तस्वीर बनाता हूँ दर्दे जिगर से
ख्वाब सजाता हू महबुबे नजर से
तस्वीर तेरी दिल मे बनाता मै रहूंगा...
यादो से तेरे घर को सजाता मै रहूंगा...
जुगनू मेरी पलको पे चमकते ही रहेंगे ,
रातो मे तुझे रस्ता दिखाता मै रहूंगा...
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
तस्वीर बनाता हूँ दर्दे जिगर से
ख्वाब सजाता हू महबुबे नजर से
तस्वीर तेरी दिल मे बनाता मै रहूंगा...
यादो से तेरे घर को सजाता मै रहूंगा...
जुगनू मेरी पलको पे चमकते ही रहेंगे ,
रातो मे तुझे रस्ता दिखाता मै रहूंगा...
इस लिबाज मे दीदार करके
चेनो शुकून
दिल के गँवाया
ए कायनात के कारीगर
कयो
आखिर क्यों
तुझे रहम
न आया
क्या
उम्र
और कैसे
सितम
मुकद्दर के
कुदरत के बाजीगर
क्यों
आखिर क्यों
तुझे
रहम
न आया
इतनी मासूम
भोली भाली
सीधी साधी
कमसिन
को
क्यों
आखिर क्यों
मुकद्दर
ने
फकत
मुकद्दर
ने
क्यों
आखिर
क्यों
आपना शिकार बनाया
क्या
यही है
करम तेरा
तुझे
एक पल को
लहम
रहम
आखिर क्यों न आया।
महबुब की चाहत जुनून दिल का होती
नजरों से बयाँ फकत मेरे यार होती
महबुब का नूर रूखसार का आलम
उसी से रौशन मेरी सरेशाम होती है
मित्रों आप अमृत सागर ज्वाइन करे मेरी और मित्रों की अद्वितीय काव्य रचनाओं का आनंद
लीजिये।
जर्रे जर्रे मे बसा सुदर्शन चक्रधारी है
मेरे जिस्म की रूह ब्रन्दावन बिहारी है
श्री राधिकारमण के श्री चरणों मे गुजरी उम्र सारी है
कृतक इस जिस्म की रूह ब्रन्दावन बिहारी कृष्ण मुरारी है
श्री राधिका रूह जिस्म बान्केबिहारी है
श्री राधिकारमण के श्री चरणों मे समर्पित उम्र सारी है
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सखी माखन चोर की याद बहुत सतावत है
चहुओर चितचोर नंदकिशोर मुरलीमनोहर नजर आवत है
साँवरो सलोने नंदकुमार की याद सतावत है
उसके प्रेम मे जोगन हो ग ई तन मन की सुधार बुध बिसराई है
प्रेम विरह मे डुबी सखी जैसे जल मे गगरियाँ
विरहाग्नि मे यु तडपत है जैसे बिन जल मछुरिया
कैसे बताऊ कैसे बिछुडी जैसे कान्हा के लबो से बाँसुरिया
दुनिया कहती प्रेम दिवानी कोई न समझे विरह
साँवरा साँवरा साजन साँवरा रटते रटते हो ग ई बावरिया।
रिश्ते दिलों का बंधन है आसमाँ से बनके आते है
जमी पर इन्सान आसमाँ फकत आते है
हम मतलबी जमीनी इन्सान अपने मतलब से उसे
हिन्दू मुसलमान सिक्ख इसाई बनाते है
राखी के कच्चे धागों से बंधकर धरा पे मजबूती पाते है
सच्चा रिश्ता महबुब का होता है जो मरते दम तक निभाती है
मौत महबुबे मोहब्बत साथ लेकर जाती है
धरा की यारी मजबूत रिश्ता दोस्ती यारी कहलाती है
दोस्ती मे यार की खातिर जान की बाजी भी कम नजर आती है
बेकाबू होती
दिल की धडकनो को
थाम लो
बाहो के घेरे मे
घनेरे अंधेरे मे
जुलफो के शाये मे
ज्यों केश उलझते है
सुलझाने मे पसीना आता है
हम सुलझना नही चाहत हमारी
उलझने महबुब से अपुन की यारी
नही रोक सकती
कोई चार दिवारी
धडकते हुये दिलों की परवाज
मोहब्बत हमारी
दिलों की यारी
ज्यों परवाने की आरजु
शमाँ लगती
अपनी जान से प्यारी
जब से यारी
तेरी चाहत बनी
आरजु ए जिन्दगी
मेरे सनम मोहब्बत हमारी ।
दिलों को तोड़ने का हुनर उनको आता है
नाजुक कली को फूल बनाकर भँवरा मुस्कराता है
एक कमसिन कली को मसलके परदेशी भँवर उड जाता है
लौटकर फिर कभी गुलशन मे नही आता है।
उपवन की चाँदनी सदा के लिये मुरझा जाती है
उसके चेहरे पर ताउम्र उदासी छा जाती है
गुलाबी रूखसार बेरौनक नजर आते है
जैसे रूठके बसंत मौसम के बीच लौट जाता है
शाख से टूटकर पुष्प शोभा जुड़े की बढ़ाता
महबुबे मोहब्बत की याद बनके किताबों मे जगह पाता
खुद शाख से टूटने का दर्द भुलाके औरों की खुशी मे चार चाँद लगाता है
जमाने मे आदमियत को खुश देख पुष्प भी मुस्कराता है
पुष्प टोडने की मनाही किताबों और उपवन मे लिखी होती है
दिल टोडने की मनाही का जिक्र किसी की जुबाँ पे यार नही आता है
यु तो भँवर मोहब्बत हरेक कली से उपवन मे यार जताता है
हरेक कली का पराग चूसके परदेशी भँवर भाग जाता है।
जब तुम नही होती हो
हमारे दिल के करीब
सावन के काले घनेरे मेघ
जब जोरों से गुजरते है
रूह काँप जाती है हमारी
तनहाईयो मे तुम्हारी यादें
जिन्दगी का सबब फकत यार होती
बिजली की चमक मे तुम्हारा शाया नजर आता
दिल को शुकून मिलता
मेहबुबे मोहब्बत का दीदार
हो जाता है
जन्नते हूर वसुन्धरा का गुरूर सागरमय का शुरूर
मेरी सरकार नजर आती हो नजर आती हो
सावन के सुहाने मौसम मे दिलों पे गाज गिराती
महबुबे मोहब्बत मोहपास मे फाँसकर बा अदब इष्क फरमाती हो।
चाँद की मादकतम चाँदनी सम अमृत वर्षों कर दिलों के होश उडाती हो
मेरे महबुबे मोहब्बत के मादक हुस्ने यार की चाहत जन्नत की सैर कराती है
तेरी मोहब्बत मे मोहब्बत के नग्मे लिखता हू
तेरी मोहब्बत मे मोहब्बत के नग्मे गुनगुनाता हूँ
तनहाईयो मे तेरी यादों के साये के तले
खुने जिगर की स्याही से मोहब्बत के नग्मे सजाता हू
मोहब्बत भरे ये अनमोल नग्मे मेरे दर्दे दिल का गुबार
मेरे इन गीतों से फिजा मे आती है बहार
हरश्रृन्गार की महक से महकती है फिजा
दिल की मादक उमंगो मे आता निखार
मेरे गीत मेरी गझल नग्मात मेरे दिल का अहसास फकत
मेरे इन गीतों पे आता महबुबे मोहब्बत को प्यार बेशुमार
पाया है महबुबे मोहब्बत से प्यार बेशुमार
देखा है महबुब की नजरों मे छलकता प्यार मेरे यार
मेहबुबे मोहब्बत के गुलाबी रूखसार से झलकता एतबार बेशुमार
तेरी मोहब्बत के इन्द्र धनुषी रंगों सजाया मैने प्यार बेशुमार
तेरी मोहब्बत सरमायादारो की मोहताज नही
इस पे है तेरी रूह पे है मेरा इख्तियार मेरे यार
मोहब्बत भरे पलो के हँसी नग्मात सिर्फ तेरे लिये मेरे यार।
दिले बेताब की तमन्ना मेरे यार रंग लायेगी
तेरी रचना की महक से फिजा महक जायेगी
चाँदनी चौबारे मे फकत आज रात आकर
अमृत वर्षा से जन्नत का सुख पहुँचायेगी।
तेरी मोहब्बत मे मोहब्बत के नग्मे लिखता हू
तेरी मोहब्बत मे मोहब्बत के नग्मे गुनगुनाता हूँ
तनहाईयो मे तेरी यादों के साये के तले
खुने जिगर की स्याही से मोहब्बत के नग्मे सजाता हू
मोहब्बत भरे ये अनमोल नग्मे मेरे दर्दे दिल का गुबार
मेरे इन गीतों से फिजा मे आती है बहार
हरश्रृन्गार की महक से महकती है फिजा
दिल की मादक उमंगो मे आता निखार
मेरे गीत मेरी गझल नग्मात मेरे दिल का अहसास फकत
मेरे इन गीतों पे आता महबुबे मोहब्बत को प्यार बेशुमार
पाया है महबुबे मोहब्बत से प्यार बेशुमार
देखा है महबुब की नजरों मे छलकता प्यार मेरे यार
मेहबुबे मोहब्बत के गुलाबी रूखसार से झलकता एतबार बेशुमार
तेरी मोहब्बत के इन्द्र धनुषी रंगों सजाया मैने प्यार बेशुमार
तेरी मोहब्बत सरमायादारो की मोहताज नही
इस पे है तेरी रूह पे है मेरा इख्तियार मेरे यार
मोहब्बत भरे पलो के हँसी नग्मात सिर्फ तेरे लिये मेरे यार।
फकत एक लाइन मे
महबुबे मोहब्बत ने फरमाया
मुझे तेरी जरूरत है
तू मेरी मोहब्बत है
तू साथ है
तो ये दूनियाँ बहुत खुबसूरत है
मुझको तेरी जरूरत है
तुझे मेरी जरूरत है
राहे मोहब्बत जन्नत से भी खुबसूरत है
मेरे महबुब।
हमें कुछ ना नजर आया
फकत महबुबे मोहब्बत की यादों के सिवा
दोस्तों की राह देखते देखते
अमृत सागर के दिल का सब्र
महबुबे मोहब्बत की राहो मे खो जाने को है
महबुबे मोहब्बत की नजरों ही नजरों मे करार दिल को आने को है
वादा करके भूल गये यारी निभाने है
गुस्ताखी माफ मेरे हुजूर
मोहब्बत फकत आरजु ए दिल
के सिवा
कुछ भी नही
कुछ भी तो नही
इस बेचेन दिल की
कोई भी आरजु तो नही
सिवा महबुबे मोहब्बत
जुस्तजु ए उल्फत
कभी पूरी नही होती
मोहब्बत मे रूसवाइया जरूरी नही होती
हरेक तमन्ना दिल की
जरूरी नही
जुस्तजु ए मोहब्बत
उल्फत मे नही खोती
मेरी रचनाओं को अमृत सागर मे
मेरे यारो का इन्तझार आज भी है
तेरी टीका टिप्पणियों से दो चार हो जाने को
यारो का दिल बेकरार आज भी है
साज कुदरत ने छेड़ दी है
सावन का महिना बहुत सुहाना है
महबुबे मोहब्बत ने नग्मात ए मोहब्बत गुनगुना है
आरजु ए वफा को तहेदिल से शुक्रिया फरमाना है
जुस्तजु ए महबुब को आरजु बनाना है
उनकी रूसवाइयो से दो चार हम हुये
इतने हुये करीब
इतने हुये करीब
कि उनकी झुल्फो मे
गिरफ्तार हम हुये
गिरफ्तार हम हुये
जब दिल से जुदा हुये
जब दिल से जुदा हुये
तलबगार हम हुये
तलबगार हम हुये
महबुबे मोहब्बत के इष्क मे
महबुबे मोहब्बत कै इष्क मे
जानशी यार हम हुये।
लक्ष्मी जी aabhar
चेहरा व्यक्तित्व का आईना मेरे यार होता है
खामोश चेहरा हाले दिल की कहानी कहता है
चेहरे की मुस्कान व्यक्तित्व को इन्द्र धनुषी बनाते
गुलाबी रूखसार चेहरे को काश्मीरी रंगत देते है।
शुभ दोपहरी मे
शभ नाग पंचमी कहने का ख्याल दिल मे आया है
सदियों से आज तलक इस पुनित पावन अवसर पर हमने शिव प्रिय आभुषणो को दूध पिलाया
यह हमारी भारतीय संस्कृति एतिहासिक धरोहर की माया है
पृथ्वीराज चौहान ने 16 बार गोरी को माफ कर दूध पिलाया
सर्प का धर्म डसना फकत होता है यह एतिहासिक तथ्य सिद्ध हमने पाया
जिसको दिल से अपना समझकर पाला पोषा उसी ने डसा सर्वदा वही आस्तीन का सर्प घर का भेदी कहलाया।
हार्दिक शुभकामनाये नाग पंचमी
ॐॐॐॐ नमः शिवाय
अरमाँ मोहब्बत दिल मे लिये
अंजान आवारा दिल ही तो है
भूले से मोहब्बत कर बैठा
नादा था बेचारा दिल ही तो है
धडकता है फकत तेरे लिये
मोहब्बत का मारा दिल ही तो है
महबुबे मोहब्बत का मारा
भटकता तडपता दिल ही तो है।
मेरी महबुबे मोहब्बत शोख हँसी
ज्यों जन्नते हूर सजल
रोज है गुजरती मेरे घर की डगर
आशिक की बेपनाह मोहब्बत मे कैद
अपनी जिन्द से भी ज्यादा मोहब्बत
कोई चाहत लगाव मेल मिलाप न था
जब गुजरती तो महकती अंजान डगर
उसके जुड़े मे गुथे शेफाली के फुलो की महक
नजरें दीदार ए यार की लगती प्यासी फकत
साँसे ठहरती उसके इन्तझार मे फकत
उसके हाथों की हिना की महक
जैसे बसंत ने ली अंगडाई फकत
उसकी जुलफे जब लहराई फिजा
ज्यो भेजी देवराज ने सेना
पाक दामन वो महबुबे मोहब्बत
मै जैसे कंटीले बंबूल की शाख
जिसपे काले कौवे की विला
ये सब कुछ जैसे मेरे मानिन्द
मेरी जिन्दगी के हरेक लम्हात मे शुमार
दिल की चाहत यु ही महबुबे मोहब्बत गुजरती रहे
जब तक जिस्म मे रूह शामिल है फकत
दीदार ए यार से रौशन होती सुब
साँझ ढलती है महबुब की अंगडाई से।
चाँदनी खिलती पलकों के इशारे से
रात परवान चढती जब वो गिराती पलके।
महबुबे मोहब्बत की उदासी का सबब
जानने की काबलियत आशिको का हुनर
गर तुम चाहो तो राजे उल्फत जुबा पे आये
दीदारे यार मेरे महबुब का मुस्कराते हो
और पतझड की ऋतु मे कमल खिल जाये
तेरे अश्को ने
मेरे दिल को
जो जख्म दिये
वो किसी मरहम के मोहताज नही
तेरी मोहब्बत का मरहम मेरे यार
अब भी फकत एक आस
सबब ए जिन्दगी है
मेहबुबे मोहब्बत ने अश्को को आँखों मे बसाया है
अपने हँसी खाबो की दुनिया का शहंशाह बनाकर
महबुब के खाब पूरे हो जाते है देखने से पहले
जब वो आँखें खोलती है दीदारे यार होता है
महबुब को मंजिले मोहब्बत करीब लगने लगी है
दीदारे यार से पहले महबुब का एतबार प्यार पाया है
औरों को खुशी देख यारो मुस्कराता हू
मै उपवन का पुष्प शाख से टूटने का गम भुलाता हू
मानव की जिन्दगी मे हरेक अवसर पे काम आता हँ
देवो के सर पे चढके अपने भाग्य पे इतराता है
जन्नत के मुसाफिरो की अर्थियो की शोभा बढ़ाता है
मानव की करूणाई के वक्त मुस्कराते हुये सहलाता हू
सभी धर्मों के लोगों के काम आता हूँ
अमीर गरीब सभी के द्वारा सराहा जाता हू
मै फूल हू उपवन का सभी के काम आता हू
रति के गुजरे मे सजाकर चार चाँद उसके सौन्दर्य मे लगाता हू
सुहाग की सेज पे सजके दुलारा जाता हू
मूक गवाह कली को फूल बनते देख मुस्कराता हूँ
बिन्दास शब है जननत से हूर आई
रब दी कायनात और फिजा महकाई
जैसे परवरदिगार ने हाथों से गढी परी
शबनमी महक से वसुन्धरा महकाई ।
फिजा मे घुली मादक महक
एक गुँजता हुँआ दिलकश नग्मा
कोहीनूर सी लरजती बेबाक नजरें
मरमरी जिस्म गुनाह करने के बेताब दिल
नर्मो नाजुक लबो को चूमने की चाहत
बिन्दास बाहो मे सामने की तमन्ना
ख्वाबो की दुनिया कितनी रंगत लिये
वक्त की मार के आगे बेबस लाचार
मेरी मेहबुब मोहब्बत जो दिल की धडकन
देखते ही शुरूर छा जाना
बेकाबू होती धडकते दिल की धडकन
शमाँ ए मोहब्बत रौशन फकत मेरे महबुब।
बेशुकू खामोश काली घनियारी स्याह रात
दिल की बेचेनिनो ने कब्जा नींद पे जमाया
राहत का कोई मंजर अबतलक नजर नही आया
मुश्किले बढ़ती नजर आती है दिल की यार
महबुबे मोहब्बत की दिली ख्वाहिश
तनहाईयो का बेकाबू आलम
मेहबुब की यादों के शाये के इर्द गिर्द
बेकरार दिल को तलाश मोहब्बते शुकून की
बाद मुद्दत के महबुब का दीदार किया
जमाने की रफ्तार कभी धीमी कभी तेज
महबुब से बहुत दूर जिस्मानी तौर पर
रूहानी तौर पर दो जिस्म फकत एक रूह
जमाने की नजरो मे मोहब्बत चढ गई
नफरत भरी नजरें मजबूत दीवार की शक्ल मे
मेरी महबुब को इन हकीकतो का कोई गुमाँ नही
मै भी कैद हू जमाने के जंजाल मे
मेरी रूह जिस्म मे सजायाफ्ता महसूस होती है
हलाते हाजरा पे यकीन है महबुब को
तमाम तोहफे जुटाये थे उसकी खातिर
जब कभी मुन्तखिब होंगे
महबुब को दिल के हँसी टुकड़े रास आयेगे
कुछ रूमाल नेल पालिस बाड़ी लोशन महकते हुये खस
जाने क्या क्या जुटा रखा है दिले नादाँ
महबुबे मोहब्बत की इष्क मे लबरेज बातें
एक दुजे की बाहो मे गुजरी वो चाँदनी राते
तनहाईयो मे की थी जो मोहब्बत की बातें
गुलशन मे हुई वो तमाम रंगी मुलाकाते
वो रूखशार पे बोसो के निशा
मोहब्बत भरी कस्मे मेहबुब के वादे
वो तमाम खामोशीया गवा ए मोहब्बत ।
मोहब्बत करके अश्को का सिला दिया
जिसपे जा छिटकते थे हम
मेरे मेहबुबे मोहब्बत ने एक पल मे भुला दिया
महबुबे मोहब्बत ने अश्को का सिला दिया
महबुबे बोस मोहब्बत ने दीदारे जन्नत करा दिया ।
उल्फते महबुब ने पीना सिखा दिया
मदभरे बोसो रूखशार ने जीना सिखा दिया।
मोहब्बत नादाँ दिलों की कहानी है
दिलों का उन्माद है
फकत पागलपन है
सरासर बेईमानी है
मोहब्बत मे शहादत नयी नही
सदियों पुरानी है
अंजामे मोहब्बत फकत मौत है
सभी ने ये सच्चा ई जानी है
लैला मंजनु सिरी फरहाद
हीर राझणा से वाकिफ नही
हमारी नई जवानी है
मोहब्बत करने वालों की फकत यही कहानी है।
तेरे रूखसार की लपट जिस्म की चाँदनी
तुझसे पाया जो कुछ भी मैंने तुझे याद है
बेहिसाब जन्नत का सा सुख तुझसे पाया
फिर भी दर्दे दिल का फकत ईलाज नही
गमो के सिवा कुछ भी तो न बाँट पाया
उँचे दरख्तो के शाये मे बेहिसाब प्यार पाया।
रब की कुदरत या अम्बर का चाँद मुस्कराया है
महबुबे मोहब्बत के हुस्न ने खूब गजब ढाया है
मौसमे मोहब्बत मे दिल के अरमानो ने सर उठाया है
मेरे मेहबुब का दीदार करके चाँद भी शरमाया है
नन्हे मुन्ने बच्चो ने आसमान सर पे उठाया है
चाँद को पाने की ख्वाहिश जताकर जीना दुभर बनाया
हमने डलझील को आईना बच्चो की खातिर बनाया
और माँझी को चाँद का गाडीवान नन्हे मुन्नो को समझाया है।
अमृत सागर ने मोहब्बत सबकी पाई है
अमृत सागर के स्वर्णिम कमलो ने खुबसूरत झाँकी बनाई है
500 से अधिक मित्रों ने सहमति जताई है
और भी अनेक मित्रों को अमृत सागर की घटा लुभा रही है
आपके दीदार को अमृत सागर प्यासा नजर आ रहा है
મેરી બાહ મે બિખરી હૈ ધનેરી જુલ્ફે તેરી
એક ખુબસુરત ચાઁદ મેરે આગોસ મે હૈ
મહકતી હુઈ જવાની કા મદહોશી સા નશા
જમાને કે મયખાનો કી મસ્તી મેરે યાર મે હૈ
सुर्ख रक्तिम लाल मेहबुबे मोहब्बत के मादक लबो पे
दमकते हुये कमसिन गुलाबी गालो पे
नागिन सी लहराती बलखाती जुलफो ने गजब ढाया
चढती जवानी के दिलफरेब उभाँ
मगरूर ताज के गोल गुम्बज जैसे
फकत खुबसूरती सबब ए मोहब्बत नही होती
आरजु ए दिल यार तुम ना जान पाओगे
छोडो भी जाने भी दो यारो
महबुबे मोहब्बत बेश कीमती है तुम नही खरीद पाओगे।
हम तुमहे दिल से चाहने लगे है
रोज रात को तुम्हारे खाब आने लगे है
सपनों मे तेरा नाम लेके चिल्लाने लगे
सुब को सरेशाम बुलाने लगे है
गीत मोहब्बत के गाने लगे है
सपनों मे तुम्हे बुलाने लगे है
कलयुगी कैसे कैसे चमत्कार दिखाता
राम की मूरत रहमान बनाता
गोविंद रोजा मेरा यार रखता है
सजदे मे सर हर पल झुकाता है
नवरात्रि की भजन संध्या मे जब नाज गाती है
ये मंजूर देखने दुर्गा मा नौ बहनों के साथ आती है
रामायण गुरू ग्रन्थ साहब कुरान फरमाते है
रब की अजीम नेमत इन्सान जननत से आते है
फकत धरती पे आके राम रहीम रहमान बलवान बन जाते है
धर्म की डगर पकड़ सिख हिन्दू ईसाई और मुसलमान बन जाते है
उपर जननत मे रब फकत इन्सान बनाता है
नही हिन्दू सिख मुसलमान बनाता है
मेरे महबुब से मिलन की ऋतु आई
महबुबे मोहब्बत की चाहत प्यार अपार लाई
नैन छलकती मय के पैमाने
कई दिवाने डूब गये इन पैमानो मे
गुलाबी रूखसार ज्यों भोर के रक्तिम सुर्य की लालिमा
दिल की चाहत नित गाती गजल
कुदरत के कृतक को सजदे मे सर अपना झुकाता हू
उसकी कारिगरी के नायाब हुस्न से रूबरू कराता हू
कुदरत के बाजीगर की कृति का गौर से दीदार किया
कलकल बहती नदियों गुनगुनाते भौरो कुहूकती कोयल से प्यार किया
गगनचुम्भी अट्टालिकाओ का चुम्बन लेते बादलों का दीदार किया
वनों मे स्वछंद विचरण करते स्वर्णिम मृगो का प्यार से दीदार किया
कुदरत ने इन नायाब करिश्मो को मोहब्बत से अपनाया
कलरव करते खग मृग ने कुदरत को खूबसूरती से सजाया
मानता ने आदमियत भुलाके हैवानियत से
रब की कुदरत को बेजार करने का प्लान बनाया ।
तुम कहाँ हो
आवाज दो
जो आवाज दिल को सुनाई दे
वो साज दो आवाज दो
तेरी चाहत बहुत हमें न तडपाये वो राज दो
मेरे महबुब दिल से आवाज दो
तनहाईयो मे तेरी याद न सताये वो राज दो
आवाज दो आवाज दो
कल रात नींद की खुमारी
रात मेहबुबे मोहब्बत की ख्वाबगाह मे गुजारी
महबुब के सुर्ख लबो से हुई यारी
पैमान ए लबो यौवन मय पी शब सारी ।
दो धडकते हुये दिलों के दर्मिया सरहदे न रही
सुनामी ए मोहब्बत मे ध्वस्त हुई दीवारो दुनिया सारी
हुस्न और इष्क के एकीकरण से
सागर भी खामोश स्तब्ध नजर आया
गुलाबी रूखसार बाहो मे समाहित
आज जन्नते हूर हुई हमारी ।
हमारे मुल्क मे मिडिया सेन्सरशिप जरूरी है गरीब किशानो का दुश्मन है मिडिया मित्रों आप अमृत सागर ज्वाइन करे मेरी और मित्रों की अद्वितीय काव्य रचनाओं का आनंद ले
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प्याज के बढ़ते दामों ने पब्लिक से कही ज्यादा प्रिट मिडिया को रूलाया
अरे जनाब पब्लिक की बात छोडिये मीडिया को एड़ी से चोटी तक पसीना आया
प्याज के दाम बढ़ाने मे बलात्कारी मिडिया ने अहम किरदार किया
बलात्कार की शिकार बच्ची के आरोपी का साक्षात्कार आज तक लाईव दिखाया
छोडिये पब्लिक की बात वो सब जानती है यारो
इन बलात्कारियो का रेटिंग का बिजनेस अब जनता जनार्दन की समझ आया।
किशानो गरीबों का दुश्मन है मिडिया ।
शाख से टूटकर पुष्प शोभा जुड़े की बढ़ाता
महबुबे मोहब्बत की याद बनके किताबों मे जगह पाता
खुद शाख से टूटने का दर्द भुलाके औरों की खुशी मे चार चाँद लगाता है
जमाने मे आदमियत को खुश देख पुष्प भी मुस्कराता है
पुष्प टोडने की मनाही किताबों और उपवन मे लिखी होती है
दिल टोडने की मनाही का जिक्र किसी की जुबाँ पे यार नही आता है
यु तो भँवर मोहब्बत हरेक कली से उपवन मे यार जताता है
हरेक कली का पराग चूसके परदेशी भँवर भाग जाता है।
तेरी मोहब्बत मे नग्मे लिखता हू
तेरी मोहब्बत मे मोहब्बत के नग्मे गुनगुनाता हूँ
तनहाईयो मे तेरी यादों के साये के तले
खुने जिगर की स्याही से मोहब्बत के नग्मे सजाता हू
मोहब्बत भरे ये अनमोल नग्मे मेरे दर्दे दिल का गुबार
मेरे इन गीतों से फिजा मे आती है बहार
हरश्रृन्गार की महक से महकती है फिजा
दिल की मादक उमंगो मे आता निखार
मेरे गीत मेरी गझल नग्मात मेरे दिल का अहसास फकत
मेरे इन गीतों पे आता महबुबे मोहब्बत को प्यार बेशुमार
पाया है महबुबे मोहब्बत से प्यार बेशुमार
देखा है महबुब की नजरों मे छलकता प्यार मेरे यार
मेहबुबे मोहब्बत के गुलाबी रूखसार से झलकता एतबार बेशुमार
तेरी मोहब्बत के इन्द्र धनुषी रंगों सजाया मैने प्यार बेशुमार
तेरी मोहब्बत सरमायादारो की मोहताज नही
इस पे है तेरी रूह पे है मेरा इख्तियार मेरे यार
मोहब्बत भरे पलो के हँसी नग्मात सिर्फ तेरे लिये मेरे यार।
दिल की बेकरारी खामोशी कै साये
तेरे आगोस मे मेरी मोहब्बत कभी कभी
रात की तनहाईयो मे
प्रेमोन्माद मे अंग प्रत्यंग से झलकती है खुमारी
और आनंदोन्मादित होके
दिमाग मे आती है छवि सहरा की
महबुबे मोहब्बत के करीब
नींद चौकोर की मानिन्द
अनजान खौफ मोहब्बत मे शुमार मेरे महबुब
अपने इष्क का इझहार
खामोशी के आलम मे रात की तनहाईयो मे
मेरे आगोस मे मेरी मेहबुब
तेरे उन्दे यौवन मे मचलते जजबात
मोहब्बत मे गुनाही का सबब फकत
हरेक पल दिल ख्यालो मे मशगूल
मेहबुबे मोहब्बत नही मेरी
जन्नते हूर है मेरे सनम आगोस मे मेरे
और तेरे मरमरी जिस्म शिकारी की पनाह मे
बाद मुद्दत के ये रात आई
अपने जिस्म को हल्का महसूस किया
बेपनाह मोहब्बत का अरमाँ दिल मे
अपनी मोहब्बत के करीब हू मै
मेरे दिल मे उमडते घुमडते बादल
मेरी मोहब्बत है मेरा महबुब
खामोश रात की तनहाईयो मे
मोहब्बत महबुब की उल्फत।
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खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव