिल की धडकन
बहुत प्यारी और बहुत खुबसूरत है वो
त्याग बलिदान और ममता की मूरत
बहुत दिलकश और बडी खुबसूरत है वो
उसकी वाणी से दुनियाँ की राग है
शक्ति है वो भक्ति है वो
जीवन ज्योति जिन्दगी की धडकन है वो
नारी से ये दुनियाँ जहाँ है
नारी से वसुन्धरा और आसमाँ है
नारी ही कुदरत है नारी ही कृियेटर
नारी ने रचा ये जहाँ है
बिन नारी अर्थहीन दुनियाँ जहाँ है
माँ वसुन्धरा है वो जिन्दगी की धडकन है
बलिदान की पृतिमूर्ती से जमीं आसमाँ है

मनोहर यादव " अमृत सागर "

मोहब्बत

दीदारे यार से दिल हुआ बेकरार !
नूरे रूखसार से चहक उठा संसार !!

मोहब्बत की मौंजों से दिल हुआ बेकरार !
नजरों ने हाले दिल बयाँ किया चहक उठा संसार !

काली घनेरी जुल्फें जो बिखरी उसने !
महबूबे मोहब्बत में दिल हुआ बेकरार !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Saturday, 4 March 2017

एक आम औरत

एक आम स्त्री सामाजिक बंधनों के मकडजाल में जकडी
वो बहन किसी और किसी की बेटी
औरत वह किसी मर्द के आगोष में लेटी
माँ बनके वसुन्धरा के मानिंद फर्ज अपना निभाती
सैनिक बन सीमा पर माँ वसुन्धरा का कर्ज चुकाती
अध्यापिका बनके वह देश का भविष्य बनाती
डाक्टर बनके वह देश वाशियों की जीवन दायिनी कहलाती
किचन में कुक बनके सबका खाना बनाती
दुध अपना पिलाकर भारत का भविष्य बनाती
सब कुछ वह करती ९ माह गर्भ से बालक जनती
दुर्गा बनके महिषी का संहार कर देवों को बचाती
फिर भी परिचय के नाम पर साधारण हाउस वाईफ कहलाती
हँसते हँसते हर दुख सहती जिन्दगी को गले लगाती
बाबुल के आँगन से लेकर ससुराल तक फर्ज ऩिभाती
बाल अवस्था यौवनावस्था अंतत: वृद्धावस्था जी जन्म सफल बनाती
कहीं तीन तलाक का दुख वो झेलती द:ख के दरियाँ में गोते लगाती
कहीं समाज के ठेकेदारों के हत्थे चढ वैशाली की नगर वधू बन जाती
सावित्री बन यम से पति के पृाण सहज बचाती
नारी ममता की सहज मूर्ती रिश्तों का फर्ज ताउमृ सहज निभाती !

मनोहर यादव "अमृत सागर "

मोहब्बत

मै दिली तौर पर वाकिफ हूँ
इस बात से बहुत मोहब्बत
तुम सनम हमसे करती हो
तडपती हो सिसकती आहें
मेरी मोहब्बत में भरती हो
तुम कहती हो
इतनी मोहब्बत मैं तुमसे नही करता
मेरे महबूब
मैने मोहब्बत नही इबादत की है हुस्नों यार की मेरे दिल की धडकन
मेरे प्यार की
बँधा हूँ मोहब्बत में प्यार में
साँसारिक व्यवहार में
मोहब्बत के सैलाभ में
तुम्हारी हमारी जिन्दगी के मायने
मोहब्बत है जिन्दगी हो तुम
जिन्दगी है मोहब्बत
मोहब्बत ही एतबार है
जिन्दगी हो तुम
जिन्दगी ही तुम्हारी मोहब्बत
तुम्हारा प्यार है
वाकिफ है दिल की  हरेक धडकन
तुम्हारी मोहब्बत तुम्हारे प्यार से
तुम्हारी मोहब्बत तुम्हारे इकरार से

मनोहर यादव " अमृत सागर "

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव