Saturday, 25 February 2017

मोहब्बत

सागर की गहराईयों में डूबकी लगाओगें माणिक्य पाओगे
अँखियों के रास्ते महबूब के दिल की गहराईयों में बस जाओगें
अपनी मोहब्बत की मादक महक से वादियें दिल तुम महकाओगें
उनकी बेवफाईयों को भुलाके आशियाना ए दिल की मलिका बनाओगे !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

बेगाना

जाने क्यों अपने आज बेगाने हो गये
हमारी मोहब्बत के अफसाने कायनातों फिजा में खो गए !

मोहब्बत की मादक महक से महकती है कायनात
उनके रसीले सुरों से चहकती है कायनात

जो डगर गुजरती है तेरे घर के द्वारे से
अँखियों को इन्तजार रहता है तेरे डगर पे आने का

तेरी मोहब्बत की महक अनजान हवाएँ दे जाती हैं
मदहोश हवाएँ नग्में हमारी मोहब्बत के गाती हैं

मोहब्बत कोई खेल नही दो दिलों का मेल है मेरे यार
एक दिन तू भी जान जायगी क्या होती है मोहब्बत और एतबार

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Sunday, 19 February 2017

आँखें

राज दिल खोलती है नजरें
बिन कहे सब कुछ बोलती हैं नजरें
आईना ए मोहब्बत आँखें यार होती हैं
लब बंद जुबाँ खामोश आँखें हाले दिल कहती हैं

मोहब्बत है तुमसे कहती हैं आँखें
नफरत है उजागर करती हैं आँखें
इझहारे मोहब्बत करती हैं आँखें
रब की इबादत में झुकती हैं आँखें

सरहदों की निगेबान होती है आँखें
नूरे रूखसार को पढ लेती हैं आँखें
मोहब्बत का इकरार करती हैं आँखें
मोहब्बत का इझहार करती हैं आँखें

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Friday, 17 February 2017

महकती हुई यादें

कैसे बीते दिन वो सजनवा
तुम्हारी मोहब्बत भरी यादों के सहारे
कैसी कटी वो राते सजनवा
जब तनहाईयाँ दिलाती थी
याद उन महकते दिनोकी
जब तुम साथ थी हमारे
जिन्दगी तुमसे थी
रूह तुम्हारी याद में
कैद थी जिस्म में पृियतम
महकने लगी कायनातों फिजा
तुम्हारे गुलशन मे आने की खबर सुनकर
बेदम रूह फडफडाने लगी है
उम्मीदों का चमन सजाने लगी है
गुलशन मे तुम्हारे आने की खबर सुनकर

मनोहर यादव अमृत सागर

मोहब्बत

तनहाईयाँ जब बहुत सताती हैं हमे
मेरे महबूब तुम्हारी याद आती है हमे

तनहाईयाँ लम्हा लम्हा संवर जांती है
जब तुमसे पहले तुम्हारी याद आती है

तनहाईयाँ खुशगवार और रंगी हो जाती हैं
जब तुमसे पहले तुम्हारी याद दामन में समाती है

मोहब्बत की मादक महक से तनहाईयाँ महक जाती है
जब यादों के सायें पर्त दर पर्त जहन में समा जाते हैं

राहे मोहब्बत में तनहाईयों का चोली दामन का सा नाता हैं
मोहब्बत में जाँन की बाजी लगाना हमें बहुत खूब यार आता है

दिली जजबात नूरे रूखसार पे उभर आते हैं
हवाओं के मार्फत महबूब का पता हम पा जाते हैं

मनोहर यादव " अमृत सागर "

चाँदनी का दीदार

इस उम्मीद में
गुजर गई अमावस
कि अब फिर चाँद आयेगा
चाँदनी से नहायेगी
वसुन्धरा सारी
औऱ चाँदनी से होगी
शबनमी मोतियों की बरसात
महकेगी धरा सारी
आशिकों का जमघट होगी
मोहब्बत से महकेगी
धरा सारी
अम्बर में गूँजेगी
चाँदनी की किलकारी
और सराबोर होगी
मोहब्बत की मादक महक से
वसुन्धरा एक बार फिर से सारी
चाँद आयेगी गगन में
सितारों की बारात के साथ
और टिमटिमाते
और झिलमिलाते सितारे
दिल लुभायेंगें
पृियतम का हाथ
अपने हाथों में लिये
बाद मुद्दत के
आज फिर से
चाँदनी से होगी शबनमी मोतियों की
बरसात झूम उठेगा दिल
महक उठेगी अम्बर में चाँदनी

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Thursday, 16 February 2017

नूरे रूखसार

नूरे रूखसार से रौशन ये जहाँ है
ये शबनमी वसुन्धरा और आसमाँ

नूरे रूखसार की कशिश से घायल हम हुये
तेरी मोहब्बत की मादक महक के कायल हम हुये

नूरे रूखसार जैसे सूरज की पहली किरण
तेरा जिन्दगी में आना ज्यों कस्तूरी से बहका हिरण

नूरे रूखसार मेरी जिन्दगी मेरी सरकार
मोहब्बत की तडप में मचलता महबूब यार

तेरी अँखियों ने एसा जादू किया है
तनहाईयाँ बे पर्दा मेरे यार हो गई

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Wednesday, 15 February 2017

मोहब्बत

जर्रे जर्रे में समाई तेरी मोहब्बत तेरा ही नूर है
मेरे पृियतम साँवरिया इस दिल की धडकन है तू , तूही गुरूर है
अमृत सागर परिवार मे आपका हार्दिक स्वागत है
Friends aabhar please join amritsagar
मोहब्बत से लबरेज कविताओ का खजाना
साँझ ढले तो आ जाना
अमृत सागर मे डुबकी लगाना चले आना
https://m.facebook.com/amritsagarownsms/

मोहब्बत मोहब्बत

मोहब्बत की मादक महक की है ये खुमारी
अँखियों में बस है सनम तस्वीर तुम्हारी

मोहब्बत जिन्दगी में इनायते रब यार होती है
मोहब्बत रब की इबादत की मानिंद होती है

जमाना हँसता है यारी पे मोहब्बत पे
महबूब के अश्कों से वसुन्धरा भी सिसकती है

अंजामें मोहब्बत से वाकिफ जमाना होता है
मोहब्बत में जा लुटाना फलसफा पुराना होता है

उऩकी मोहब्बत में हरेक बाजी खेल जायेगें
गर जरूरत पडी तो जाँ अपनी लुटायेंगें

मनोहर यादव " अमृत सागर "

मोहब्बत

तुम्हारी मोहब्बत की मादक महक से
महक उठी है सनम जिन्दगी यार हमारी
महकी महकी सी है कायनातों फिजा सारी
महकी चहकी सी है यारी जिन्दगी हमारी
तुम्हारी मोहब्बत की मादक महक से
हमने तोड दी है दुनियाँ की सरहदे सारी

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Sunday, 12 February 2017

हेप्पी किस डे

एक प्यार भरी पप्पी दुनियाँ के गम भुलाती है
सहराओ में कुमुदनी यार खिलाती है
जिन्दगी में बासंती बहार यार लाती है
जिन्दगी जीने का अंदाज बदल जाती है

एक मोहब्बत भरी झप्पी सैलाभे खुशियाँ लाती है
एक पल में गैर को भी अपना यार बनाती है
दर्दे गम के मंजर से एक पल में उबार लाती है
अषाड की उमस में सावन की शबनमी फुहार बन जाती है

एक मोहब्बत भरी पप्पी अमावश का शाप हरती है
पूनम की शबनमी चाँदनी बन वसुन्धरा को मोतियों की चादर उढाती है
शत्रुता पलक झपकते भुलाकर यार अपना बनाती है
वसुन्धरा पर मादक कोहरे की मानिंद प्यार बढाती है

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Saturday, 11 February 2017

जिन्दगी

हरेक दिन की कवायद खास होती है
जिन्दगी रब की अरदास होती है
जमाने भर के गम भूलादे खुशियों का दुलार कर
जिन्दगी के हँसी लम्हों का आज दुलार कर
गर कुछ करना ही है जिन्दगी में मेरे यार
जी भरके आदमियत से तू प्यार कर , प्यार कर
सच्चा दोस्त यार बनके दोस्ती पे जिन्दगी तू वार
गर करना है रब की दिली इबादत तू मेरे यार कर !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

जर्रे जर्रे में समाई तेरी मोहब्बत तेरा ही नूर है
मेरे पृियतम साँवरिया इस दिल की धडकन है तू , तूही गुरूर है
अमृत सागर परिवार मे आपका हार्दिक स्वागत है
Friends aabhar please join amritsagar
मोहब्बत से लबरेज कविताओ का खजाना
साँझ ढले तो आ जाना
अमृत सागर मे डुबकी लगाना चले आना
https://m.facebook.com/amritsagarownsms/

Saturday, 4 February 2017

महबूब

जिन्दगी में बहारे आती हैं चली जाती हैं
नग्मात ए मोहब्बत फिजा महकाती हैं
चहकती है कभी कुहुकती है जिन्दगी
कभी दरियाए अश्क हो जाती है जिन्दगी
मेरे महबूब से जिन्दगी सावन की मानिंद है
बिन महबूबे मोहब्बत के सहराओ में भटकता ख्वाब है
महबूब से जिन्दगी में बहार है
महबूब सागर में नाविक की पतवार है
महबूब से सहराओ में महकती बयार है
महबूब सावन की मादक महकती फुहार है
महबूब जिन्दगी में शबनमी बहार है
महबूब से ही तो है जिन्दगी महबूब रूप सिंगार है !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Friday, 3 February 2017

महक

आज फिजा महक उठी है तेरे मुस्कुराने से
सहराओ में महक उठी एक तेरे आने से
तेरी मोहब्बत में दिल चहक उठा एक तेरे गाने से
दिल का भँवर करे पुरार यार तेरे मिल जाने से !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Wednesday, 1 February 2017

मेरी जिन्दगी की मुस्कान




 तुमसे  मेरी जिन्दगी की मुस्कान है
 तुमसे मेरी जिन्दगी  के अरमांन  है
 सब कुछ तुमसे मैंने पाया है
मेरे सनम इस जिन्दगी  में
मुझे इससे ज्यादा कुछ नहीं चाहिए रब से
मेरी चाहत है तुम स्वयं देखो
मेरी मोहब्बत तुम्हारे लिए
सिर्फ तुम्हारे लिए
विशाल सागर के सामान है
मैं  चाहता हूँ
तुम मेरे मादक लैब चूमो
अपनी बाहों  में झप्पी लेकर
अनंन्त काल तक तुम मुझे प्यार करो
सारी  निशा बीत  जाये
तुम्हारी बाहों  के घेरे में
प्रियतम तुम मेरे दिल में
आशियाना ए दिल में रहते हो
तुम रूह हो मेरे जिस्म की
मेरे जिस्म की हरेक सांस तुमसे है
सिर्फ और सिर्फ तुम्ही मेरा प्यार हो
मेरी जिंदगी और मेरी चाहत
अंतिम सांस तक
सिर्फ तुम्ही तो हो

मनोहर यादव " अमृत सागर "




मोहब्बत भरे अल्फ़ाज़ों से

मोहब्बत भरे अल्फ़ाज़ों  से
वाकिफ़  है दिल हमारा
दिल समझता है ढकन से मोहब्बत
बहुत शुकून  दिल को मिलता है यार
एक तेरे मुस्कुराने से
एक अदभुद अनुभूति से
मचलने लगता है दिल दिल
तुम्हारे जिंदगी में होने मात्र की अनुभूति से
चैनो शुकून  दिल को यार आता है
मेरी जिन्दगी  का सब कुछ ही तो है
यार मोहब्बत तुम्हारी
मेरे दिन की शुरुवात तुम्हारे
एक तुम्हारे मुस्कुराने भर से यार होती है
इस सबसे मेरे जीवन को एक नई  ऊर्जा
मेरे यार मिलती हैं
मेरे जीवन में तुम्हारा स्थान वही है
जो एक जिस्म में रूह का यार होता है
तुम्हारे अल्फाजो से
मोहब्बत भरे अल्फ़ाज़ों  से
बहुत शुकून  दिल को यार होता है
खुद को संयमित रखना मुश्किल यार होता है
सब कुछ हो तुम मेरे लिए
मेरे जिन्दगी  मेरा प्यार हो तुम
बहुत मुश्किल है
मेरे सनम ये बात भुलाना

मनोहर यादव "अमृत सागर "


खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव