सहराओं में बुझती नहीं प्यास
सारी नदियाँ सूखी सूखी सी
लगती है बदहवास
सूर्य की कडकती धूप में
जिन्दगी भी हुई बदहवास
चिलचिलाती धूप में गगनचर
हुये बदहवास
सूनी हो गई सडके सारी जिन्दगी पुन: हो गई उदास
पेड पौधे सब के सब जीव जन्तु जगत के बदहवास
चारों ओर जिन्दगी बोरयाई कुछ नजर नही आता खास
बुझती नही दिली जख्मों की प्यास टूटे हुये दिल की आस
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Saturday, 30 April 2016
सहराओं में बुझती नही प्यास
Friday, 29 April 2016
खुबसूरती टपक रही है बेशुमार
बेकरार दिल को आता है करार
दीदारे यार से जोरो से धडकता है दिल
मिलता है दिले नादां को करता बेशुमार
बहुत लाजवाब और खुबसूरत लिखती है आप
साक्छात सरस्वती लबो से बोलती पृतीत होती है
पठानकोट की सैनिक गाथा शब्दो मे छवि पृकट होती है
माँ के नाम संदेशा फिर पत्नि बहन बेटी बेटा का हाल बताती है
थमते नही अश्क आँखो से सैलाभे अश्क जगाती है
तुम्हारी अमृत सम अनुपम कृति पूनम दिल को सरेशाम जगाती है
गुँजरे हुये वक्त की यादे दिल को बहुत तडपाती है
कभी कभी जिन्दगी को जनन्त और कभी....बनाती है
मोहब्बत मे लबरेज दिल को बहुत दर्द दे जाती है
कभी कभी मोहब्बत मे दिल को चेनो शुकून भी पहँचाती है
गुँजरे हुये वक्त की यादे दिल को बहुत तडपाती है
कभी कभी जिन्दगी को जनन्त और कभी....बनाती है
मोहब्बत मे लबरेज दिल को बहुत दर्द दे जाती है
कभी कभी मोहब्बत मे दिल को चेनो शुकून भी पहँचाती है
Wednesday, 13 April 2016
कलम पाती है रंगीनियत तेरे हाथों मे आकर खुद ब खुद बयाँ होते है अफसाना ए जिन्दगी हुजूर
खुद ब खुद बयाँ होते है अफसाना ए जिन्दगी हुजूर
बिन तेरे सनम डगर ए जिन्दगी पे चलना दुश्कर मेरे यार
गुजर सँभव नही जिन्दगी की बिन तेरी मोहब्बत के मेरे सरकार
अपने अपनों से रिश्ता ए जिन्दगी तोड बैठे है हम
जिस दिन से हम रूखसत ए गुलशन हुये है मेरे यार
आँखों से दरियायें अश्क बदस्तूर ऱौशन है फिजा में
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तनहाइयों से चोली दामन का सा नाता है
उम्मीदों के सहारे गुजर रही है जिन्दगी तेरी यादों में
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आप डाक्टर है हमारी नब्ज देखियें साहिल से मोहब्बत नही मौजों की मोहब्बत पे
हमारी नब्ज देखियें
साहिल से मोहब्बत नही
मौजों की मोहब्बत
पे
एतबार करते है
तुम्हारी कसम
ए मेरे सनम
अपनी जान से भी ज्यादा
तुमसे प्यार करते है
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वो क्या जाने मोहब्बत क्या जाने प्यार
क्या जाने प्यार
जिसे हमपे नहीं एतबार
वो क्या जाने मोहब्बत
जिसे दिल से प्यार नहीं
साँसो की आहट से
पहचान लेते है
जिस्म की गर्मी से
जान लेते है
वो क्या जानें
दिली जख्मों को
जो बात बात में
अश्कों का दामन
थाम लेते हैं
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Monday, 11 April 2016
आगे ही आगे बढता ही जा रहा हूँ
सदियों से
कदम दर कदम
आगे ही आगे
बढता ही जा रहा हूँ मैं
आँधियों और तुफानों से
टकराते हुये निऱबाध गति से
वक्त से कदम मिलाते हुये
बढता ही जा रहा हूँ मैं
बढता ही जा रहा हूँ मैं
नील गगन के तले
महकती फिजाओं में
लरजती कायनात
चहकती हवाओं के साथ
उत्तरोत्तर आगे ही आगे
किसी को परवाह है या नही
बिल्कुल अंजान
मगर नही तनिक हैरान
आगे ही आगे बढता ही जा रहा हूँ मैं
मेरे पथ का कोई अंत
मंजिल का कोई पता नही
जनम से आज तलक
आगे ही आगे बढता ही जा रहा हूँ मैं
Saturday, 9 April 2016
प्यार करते हैं एतबार करते हैं जान सेभी ज्यादा मोहब्बत यार करते है
प्यार करना सीखा
एतबार करना सीखा
तुमसे मिलने के बाद
प्यार करना सीखा
जिन्दगी हो मेरी
जिन्दगी से ज्यादा प्यार तुमसे करते है
मोहब्बते महबूब पे एतबार दिल से करते है
बिन तेरे जिन्दगी दुश्वार मेरे यार लगती है
बिन तेरे सनम जिन्दगी पहाड सा बोझ मेरे यार लगती है
दिली आशियाना
दिल की बातें बयाँ नजरों से यार होती है
उनकी मदभरी आँखें आइना ए दिल यार होती है
दर्दे जुदाई से सहमे सहमे से है मेरे यार हम
फकत इसीलीये दिली आशियाने पे एतबार होता है
दिल की बेकरारी
दिल की बेकरारी सबब ए मोहब्बत यार होती है
आशिकी में मेहबुबे मोहब्बत से मिलने को धडकने दिल बेकरार होती है
दिल का चैनो अमन दुश्वार यार हो जाता है
यु नो एसा कब होता है जब किसी की मोहब्बत का एतबार हो जाता है
तुम मोहब्बत हो हमारी
दिल मे तुमको बसाया हमने
आरजुये जिन्दगी हो सनम
साँसो की आहट कहू या रूह सनम
जिन्दगी की दुआ कहू
जुस्तजूये जिन्दगी पृियतम
दो जिस्म
रूह एक
धडकने दिल महबूबे मोहब्बत यार
चमेली का गजरा समझकर जुल्फों में बसा ले सनम
अपनी आँखो का कजरा समझके पलकों से लगा ले सनम
अपने कानो का झुमका बना हमे झुमका बरेली का समझके
अपने दिल मे बसा ले तेरी मोहब्बत का परवाना समझके
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दिल के उपवन में मोहब्बत के फूल खिलायें नही जाते खुद ब खुद खिल जाते है
मोहब्बत के फूल
खिलायें नही जाते
खुद ब खुद खिल जाते है
रब दी इबादत होती है मोहब्बत
आशिक रब दा पैगामें
मोहब्बत ले धरा पे आते हैं
ये आशिक मिलायें नही जाते
खुद ब खुद मिल जाते है.
रब दा पैगामें मोहब्बत
जहाँ को देते है
और रूख्सत हो जाते है
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अपनो जुल्फो मे बसा ले हमे गजरा चमेली का समझके
अपनी आँखो मे बसा ले हमे कजरा कलकतिया समझके
अपने कानो का झुमका बना हमे झुमका बरेली का समझके
अपने दिल मे बसा ले तेरी मोहब्बत का परवाना समझके
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Friday, 8 April 2016
अमृत सागर परिवार मे आपका हार्दिक स्वागत है
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Thursday, 7 April 2016
आपका उसूल बहुत खूबसूरत और प्यारा है
फूलों की महक से महकता ये जग सारा है
काँटें ही तो है जो फूलों के दामन को तार तार होने से बचाते हैं
अपने दिल से अपने ही होती है जो मुश्किल में काम आते हैं
फूलों और काँटों का चोली दामन का सा नाता है
फूल फिजा महकाता और काँटा दामन बचाता है
जब कभी कोई नन्ही कली को कुचलने का पृयास करता है
काँटा ही तो नन्ही की फरियाद पर सूई चुभोता है
sawan ki pahali phuhaar hai tu.
basant ki madak bayar hai tu.
phalgun ke palash ki rangili phiza.
mohabbat bhare dil ka yar aitbaar hai tu.
Poonam ki chandani ki si nashili madabhari raat.
chandani ke shabanami motiyo se fiza ka anupam shrigaar hai tu.
mehabub ke dil ki dhadakan.
palako ke shaamiyane ka iqaraar hai tu.
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बहुत खूबसूरत और बहुत प्यारी है
मेरा एतबार करो मेरा एतबार करो मेरी मोहब्बत हो तुम दिली चाहत हो तुम मोहब्बत ही नही रब दी इबादत हो तुम
तेरी डगर तकते तकते जिन्दगी की शाम ढल गई
जब पहले पहल कजरा मेरी आँखों में तुमने लगाया
लो चाँद गगन मे आ पहुँचा ना जाने तुम कब आओगे फिजा भी रंग बदल चुकी तुम ना जाने कब आओगे
कभी कभी मेरे ख्वाबो में मेरे सनम मे आया करो अपनी बेशुमार मोहब्बत हमपे लुटाया करो
कल रात ख्वाब में तुमसे मुलाकात हो गई
तुम कभी ........ न थी हमारी..... तुम्हारी मोहब्बत.... मृग मरिचिका
तुम मोहब्बत हो हमारी दिल मे तुमको बसाया हमने
तुम जान थी तुम जान हो तुम जान रहोगी हमारी
कल रात ख्वाब में तुमसे मुलाकात हो गई लब खामोश खामोश जुबाँ नजरो ही नजरो दिल की बात हो गई
कल रात ख्वाब में तुमसे मुलाकात हो गई
लब खामोश खामोश जुबाँ नजरो ही नजरो दिल की बात हो गई
कल रात ख्वाब में तुमसे मुलाकात हो गई लब खामोश खामोश जुबाँ नजरो ही नजरो दिल की बात हो गई
कल रात ख्वाब में तुमसे मुलाकात हो गई
लब खामोश खामोश जुबाँ नजरो ही नजरो दिल की बात हो गई
काँटा ही तो है जो
आपका उसूल बहुत खूबसूरत और प्यारा है
फूलों की महक से महकता ये जग सारा है
काँटें ही तो है जो फूलों के दामन को तार तार होने से बचाते हैं
अपने दिल से अपने ही होती है जो मुश्किल में काम आते हैं
फूलों और काँटों का चोली दामन का सा नाता है
फूल फिजा महकाता और काँटा दामन बचाता है
जब कभी कोई नन्ही कली को कुचलने का पृयास करता है
काँटा ही तो नन्ही की फरियाद पर सूई चुभोता है
तुम मोहब्बत हो हमारी, दिल जानो जिगर से प्यारी
तुम मोहब्बत हो हमारी
दिल मे तुमको बसाया हमने
आरजुये जिन्दगी हो सनम
साँसो की आहट कहू या रूह सनम
जिन्दगी की दुआ कहू
जुस्तजूये जिन्दगी पृियतम
दो जिस्म
रूह एक
धडकने दिल महबूबे मोहब्बत यार
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Tuesday, 5 April 2016
यारों का स्वागत करने को बेताब है दिल हमारा
अमृत सागर की मचलती मौजों ने धडकते हुम ए साहिल तुम्हे पुकारा
दिल मौजों का मचलता साहिल की मोहब्बत को
साहिल बाहों में समा लेता है मचलती मादक मौंजो को
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महबूबे मोहब्बत के साथ जीने की इझाजत दे दे
बाद मौत के रूह से मोहब्बत या रब तुझसे करेंगें
जिस्म से जिस्म को पाने की तमन्ना मे गुजर गई जिन्दगी
या रब मुझे मेरी पहली सी मोहब्बत दे दे
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अमृत सागर हूँ सागर सा अमृत दिल में समायें
अमृत सागर सम परिवार है हमारा
अमरत्व की दिली ख्वाहिश है हमारी
आशिकी धर्म जिन्दगी मे लगता है प्यारा
जन्नत से हँसी है जिन्दगी हमारी
महबूबे मोहब्बत की चाहत जिन्दगी लगती है प्यारी
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हमे दिल के आशियाना मे बसने की इजाजत दे दो
ए चाँदनी सी जनन्ते हूर मोहब्बत की इजाजत दे दो
परवाना हू अंजान डगर का इबादते हुस्न तासीर हमारी
हुजूर हुस्ने यार की इबादत पुस्तेजी जागीर हमारी
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महबूबे की बेइन्तहा मोहब्बत का दीदार किया मैने
दिल ही दिल मे अपनी जाँ से भी ज्यादा प्यार किया मैने
उसकी वफाओ पे दिली एतबार मेरे यार किया मैने
महबूबे मोहब्बत की मादक महक पे रूह से एतबार किया मैने
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तुम्हारी यादों मे आउँगा तुम्हारे ख्वाबगाह सजाउँगा
बनके शैफाली की मादक महक तेरे जहन मे बस जाउँगा
बनके कुमकुम तुम्हारे माथे की शोभा पृियतम बढाउँ
तेरे पाँवो की पायल बनके फिजा स्वर लहरी से सजाउँ
बनके तेरे रूखसार की गुलाबी रंगत तेरा सिन्गार सजाउँ
बनके तेरे कानो की झुमकी बरेली के बजार मे गिर जाउँ
बनके तेरी पलको का कजरा आशियाना आँखो मे तेरी बनाउँ
बनके चमेली का महकता गजरा तेरे जुडे की शोभा बढाउँ
बनके तेरे लबों की लाउँ तेरे मादक लबो से लिपट जाउँ
बनके तेरी महकती सप्तरंगी इन्दृधनुषी चुमने दामन से लिपट जाउँ
बनके महकते केशरी रंग तेरे कमसिन नखो की शोभा बढाउँ
अपनी मोहब्बत की मादक महक से कायनात और फिजा महकाउँ
बनके शैफाली की महक तेरी रूह मे समाँ जाउँ
जितनी भुलानै की कोशिश करो उतना ही ज्यादा याद आउँ
बनके तेरी चुडियो की खनक फिजा और कायनात रंगी बनाउँ
बनके धडकन तेरी रूह और तेरे जिस्म मे मेरे महबूब समाँ जाउँ.
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अपनो जुल्फो मे बसा ले हमे गजरा चमेली का समझके
अपनी आँखो मे बसा ले हमे कजरा कलकतिया समझके
अपने कानो का झुमका बना हमे झुमका बरेली का समझके
अपने दिल मे बसा ले तेरी मोहब्बत का परवाना समझके
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बेताब दिल की फरियाद को यु नजरअंदाज न कर
अपनी पहली मोहब्बत और दिली ख्वाहिश को बर्बाद न कर
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आपका उसूल बहुत खूबसूरत और प्यारा है
फूलों की महक से महकता ये जग सारा है
काँटें ही तो है जो फूलों के दामन को तार तार होने से बचाते हैं
अपने दिल से अपने ही होती है जो मुश्किल में काम आते हैं
फूलों और काँटों का चोली दामन का सा नाता है
फूल फिजा महकाता और काँटा दामन बचाता है
जब कभी कोई नन्ही कली को कुचलने का पृयास करता है
काँटा ही तो नन्ही की फरियाद पर सूई चुभोता है
sawan ki pahali phuhaar hai tu.
basant ki madak bayar hai tu.
phalgun ke palash ki rangili phiza.
mohabbat bhare dil ka yar aitbaar hai tu.
Poonam ki chandani ki si nashili madabhari raat.
chandani ke shabanami motiyo se fiza ka anupam shrigaar hai tu.
mehabub ke dil ki dhadakan.
palako ke shaamiyane ka iqaraar hai tu.
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Saturday, 2 April 2016
काँटा ही तो है जो
आपका उसूल बहुत खूबसूरत और प्यारा है
फूलों की महक से महकता ये जग सारा है
काँटें ही तो है जो फूलों के दामन को तार तार होने से बचाते हैं
अपने दिल से अपने ही होती है जो मुश्किल में काम आते हैं
फूलों और काँटों का चोली दामन का सा नाता है
फूल फिजा महकाता और काँटा दामन बचाता है
जब कभी कोई नन्ही कली को कुचलने का पृयास करता है
काँटा ही तो नन्ही की फरियाद पर सूई चुभोता है
खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई














