दिल महकता है
तुम्हारे
तुम्हारी उपवन की
हरेक नव कृति
जब खिलती है
और
काव्य सरिता में
सरेशाम
मचलने लगती है
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Friday, 25 November 2016
दिल
कस्तूरी
मोहब्बत से महकता है कायनातों फिजा
शबनमी चाँदनी के मोतियों से सजती है वसुन्धरा
फूलों की महक से महकती है कायनात
अम्बर के सितारों से दुघियाँ सी लगती अमावस की रात
सहरा महकने लगते है मृग की नाभी में बसी कस्तुरी से
मृग महक से बावला होकर सहराओं में सतत दौडता रहता है
कभी न कस्तूरी अंजान मृग पाता है
महकती डगर पर थक हार के जब बैठता है
कस्तूरी की मादक महक से कायनातों फिजा को महकाता है
सारे जहाँ की उदासी पलक झपकते दूर होती है
दिल का उपवन मोहब्बत की महक से रौशन हो जाता है
उपवन
उपवन का माली
महकती फूलों की डाली
दिल बाग बाग हो जाता
जब कभी उपवन में आता
हरेक फूल , नन्हीं कली
मुस्कुराहट मै दिल से देख
बाग बाग दिल हो जाता
जब कोई फूल तोडता
फुलों की महक से फिजा
मुस्कुराती सी लगती
जब गजरे मे ढलके सुमन
गोरी के मादक गेसू सजाते
और सुन्दरता में चार चाँद लगाते
मै माली दिल ही दिल मुस्कुराता
जब दिली मोहब्बत
फूलों से उमडती
दिल सैलाभे अश्क
डूब जाता
फूलों की मोहब्बत
मैं मे माली
सतत अश्क बहाता
फिर फूलों को
देव सिर समर्पित देख
दिल मुस्कुराता
कभी शहीदों के शव समर्पित
दिल रोता हँसता अश्क बहाता
फूलों से महकती
ये दुनियाँ सारी
जर्रा जर्रा ए कायनात
हरेक डगर
सारा जहाँ
हम रिणी फूलों के
उसकी मोहब्बत के
कुमुदनी और सुमन के
शेफाली और चम्पा डाली
उपवन और माली
अम्बर की खुबसूरत लाली
खुबसूरत कन्या
महकते गेसू
नूरे रूखसार
रूपवती नार
नौ लखा हार
गौरी का सिंगार
मोगरा की मोहब्बत
धडकता दिल
उमडता प्यार
मनोहर यादव
" अमृत सागर "
Thursday, 24 November 2016
मोहब्बत
सरहदों से परे मोहब्बत होती है यार
हरेक पल आशिकी में दिल रहता है बेकरार
न कोई शिकवा न ही कोई शिकायत होती है मेरे यार
सैलाभे अश्क के शाये में धडकते हैं दिल मचलता है प्यार
पतंग
कटी पतंग भी
मुकाम पाती है
जब कुछ वक्त
आजाद फिजाओं मे
उडने के बाद
डोर किसी
मानव द्वारा थाम ली जाती है
पल दो पल
आजाद फिजाओ में
विचरणोपराँत
वह इक बार पुन:
कट जाती
गुम हो जाती है
मिट जाती है
कायनात के उँचे दरख्तों के
हत्थे जब लग जाती है
जिन्दगी का भी
एसा ही कुछ आलम है
कभी कभी एसा लगता है
कटी पतंग और मेरी जिन्दगी में
कोई फर्क नही है
दिल की उमंगे समाप्तपृाय: लगती है
हवाओ के बहने से कोई वास्ता नही
जैसे हवा नही होने पे पतंग
जमीं पे आ जाती है
वैसी ही कुछ मेरी जिन्दगी की कहानी है
वो भी अम्बर से कटके जमीं पे आई
मै भी उसी की मानिंद
दुनियाँ वालों ने लुटने के लिये
चिंदे चिंदे कर दिया
वही सब कुछ जिन्दगी की कहानी है
हकीकत है ये
नही कोई नादानी है
अम्बर की कटी पतंग की
मानिंद मेरी जिन्दगी की कहानी है
Wednesday, 23 November 2016
जिन्दगी रब की इनायत है महबूबे मोहब्बत का एतबार है
हरेक सवाल का जवाब है जिन्दगी
फरिश्ते भी तरसते हैं वो माहताब है जिन्दगी
जिन्दगी जिंदादिली का नाम है
जिन्दगी मोहब्बत भरा शबनमी पैगाम है
रब की इनायत है जिन्दगी
रब का दुलार है
मोहब्बत का आईना है जिन्दगी
दिल का एतबार है
रब का नूरे रूखसार है जिन्दगी
महबूबे मोहब्बत का महकता शबनमी प्यार है जिन्दगी
जिन्दगी संघर्ष है
कभी एतबार है जिन्दगी
शेफाली की मादक महक
चंदा की चाँदनी के शबनमी मोतियों का दुलार है जिन्दगी
मनोहर यादव "अमृत सागर "
साँवरिया तेरी मोहब्बत में तडपत ये दऊ नैना मतवारे, अब तो आजा दरश दिखाजा साँवरिया मेरे महबूब प्यारे
तेरी ही आस है तुझसे ही प्यास है साँवरिया
तुझसे ही मोहब्बत है तुझसे ही अरदास है साँवरिया
तुझसे ही महकती है शबनमी कायनात साँवरिया
तेरे ही नूरे रूखसार से रौशन ये कायनात है
भोर में खिलती हुई कुमुदनी से पृेमी हुआ आजाद है
मोहब्बत में दीवानगी का कितना मधूर अहसास है
चंदा की चाँदनी की तपिश अब सही नही जाय साँवरिया
तेरे और तेरी मोहब्बत के बगैर अब रहा नही जाय साँवरिया
पृियतम प्यारे दो बिरही नैना मतवारे तेरी राह निहारे
अब तो आजा नंद के दुलारे साँवरे सलोने मतवारे
गिरगिट
आईना ए दिल में दीदारे यार करते हैं
जिन्दगी से ज्यादा तुमपे एतबार करते हैं
अपने आप की खोज में निकला था मैं
तमाम डगरों के मकडजाल में दिग भृमित हो गया
नजरों से मिली नजरें दिल को एतबार हो गया
पहली मोहब्बत नजर से दिल को उनसे प्यार हो गया
रंग बदलती दुनियाँ में गिरगिट न जाने कहाँ खो गया
आदमियत से तौबा करके आदमी गिरगिट हो गया
तनहाईयों में आईना ए दिल पे एतबार करता हूँ
ए मेरी जाँनशी खुद की जगह तेरा दीदार करता हूँ
दीवानगी के आलम में कृतक अंजान ढह गये
मोहब्बत के मारे डगर तकते ता उमृ तनहा ही रह गये
मनोहर यादव " अमृत सागर "
Tuesday, 22 November 2016
बाँसुरियाँ ने तेरे लब से लगके नित नव तान पाई है , दिल में बसी तस्वीर तुम्हारी तुम्ही मेरा साँवरा सलोना कन्हाई है , दिल में बसी छवि सिर्फ इक तुम्हारी मोहब्बत भरी दिल को रास आई है , मेरे मन मोहना मेरे साँवरिया तेरी मोहब्बत मे सारी दुनियाँ मैने पृियतम भुलाई है
बाँसुरियाँ लगी जब लबों से तुम्हारे
झूम उठी कायनात और चाँद तारे
बहकने लगी हवा मचलने लगा दिल
चहकने लगा जर्रा जर्रा ए फिजा
दिल की हरेक धडकन सिर्फ तुमको ही पुकारे
आजा ओ मन बीत सदियों से बसे तुम दिल में हमारे
धडकता है दिल तुम्हारी मदभरी महक से मेरे यार
तुम्ही से रौशन है जिन्दगी, कायनातों फिजा सरकार
पृियतमा रौशनी
पृियतमा रौशनी
तुम्ही से रौशन
ये कायनात सारी है
तुम बिन अँधियारी जिन्दगी
सनम हमारी है
तेरे नूरे रूखसार से रौशन ये
दुनियाँ ये जहाँ है
ये जमीं ये नजारें जमीं आसमाँ है
आलौकिक लगते है
तुम्हीं से तो नजारे
ये चंदा ये सूरज
झिलमिलाते सितारे
तुम मोहब्बत हो
तुम्ही से रौशन जिन्दगी है
रौशनी हमारी
मानव जीवन का असतित्व
तुम्ही से तो है
तुम्ही से है दुनीयादारी
तुम्हारे होने से जिन्दगी का भान है
तुमसे ही साँवरिया की
मनभावन सुरीली तान है
तन मन तुम्ही से रौशन है
तुम्ही से तो रौशन जर्रा जर्रा ए जहाँ है
मुझे इसका भान है
तुम्ही से तो जिन्दगी की शान है
आईना ए दिल में
रोज ही दीदारे यार करता हूँ
रौशनी तुम्ही से तो रौशन है जिन्दगानी
बेपनाह मोहब्बत मेरी सरकार करता हूँ
सारी सरहदों को तोडके
अपना तुम्हें बनाउगाँ
गर तुम न मिली
हरेक हद से मोहब्बत मे गुँजर जाउँगा
जब तुम नहीं होती हो
मन के पास
तनहाईयाँ बहुत सताती है रौशनी
मन के मन्दिर में
तुम्हारी छवि बसी है
तुम्हारा ही दीदार करता हूँ
ए जन्नते हूर
बेपनाह मोहब्बत की दरकार करता हूँ
मन को तिमिर मुक्त करो तुम
मन मंदिर में बस जाओ
हरेक कोशिका रौशन हो जाओ
तन मन शेफाली की महक से महकाओ
बनके चंदा की शबनमी चाँदनी
रौशनी से पोर पोर चमकाओ
महक उठे मन मस्तिष्क
फूँस की बयार बन
तन मन को तुम सहलाओ
हमे आशियाना ए दिल में
बसालों तुम रौशनी
और मोहब्बत बन दिल मे बस जाओ
आओ आ जाओ
रौशनी
नूरे रूखसार से जिन्दगी को चमकाओ
मनोहर यादव " अमृत सागर "
मेरी मोहब्बत मेरी जिन्दगी तुम्ही तो हो
सब कुछ हो तुम मेरी मोहब्बत मेरी जिन्दगी
रब की कायनात और मेरी ये जिंद तुम्ही से है
चंदा की शबनमी चाँदनी का अनमोल मोती हो तुम
या शेफाली की मादक महक से महकती फिजा मेरे हुजूर
दरिया ए के आशियाने का चमकता मोती हो तुम
या सागर में दमकती खुबसूरत और लाजवाब हंसिनी
तनहाईयाँ भी महकने लगती है तुम्हारी यादों के तसव्वुर में
ख्वाबगाह महकने लगती है तुम्हारी मादक महक से हुजूर
Monday, 21 November 2016
मोहब्बत की अर्ज
मोहब्बत की अर्ज तुम्हारी
क्या कभी तुमने कोई
पृयास किया
मुझसे से मिलने का
तुम्ही बताओ इसमें मेरी गल्ती क्या है
मै तो मोहब्बत का प्यासा
एक अंजान पथिक
कब से डगर तुम्हारी निहारता
पथरा सी गई मेरी अँखिंया
अब तो आन मिलों पृियतम
हर उपवन मैने घूमा
वन वन भटका तुम्हें न पाया
उपवन की नन्हीं कलियों से पूछा
कहीं न तुमकों मैंने पाया
डगर डगर भटका अंजान पथिक
कहीं न तुमको मैने पाया
तुम्हारी मोहब्बत की महक
आज भी जहन में बाँकी है
सिर्फ तुम्हारी मोहब्बत की चाहत मे
अपना जीवन मैने बिताया
कहीं न मिली मोहब्बत की महक
कहीं किसी डगर न तुमको मैने पाया
अब और इन्तजार मुश्किल हो गया
साथ नही देती मेरी काया
उसी नीम की मादक छाँव में
जहाँ पहले पहल दीदारे यार किया था
अपने जीवन का लम्हा लम्हा तुम्हारी
मोहब्बत की चाहत मे मेरे सनम
कसम तुम्हारी मोहब्बत की
मैने आज तलक बिताया
मेरा पृेम मेरी मोहब्बत
तुम्हारी मोहब्बत में ऐसे तडपता
ज्यों जल बिन चंचल मछुरियाँ
मेरा मुकद्दर मेरी चाहत
तुम्ही तो हो पृियतम
मै तुम्हारी मोहब्बत में पागल
सारे जहाँ को मैने भुलाया
सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी मोहब्बत में
फिर भी पृियतम
आज तलक तुमको न मैने पाया
आज भी तुम्हारा
तुम्हारी मोहब्बत का
एतबार है दिल को
इन्तजार है पृियतम तुम्हारा
आन मिलो पृियतम
ये इन्तेहा है इन्तजार की
अब और न तडपाओ
आ भी जा , आ भी जा
रूह को अब भी इन्तजार है
दीदारे यार का
इन अँखिंयों की प्यास
दीदारे यार से ही बुझेगी पृियतम
मनोहर यादव "अमृत सागर "
साँवरिया तेरी मोहब्बत में हम दीवाने हो गये
ज्योत से ज्योत जलती है साँवरिया
तेरी मोहब्बत भरी महक से महकती है दुनियाँ
आज भी आग लगती है बाँस के वन में
जब बहती है हवा विरहणी राधिका के शाप की
जो पत्ता टूटके शाख से बिछुड जाता है
वो हमेशा के लिये अपना असतित्व गँवाता है
दिल गोते लगाता है उसकी मोहब्बत की माजक मौंजों में
मौंजों के पृचण्ड वेग को साहिल बन समाता है साँवरिया
Sunday, 20 November 2016
रिश्ता मोहब्बत का
मौंजों का साहिल से
साहिल का मौंजों से
रिश्ता है कितना पुराना
हमने न जाना तुमने न जाना
कायनात का कारीगर
परवरदिगार है उसी ने ये जाना
दोनों की मोहब्बत
पाक गंगा सम निर्मल पावन
जहाँ ने ये देखा
सबने ये माना
हमने भी तुमने भी माना
अम्बर में टिम टिम झिलमिलाते सितारों
कब जमीं पे है आते
सब ने ये जाना
टिमटिमाते तारों का अम्बर से
रिश्ता उतना ही है पुराना
उपवन का माली से
फूलों का डाली से
खेतों का माली से
रिश्ता है उतना ही पुराना
हमने भी जाना तुमने भी जाना
पेडों का पंछियों के नीड से
नेताओ का जमाने की भीड से
आदमी का रीढ से
रिश्ता उतना ही......
महबूब का मोहब्बत से
महबूबा का एतबार और प्यार से
यारी का यार से
लोहे का लोहार से
सोने का सुनार से
पृमिका का प्यार से
रिश्ता उतना ही है पुराना
जितना हमने भी जाना.....
चंदा का चाँदनी से
कवि का रागिनी से
भंवरों का नन्हें फूल से (कलियों से)
सहराओ का उडती हुई धूल से
कुमुदनी का जलाशय से
टीचर का आशय से
टीटी का रेल से
जेलर का जेल से
खिलाडी का खेल से
रिश्ता उतना ही है पुराना.....
मानव का जीवन
मधुवन का खग से
साधू का जग से
रिश्ता उतना ही है पुराना....
साहिल का मौंजों से
सैनिक का सरहदों से
महबूब का मोहब्बत से
रिश्ता उतना ही है पुराना....
पृियतम का प्यार
दिल का दुलार
भावनाओ का मन से
जिद्दी का तन से
प्यार का उपवन से
रिश्ता उतना ही है पुराना.....
मनोहर यादव " अमृत सागर "
मोहब्बत आपकी मकसदे जिन्दगी है साँवरिया
सीने में महकता हुआ मोहब्बत भरा दिल है हमारा
दिली जजबातों में सिसकता और भटकता है बेचारा
नूरे रूखसार से रौशन है मोहब्बत सारी कायनातों में
ता कयामत धडकता ही रहेगा महबूबे मोहब्बत में बेचारा
निमंत्रण
लबों की इनायत बाअदब पहचानते हैं हम
शुकृिया आपकी मदमस्त अँखिंयों का हुजूर
जो आशियाना ए दिल की डगर का इशारा कर दिया
Saturday, 19 November 2016
भागीरथी सर्वदा महान
सरस सलिल निर्झर्णी
सरस बहती अविरल
सर्व जनों के पाप हरती
स्वर्ग का मार्ग दिखाती
जिसका जल अमृत तुल्य
बनता कभी संजीवनी
वह कोई आम नदी नही
हिन्दुस्तान की पृाणदायिनी भागीरथी वह
गंगा नाम पावन अति निर्मल
ज्यों मचलती निकसत गोमुख
इलाबाद हो कोलकाता पहुँचती वह जीवन दायिनी सदा
शांत सभ्य सर्वथा भिन्न
सबके पाप कर्मो को समैट
सागर मे होती विलिन
मचलती सागर की धडकन
सागर की मौंजों में समाहित
नही दूर दूर तलक साहिल का ठिकाना
नही कोई कलरव
न पृवाह की कोई फृिक
सागर मे मिल गंगासागर कहलाती
पापियों को पुण्य दिलाती
सारे तीरथ बार बार
गंगासागर एक बार कहलाती
मोक्छ दायिनी पुण्य दायिनी
पाप हरिणी निर्झर्णी
सर्वदा सदा शांत वह रहती
अपने अमृत नीर से बल देती
नही कोई सामान्य नदी
वह भागीरथी सर्वदा महान
मचलती मौंजें सागर की
मचलती मौंजें चाहत है हमारी
शबनमी चाँदनी लगती बहुत प्यारी
साहिल की आरजु है दिल में बसाने की
समाँ बहुत ही मादक है जबसे हुई यारी
ख्वाबगाह जन्नत से प्यारी
ख्वाहिश यही हो मुलाकात हमारी
चाँदनी के शबनमी मोतियों का हो बिछौना
अम्बर से बरसे महकती खुमारी
तेरी पायल की झन्कार
बस गई सनम दिलवा हमार
जिस्म की मादक महक
छेड गई हमरे दिलवा के तार
भोर में नन्हें रवि का आना
गौरैया का फुदक कर आना
चिडिया चिडवे का चोंच में दाना लाना
नन्हीं चिड्डयौं को मुह में खिलना
यौवन की दहलीज पर आते
घरौदा छोडकर फुर्र हो जाना
अपने पालकों का भुलाना
फिर कभी लौटके न आना
क्या यही है विधि का विधान
क्या यही है धर्म इमान
धरती का मानव
कृतक मनोहर हैरान अंजान
Friday, 18 November 2016
मैं सागर विशाल ह्दय
मैं सागर विशाल ह्रदय
फिर क्यों खाली तेरी गागर
अन्नंत छितिज तक मेरा साया
क्यों न में तेरे दिल को भाया
तू यौवन की मौंज मघु
मैं पृियतम अन्नतकाल से पृियतम
कबसे डगर निहार रहा
ए मोहब्बत की मादक मौंजों
साहिल की बाँहे फडक रही
दो जिस्म एक जाँ तुम हो जाओ
मैं खार प्यार तुम्हारा पृियतम
अब तो इन बाहों में समा जाओ
भोर का तारा मोहब्बत बरसाता
मोहब्बत का अभिनंदन लगता प्यारा
खार हुई प्यार में मीठी
अम्बर से बरसती शबनमी मोहब्बत
अवनी और अम्बर का मिलन
जैसे मौंजों का साहिल की बाहों में समाना
मोहब्बत आज हुई पृफुल्लित
जैसे सहराओ मे मधुर बयार
उन्मादित मौंजों को मिला साहिल का प्यार
जिन्दगी मोहब्बत की तान छेडती
दिल को हुआ मोहब्बत पे एतबार
तेरी मोहब्बत तेरा प्यार
दिल की धडकन ज्यो एतबार
तू ही दिल की धडकन पृियतम
तूही जिस्म की रूह मेरे यार
तुम्हारी मोहब्बत से धडकता है दिल
मचलता है दिल तुम्हारी मोहब्बत में यार
आशियाना ए दिल में बसा लो पृियतम
बेकरार दिल को आये करार
जर्रा जर्रा गवाह मोहब्बत का पृियतम
रोम रोम मचलता मोहब्बत मे यार
तुम आरजुये दिल की पृियतम
तुम्ही महकती शबनमी चाँदनी
तुम्ही अम्बर से बरसती रसधार
सदियों पुराना है साथ हमारा
सदियों से तुम्हारी मोहब्बत का एतबार
हम तुम जिस्म दो रूह एक करो दिली एतबार
मनोहर यादव
अमृत सागर
शक्ति स्वरूप
सबला है नारी, है शक्ति का अवतार
बीते युग किया दैत्यों का संहार ,
आज भी कर रही दुष्टों पर वार पे वार
शक्ति से असतित्व जगत का , शक्ति रब का रूप ,
शक्ति से नूर जगत का
शक्ति से ही है स्वरूप
दुर्गा भी अवतार शक्ति का
काली शक्ति स्वरूप
तेरी मोहब्बत रूह है जिस्म की साँवरिया
मेरे पृियतम अपनी वफाओ का इकरार करता हूँ
दिल की धडकनों में बसने वाले जाँ से ज्यादा प्यार करता हूँ
वाकिफ हूँ इस हकीकत से पृियतम प्यारे
जिस्म मे धडकन तुझी से है मेरे महबूब
साँस बनके मोहब्बत भरे दिल को धडकाता हूँ
बासुरियाँ की सुमधुर तान से दिलों की धडकन में बस जाता है तू
बिन तेरे सहराओ की मानिंद ये जिस्म है साँवरिया
तेरी मोहब्बत की महकती से जिन्दगी आबाद कन्हैया
दिल के तार झनझना उठते है पृियतम प्यारे
जब तेरी मोहब्बत बरसती है साँवरिया
तेरी बाँसुरी की तान जमाने के रंजो गम भुलाती है
जब तेरी याद आती दिल की कुमुदनी कायनात महकाती है
Thursday, 17 November 2016
आशियाना ए दिल
महबूब मोहब्बत का आसमाँ है
उसके आगे छोटा सारा का सारा जहाँ है
उसके अहसास मात्र से भी छलकती है मोहब्बत
जैसे चाँदनी से छलकती शबनमी मोतियो की बयार है
याद करने से पहले उसे पास पाता हूँ
तनहाईयों में बरसती है मोहब्बत ज्यो मादक बयार
उसकी हरेक खुशी और गम का मुझे अहसास है
मंजिल है मेरी मोहब्बत आशियाना ए दिल मे आबाद है
Wednesday, 16 November 2016
मोहरा
अपनी ही चालों से हैरान है इंसान
रिश्ते नातों के चकृव्यूह से परेशां है इन्सान
दुनियाँ के गूढ रहस्यों में फस गया लगता है इन्सान
शकुनी मामा की गूढ चालों से आज भी अंजान है इन्सान
जमाने वालों का क्या कहना
जमाने वालों का क्या कहना
गलत समझना उनकी रग में समाया है
हमारी क्या मजाल जो गलत समझने की हिमाकत करें
हमें तुम्हारा अहसास मादक पवन हर पल कराती है
महकती है फिजा तेरे दीदार से हँसी यार
गुँजती है कायनात जब करवट तुम बदलती हो
तेरे पलक झपकने से जिन्दगी की भोर होती है
तेरी पलक मुंदने से शशी अम्बर में यार आता है
यकीनन हकीकत है
ये वहम नही मित्र तुम्हारा
यकीनन हकीकत है
धडकता है दिल जिसकी चाहत में
वो जिन्दगी कोई नही
यार मेरे तुम्ही तो हो पृियतम
वो बहुत बहुत खुबसूरत है
यकीनन मानलो दिल से
सिर्फ और सिर्फ यही हकीकत है
मेरी मित्र बहुत बहुत खुबसूरत है
Tuesday, 15 November 2016
जो दिल से अपने होते हैं
जो दिल से अपने होते हैं
दिल की धडकन वो होते हैं
आशियाना ए दिल में दिल में रहते हैं
ख्वाबगाह में नित सपने सजोते है
रक्त की लालिमा उनसे से होती हैं
जो दिल की धडकन बन दिल मे धडकते हैं
दिल की एक पुकार पर मोहब्बत की मादक महक बन हवा के वेग से नही मन के वेग से पलक झपकते आते है
साँसों की मानिंद महकते हैं रूह में समाते हैं
दिल के मार्फत रग रग में बसते हैं
जो दिल में रहते हैं दो जिस्म एक जा मोहब्बत यार होते हैं
ये मेरा हिन्दुस्तान
ये मेरा इंडिया
आय लव माय इंडिया
वतन मेरा इंडिया
सजन मेरा इंडिया
चमन मेरा इंडिया
अमन मेरा इंडिया
प्यार मेरा इंडिया
दुलार मेरा इंडिया
करार मेरा इंडिया
एतबार मेरा इंडिया
इकरार मेरा इंडिया
आय लव माय इंडिया
ये मेरा अपना इंडिया
मेरा मीठा सपना इंडिया
जीना है मेरे वतन के लिये
मरना है मेरे वतन के लिये
सजना है मेरे वतन के लिये
सँवरना है मेरे वतन के लिये
मोहब्बत की मादक महक
तुम्हारी मोहब्बत की मादक महक ने
जिन्दगी का चैनों अमन सनम चुराया है
दिल के महकते उपवन में
परदेशी अंजान भृमर ने कोहराम मचाया
पूरब से चली जो पूरवाई
जिन्दगी की फिजा आज उसने महकाई
यौवन रस की शबनमी मादक महक
सारी कायनात और फिजा में छाई
तनहाईयों के आलम में यारो
ख्वाबगाह की खामोशी मोहब्बत की मादक महक से शर्माई
परदेशी के आने से पहले
डगर मचल उठी फिजा महकी और मुस्काई
Saturday, 5 November 2016
मोहब्बत अल्फाजों से मचलती है
चंद अल्फाज मचलते है
लकीरों की शक्ल में उभरते है
दिल के अरमाँ साँचे में ढलते है
आरजुये दिल बयाँ ये करते हैं
ज्यों मचलती हैं मौंजें सागर के सीने में
मोहब्बत की बयार पूरब से चलती है
दर्दे मोहब्बत अश्कों से बयाँ होता है
दिल मोहब्बत का आईना होता है
मेरे महबूब की मोहब्बत की महक से वाकिफ हूँ मैं
वाकिफ है फिजा ये कायनात
ये चाँद तारे
दिल की हरेक धडकन मचलती मादक मौंजों सी
हरेक पल हरेक घडी सिर्फ तुझको ही पुकारे आजा आजा
मोहब्बत का दिल की धडकन से दीदार होता है
हरेक शंय में तेरी ही अनुभूति एतबार होता है
वो मोहब्बत भरे महकते अल्फाज तुम्हारे
हरेक पल हरेक घडी मेरे महबूब सिर्फ तुम्हीं को पुकारे
Thursday, 3 November 2016
जिन्दगी मैं तुमसे मोहब्बत करता हूँ
जिन्दगी मैं तुमसे मोहब्बत करता हूँ
तेरी मोहब्बत में जीता हूँ
तेरी मोहब्बत में मरता हूँ
मैं तुमसे बेपनाह मोहब्बत करता हूँ जिन्दगी
मैं तेरा दीवाना हूँ जिन्दगी
पल पल हरेक पल तेरी याद आती है जिन्दगी
तनहाईयों में तेरी याद बहुत तडपाती है जिन्दगी
कभी हँसाती है कभी रूलाती है जिन्दगी
कभी बाहों में भरकर दो जिस्म एक जान हो जाती है जिन्दगी
कभी कभी एसा लगता है मेरा दिल अकेला है बेचारा
कभी कभी यु लगता है मेरे जिस्म में धडकता है दिल तुम्हारा
मैं जानता हूँ मेरा दिल है तुम्हारी मोहब्बत का मारा जिन्दगी
सहराओ मे भटकते हुये दिल को तुम्हारी तलाश है जिन्दगी
मेरे दिल को आज भी तुम्हारी मोहब्बत की आश है जिन्दगी
जिन्दगी तुम्हारी मादक महक मुझे रास आने लगी है
मेरी मोहब्बत नग्में वफा के गाने लगी है जिन्दगी
जिन्दगी एक बर हौले से मुझे तुमने पुकारा
जिन्दगी कृतक अंजान डगर का तुम्ही तो हो एक मात्र जीने का सहारा
जिन्दगी मेरी मोहब्बत मेरा एतबार हो तुम
जिन्दगी मेरे दिल की धडकन मेरा प्यार हो तुम
राहे वफा में आखिरी ख्वाहिश तुम्ही तो हो जिन्दगी
मेरी मोहब्बत की सरहद दिल का करार तुम्ही तो हो जिन्दगी
जिन्दगी बेपनाह मोहब्बत तुमसे करता हूँ
IlU जिन्दगी
मनोहर यादव
अमृत सागर
खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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