Thursday, 30 July 2015

एक था गुल

एक था गुल

एक था गुल और एक थी बुलबुल

एक था गुल और एक थी बुलबुल, दोनों चमन में रहते थे है ये कहानी बिलकुल सच्ची, मेरे नाना कहते थे बुलबुल कुछ ऐसे गाती थी जैसे तुम बातें करती हो वो गुल ऐसे शरमाता था जैसे मैं घबरा जाता हूँ बुलबुल को मालूम नहीं था गुल ऐसे क्यो शरमाता था वो क्या जाने उसका नग्म़ा गुल के दिल को धडकाता था दिल के भेद ना आते लब पे ये दिल में ही रहते थे लेकिन आखिर दिल की बातें ऐसे कितने दिन छूपती हैं ये वो कलियाँ हैं जो एक दिन बस काँटे बन के चुभती हैं एक दिन जान लिया बुलबुल ने, वो गुल उस का दीवाना है तुम को पसंद आया हो तो बोलू फिर आगे जो अफसाना है एक दूजे का हो जाने पर, वो दोनो मजबूर हुये उन दोनो के प्यार के किस्से गुलशन में मशहूर हुये साथ जियेंगे, साथ मरेंगे, वो दोनो ये कहते थे फिर एक दिन की बात सुनाऊँ एक सय्याद चमन में आया ले गया वो बुलबुल को पकड के और दीवाना गुल मुरझाया शायर लोग बयां करते हैं ऐसे उन की जुदाई की बातें गाते ते ये गीत वो दोनो, सैया बिना नहीं कटती रातें मस्त बहारों का मौसम था आँख से आंसू बहते थे आती थी आवाज़ हमेशा ये झिलमील झिलमील तारोँ से जिसका नाम मोहब्बत है वो कब रूकती है दिवारों से एक दिन आह गुल-ओ-बुलबुल की उस पिंजड़े से जा टकराई टूटा पिंजड़ा, छूटा कैदी, देता रहा सैय्याद दुहाई रोक सके ना उस को मिलके, सारा जमाना, सारी खुदाई गुल साजन को गीत सुनाने, बुलबुल बाग में वापस आई याद सदा रखना ये कहानी, चाहे जीना, चाहे मरना तुम भी किसी से प्यार करो तो, प्यार गुल-ओ-बुलबुल सा करना Related Videos Share on whatsapp Share on facebook Share on twitter Share on email Share on print More Sharing Services Additional Information गीतकार : आनंद बक्षी, गायक : मोहम्मद रफी, संगीतकार : कल्याणजी आनंदजी, चित्रपट : जब जब फूल खिले (१९६५) / Lyricist : Anand Bakshi, Singer : Mohammad Rafi, Music Director : Kalyanji Anandji, Movie : Jab Jab Phool Khile (1965) : Click for more songs Lyrics Submitted By Administrator June 10 2012 geetmanjusha.com © 1999-2014 Manjusha Umesh | Privacy | Community Guidelines

मिसाइल मेन

सुपर मेन मिसाइल मेन एपीजे अब्दुल कलाम ।

15 अक्टूबर 1931 एक तारा ने जन्म लेकर भारत भुमि आया।,
इस महान वैज्ञानिक ने भारत को अणुशक्ति बनाया।
2002 से2007 तक राष्ट्रपति बनके भारत का सम्मान बढ़ाया।
गरीब परिवार मे जन्मा बालक सुपर पावर बनके सामने आया।
महान वैज्ञानिक मिसाइल मेन राष्ट्रपति बनके देश का गौरव बढ़ाया।
तमिलनाडु के रामेश्वरम मे पला बढ़ा
अखबार और इडली बेचकर शिक्षित खुद को बनाया ।
मात पिता इस कोहीनुर ने भारत का परचम विश्व मे  लहराया।
राकेट बनाये मिसाइल बनाई अणुशक्ति बनाया ।
गणित के जिनियस वैज्ञानिक ने वतन का मान बढ़ाया।
दिल के दौरे ने हमसे मिसाइल मेन छुड़ाया।
मौसम भी खुब रोया और गिडगिडाया।
आप हमारे दिलों मे कभी न हम भुलायेगे।
आपका जन्म दिन वतन विध्यार्थी दिवस के रूप मे मनायेगा।
श्रृद्धाजली शत शत नमन।

जो दिल के करीब होते है

जो दिल के करीब होता है।
वो फकत नसीब से होता है।
वक्त किसी का अजीज नही है।
कर्म से मानव खुशनसीब होता है।
कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो का लेख फकत होता है।
होता वही है जो भाग्य विधाता ने लिखा होता है।
कोई हसता तो कोई रोता है।
महाभारत का लेख लिखा होता है।

बगैर खता के खतावार करार दिये

बगैर खाता के खतावार करार दिये जाते है।
महबुब छब्बीस की उम्र मे सोलह के नजर आते है।
अब तो बर्बादी के आसार नजर आते है
महबुब मोहब्बत के तलबगार नजर आते है।
महबुब कातिल नजरों से वार पे वार किये जाते है।

तेरी महक से रौशन ये कायनात

तेरी महक से रौशन ये कायनात सारी है।
शुकून दिल को मिलता है तू महबुब हमारी है।
उसकी कायनात मे सब से प्यारी है।
दिल ने फकत मान लिया तू जिन्दगी हमारी है।
तुझसे महकती ये कायनात सारी है।
तेरे नूर से रौशन फिजा ये सारी है।

कच्ची कली कचनार की

कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है।
इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है।
फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है।
इसकी मादक महक कामदेव का दिल लुभाती है।

नजरों ही नजरों मे

नजरों ही नजरों मे पैगामे मोहब्बत आया।
दिल ने महबुबे मोहब्बत पे फकत एतबार जताया ।

नूरे नजर से रौशन ये कायनात सारी है।
महबुबे मोहब्बत हमें जान से प्यारी है।

महबुबे मोहब्बत कुछ फिकमंद यार नजर आते है।
आइना ए दिल झलक एतबार की हुजूर पाते है।

फकत इष्क उन्हीं से है उन्हीं पे जाँ लुटाते है।
तनहाईयो मे उनके शाये से बा अदब बतियाते है।

खतावार नही यार तलबगार हू मै।

खतावार नही यार तलबगार हूँ मै
उल्फते मोहब्बत का शिकार हूँ मै।
फकत तीरे नजर से अंजान नही मै
महबुबे मोहब्बत का बीमार हूँ मै।।

Wednesday, 29 July 2015

दिन के ढलते

दिन ढलते और उगते समय शाया कद से फकत बढ जाता है।
दोपहर होते होते वास्तविक स्वरूप पाता है।
ये कुदरत का नायाब करिश्मा है मेरे हुजूर ।
जो फकत हमें आदमियत से रूबरू कराता है।

जुबा पे अल्फाज ए मोहब्बत

जुबा पे अल्फाज मोहब्बत के सुहाने आ गये।
जन्नत से फरिशते यारी निभाने आ गये।
महबुबे मोहब्बत के दिन फिर सुहाने आ गये।
चँदा की चाँदनी मे दिल लुभाने आ गये।
मोहब्बत के गुजरे हुये जमाने आ गये।
हीर और राझणा दास्ताने मोहब्बत दोहराने आ गये।
हमारी यारी के "ए दोस्त" जमाने सुहाने आ गये।

मोहब्बत रंग लायेगी

हुजूर एक ना एक मोहब्बत रंग लायगी।
किताब मे छुपे गुलाब की महक दिलों दिमाग पे छा जाएगी ।
अजी हुजूर फकत मोहब्बत की महक से।
सारी कायनात और फिजा महक जाएगी ।

राधिकारमण

कान्हा को पाने के लिये श्री राधिका सरकार को मनाना है।
कान्हा की आत्मा श्री राधिका प्यारी है।
राधिकारमण दो जिस्म एक रूह नही।
फकत एक जिस्मो जान की गुढ यारी है।
इसीलिए श्री राधिका हमें जिस्मो जान से प्यारी है।
श्री राधिकारमण के चरणों मे लौ लगाये बैठी
कलयुगी दुनिया सारी की सारी है
हमारे दिल मे श्री राधिकारमण बस्ते है
आपको भी श्री राधिकारमण बहुत प्यारे है।

दिल के करीब

जो दिल के करीब होता है।
वो फकत नसीब से होता है।
वक्त किसी का अजीज नही है।
कर्म से मानव खुशनसीब होता है।
कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो का लेख फकत होता है।
होता वही है जो भाग्य विधाता ने लिखा होता है।
कोई हसता तो कोई रोता है।
महाभारत का लेख लिखा होता है।

भारत का सुपर मिसाइल मेन

सुपर मेन मिसाइल मेन एपीजे अब्दुल कलाम ।

15 अक्टूबर 1931 एक तारा ने जन्म लेकर भारत भुमि आया।,
इस महान वैज्ञानिक ने भारत को अणुशक्ति बनाया।
2002 से2007 तक राष्ट्रपति बनके भारत का सम्मान बढ़ाया।
गरीब परिवार मे जन्मा बालक सुपर पावर बनके सामने आया।
महान वैज्ञानिक मिसाइल मेन राष्ट्रपति बनके देश का गौरव बढ़ाया।
तमिलनाडु के रामेश्वरम मे पला बढ़ा
अखबार और इडली बेचकर शिक्षित खुद को बनाया ।
मात पिता इस कोहीनुर ने भारत का परचम विश्व मे  लहराया।
राकेट बनाये मिसाइल बनाई अणुशक्ति बनाया ।
गणित के जिनियस वैज्ञानिक ने वतन का मान बढ़ाया।
दिल के दौरे ने हमसे मिसाइल मेन छुड़ाया।
मौसम भी खुब रोया और गिडगिडाया।
आप हमारे दिलों मे कभी न हम भुलायेगे।
आपका जन्म दिन वतन विध्यार्थी दिवस के रूप मे मनायेगा।
श्रृद्धाजली शत शत नमन।

Tuesday, 28 July 2015

सुपर मेन

सुपर मेन मिसाइल मेन एपीजे अब्दुल कलाम ।

15 अक्टूबर 1931 एक तारा ने जन्म लेकर भारत भुमि आया।,
इस महान वैज्ञानिक ने भारत को अणुशक्ति बनाया।
2002 से2007 तक राष्ट्रपति बनके भारत का सम्मान बढ़ाया।
27 जुलाई को इस महान हस्ती को क्रुर मौत ने हमसे छुडया।
गरीब परिवार मे जन्मा बालक सुपर पावर बनके सामने आया।
महान वैज्ञानिक मिसाइल मेन राष्ट्रपति बनके देश का गौरव बढ़ाया।
तमिलनाडु के रामेश्वरम मे पला बढ़ा
अखबार और इडली बेचकर शिक्षित खुद को बनाया ।
मात पिता इस कोहीनुर ने भारत का परचम विश्व मे  लहराया।
राकेट बनाये मिसाइल बनाई अणुशक्ति बनाया ।
गणित के जिनियस वैज्ञानिक ने वतन का मान बढ़ाया।
दिल के दौरे ने हमसे मिसाइल मेन छुड़ाया।
मौसम भी खुब रोया और गिडगिडाया।
आप हमारे दिलों मे कभी न हम भुलायेगे।
आपका जन्म दिन वतन विध्यार्थी दिवस के रूप मे मनायेगा।
श्रृद्धाजली शत शत नमन।

सागर की मादक लहरों मे

सागर की मादक लहरों मे मेरी नाँव डगमगाने लगी है।
दिल को यु लगता है घड़ी महबुबे मोहब्बत से मुलाकात की आहिस्ता आहिस्ता करीब आने लगी है।

मेरी मधुशाला के कृतक अंजान डगर को गुमाँ होने लगा है।
महबुबे मोहब्बत के इष्क मे नादान दिल आहिस्ता आहिस्ता खोने लगा है।

महबुबे मोहब्बत की आँखों मे सैलाभे अश्क आया है।
इस सैलाभे अश्क मे कृतक अंजान डगर ने दोनों पतवार गँवाई है।

Monday, 27 July 2015

जिन्दगी हरेक पल तुझसे बहुत दूर जा रहा हू मै

जिन्दगी हरेक पल तुझसे बहुत दूर जा रहा हूँ मै।
अपनी महबुबा मोहब्बत मौत को फकत दिल के करीब पा रहा हू मै।

आहिस्ता आहिस्ता अहसासे मोहब्बत होने लगा है।
नादान दिल महबुबे मोहब्बत के इष्क मे आहिस्ता आहिस्ता खोने लगा।

सागर की मादक लहरों मे मेरी नाँव डगमगाने लगी है।
दिल को यु लगता है घड़ी महबुबे मोहब्बत से मुलाकात की आहिस्ता आहिस्ता करीब आने लगी है।

मेरी मधुशाला के कृतक अंजान डगर को गुमाँ होने लगा है।
महबुबे मोहब्बत के इष्क मे नादान दिल आहिस्ता आहिस्ता खोने लगा है।

महबुबे मोहब्बत की आँखों मे सैलाभे अश्क आया है।
इस सैलाभे अश्क मे कृतक अंजान डगर ने दोनों पतवार गँवाई है।

Sunday, 26 July 2015

बहुत खुबसूरत

बहुत खुबसूरत
और बहुत प्यारी हो
जमाने की रूसवाइयो से
अंजान
होन
वाली
दोस्त
हमारी हो
अजीज
दिल को लगती
छलकती
मोहब्बत
नही
लाचारी हो
बहुत
खुबसूरत
रब की रचना
अनमोल
कृति
संगीता
दोस्त
हमारी हो
कृतक
ने
देखते ही
पहली नजर मे
जान लिया
फकत
दिल
ने अपना यार
मान लिया

राम और अली जैसे मिश्री की डेली।

रमजान की शुरुआत राम के नाम से होती है।
दीपावली की सुब अली के साथ होती है।

ये समझने की चीज हिन्दू तो जानते है।
मुस्लिम भाइयों को ये सच मानना होगा।

मानवता के शत्रुओ को पहचानना होगा।
आदमी यत को दिल से फकत मानना होगा।

दिलों मे नेर ए मोहब्बत लेके धर्म के भेद को जानना होता ।

Saturday, 25 July 2015

विजय दिवस

याद ए दुश्मन पाकिस्तान तुझे बीता कल याद आएगा।
वो बीता हुआ कल तेरी पुशतो को हजारों साल रूलायेगा।

बाँग्ला देश का भूत तेरी संतानो याद ए दुश्मन बीता कल याद आएगा।
वो बीता हुआ कल तेरी पुशतो को हजारों साल रूलायेगा।

बाँग्ला देश का भूत तेरी संतानो याद ए दुश्मन बीता कल याद आएगा।
वो बीता हुआ कल तेरी पुशतो को हजारों साल रूलायेगा।

बाँग्ला देश का भूत तेरी संतानो को कोख मे डरायेगा।
बीते हुये कल का भूत तुझे सदियों रूलायेगा।

उस जनरल नियाजी को भला कैसे तू भुलायेगा।
जिसने 90 हजार सैनिकों सहित आत्मसमर्पण किया कैसे उसे भुलायेगा ।

तेरी औकात सारा जहाँ जानता है
अब तो बराक भी आतंकियो की नर्सरी तुझे मानता है।

तेरे घर मे घुसके ओसामा को ओबामा ने मारा था।
तु हो बेसहारा ओबामा ने किया किनारा था।

हमने कारगिल मे तेरे आतंकी सैनिकों को मारा था।
विजय दिवस बना जीत का सबब तिरंगा हमको प्यारा है।

आपकी वफा

आपकी वफा ए मोहब्बत से रौशन फिजा और कायनात है
गर महबुब की मोहब्बत फकत साथ है फिर जमाने की क्या बात है।

यादें

यादों को फकत दिल मे अपने बसाया है
जिन्दगी जीने का सबब फकत उनमे पाया है
तनहाईयो मे उन्हें हमने आजमाया है।
जिन्दगी जीने मे यादों ने शाया बनके साथ निभाया है।

मोहब्बत

मोहब्बत दर्दे दिल होती है
बयाँ हुजूर अल्फाज से होती है
यादें तनहाईयो की फकत ज्योति है।
कृतक के दिल के आँगन मे अश्को की माला पिरोती है।

महबुबे मोहब्बत

तेरी हँसी यादों के सहारे जिये जा रहे है
मेहबुबे मोहब्बत से इष्क लडाने को मजबूर है किये जा रहे है

नूरे नजर

ए नूरे नजर क्या खूब हुस्न निखर के आया।
तुझे एक झलक देख के चाँद भी शर्माया है

लम्हे

ठीक है हम बेकरारी से इन्तझार उस लमहे का करेंगे ।
जिस घड़ी अल्फाजो से सजी षोडसी आपकी लाडली कविता ।
अमृत सागर फकत गोते लगायेगी।
सभी की जुबा पे मेरे यार छा जायेगी।

देवनागरी

आपकी कृति देवनागरी मे दिल के तार झनझनायेगी।
सारे कृति के आशिको की दिलों जान पे छा जायेगी

हिन्दी

मौन खामोश

आखिर कयो मौन बहिष्कार का सूचक कहलाता है।
आखिर कयो मौन से सारा जग घबराता है।
वाचाल आजकी दुनिया मे कोई भाव नही पाता ।
आखिर कयो मौन से सारा जहाँ थर्राता है।
मौन का पर्याय सारे जहाँ मे चाण्कय महान जाना जाता है।
उसका नाम सुनकर आज भी अच्छे अच्छे राजनीतिज्ञो के माथे पे पसीना आता है।
जब आपके सारे हथियार फेल हो जाये तब।
मौन ब्रह्मास्त्र मेरे यारो सदा से ही कहलाता है

रचनाकार

तेरा नाम बहुत प्यारा है
तुझी से रौशन सारा संसार।
यकिन न हो तो स्वयं देख लो।
तुझे पाने को सारा जहाँ बेकरार।
आप बहुत खुबसूरत रचनाकार है यार।
यकिन कीजिएगा हमतो मान गये क्या आप है तैयार।

मोहब्बत क्या है ।आखिर क्या है ये मोहब्बत

अश्को का गुबार है मोहब्बत ।
तलवार की फकत धार है मोहब्बत ।
दिलों का एतबार है मोहब्बत ।
तेल नही तेल की धार है मोहब्बत ।
दिलों के जजबात है मोहब्बत ।
अमावस्या मे चाँदनी रात है मोहब्बत ।
पुर्णिमा की फकत चाँदनी रात है मोहब्बत ।
मोहब्बत भरे ख्यालात है मोहब्बत
पद्मिनी सी मरमरी कोहीनूर है मोहब्बत।
बेताब धडकते दिलों का गुरूर है मोहब्बत अश्को का सैलाभ है मोहब्बत ।
खाबो और ख्यालो मे महबुबे मोहब्बत से मुलाकात है मोहब्बत

स्वर्णिम कुमूदनी

तुम अमृत सागर की स्वर्णिम कुमूदनी।
वह राजहंस पावन मजधार।
मै एक अदना सा ग्वाला प्रिये।
कैसे चुकाउ बदला तेरे उपकार का।

आखिर कयो

आखिर कयो मौन बहिष्कार का सूचक कहलाता है।
आखिर कयो मौन से सारा जग घबराता है।
वाचाल आजकी दुनिया मे कोई भाव नही पाता ।
आखिर कयो मौन से सारा जहाँ थर्राता है।
मौन का पर्याय सारे जहाँ मे चाण्कय महान जाना जाता है।
उसका नाम सुनकर आज भी अच्छे अच्छे राजनीतिज्ञो के माथे पे पसीना आता है।
जब आपके सारे हथियार फेल हो जाये तब।
मौन ब्रह्मास्त्र मेरे यारो सदा से ही कहलाता है

मोहब्बत

अश्को का गुबार है मोहब्बत ।
तलवार की फकत धार है मोहब्बत ।
दिलों का एतबार है मोहब्बत ।
तेल नही तेल की धार है मोहब्बत ।
दिलों के जजबात है मोहब्बत ।
अमावस्या मे चाँदनी रात है मोहब्बत ।
पुर्णिमा की फकत चाँदनी रात है मोहब्बत ।
मोहब्बत भरे ख्यालात है मोहब्बत
पद्मिनी सी मरमरी कोहीनूर है मोहब्बत।
बेताब धडकते दिलों का गुरूर है मोहब्बत अश्को का सैलाभ है मोहब्बत ।
खाबो और ख्यालो मे महबुबे मोहब्बत से मुलाकात है मोहब्बत

दोस्ती

एड मी
माय डियर
हिमानी
तेरी शक्ल है
कुछ कुछ
जानी पहिचानी
कवि
मनोहर
यादव
राजिस्थानी
मत कर नादानी
तु हे बड़ी सयानी
लगती नाय अभिमानी
आजा
हम
तुम
मित्र
बन जाये
राजिस्थानी ।

मौन

आखिर कयो मौन बहिष्कार का सूचक कहलाता है।
आखिर कयो मौन से सारा जग घबराता है।

वाचाल आजकी दुनिया मे कोई भाव नही पाता
आखिर कयो मौन से सारा जहाँ थर्राता है।

मौन का पर्याय सारे जहाँ मे चाण्कय महान जाना जाता है।
उसका नाम सुनकर आज भी अच्छे अच्छे राजनीतिज्ञो के माथे पे पसीना आता है।

जब आपके सारे हथियार फेल हो जाये तब।
मौन ब्रह्मास्त्र मेरे यारो सदा से ही कहलाता है

आखिर कयो चाणक्य मौन का पर्याय सारे विश्व मे जाना जाता है
तनहाईयो मे कृतक महबुबे मोहब्बत की यादों मे फकत खो जाता है।

श्री ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

चाँदनी रात मे

तेरी बहुत याद मेरे सनम हमें रोज आती है चाँदनी,चाँदनी रात मे।
हरेक बेइन्तहा मोहब्बत का अहसास कराती है चाँदनी, चाँदनी रात मे।
कृतक अंजान के दिल की धडकन चाँदनी, चाँदनी रात मे।
मेहबुब संग मिलके नग्मे मोहब्बत के गाती है चाँदनी, चाँदनी रात मे।

तनहाइयो के आलम मे

तनहाईयो के आलम मे यादों के मानिन्द जो जजबात दिल मे आते है।
महबुबे मोहब्बत की दिल की धडकन को मोहब्बत से गुनगुनाते है

अमृत सागर

मेरे महबुब ने अश्क बनाके अपनी आँखों मे बसाया ।
दुपटटे की सलवटो मे बसाके सीने से फकत लगाया ।

तेरे अश्क दिल पे वार फकत यार करते है।
कृतक अंजान डगर के दिल को तार तार करते है।

तेरी आँखों मे अश्क देखकर
मेरे यार कलेजा मुँह को आया
लख लख शुक्राणा उस रब दा।
जिसने महबुबा के दिल फकत हर्षाया।
गमो के बादलों का दमन हुआ।
महबुबे मोहब्बत का दामन खुशियों से हर्षाया।

महबुबे मोहब्बत के अश्को को देख
मेरे अल्फाजो ने नोटिस हड़ताल का भिजवाया।
अल्फाजो ने रूख यार दिल का किया
और शेरो शायरी पे प्रश्न चिन्ह लगाया ।

मेरी महबुबे मोहब्बत का अश्को का राज कृतक समझ आया ।
कृतक अंजान डगर को अपने दिल मे महबुबे मोहब्बत ने बसाया ।

आज तलक मेहबुबा को मेरी मोहब्बत का एतबार नही।
ये बात अलग है मेरी महबुबे मोहब्बत ही फकत मेरी यार है।

Friday, 24 July 2015

दफ्तर

सरकारी दफ्तर का बाबु बहुत अब काम करता है।
दो चम्मच चीनी की चाय पीता केश लेता आराम करता है।

जिस रोझ दिल फकत सरकारी दफ्तर हो जायेगा।
दोनों आँखें सदा को बंद करके कृतक गुडबाय हो जायेगा।

दूर के ढोल

दूर के ढोल दिल लुभाते है।
पास आकर दिल को फकत तीर चुभाते है।

दूर रहकर वो बहुत याद आते है
पास आकर दिल के तारों को फकत झनझनाते है।
तेरी यादों मे नग्मात ए मोहब्बत दिल से गुनगुनाते है।
फकत जब सामने महबुब मोहब्बत को पाते अपना पता भी भूल जाते है।
तनहाईयो के आलम मे यादों के मानिन्द जो जजबात दिल मे आते है।
महबुबे मोहब्बत की दिल की धडकन को मोहब्बत से गुनगुनाते है

दिल तोड़ने वाले

दिल तोड़ने वाले को नजरें खोजती।
राज दिल तोड़ने का जानने का कयास है
वो हमसे जुदा है मगर दूर नही
कुदरत के नजारो से पता नजरें पुछती है।

कुदरत का आलौकिक सौन्दर्य निखर के आज आया है

गगनचुम्भी अटटालिकाओ पे घनेरे स्याह मेघो ने डेरा डाला है।
कुदरत का अनुपम हर्दय स्पर्शी सौन्दर्य निखर के आया है।
अनुपम रूप लाव्णय ने दृश्य को नैनाभिराम बनाया ।
कुदरत के कुशल चितेरे कृतक के दिल को करिश्मा कुदरत का भाया है

Wednesday, 22 July 2015

बस तनहाईयो का आलम है

बस तनहाईयो का आलम है
आपका साथ है
दिल दिल मे हो रही दिल से दिल की बात है।
दिल मे जजबात है
साँझ ढल रही
होने वाली अब रात है
आपसे जबसे हुई मुलाकात है
बिखरे हुये ख्यालात है
जेहन मे उठते सवालात है
यही है जिन्दगी
यही मुलाकात है
पल दो पल का साथ है
हो रही बात है
आप मेरे साथ
हम आपके साथ है

दोस्ती

दोस्ती
इन्द्रधनुषी
जैसे भागीरथी
कुदरत सँवरती है
दोस्ती निखरती है
सात रंगों के मेल से
सफेद रंग बनता है
सजोया है
इसने जमाने
की रंगत को
और
निखार
हरेक
पल
यार
दिल से
आया है

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मौन एक

मौन एक सम्पूर्ण भाषा है।
मौन एक सम्पूर्ण दिलाषा है।
बहिष्कार का सूचक
एक सहमति है मौन
राग है द्वेष है
जीवन का कलेश है
हाँ भी है
ना भी है मौन
जीवन मे तुफान है
सागर की सुनामी है मौन
शाँत दिल मे छुपा बवंडर
कभी क्लेष
कभी केलण्डर
सुसुप्त ज्वार
गरीब की चुप्पी
वन मे दावानल है मौन
राजनीति का चाणक्य दिग्गी
तनहाईयो मे सन्नाटा
गाल चे पड़े थपपड का झन्नाटा
गरीब की हा
पंडित की पूजा
रामदेव का योग
आशाराम का भोग
काम और रति का काम
इन्द्र और इन्द्राणी का आराम।
कृतक के हाथों मे सागर मय जाम
कायर का डर
लाल बाल की धधकती ज्वाला
बच्चन जी मधुशाला
कृतक की कमसिन सुरबाला ।
निर्माण और सृजन का आरंभ
नील कमल का राजकुमार
आस्था वान कलाकार का ध्यान
तलवार पे म्यान
कृतक का ज्ञान
कमसिन का श्रृन्गार
रूपमति का शौ लखा हार
भीम का वज्रप्रहार
मौन एक ससक्त भाषा है

एक मानव

एक मानव
एक पत्थर
एक हीरा
कोयले की खान
एक मोती
अमृत सागर के गर्भ की ज्योति
एक तारा
नीला आसमान
स्थिर
भक्त ध्रुव
कण कण मे कृपानिधान
मानव हैवान
गगन का सुर्य
जीवन की पहचान
गगन का चाँद
अमृत की खान
प्रियतम की जान
खुला आसमान
जिसने रचा ये जहाँ
साक्षात भगवान
नव सृजन
नित विनाश
जीवन की आस
प्रेम विश्वास
धर्म कर्म
रिश्ते नाते
धोरा
तेरा मेरा
मिल जाये तो मौका
जीवन की आस
परमात्मा मे विश्वास ।

तुम मेरी मोहब्बत

तुम मेरी मोहब्बत
मै मोहब्बत तुम्हारी
मै तुम्हें जान से प्यारा
तुम जान हमारी
मेरी भी कुछ लाचारी
तेरी भी कुछ लाचारी
हम दोनों मे निःस्वार्थ निहित है
दुनिया हमारी
मै दिल जिगर जान तुम्हारी
तुम सब कुछ हमारी
तुमसे से जीवन है
तुमसे है दुनिया सारी
तनहाईयो का आलम
हँसी यादें तुम्हारी
जिन्दगी बन गई
मानो लाचारी
समाज बन बैठा
बड़ा ही व्याभीचारी
उसको दिमाग की बिमारी
आँखों की लाचारी
कानों की बिमारी
कोई लगता नही अपना
जिन्दगी बन गई एक हँसी सपना।
वो तकती रहती राह हमारी ।
यारो मोहब्बत है
ला ईलाज बिमारी
इससे सारी दुनिया है हारी
मोहब्बत की राह मे
आंशिक मर ��जाते
है
नाम अमर कर जाते है
नित नये आंशिक आते है
सजदा करते मजार पे शीशे झुकाते है
आशिर्वाद मे दुख दर्द और मोहब्बत पाते है

मोहब्बत

मोहब्बत करना तेरे बस की बात नही
ये मोहब्बत है प्यारे रब की अरदास नही।
मंदिर मे जाता हू रब के आगे शीश झुकाता है।
या रब मुझे मेरी मोहब्बत मिल जाये चाहे कयामत आये

यार अपना बनाकर

यार अपना बनाके जिसे दिल मे बसाया।
उसी यार खंजर या रब मेरी पीठ मे घोपा।
अपने दर्दे दिल की तरह जिसे सीने से लगाया ।
उसी यार ने आस्तीन का सर्प बनके डस लिया ।
मेरी रूह काँप गई उस झील के ठहरे हुये पानी के मानिन्द।
जब पत्थर मेरे अजीज यार ने अपने हाथ उठाया ।
दुआ यही रब से मेरे उस यार को रहमत तू बक्सना ।
उसकी जिन्दगी चेनो अमन शुकून से सदा आबाद रहे।

सावन के सुहाने मौसम मे

सावन के सुहाने मौसम मे मेघ अमृत बरसायेगे।
बहुत दिनो के बाद आज सजन घर आयेगे।
आज से हर दिन होली हरेक रात दिवाली हो जायेगी।
बहुत दिनों के बाद प्यार की झप्पी देकर सजन अंग लगायेगे।
महबुबे मोहब्बत की प्यास बूझेगी स्वाति नक्षत्र के मेघ अमृत बरसायेगे।
महबुबे मोहब्बत सावन मे मनभावन नग्मे सुनायेगे।

दिल ने कहा

दिल ने कहाँ आप से पूछु
और हमने आपसे पूछ लिया
हाले दिल यार का दिल जानता है
वह जानता है या रब जानता है
हाले दिल यार का दिल जानता है
वह जानता है या रब जानता है

आपने अब तक

आपने अब तक बताया नही क्या कुछ खास है आज।
आप कहे हा या चाहे ना कहे हकीकत या तो आपका दिल जानता है हमारा दिल जानता है।
ये दिल ही तो जो आप यार अपना दिल ' दिल से मानता है।

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव