लम्हा लम्हा रात ढल रही है महबूबे मोहब्बत के इन्तजार मे
महफिल मे मादक शमां जल रही है परवाने के इन्तजार मे
आहिस्ता आहिस्ता उपवन मे खिल रही है भंवर के इन्तजार मे
महक रही है कायनात और फिजा महबूब मोहब्बत के इन्तजार मे
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Wednesday, 16 December 2015
लम्हा लम्हा रात ढल रही है
दूर रहकर भी
दुर रहकर भी तेरी अरदास करते है
ए मेरी जिन्दगी तुझसे बेशुमार प्यार करते है
आईना ए दिल मे दीदारे यार करते है
हरेक पल रब से तुम्हारी आरजुये फरियाद करते है
इस बात से वाकिफ है दिल मे हमारे आशियाना है तुम्हारा
फिर भी दिल ही दिल मे साहिल मौजो का इन्तजार करते है
Tuesday, 15 December 2015
दूर रहकर भी
दुर रहकर भी तेरी अरदास करते है
ए मेरी जिन्दगी तुझसे बेशुमार प्यार करते है
आईना ए दिल मे दीदारे यार करते है
हरेक पल रब से तुम्हारी आरजुये फरियाद करते है
इस बात से वाकिफ है दिल मे हमारे आशियाना है तुम्हारा
फिर भी दिल ही दिल मे साहिल मौजो का इन्तजार करते है
समाँ मोहब्बत का
समाँ मोहब्बत का बाद मुद्दत के यार आया है
महकती फिजा मे पहले पहल महबूब तुम सा पाया है
महबूबे मोहब्बत ने तन मन से प्यार हमपे बरसाया है
उनकी मोहब्बत मे अमावस्या मे पूनम का चाँद चाँदनी संग आया है
जनन्ते हूरे जनन्त का मोह छोड धरा पे आया है
यु नो कामदेव ने महबूबे मोहब्बत की महक से रति को बिसराया है
समाँ मोहब्बत का
समाँ मोहब्बत का बाद मुद्दत के यार आया है
महकती फिजा मे पहले पहल महबूब तुम सा पाया है
महबूबे मोहब्बत ने तन मन से प्यार हमपे बरसाया है
उनकी मोहब्बत मे अमावस्या मे पूनम का चाँद चाँदनी संग आया है
जनन्ते हूरे जनन्त का मोह छोड धरा पे आया है
यु नो कामदेव ने महबूबे मोहब्बत की महक से रति को बिसराया है
और भी गम है जमाने मे
और भी गम है जमाने मे सिवा मोहब्बत के मेरे यार
तूही बता कैसे कह दू नही करता मै तुझसे प्यार
एक पल भी जीना दुश्वार होता है बगैर दीदारे यार
तूही बता कैसे आखिर क्यो करू महबूबे मोहब्बत से इन्कार
सिर्फ एक तूही है तूही की कली दिसपे कुर्बान जानो जिगर मेरे यार
मरते दम तुझसे मोहब्बत न होगी कम करता रहूँगा तेरा इन्तजार
सिर्फ और सिर्फ
सिर्फ और सिर्फ तुम्ही से बेपनाह मोहब्बत है मेरे यार
तेरी मोहब्बत भरी चाहत मे दिल रहता है बेकरार
तुम्ही आरजुये ए जिन्दगी है मेरे सनम मेरे यार
तुही प्यार तूही चाहत मेरा रब और इबादत तुही मेरे यार
बनके ख्वाहिशे दिल
बनके ख्वाहिशे दिल मेरे ख्वाबगाह की सैर कीजिये
जब आपका जी चाहे ख्वाब मे सनम आया कीजिये
हम नीदों मे जागकर महबूबे मोहब्बत का इन्तजार करते है
तुम क्या जानो सनम तुम्हारे साये से भी बेशुमार प्यार करते है
अबसे
अबसे आँखो से अश्क नाहक बहाया न कीजिये
सनम महबूबे मोहब्बत को यु जाया न कीजिये
हमारी खातिर न सही जमाने की खातिर मुसकुराया कीजिये
आशिक है तुम्हारे सनम शमाँ सम परवाने को गले लगाया कीजिये
बनके जिन्दगी
बनके जिन्दगी गले अपने लगाया कीजिये
परदेशी परिन्दे को दिल मे बसाया कीजिये
बनके चकोर बनकी भोर मे मिल जाया कीजिये
चाँद की चाँदनी बनकर शबनमी मोतियो से मोहब्बत बरसाया कीजिये
हैरान है जमाना मोहब्बत से हमारी आशिक को यु सताया न कीजिये
चाँद की चाँदनी हो तुम नदिया के उस पार मिलने आया कीजिये
सागर की मौजो
सागर की मौजो के लब चुमने को साहिल रहता है बेकरार
सादियो पुरानी है मोहब्बत साहिल से मौजो की मेरे यार
तडपता है मचलता है बहकता है इन्तहा होने पे इन्तजार करता है
बाद मुद्दत के जब दीदारे यार होता है लब चुमता है मौजो का साहिल
हा यही तो मोहब्बत की खुमारी होती है मेरै यार
खिलती हुइ नन्ही कली को देख अंजान भंवर बहक जाता है सरकार
महबूबे मोहब्बत
उनकी मोहब्बत मे हर जुल्मो सितम हँस हँस के सहेगें
सुली पे चढ जायेगे,शमाँ मे समाँ जायेगे कभी उफ न करेंगें
सदियों पुराना रिश्ता है मोहब्बते महबूब से यारो हमारा
गमे दरिया मे रहके महबूबे मोहब्बत की आबादी की दुआ करेंगें
साहिल की मोहब्बत
साहिल की मोहब्बत मे मौजो ने बेशुमार प्यार पाया है
आज साहिल मर्यादा भुलाकर मौजो मे समाहित होने आया है
सदियो पुराना रिश्ता हमारा कोई रोक न पायेगा
हमसे जो टकरायेगा चूर चूर हो जायेगा
आज शुब जिन्दगी का पैगाम आया
आज सुब जिन्दगी का पैगाम आया
मोहब्बत भरा खुबसूरत. सलाम आया
जिन्दगी ने ऩग्मा मोहब्बत भरा गुनगुनाया
प्यारा सा नन्हा दुआ ए रब चौबारे आया
रब करे
रब करे महबूबे मोहब्बत मुझे भुल जाये
जब दिल से याद वो करे सहराओ मे कमल खिल जाये
बागो मे बहार आये जब महबूबे मोहब्बत मुस्कुराये
सहराओ मे खिली कुमुदनी फिजा खूब महकाये
पतझड की उदासी के बाद जब बागो मे बसंत बहार आये
भँवरो की गुंजन से हरेक कुमुदनी फिजा महकाये
चिडियो की चहचहाअट से भोर का सुरज आये
साँझ ढले गगन तले चाँदनी शबनमी मोतियो से धरा सजाये
पूनम की रात महबूबे मोहब्बत की मादक महक से महकाये
महबूबे मोहब्बत की बाहो मे मोहब्बत का कमल मुस्कुराये
दिल ही दिल मे
दिल ही दिल मे दिल से दिल की बात हो गई
चाँदनी रात मे चाँद के सामने मुलाकात हो गई
लब बंद जुबाँ खामोश फिर भी दिल की दिल से बात हो गई
कभी दिल फरेबी नही होता पर फरेब परे भी नही यार
मुलाकात तय थी दिलो की चाँदनी रात मे हो गई
बहुत खुबसूरत
बहुत खुबसूरत और लाजवाब लिखती है आप
दिले नादां सदियो से है चाँदनी तुम्हारा
तुम्हारी मोहब्बत मे भृमित दिल बेचारा
मेरे मोहब्बत भरे दिल को तेरा सहारा
किनारे लगने से डरता है मासूम बेचारा
मोहब्बत का रिश्ता
मोहब्बत का रिश्ता बडे मुकददर से नसीब होता है
बहुत खुशनसीब है वो जो महबूब के करीब होता है
महबूब का दिल आशिक की रूह दो जिस्म एक जान होते है
ये प्यार के पागल परवाने जमाने की रूसवाइयो से अंजान होते है
वक्त की वफाये भी बडी नादान होती है
प्यार मे पागल परवानो की दीवानगी से अंजान होती है
खिजा.के फूल भी महबूब की मोहब्बत से वाकिफ यार होते है
महकती हुई मोहब्बत लरजती हुई महक के पसेमान होते है
रब की रहमत भी महबूबे मोहब्बत की निगेबां होती है
जमाने की रूसवाइयो के दर्मिया मोहब्बत जवाँ होती है
रब की अजीमो करीम रहमत से महबूब की मोहब्बत पाई है
मोहब्बत की महक से सहराओ की फिजा मे रंगत छाई है
हमने अपना आशियाना महबूब का दिल बनाया है
पाक परवरदिगार को हमारी मोहब्बत की पाकीजगी पे यकीं आया है
बाद मुद्दत के सहराओ से मोहब्बत की बयार आई है
चाँदनी ने शबनमी मोतियो से वसुन्धरा आज सजाई है
महबूबे मोहब्बत की यादे शाया बनकर साथ रहतीं है
लब बंद जुबाँ खामोश नजरे दिल से दिल की बात कहती है
महबूबे मोहब्बत की हँसी यादो का शाया साथ रहता है
प्यार भरा दिल मेरे महबूब की यादो मे धडकता रहता है
महबूब की रूह रोज साँझ ढले मेरी ख्वाबगाह आती है
तनहाईयो के आलम मे मोहब्बत से सराबोर कर जाती है
अश्क
बेवजह महबूब ने अश्क समझ कर गिरा दिया
जब दिल किया मोहब्बत से उठा के दिल से लगा लिया
चिल्मन हमे समझकर एक झटके मे हटा दिया
महबूब ने चाँद हमे समझकर बाँहो मे समेट लिया
दर्दे दिल समझ कर महबूब ने हमको भुला दिया
दिल के जख्मो को कुरेदने के लिये बेवफाई का सिला दिया
गद्दारे वतन
असहिष्णुता असहनशीलता के माइनो से वाकिफ है यार हम वाकिफ हो यार तुम
और वाकिफ है यार हिन्द वाकिफ है जहाँ
जिसे मेरे वतन से मोहब्बत नही
जो महसूस करता है ऐसा
खुशी खुशी छोड दे मादरे वतन वो काफिर
छोड दे मेरा जनन्त सा प्यारा हिन्दोस्ता
चुन ले वो अपना वतन
बहुत विशाल है जहां
उठाले अपना कारवाँ
बनाले अपना चमन
दुखता है दिल गद्दारे चमन की हरकतो से
मेरा वतन मेरा प्यारा वतन
हसरते दिल
मेरी दिली हसरत से तू मैरी मोहब्बत है यार
तुही मेरे दिल की धडकन तुही मेरा रियल प्यार
बाहो मे भरने को रहता है दिल सनम बेकरार
इन्तजार इन्तजार महबूबे मोहब्बत का दिल को है इन्तजार
हँसाती है मोहब्बत
हँसाती है मोहब्बत रूलाती है मोहब्बत
शुकून दिल को मिलता है मोहब्बत से
महबूबे मोहब्बत की यादो मे तडपता है दिल
फाल्गुन की मादक बयार बन दिल सहलाती है मोहब्बत
महबूब की खनकती हुई चुडियों से
महबूब की खनकती हुई चुडियो से मोहब्बत बयाँ होती है
चिडियो की धुन मोहब्बत की रंगीनियत का फलसफा होती है
चिडियो की खनक महबूब का दिल प्यार से लुभाती है
चाँदनी रात मे चिडियो की खनक दिल की धडकन बढाती है
गर इक बार
गर एक बार इजाजत मिल जाये सहराओ मे कमल खिल जाये
पृियतम मै तुम्हारे मादक लबो को चूमना चाहता है
टप टप टपकती यौवनरस हाला पीके जनन्त का सा आनंद सनम आयेगा
सावन के सुहाने मौसम मे दिल गार्डन गार्डन सनम हो जायेगा
एसे मे कामदेव रति को छोड वसुन्धरा पे दौडा दौडा आयेगा
पावन महकती कायनात मे जनन्त से कही अधिक सुख धरा पे पायेगा
गुड मार्निग डियर दोस्त
गुड मार्निग डियर फृेंड केन आय से लव यु
यु वेरी वेल अवेयर आफ इट
मुझे तुमसे मोहब्बत नही नही नही है
मगर मैने अब तक ये राज तुमको बताया नही
मेरी वफा और मेरे वादो पे शक की गुंजाइश नही
नेक थे मेरे इरादे किये थे मोहब्बत मै तुमसे जो वादे
अपने वादो से मुकरने की हिम्मत मुझमे नही
क्योकि यु वेरी वेल अवेयर आफ इट मै तुमसे मोहब्बत तुम्हारे लिये है
जब आँखो का नीर
जब आँखो का नीर "अश्क "
रूखसार भिगोता
तब मोहब्बत के मानिंद दिल भी यार रोता है
आँखो के अश्क यार सबको दिखाई देते है
लेकिन दिल के अश्को से दो चार महबूब यार होता है
दिल ही दिल की भाषा से वाकिफ यार होता है
तनहाईयो के आलम दिल ही दिल मे बेकरार दिल यार रोता है
दिल के टूटने का अहसास सिर्फ दिल को ही यार होता है
दिल टूटने पर सैलाभे अश्क महबूब की आँखो से बयाँ होता है.
मोहब्बत से शुकून दिल को
मोहब्बत से शुकून दिल को मिलता है
मोहब्बत से शुकून दिल का जाता है
ये एक पागल पृेमी ही जानता है
जो महबूब की चाहत मे पत्थर खाता है
वाह जी वाह . क्या बात है .मदमस्त चाँदनी रात है .दिल मे मचलते जजबात है. महबूबे मोहब्बत साथ है.
वाह क्या बात है
चाँदनी रात है
हाथो मे हाथ है
महबूबे मोहब्बत का साथ है
पहली पहली मुलाकात है
दिल मचलते जजबात है
चाँदनी रात है
शबनमी अहसास है
पृियतम भी पास है
वाह क्या बात है
नारी शक्ति
कवि नरेन्द्र सिंह 'मतवाला' भाई
महिलाये माँ बहन हमारी है
महिलाये आदि शक्ति का अवतार धरा पे सारी है
जननी है वह माँ कहलाती है
भार्या बन परिवार का बोझ उठाती है
बहन भाई को कर्त्व्य पथ सिखलाती है
बन चामुण्डा शक्ति रण मे विजय पताका लहराती
माता बनकर पुत्र खिलाती बृहम्चर्य का पाठ पढाती
मेरे साँवले सलोने गिरिधारी कृष्ण मुरारी, दिल मे बसी है कान्हा छवि तिहारी, बनवारी मोहन मुरारी मै तो राह तकत तकत कान्हा हारी.
दिल मे बसी एक छवि कान्हा तुम्हारी है
एक तुम्हारी ही छवि मनमोहना लगती प्यारी है
दिल को साँवरे तुम सी हुई यारी है
हरेक पल दिल की धडकन जपत कृष्ण मुरारी राधिका प्यारी है
कमसिन महबूब
कमसिन महबूब की मुस्कान पर फिदा यार हम हुये
अल्हड हुस्न के कातिल तीरे नजर के शिकार हम हुये
बातो ही बातो मे कमसिन महबूब ने दिल अगवा कर लिया
दिल को दिल के हवाले कैद कर मोहब्बत मे जकड लिया
मेरे महबूबे मोहब्बत से जूडकर यार मशहूर हम हुये
इतने हुये मशहूर की उनकी नजरो का नूर हो गये
दिल के अरमां नजरो ही नजरो मेरे दिल ने जाने है
दिलो दिमाग मे कब्ड्डी खेलते मोहब्बत भरे लफ्ज पहचाने
शबनमी चाँदनी
शबनमी चाँदनी धरा पे उतर आई है
महबूब के रूखसार पर हया छाई है
बहकती मदभरी हवाओ ने पुकारा है
टप टप टपकती शबनमी मोतियो का इशारा है
चाँदनी का हुस्न क्या खूब निखर के आया है
मचलती हुई ख्वाहिशो ने दिल पे कहर ढाया है
बहुत खुबसूरत ख्वाहिश
बहुत खुबसूरत ख्वाहिश यार है तुम्हारी
बेशक दिलो जां से लगती हो तुम प्यारी
जिस दिन से हुई चाँदनी तुम से यारी
तुम्ही दिल की पहली ख्वाहिश आरजु हमारी
तुम्हारी हार या जीत के सदके मुकाम तुम्हारा
हरेक पल बंदे का बाअदम सलाम प्यारा
तुम्हारा साथ दिल को लगता है बहुत ही प्यारा
लगता है मुकद्दर मे तुमसे मिलना नही गवारा
हार हो या जीत सनम लगती हो तुम बहुत प्यारी
जमाने मे सबसे हँसी जनन्ते हूर दिल की राजकुमारी.
कितनी जल्दी
कितनी जल्दी सुब ढल रही है
कितनी जल्दी शाम हो रही है
देखो जरा गौर से मेरे यारो
जिन्दगी पलक झपकते तमाम हो रही है
हरेक शँय उसकी गुलाम हो रही है
आज सरेआम मोहब्बत निलाम हो रही है
गुर्बत सरेआम कुर्बान हो रही है
हिमानत नदारद सुब शाम हो रही है
आदमियत सरेशाम कत्लेआम हो रही है
जम्हूरियत हुक्मरानो की गुलाम हो रही है
इन्सानियत निलाम हो रही है
जब अपने सर को
जब अपने सर को झुकाया मैने
अपने गुरूर को मिट्टी मे मिलाया मैने
जब अपनी नजरो को झुकाया मैने
तेरी हरेक ख्वाहिश को दिल मे बसाया मैने
जब तेरी चरण रज को मांग का सिंदूर बनाया मैने
अपना रब समझ दिल मे सनम बसाया मैने
जब दिल ही मे अपना चाँद समझ अपनाया मैने
मेरे महबूब दिल जानो जिगर सब कुछ लुटाया मैने
जब दोनो हाथो को उपर उठाया मैने
तेरे सदके सबकुछ अपना लुटाया मैने
लबो पे महबूबे मोहब्बत को बसाया मैने
अपना सर्वस्य तुझमे ही मेरे सनम पाया मैने
रोज ही दिल से
रोज ही दिल से तुम्हे याद करते है
रब से यही फरियाद यार करते है
लंबी उमृ हो मेरे महबूब की खुदा
हम उन्हे खुद से भी ज्यादा प्यार करते है
बीती शब
रात मेहबुबे मोहब्बत की ख्वाबगाह मे गुजारी
महबुब के सुर्ख लबो से हुई यारी
पैमान ए लबो यौवन मय पी शब सारी ।
दो धडकते हुये दिलों के दर्मिया सरहदे न रही
सुनामी ए मोहब्बत मे ध्वस्त हुई दीवारो दुनिया सारी
हुस्न और इष्क के एकीकरण से
सागर भी खामोश स्तब्ध नजर आया
गुलाबी रूखसार बाहो मे समाहित
आज जन्नते हूर हुई हमारी ।
दिल से धडकनो को
दिल से धडकन को दूर करने की साजिस कर रहे है
लम्हा लम्हा मेरी हरेक साँस थामने की चाहत है तुम्हारी
जो बसी है मेरे दिल की हरेक धडकन मे भला कैसे भुल जाऊ
मेरी महबूब मेरी मोहब्बत मेरी जाने तमन्ना धडकन मेरे दिल की
तेरी मोहब्बत मे अपने आप को यार भुला बैठा हू
कोई आहट भी होती है तो जुबाँ पे तेरा ही नाम आता है
हर घडी हरेक पल तेरे ही ख्यालो मे खोया रहता हू
तेरी मोहब्बत भरी यादो के शाये मे जिन्दगी बसर हो रही है
मोहब्बत मे इन्तहाये इन्तजार का दीदार कर रहा हू
बिन तेरे जिन्दगी खालिस अंतिम सफर यार महसूस होती है
जिस पल से
जिस पल से तेरे हुस्न का दीदार किया है
प्यार ही प्यार हुस्ने यार बेशुमार किया है
तेरी हरेक अदा दिली एतबार किया है
अपने गमो को भुला के तुझसे प्यार किया है
ख्वाबगाह
मेरी ख्वाबगाह की ख्वाहिश
मेरे ख्वाबो की मलिका
मेरी नूरे नजर
मेरी जानो जिगर
तुही बता कैसे तेरे बगैर
तेरे बगैर तूही बता
कैसे जिये सनम तेरे बगैर तेरे बगैर
कैसे जिये तेरे बगैर
नइयो लगदा जिया तेरे बगैर
साँझ ढले सनम आजा खेत की मुन्डेर
जिया नइयो लगदा सनम तेरे बगैर
चाँदनी को पाने की
चाँदनी को पाने की आरजु है हमारी
चाँदनी की लगती है दिल को प्यारी
महबूबे मोहब्बत से रौशन है सारा जमाना
जर्रा जर्रा कायनात का चाँदनी का है दीवाना
चाँदनी सदियो से है मोहब्बत हमारी
दिल जानो जिगर मे बसी है सूरत प्यारी
मुझको आवाज दो
मुझको आवाज दो
तुम कहाँ हो
आवाज दो
जो आवाज दिल को सुनाई दे
वो साज दो आवाज दो
तेरी चाहत बहुत हमें न तडपाये वो राज दो
मेरे महबुब दिल से आवाज दो
तनहाईयो मे तेरी याद न सताये वो राज दो
आवाज दो आवाज दो
हमारे मुल्क मे
हमारे मुल्क मे मिडिया सेन्सरशिप जरूरी है गरीब किशानो का दुश्मन है मिडिया मित्रों आप अमृत सागर ज्वाइन करे मेरी और मित्रों की अद्वितीय काव्य रचनाओं का आनंद ले
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प्याज के बढ़ते दामों ने पब्लिक से कही ज्यादा प्रिट मिडिया को रूलाया
अरे जनाब पब्लिक की बात छोडिये मीडिया को एड़ी से चोटी तक पसीना आया
प्याज के दाम बढ़ाने मे बलात्कारी मिडिया ने अहम किरदार किया
बलात्कार की शिकार बच्ची के आरोपी का साक्षात्कार आज तक लाईव दिखाया
छोडिये पब्लिक की बात वो सब जानती है यारो
इन बलात्कारियो का रेटिंग का बिजनेस अब जनता जनार्दन की समझ आया।
किशानो गरीबों का दुश्मन है मिडिया ।
रूखसार
तेरे रूखसार का नूर जिस्म की चाँदनी
तुझसे पाया जो कुछ भी मैंने तुझे याद है
बेहिसाब जन्नत का सा सुख तुझसे पाया
फिर भी दर्दे दिल का फकत ईलाज नही
गमो के सिवा कुछ भी तो न बाँट पाया
उँचे दरख्तो के शाये मे बेहिसाब प्यार पाया।
मोहब्बत
मोहब्बत नादाँ दिलों की कहानी है
जवाँ दिलों का उन्माद है
फकत पागलपन के सिवा कुछ भी नही
सरासर बेईमानी है
दिलो की नीदानी है
रूह की रवानियत
उमंगे की कहानी है
मोहब्बत मे शहादत नयी नही
सदियों पुरानी है
अंजामे मोहब्बत फकत मौत है
सभी ने ये सच्चा ई जानी है
लैला मंजनु सिरी फरहाद
हीर राझणा से वाकिफ नही
हमारी नई जवानी है
मोहब्बत करने वालों की फकत यही कहानी है।
मोहब्बत के अश्क
मोहब्बत करके अश्को का सिला दिया
जिसपे जा छिटकते थे हम
मेहबुबे मोहब्बत ने एक पल मे भुला दिया
महबुबे मोहब्बत ने अश्को का सिला दिया
महबुबे बोस मोहब्बत ने दीदारे जन्नत करा दिया ।
उल्फते महबुब ने पीना सिखा दिया
मदभरे बोसो रूखशार ने जीना सिखा दिया।
वक्त
ना
कहो धोकेबाज वक्त को
वक्त कभी थमता नही
किसी का हुआ है ना होगा
बगैर किसी भेदभाव
हमारा भी वक्त आयेगा
यार
सावन मे बरसेगी रिमझिम फुहार
दो दिल मिलेगे
मोहब्बत के फूल खिलेगे
वक्त सभी का आता है यार
समय की पाबंदी
वक्त की पाबंदी का सबब
महबुबे मोहब्बत से पाया है
हरेक पे ठोकर देकर वक्त ने
जिन्दगी का सबक सिखाया है
वक्त के आगे अच्छे अचछो ने
सर बा अदब झुकाया है
वक्त की वफाओ से महबुब
मेरे यार तुझसा पाया है
वक्त को रोकने का
दु:साहस कोई नही कर पाया है
Sunday, 13 December 2015
चंदन
चंदन " से " वंदन "
ज्यादा शीतल होता है,
" योगी " होने के बजाय
" उपयोगी " होना ज्यादा अच्छा है,
"प्रभाव " अच्छा होने के बजाय
"स्वभाव " अच्छा होना ज्यादा जरूरी है
"दवा" कडवी होती है दुआ "मीठी" होती है
चाँदनी रात
चाँद को देखकर मेहबुब शर्माया है
चाँदनी रात मे मेहबुब ने गजब ढाया है
प्यार की झप्पी सरेशाम देकर
महबुब ने इष्क पर दिली एतबार जताया है
पुष्प की कुर्बानी अपनी कहानी अपनी जुबानी
महबूब को खुशी देकर यारो मै सदा मुस्कराता हू
मै उपवन का पुष्प शाख से टूटने का गम भुलाता हू
मानव की जिन्दगी मे हरेक अवसर पे काम आता हँ
देवो के सर पे चढके अपने भाग्य पे इतराता है
जन्नत के मुसाफिरो की अर्थियो की शोभा बढ़ाता है
मानव की करूणाई के वक्त मुस्कराते हुये सहलाता हू
सभी धर्मों के लोगों के काम आता हूँ
अमीर गरीब सभी के द्वारा सराहा जाता हू
मै फूल हू उपवन का सभी के काम आता हू
रति के गुजरे मे सजाकर चार चाँद उसके सौन्दर्य मे लगाता हू
सुहाग की सेज पे सजके दुलारा जाता हू
मूक गवाह कली को फूल बनते देख मुस्कराता हूँ
आजाद फिजा
हमने आजाद फिजाओ मे जन्म सनम मेरे सनम पाया है
शैफाली की मादक महक से महकती फिजाओ को जेहन बसाया है
महबुबे मोहब्बत ने गुलामी के से माहौल मे जिन्द बिताई है
कायनात के आपरेटर को मेरे महबुब पे दया आई है
जिन्दगी उसी रब के रहमो करम पे है फकत उसी की खुदाई है
सावन के सुहाने मौसम मे बरखा ने परिन्दो की नींद उडाई है
इन्द्र की सेना कहर बरपाती सितमगर नजर आई है
महबुबे मोहब्बत की आशिकी मिलन के हँसी लमहे सौगात मयी नजर आई है
चाँदनी ने मेरे चौबारे अमृत वृष्टी कर जिन्दगी मे बहारे लौटाई है।
Sunday, 6 December 2015
महक
तुम्हारी महक को दिल मे बसा लेगे
मधुर धुनो को रूह मे
कभी बिखरने न देगे सनम मेरे
अपने दिल के उपवन मे सजा लेगे
मोहब्बत
मोहब्बत भरे दिल से नग्मा मोहब्बत का यार ने गुनगुनाया है
यु लगा दिल को सनम जैसे परवरदिगार को रहम यार आया है
रब
रब करे आज की शाम न ढले
अम्बर मे ठहर जाये रवि
और हम वक्त से कहे
ठहर जा तू भी
हम यार से गुफ्तगू मे
व्यस्त है अभी
यार
यार ही महबूबे मोहब्बत सी है प्यारी
दुनिया मे सबसे हँसी और न्यारी
दिल की बगियाँ महकती है उसकी महक से
अमृत सागर मे खिलती है कुसुमकुमारी
कितना हँसी यार
कितना हँसी यार रब की महर से पाया है
रब ने अपनी कायनात मे तुमसा यार
मेरे यार सिर्फ
मेरे लिये बनाया है
तुमसे मिलकर दिल के अरमान मचलते है
और गुबारे दिल अल्फाजो की साजिस से छलकते है
तेरी चाँदनी से
तेरी चाँदनी से रौशन है गुलिस्ता और कायनात
महकते सै लग रहे है मोहब्बत भरे दिल के जजबात
महक रही है निशा और महक रहे है उमंगो से लबरेज ख्यालात
महक रही जिन्दगी तेरी मोहब्बत की महक से और महक रहे दिली जजबात
दीवाना दिल
दिवाने दिल की आरजुये मोहब्बत हो तुम
धडकते हुये दिल की सुमधुर तान
धर्म की रक्छा मै निकली जैसे गुरू कृपान
महबूबे मोहब्बत से महकती है जिन्दगी वही मेरी आरजु वही जान
माटी
माटी की महक ने दिल पे ऐसा जादू चलाया है
महकती हुई फिजा मे नजर आया यार का साया
बहुत लाजवाब और खुबसूरत मेरा यार होगा
जिस्म याद मे आँखो अश्क बहाये वही प्यार होगा
अश्क
अश्क बहते है आँखो
घासल जिगर यार होता है
क्या यही मोहब्बत होती है
क्या यही प्यार होता है
बगैर तीर खंजर के
दिल तार तार होता है
तुम्हारी नजरो का सनम जब
दिल पर वार मेरे सरकार होता है
महबूब
मेरे महबूब को अपना मुकद्दर बनाया हमने
नजरो के मार्फत उन्हें दिल मे बसाया हमने
अपनी तकदीर समझकर लकीरो मे उकेरा
जिन्दगी का नग्मा समझ प्यार लुटाया हमने
अश्क
तेरे अश्को ने
मेरे दिल को
जो जख्म दिये
वो किसी मरहम के मोहताज नही
तेरी मोहब्बत का मरहम मेरे यार
अब भी फकत एक आस
सबब ए जिन्दगी है
वाह
तेरी ईक " वाह " से सहराओ मे कमल खिलते है
दिल मे सोये हुये मोहब्बत भरे अरमान मचलते है
जर्रा जर्रा वादिये काश्मीर का सनम महकने लगता है
कायनात मचलती है फिजा हरेक पल रंग बदलती है
तेरी ईक " वाह " के दिल से कायल मेरी सरकार है हम
हा तुझसे मोहब्बत है तेरी मोहब्बत के दिल से वफादार है हम
खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई