होठ कपड़ा नही, फिर भी, सिल जाते है!
किस्मत सखी नहीं, फिर भी, रुठ जाती है!
बुद्वि लोहा नही, फिर भी, जंग लग जाती है!
आत्मसम्मान शरीर नहीं, फिर भी, घायल हो जाता है!
और,इन्सान मौसम नही, फिर भी, बदल जाता है!…..
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
रात कविता सपने आई
देने लगी मोहब्बत की दोहाई
पृियतम तोहे नींद कैसे आई
तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
हर हाल में जिन्दगी जिये जाना तुम
तनहाइयों से दामन बचाना तुम
यारी मोहब्बत में गरल पिये जाना
तनहाइयों को सिरे से भुलाना तुम
जिन्दगी अनमोल तोहफा है
पाक परवरदिगार दिगार का यारों
हँसते हँसते कठिनाईयों को भुलाना तुम
मोहब्बत ही जिन्दगी है जिन्दगी का मकसद मोहब्बत बनाना तुम
तेरी हँसी यादों के सहारे जिये जा रहाँ हूँ मैं
गरल जमाने भर का हँसते हँसते पिये जा रहाँ हूँ मैं
एक महकती हवा का झोका है जिन्दगी
ये सोच कर तेरी यादों के सहारे जिये जा रहा हूँ मैं
बिन तेरे जिन्दगी सहराओं की मृग मरिचिका सी लगती है
तनहाइयों के दामन में तेरी यादों को दिल के करीब पा रहाँ हूँ मैं
बडी हँसी है यादें तेरी तुझको करीब पा रहा हूँ मैं
तेरा साया सदा ही अपने करीब बहुत करीब पा रहाँ हूँ मैं
जिन्दगी जिन्दादिली का नाम फकत होती है
कदम कदम पे ये अहसास कमबख्त जमाने को दिला रहाँ हूँ मैं
मोहब्बत का एक हँसी जाम काफी है
जो गुजारी तेरे संग जिन्दगी की वो हँसी शाम काफी है
मोहब्बत का एक पल सदियों के मानिंद यार होता है
बिन मोहब्बत के जिन्दगी सहराओं में व्यापार होता है
जहाँ की खुशीयों से तेरा दामन सजाउँ मैं
मेरी पहली मोहब्बत आखिरी ख्वाहिश है तू
दिल के आशियाने में तुझे बसाउँ मैं
बंद आँखों से भी तेरा ही दीदार करूँ
बेशुमार मोहब्बत तुझसे मेरी सरकार करूँ
दिल कहता है तेरा एतबार करूँ
उनमुक्त गगन में तुझसे प्यार करूँ
माँ की मानिंद तेरे आँचल में छुप जाउँ
कदम के पेड पे यमुना तीरे गोपियों के वस्त्र छुपाउँ
जहाँ को मोहब्बत का संदेशा दू
मोहब्बत की महक की महक से जहाँ महकाउँ
गोकुल की गोपियों की मटकियाँ फोडू
गुजरियों के घर से माखन चुराके सखाओं के ढिंग बैठ के खाउँ
कान्हा की मानिंद कलयुगी कालियाँ का दमन करूँ
राधिका की मोहब्बत कलयुग में पाउँ
जिन्दगी तेरी मोहब्बत में सर अपना झुकाके
मोहब्बत के नगमों से फिजा आज महकाउँ
जिन्दगी तेरी बाहों में बिन्दास समाउँ
मेरी गजल भी तूही , तूही मेरा शबनमी गीत
तूही जिन्दगी की रीत सनम तूही मनभावक संगीत
जिन्दगी की सुरीली भोर तूही, तूही जिन्दगी की डोर
तूही जिन्दगी का राग सनम, तूही जिन्दगी का गीत
कभी तुमने सोचा है
एक अदद
नन्हा सा दिल हमारा भी है
शीशे का नहीं
पत्थर का नही
ना मोम का है दिल हमारा
इसे भी चोट लगती है
हमें भी अहसास होता है
कभी तुमने सोचा है
कभी कोशिश की है तुमने दिल में झाँकने की हमारे
चोट पे चोट ये सहता है
कभी उफ तक नही करता है
तुम्हारा दिल बहुत सुकोमल है
जाने अनजाने आहत हो जाता है
क्या हमारे दिलों की बनावट में रब ने फर्क किया है
नहीं
मै कैसे कर सकता हूँ
यू भी आशिको का दिल एक यार होता है
तभी तो मोहब्बत होती है
तभी तो प्यार यार होता है
मोहब्बत यकीनन दिलों के दर्मिया विश्वास का रिश्ता यार होती है
तभी तो मोहब्बत करने वालों की रूहें तक एक हो जाने को बेकरार होती है
मोहब्बत का सागर है अमृत सागर
मोहब्बत की मौंजे है सागर का प्यार
मोहब्बत ही साहिल मोहब्बत एतबार
तुम्ही मेरी जिन्दगी , मोहब्बत हो तुम्ही
तुम्ही जिन्दगी का मकसद , तुम्हीं जिन्दगी का एतबार
सागर के दिल की सागर अमृत सागर मेरे यार
सागर का जिस्म सागर की रूह
सागर की मोहब्बत, सागर का एतबार
अमृत सागर की मौंजे और साहिल का दुलार
अमृत सागर ही कश्ती, अमृत सागर ही जिन्दगी का एतबार.
पहली नजर में दिल में वो उतर गयें
चंद पलों में घायल दिल को कर गयें
सरे राह तीरे नजर से घायल कर गयें
आशियाना ए दिल में घर वो कर गयें
जिन्दगी के उपवन में कुमुदनी बन खिल गये
सरे राह चलते चलते मेरे महबूब मिल गयें
जिन्दगी के सागर की मौंजे बनकर ठहर गयें
साहिल पे होकर भी "सागर" वो किनारा कर गयें
मोहब्बत बनके नजरों में वो बस गयें
फरियाद बनकर सागर की जिन्दगी में जम गयें
हरेक शाम जिन्दगी का हँसी पैगाम लाती है
चाँदनी शबनमी मोतियों की चादर बिछाती है
शेफाली की महक निशा को मादक बनाती है
रूपसी बाला की मादक हाला रात का यौवन बढाती है
चँदा की चाँदनी में मोहब्बत क्या खूब खिलती है
भादों के मेघों में ज्यों बिजूरिया मचलती है
भोर के आँगन में नन्हीं कुमुदनी खिलती है
अंजान डगर के परदेशी भँवर की बाहों में मचलती है
यौवन की दहलीज पर पल पल हरेक पल निशा रंग बदलती है
परदेशी अंजान डगर की बाहों में कुमुदनी फूल बनके निखरती है
तुम बहुत खुबसूरत और बहुत प्यारी हो
लगती हो जन्नते हूर की सी राजकुमारी है
तुम्हारी महक से महक रहा जमी और आसमाँ है
तुम्हारी यारी पर यारों का दिल कुर्बान है
शबनमी चाँदनी रात में मोहब्बत तुम्हारी पाना चाहता हूँ
दिल के आशियाने मे तुमको बसाना चाहता हूँ
सावर की मादक रिमझिम मे प्यार तुमपे लुटाना चाहता हूँ
बाद मुद्दत के आज फिर मुस्कुराना चाहता हूँ
तुम्हारी हमारी मोहब्बत से कायनातो फिजा महकना चाहता हूँ
तुम्हे पाने की खातिर हरेक हद से गुजर जाना चाहता हूँ
दिल के आशियाने में तुम्हे सदा के बसाना चाहता हूँ
ए मोहब्बत की देवी नूरे नजर मोहब्बत तुमपे लुटाना चाहता हूँ
बाद मुद्दत के आज फिर मुस्कुराना चाहता हूँ
नजरों के मानिंद दिल की हरेक धडकन बनाना चाहता हूँ
तुम्हारी मुस्कुराहट से मुस्कुराता है जमाना
एक न एक दिन तुम्हे धरती पे पडेगा आना
तुम्हारी मोहब्बत से आज भी महक रहा है जमाना
जिन्दगी की चाहत तुम्ही हो कन्हैया ये मैने है जाना
अमृत सागर परिवार मे आपका हार्दिक स्वागत है
Friends aabhar please join amritsagar
मोहब्बत से लबरेज कविताओ का खजाना
साँझ ढले तो आ जाना
अमृत सागर मे डुबकी लगाना चले आना
https://m.facebook.com/amritsagarownsms/
तेरे नूर से रौशन है कायनातों फिजा सारी
तुम्ही ख्वाहिशे दिल तुम्ही से दुनियाँ हमारी
तुम्हारी नजरों सूरज चँदा कोटी अम्बर के तारे
सदियों से चाहते दिल हो हमारी मनमोहन प्यारे
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पपीहे की पीहू पीहू महबूबे मोहब्बत की याद दिलाती है
दिल में अगन लगाती है
पपीहे की पीहू पीहू दिल की धडकन बढाती है
तनहाइयों में बहुत सताती है
पपीहे की पीहू पीहू तुम्हारी मोहब्बत का सबब बन जाती है
रह रह कर तुम्हारी याद दिलाती है
पपीहे की पीहू पीहू बनकर महबूब मोहब्बत की महक से फिजा महकाती है
दिल के आशियाने में बस जाती है
तुमसे मिलकर बेकरारी में करार आया
तुम्ही हो
जिसमें जिन्दगी को मोहब्बत की महक से महकाया
तनहाइयों के आलम में डूबे हुये कृतक अंजान को नई राह दिखाई
वो तुम्ही हो मेरे महबूब
जो मेरी जिन्दगी में मोहब्बत की महक बनके आई
तुम्हारी खुदाई में परवरदिगार की सहमति मैने पाई
जिन्दगी बनके मेरी जिन्दगी में आई वो
बहार बनके मेरी जिन्दगी में मुस्कुराई वो
आइने में खुद का दीदार करके छुई मुई सी लगाई वो
सामने आते ही नजरों ही नजरों में दिल में समाई वो
जिन्दगी का सबब बनके मन ही मन मुस्कुराई वो
शेफाली की मादक महक बनके फिजा में समाई वो
जन्नते हूर रूपसी बाला बनके धरा पे आई वो
कृतक की रचना आईना ए दिल यार होती है
शेफाली की मादक महक हवा से दो चार होती है
यू तो चाँद से ही होती है चाँदनी इस जहाँ में मेरे यार
आशिकी रब की इनायत और इबादत यार होती है
अच्छे दोस्त चाँद की चाँदनी फकत यार होते है
मोहब्बत में महबूब की दिली ख्वाहिश और एतबार होते है
कभी न कभी, किसी न किसी मोड पर दो चार होते है
लाख छुपाओ छुपती नही शबनमी चाँदनी सनम
चाँदनी की मादक महक कायनात का एतबार होती है
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव