सागर की गहराईयों में डूबकी लगाओगें माणिक्य पाओगे
अँखियों के रास्ते महबूब के दिल की गहराईयों में बस जाओगें
अपनी मोहब्बत की मादक महक से वादियें दिल तुम महकाओगें
उनकी बेवफाईयों को भुलाके आशियाना ए दिल की मलिका बनाओगे !
मनोहर यादव " अमृत सागर "
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
सागर की गहराईयों में डूबकी लगाओगें माणिक्य पाओगे
अँखियों के रास्ते महबूब के दिल की गहराईयों में बस जाओगें
अपनी मोहब्बत की मादक महक से वादियें दिल तुम महकाओगें
उनकी बेवफाईयों को भुलाके आशियाना ए दिल की मलिका बनाओगे !
मनोहर यादव " अमृत सागर "
जाने क्यों अपने आज बेगाने हो गये
हमारी मोहब्बत के अफसाने कायनातों फिजा में खो गए !
मोहब्बत की मादक महक से महकती है कायनात
उनके रसीले सुरों से चहकती है कायनात
जो डगर गुजरती है तेरे घर के द्वारे से
अँखियों को इन्तजार रहता है तेरे डगर पे आने का
तेरी मोहब्बत की महक अनजान हवाएँ दे जाती हैं
मदहोश हवाएँ नग्में हमारी मोहब्बत के गाती हैं
मोहब्बत कोई खेल नही दो दिलों का मेल है मेरे यार
एक दिन तू भी जान जायगी क्या होती है मोहब्बत और एतबार
मनोहर यादव " अमृत सागर "
राज दिल खोलती है नजरें
बिन कहे सब कुछ बोलती हैं नजरें
आईना ए मोहब्बत आँखें यार होती हैं
लब बंद जुबाँ खामोश आँखें हाले दिल कहती हैं
मोहब्बत है तुमसे कहती हैं आँखें
नफरत है उजागर करती हैं आँखें
इझहारे मोहब्बत करती हैं आँखें
रब की इबादत में झुकती हैं आँखें
सरहदों की निगेबान होती है आँखें
नूरे रूखसार को पढ लेती हैं आँखें
मोहब्बत का इकरार करती हैं आँखें
मोहब्बत का इझहार करती हैं आँखें
मनोहर यादव " अमृत सागर "
कैसे बीते दिन वो सजनवा
तुम्हारी मोहब्बत भरी यादों के सहारे
कैसी कटी वो राते सजनवा
जब तनहाईयाँ दिलाती थी
याद उन महकते दिनोकी
जब तुम साथ थी हमारे
जिन्दगी तुमसे थी
रूह तुम्हारी याद में
कैद थी जिस्म में पृियतम
महकने लगी कायनातों फिजा
तुम्हारे गुलशन मे आने की खबर सुनकर
बेदम रूह फडफडाने लगी है
उम्मीदों का चमन सजाने लगी है
गुलशन मे तुम्हारे आने की खबर सुनकर
मनोहर यादव अमृत सागर
तनहाईयाँ जब बहुत सताती हैं हमे
मेरे महबूब तुम्हारी याद आती है हमे
तनहाईयाँ लम्हा लम्हा संवर जांती है
जब तुमसे पहले तुम्हारी याद आती है
तनहाईयाँ खुशगवार और रंगी हो जाती हैं
जब तुमसे पहले तुम्हारी याद दामन में समाती है
मोहब्बत की मादक महक से तनहाईयाँ महक जाती है
जब यादों के सायें पर्त दर पर्त जहन में समा जाते हैं
राहे मोहब्बत में तनहाईयों का चोली दामन का सा नाता हैं
मोहब्बत में जाँन की बाजी लगाना हमें बहुत खूब यार आता है
दिली जजबात नूरे रूखसार पे उभर आते हैं
हवाओं के मार्फत महबूब का पता हम पा जाते हैं
मनोहर यादव " अमृत सागर "
इस उम्मीद में
गुजर गई अमावस
कि अब फिर चाँद आयेगा
चाँदनी से नहायेगी
वसुन्धरा सारी
औऱ चाँदनी से होगी
शबनमी मोतियों की बरसात
महकेगी धरा सारी
आशिकों का जमघट होगी
मोहब्बत से महकेगी
धरा सारी
अम्बर में गूँजेगी
चाँदनी की किलकारी
और सराबोर होगी
मोहब्बत की मादक महक से
वसुन्धरा एक बार फिर से सारी
चाँद आयेगी गगन में
सितारों की बारात के साथ
और टिमटिमाते
और झिलमिलाते सितारे
दिल लुभायेंगें
पृियतम का हाथ
अपने हाथों में लिये
बाद मुद्दत के
आज फिर से
चाँदनी से होगी शबनमी मोतियों की
बरसात झूम उठेगा दिल
महक उठेगी अम्बर में चाँदनी
मनोहर यादव " अमृत सागर "
नूरे रूखसार से रौशन ये जहाँ है
ये शबनमी वसुन्धरा और आसमाँ
नूरे रूखसार की कशिश से घायल हम हुये
तेरी मोहब्बत की मादक महक के कायल हम हुये
नूरे रूखसार जैसे सूरज की पहली किरण
तेरा जिन्दगी में आना ज्यों कस्तूरी से बहका हिरण
नूरे रूखसार मेरी जिन्दगी मेरी सरकार
मोहब्बत की तडप में मचलता महबूब यार
तेरी अँखियों ने एसा जादू किया है
तनहाईयाँ बे पर्दा मेरे यार हो गई
मनोहर यादव " अमृत सागर "
जर्रे जर्रे में समाई तेरी मोहब्बत तेरा ही नूर है
मेरे पृियतम साँवरिया इस दिल की धडकन है तू , तूही गुरूर है
अमृत सागर परिवार मे आपका हार्दिक स्वागत है
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साँझ ढले तो आ जाना
अमृत सागर मे डुबकी लगाना चले आना
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मोहब्बत की मादक महक की है ये खुमारी
अँखियों में बस है सनम तस्वीर तुम्हारी
मोहब्बत जिन्दगी में इनायते रब यार होती है
मोहब्बत रब की इबादत की मानिंद होती है
जमाना हँसता है यारी पे मोहब्बत पे
महबूब के अश्कों से वसुन्धरा भी सिसकती है
अंजामें मोहब्बत से वाकिफ जमाना होता है
मोहब्बत में जा लुटाना फलसफा पुराना होता है
उऩकी मोहब्बत में हरेक बाजी खेल जायेगें
गर जरूरत पडी तो जाँ अपनी लुटायेंगें
मनोहर यादव " अमृत सागर "
तुम्हारी मोहब्बत की मादक महक से
महक उठी है सनम जिन्दगी यार हमारी
महकी महकी सी है कायनातों फिजा सारी
महकी चहकी सी है यारी जिन्दगी हमारी
तुम्हारी मोहब्बत की मादक महक से
हमने तोड दी है दुनियाँ की सरहदे सारी
मनोहर यादव " अमृत सागर "
एक प्यार भरी पप्पी दुनियाँ के गम भुलाती है
सहराओ में कुमुदनी यार खिलाती है
जिन्दगी में बासंती बहार यार लाती है
जिन्दगी जीने का अंदाज बदल जाती है
एक मोहब्बत भरी झप्पी सैलाभे खुशियाँ लाती है
एक पल में गैर को भी अपना यार बनाती है
दर्दे गम के मंजर से एक पल में उबार लाती है
अषाड की उमस में सावन की शबनमी फुहार बन जाती है
एक मोहब्बत भरी पप्पी अमावश का शाप हरती है
पूनम की शबनमी चाँदनी बन वसुन्धरा को मोतियों की चादर उढाती है
शत्रुता पलक झपकते भुलाकर यार अपना बनाती है
वसुन्धरा पर मादक कोहरे की मानिंद प्यार बढाती है
मनोहर यादव " अमृत सागर "
हरेक दिन की कवायद खास होती है
जिन्दगी रब की अरदास होती है
जमाने भर के गम भूलादे खुशियों का दुलार कर
जिन्दगी के हँसी लम्हों का आज दुलार कर
गर कुछ करना ही है जिन्दगी में मेरे यार
जी भरके आदमियत से तू प्यार कर , प्यार कर
सच्चा दोस्त यार बनके दोस्ती पे जिन्दगी तू वार
गर करना है रब की दिली इबादत तू मेरे यार कर !
मनोहर यादव " अमृत सागर "
जर्रे जर्रे में समाई तेरी मोहब्बत तेरा ही नूर है
मेरे पृियतम साँवरिया इस दिल की धडकन है तू , तूही गुरूर है
अमृत सागर परिवार मे आपका हार्दिक स्वागत है
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साँझ ढले तो आ जाना
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जिन्दगी में बहारे आती हैं चली जाती हैं
नग्मात ए मोहब्बत फिजा महकाती हैं
चहकती है कभी कुहुकती है जिन्दगी
कभी दरियाए अश्क हो जाती है जिन्दगी
मेरे महबूब से जिन्दगी सावन की मानिंद है
बिन महबूबे मोहब्बत के सहराओ में भटकता ख्वाब है
महबूब से जिन्दगी में बहार है
महबूब सागर में नाविक की पतवार है
महबूब से सहराओ में महकती बयार है
महबूब सावन की मादक महकती फुहार है
महबूब जिन्दगी में शबनमी बहार है
महबूब से ही तो है जिन्दगी महबूब रूप सिंगार है !
मनोहर यादव " अमृत सागर "
आज फिजा महक उठी है तेरे मुस्कुराने से
सहराओ में महक उठी एक तेरे आने से
तेरी मोहब्बत में दिल चहक उठा एक तेरे गाने से
दिल का भँवर करे पुरार यार तेरे मिल जाने से !
मनोहर यादव " अमृत सागर "
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव