Friday, 30 September 2016

दुर्गा स्वरूपा

दुर्गा स्वरूपा आभा भव्य निराली है
रक्त बीजो का संहार करने शक्ति आली है
तेरे रूखसार के नूर से रौशन है ये जहाँ
तीनों लोक अचंभित दर्शन कर दिव्य स्वरूपा

Thursday, 29 September 2016

लवयु जिन्दगी, मै तुमसे मोहब्बत करने लगा हूँ, तुम्हारी मोहब्बत मे तडपने लगा हूँ , आहें भरने लगा हूँ तुम्हारी मोहब्बत में

लवयु जिन्दगी
मेरा दिल धडकता है
तुम्हारी मोहब्बत में
नाजुक है दीवाना है
तडपता है ये
तुम्हारी मोहब्बत में
दिल ये पागल दिल मेरा
महकता है
बहकता है कभी
आहें भरता है
तुम्हारी मोहब्बत में
बेचेन रहता है
बेकरार रहता है
तुम्ही हो मोहब्बत मेरी
हरेक पल यही कहता है
तुम्हें देखकर करार आता है
बेकरार दिल को मेरे
तनहाईयों में तडपता है
मचलता है बेचेन दिल मेरा
तुम्हारी मोहब्बत में
आहें भरता है
अश्क बहाता है
दिल मेरा
मेरा दिल धडकता है
बस तुम्हारे लिये

पहली मोहब्बत, पहला पहला प्यार

पहली मोहब्बत है मेरी महबूब
दिल की धडकन है मेरी
आरजुये दिल है सनम
जुस्तजुये जिन्दगी है वो
सैलाभे मोहब्बत है वो
प्यार का सागर है
साहिल हूँ मैं
वो मादक मौंजे मोहब्बत की
मोहब्बत की मौंजों से
करार बेचेन दिल को आता है
सारे गिले शिकवे
जमाने के रंजों गम
भूल जाता है मौंजों को
भरके अपनी बाँहों मे
बयार मोहब्बत की
पाता हूँ मेरे महबूब
पूनम की शबनमी चाँदनी
टप टप टपकती शबनमी मोतियों की थाप
उसका वजूद जिन्दगी मेरी
उसकी मोहब्बत मंजिले जिन्दगी
महकती है कायनात उसकी महक से
पलकों से बुहारती वो डगर
आशियाना ए दिल में
बसी है वो
मेरी मोहब्बत मेरी महबूब
उसके अश्क मोहब्बत का पर्याय
जमाने को कभी रास न आये
दिल को हिलाते हैं
तुफा कभी सैलाभे मोहब्बत बनके
थम जाते हैं जिन्दगी में
उसकी असीम चाहत
प्यार मोहब्बत उसका
तस्सवुरे जिन्दगी
उसके रूखसार के नूर से
रौशन है जिन्दगी
और कायनातों फिजा
मेरी महबूब साँसे जिन्दगी की
मोहब्बत का दरिया
कभी सैलाभे मोहब्बत
तुम ही हो
तुम ही तो हो
जिन्दगी का सबब
प्यार का दरिया
मेरी महबूब

दिल , ये पागल दिल मेरा दिवाना है तेरी मोहब्बत का

तू धडकन मेरे दिल की
तू साँसों का खजाना
मेरा दिल धडकता है
धडकता ही रहेगा
तुम्हारे लिये तुम्हारे लिये
जरूरी है तुम्हारी मोहब्बत
मेरे दिल की धडकन हो तुम
तुम गर साथ हो तो
धडकता ही रहेगा
दिल मेरे
मेरे दिल की धडकन है तू
तूही साँसो का खजाना
तूही आरजुये जिन्दगी
तूही मोहब्बत की मौंजे
आहिस्ता आहिस्ता
हौले हौले
देख जरा मेरे दिल को
एक तेरा दिल
एक दिल मेरा
कभी न तोडियो दिल मेरा
बहुत ही नाजुक है ये
तेरे अश्को से दहल जाता है
बनके पूनम की चाँदनी
शबनमी मोतियों की बारिश
करियो दिल पे मेरे
हेप्पी हार्ट डे

Wednesday, 28 September 2016

आरजुये दिल

ख्वाहिश महबूब
ख्वाबगाह की कशिश
तनहाईयों का आलम
तेरी महकती यादों का मंजर
दिली उपवन के शामियाने में
तुम्हारी मेहकती साँसों की
सुखद अनुभूति
निशा का निखरता यौवन
दिली आरजू महबूब की शबनमी मोहब्बत

मुकद्दर

हाथों की चंद लकीरों में
लिख दिया रब ने
मुकद्दर जिन्दगी हमारी
जिन्दगी का एतबार
जिन्दगी का ठहराव
आशियाना ए मोहब्बत
दिल की किताब
सब कुछ तो समाहित है
इन चंद लकीरों में
कुछ लकीरों में
माथे की लकीर
हाथों की लकीर
गृह नक्छत्र और तारे
ज्योतिष घुमादेते गृहों को
चंद सिक्कों में
और बना देते है
सुगम जिन्दगी का मार्ग
चेन मोहब्बत करार एतबार
जिन्दगी की आवश्यकता
मेरे यार मेरे महबूब
मेरे एतबार
दिल ख्वाहिश
आरजुये जिन्दगी
दिल का करार
दिलों में कुछ लकीरे
धडकन बढती
कभी कभी जोरोसे
इन धडकनों में बसी
मेरी मोहब्बत
मेरी महबूब
मेरा प्यार
चंद लकीरों में बसी मेरी मोहब्बत
मेरी जिन्दगी मेरा एतबार

Tuesday, 27 September 2016

दुसरी औरत ( रखैल ) २

पहली मोहब्बत है वो
पहला पहला प्यार
दिली आरजू है वो
दिली एतबार
जाँ से ज्यादा करती है मोहब्बत
करती है एतबार
मोहब्बत है जहाँ उसका
मोहब्बत परवरदिगार
मोहब्बत उपवन है जिन्दगी का
मोहब्बत जिन्दगी का एतबार
मेहबूब ही जिन्दगी का उपवन
महबूब ही उसका सिंगार
जाँ निछावर महबूब पे
जमाने की लाज रख ताक पर
महबूब की महक उसका सिंगार
महबूब की आवाज जिन्दगी उसकी
महबूब का अहसास उसका प्यार
हरेक पल महबूब की महक उसका दुलार
महबूब उसकी दिली धडकन
महबूब दिल का शालीमार
महबूब सैलाभे मोहब्बत
अश्क भी मोहब्बते महबूब
खुशियों का परचम महकता प्यार
गीत महबूब गजल महबूब
महबूब पूनम की शबनमी चाँदनी
महबूब महकती खुश्बुओ का दुलार
मजहब मोहब्बत इष्क उसका सोलह सिंगार
जिन्दगी मोहब्बत का एतबार
जिन्दगी महबूब का महकता प्यार

बनके मनकी चाँदनी

बनके वन के उपवन की महक महकाऊ फिजा
बनके वन की मोरनी नाचू बहकाऊ हवा
बनके चाँदनी चंदा की शबनमी मोतियों से वसुन्धरा का सिंगार करू
बनके नित नई आशा वीश्वास का संचार करू
बनके वन की वनरानी नित नव सिंगार करू
बन के चंदा की चकोर महबूब मोहब्बत का एतबार करू
बनके कान्हा की बाँसुरिया गोपियों को लुभाऊ
बनके इन्दृ की सेना घनघोर वसुन्धरा पे बरसू
बनके इन्दृ धनुष सबके मन लुभाऊ
बनके चकवा की चकोर नित मन को हर्षाऊ
बनके तेरी पेृमिका वन मे तेरा इन्तजार करू
बनके तेरी राधा तेरी मोहब्बत का एतबार करू
बनके तेरी बाँसुरी लबों की शोभा नित बढाऊ
बनके खुबसूरत मयुर पँख तेरे माथे की शोभा बढाऊ
बनके मोहब्बत मेरे महबूब तेरी संसार महकाऊ
बनके तेरी गलमाला साथ हरपल तेरा मेरे महबूब पाऊ

दूसरी औरत ( रखैल )

जिसे जहाँ गलत नजरों से देखता
रखेल का ठप्पा लगाता है
जमाने भर की मोहब्बत वो लुटाती
अपनी मोहब्बत से जिन्दगी वो देती
सैलाभे गम से उबार कर लाती
चैनों अमन से जिन्दगी को सुगम वो करती
फिर भी जमाने की नजरों में ऱखैल कहलाती
अपना वजूद छिपाती
सर्वस्व महबूब पे लुटाती
कभी न सामने वो आती
रात के अंधेरे में
सैलाभे मोहब्बत से
जिन्दगी को रंगिनियों से सजाती
कभी किसी चीज की चाहत न करती
जब कभी बात न होती
सैलाभे अश्क बहाती
रोती बिलखती प्यार में अश्क बहाती
मोहब्बत ही जिन्दगी है
जिन्दगी ही मोहब्बत है
महबूब की चाहत में
पलक डगरों पे बिछाती
पूनम की रात
चंदा के सामने अश्क बहाती
जमाने भर का अपमान वो सहती
जमाने भर ताने वो सहती
मोहब्बत के अफसाने वो लिखती
पल पल आहें वो भरती
रोती बिलखती
मोहब्बत में जाँ की बाजी लगाती
फिर भी मेरी मोहब्बत
मेरी महबूब
मेरी जाने जनाना
कभी वो स्थान ही पाती
करवाँ चौथ का वृत वो करती
पति की मानिंद
जिन्दगी में स्थान वो देती
एक झलक महबूब की पाने
जमाने की खुशी वो पाती
फिर भी मेरी मोहब्बत
आखिर क्यों
दुसरी औरत है कहलाती

Monday, 26 September 2016

आशियाना ए दिल

आइना ए दिल में
उनका दीदार करता हूँ
अपनी जिन्दगी से ज्यादा
एतबार करता हूँ

हरेक पल तनहाईयों में
उन्हीं का इन्तजार करता हूँ
वो मोहब्बत है मेरी
दिल से स्वीकार करता हूँ

मेरा दिल
आशियाना ए मेरे महबूब
जब ख्वाहिश होती है
दीदार करता हूँ

पलक झपकते
ख्वाबगाह में आती है वो
दिली चाहत है मेरी
जिन्दगी से ज्यादा एतबार करता हूँ

अफसाना ए मोहब्बत
हरेक अल्फाज उनका
उनकी मोहब्बत की महक
हवाओं से स्वीकृत यार करता हूँ

तनहाईयों में
उनकी यादों का सहारा है
इनकी हरेक पल उपस्थिती
दिल से स्वीकार करता हूँ

मेरा मोहब्बत
मेरी सनम
आरजुये जिन्दगी
दिली एतबार करता हूँ

मनोहर यादव
" अमृत सागर "

आशियाना ए दिल

आइना ए दिल में
उनका दीदार करता हूँ
अपनी जिन्दगी से ज्यादा
एतबार करता हूँ

हरेक पल तनहाईयों में
उन्हीं का इन्तजार करता हूँ
वो मोहब्बत है मेरी
दिल से स्वीकार करता हूँ

मेरा दिल
आशियाना ए मेरे महबूब
जब ख्वाहिश होती है
दीदार करता हूँ

पलक झपकते
ख्वाबगाह में आती है वो
दिली चाहत है मेरी
जिन्दगी से ज्यादा एतबार करता हूँ

अफसाना ए मोहब्बत
हरेक अल्फाज उनका
उनकी मोहब्बत की महक
हवाओं से स्वीकृत यार करता हूँ

तनहाईयों में
उनकी यादों का सहारा है
इनकी हरेक पल उपस्थिती
दिल से स्वीकार करता हूँ

मेरा मोहब्बत
मेरी सनम
आरजुये जिन्दगी
दिली एतबार करता हूँ

मनोहर यादव
" अमृत सागर "

मादक लब

आपके लबों पे आने को अल्फाज मचलते है
खुद ब खुद गीतों गजल बन बाहर निकलते हैं
स्वमेव संजते है कुदरती सप्तरंगी स्वर लहरी से
नाना भाँति के रंगों में ढलकर कुदरत में बिखरते हैं

मोहब्बत की महक

रब की कायनात का खुबसूरत गीत हो तुम
या फिजा को महकाती मादक गजल
पूनम की शबनमी चाँदनी की सी
बहुत खुबसूरत और हँसी जन्नते हूर परी कोई

साँवरिया

आहिस्ता आहिस्ता
तुम्हारी मोहब्बत का असर होने लगा है
दिल तुम्हारी मोहब्बत में खोने लगा है
बेचेन रहती है रूह दिलो दिमाग तुम्हारी मोहब्बत में साँवरिया
जिस्म मै हूँ रूह तुम्हीं हो साँवरिया
हरेक संय में दीदारे यार करता हूँ
तुम्हारी मोहब्बत की सौ दिली एतबार करता हूँ

Sunday, 25 September 2016

अहसासे मोहब्बत

पहले पहल जिस पल तेरा दीदार मेरे यार हुआ
नजरों ने रूखसार ए यार से हटने को इन्कार किया

आशियाना ए दिल महक उठा तुम्हारी महक से
तेरी मोहब्बत का अहसास दिल को पहली पहली बार हुआ

अँखिंयों ही अँखिंयों में कटने लगी रातें अब तो
दिल को तुम्हारी मोहब्बत का दिल ही दिल में एतबार हुआ

पूनम की चाँदनी का इन्तजार दिल को रहता है
पहले पहल दिल को नूरे रूखसार तेरी मोहब्बत का एतबार हुआ

तनहाईयों में पहले पहल आशियाना ए दिल में निहारा
तुम्हारी मोहब्बत की गलियों में तेरा दीदार ए यार हुआ

कैसे बीते दिन कैसे कटी रातें सनम
अँखिंयों ही अँखिंयों में गुजरती रातों से तेरी मोहब्बत का अहसास पहली बार हुआ

बन तेरे जिन्दगी हुई दुश्वार मेरे यार पहले पहल दिल को अहसास हुआ

मोहब्बत भरा निमंत्रण दिल ने पहले पहल जब पाया तेरी अँखिंयों से
दिल बाग बाग हो गया तुम्हारी मोहब्बत में
दिल को मेरे महबूब मेरे सनम
अपने होने का तुम्हारी मोहब्बत में खोने का एतबार हुआ

मनोहर यादव
" अमृत सागर "

Saturday, 24 September 2016

मेरी मोहब्बत मेरी तमन्ना

पूनम की मादक चाँदनी
गजब दिल पे ढा रही
ख्वाहिशे ख्वाबगाह
हुस्न परी जन्नते हूर
चैनों अमन चुरा गई
हवा के झरोखे के साथ
नींद भी हवा हो गई
तुम्हारी आरजू में सनम
तनहाईयाँ भी खफा हो गई

इन्ता हुई इन्तजार की
मन में तेरी चाहत
जवाँ सनम हो गई
मोहब्बत की महक से
महकने लगी कायनात
आशियाना ए दिल
ठिकाना ए सनम
पलकों के शमियाने में
इन्तजार है तुम्हारा

मनोहर यादव
" अमृत सागर "

नायाब रिश्ता मोहब्बत का

नायाब रिश्ता मोहब्बत का यार होता है
दिल की गहराईयों में गुथा प्यार होता है
चंदा की शबनमी मोतियों की महक है मोहब्बत
घनेरे मेघों की गोंद का सतरंगी इन्दृ धनुष है मोहब्बत
मेरे महबूब की रूह की मादक महक है मोहब्बत
पूनम की रात निखरती चाँदनी की सी है मोहब्बत
केशर और शेफाली की मादक महक है मोहब्बत
मेरी मधुशाला की सुरबाला की हाला सी है मोहब्बत
मोहब्बत रब का वरदान होती है
मोहब्बत दिलों की गहराई जमीं आसमाँ होती है

मोहब्बत का रिश्ता

दुनियाँ के झमेले में
रंजोगम के मेले में
साया भी साथ छोड देता है
तनहाईयों में
सिर्फ तुम्हारी यादें
और महकती साँसें
वफाओं के इरादे
मोहब्बत का ख्याल
रूसवाइयों के चलते
अपने पराये
कोई नजर नही आता
दूर दूर तलक
खामोशियों के शायें
और
महकती शबनमी मोतियों की माला लिये
स्वागतातुर
महकती चाँदनी

Thursday, 22 September 2016

वक्त की वफाओ से अंजान नही , वाकिफ हूँ वक्त के तकाजों से परेशाँ नहीं

वक्त सिखाता है ठोकर मारके
इंसा जिसे कभी भुलाता नहीं

जो ठगाता है वक्त के हाथों यार
वो फिर कभी धोखा खाता नही

वक्त के चलते बदलता है मुकद्दर
वक्त के चलते समय से पहते परिपक्वता आती है यार

वक्त के चलते समय से पहले आती है जवानी
वक्त के चलते समय से पहले आता है बुढापा

वक्त के चलते गुम हो जाता है बचपन
वक्त के चलते नचाता है बेवफा यौवन

जिन्दगी की नैया फसती है मझधार में वक्त के चलते
जिन्दगी की नैया लगती है किनारे वक्त के चलते

वक्त के चलते परवाज भरती है मोहब्बत
वक्त के चलते जिन्दगी के रहमों करम को तडपती है मोहब्बत

वक्त किसी का हुआ है न ही किसी का होगा
वक्त किसी के रोके रूका है न किसी के रोके रूकेगा

वक्त की बेरहम मार कृतक अंजान झेल रहा हूँ
बीता बचपन बीती जवानी खेल खेल में यारो बुढापा झेल रहा हूँ

वक्त की वफाओं का मोहताज नहीं हूँ
अपनों कर्तव्य पे यकीं कर मंजिल पा रहा हूँ

जो भी आरजू हमने की जिन्दगी में अपनी
अपने मुकद्दर को कर्मो से झुका रहा हूँ

मनोहर यादव
" अमृत सागर "

Wednesday, 21 September 2016

जिन्दगी में चार चाँद लगाती है मोहब्बत

रूलाती है मोहब्बत
हँसाती है मोहब्बत
जख्म दिल को देती है मोहब्बत
कभी कभी मरहम बन जाती है मोहब्बत
कभी मौत का सबब बन जाती है मोहब्बत
कभी जिन्दगी का पैगाम लाती है मोहब्बत
कभी नासूर बन जाती है मोहब्बत
कभी अमृत बन सीने में बस जाती है मोहब्बत

जिन्दगी में चार चाँद लगाती है मोहब्बत

रूलाती है मोहब्बत
हँसाती है मोहब्बत
जख्म दिल को देती है मोहब्बत
कभी कभी मरहम बन जाती है मोहब्बत
कभी मौत का सबब बन जाती है मोहब्बत
कभी जिन्दगी का पैगाम लाती है मोहब्बत
कभी नासूर बन जाती है मोहब्बत
कभी अमृत बन सीने में बस जाती है मोहब्बत

मेरा मुल्क मेरा देश मेरा ये वतन,अमन ओ शांति का चमन

समस्त भारतवासियो

सभी भारतीय साँसदों से एक
भारतिय नागरिक की करबद्ध अपील है
हमारी संसद का संयुक्त आपातकालीन सत्र बुलाया जाय और बगैर विलम्भ किये पाकिस्तान को आतंकवादी राष्टृ घोषित करने संबंधी बिल पास किया जाय!
सिन्धु जल संधी जो कि १९५० में तत्कालीन पृधानमंत्री जवाहरलाल ने की थी तत्काल रद्द की जाये
सिंधु पर बाँध बनाने से हमे २००००मेघावाट से ज्यादा बिजली मिलेगी और
पाकिस्तान स्वत: ध्वस्त हो जायेगा
हरेक हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई जो भारतिय नागरिक है पाकिस्तान की आलोचना करना चाहिये
पाकिस्तान का बहिष्कार करना चाहिये
भारत भूमि का सम्मान करना चाहिये
जो कोई चाहे नेता हो या अभिनेता राष्टृ विरोधी कार्यवाही में संलिप्त पाया जाय
उसे तत्काल शूट एड साइड
किया जाय
आप सहमत है तो शेयर कीजिये
नमों तक पहुँचाइये हमारा संदेश
इसे बनाइये जन जन का संदेश
भारतिय नागरिक हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई हम सब है भाई भाई
बच के रहना ए पाकिस्तान अब तेरी शामत है आई

जय हिन्द जय भारत
मनोहर यादव
अमृत सागर

Monday, 19 September 2016

एक जंग है जिन्दगी

एक जंग है जिन्दगी
जिये जा रहा हूँ मै
हलाहल मोहब्बत का
हर्षित हो पिये जा रबा हूँ मै

कच्चे धागे से बँधे
मजबूत सामाजिक बंधन
निभा रहा हूँ मै
अंजान डगर पे चलके
मंजिल भी पा रहा हूँ मै

जलजले आये चाहे सुनामी
पथ पे बढता जा रहा हूँ मै
मोहब्बत की डगर काँटों भरी है
महबूबे मोहब्बत की महक पा रहा हूँ मै

अपनों के दिये घावों को
मोहब्बत में भुला रहा हूँ मै
पोषित उन घावों से होके
जिन्दगी जिये जा रहा हूँ मै

बिते हुये स्वर्णिम पलों को याद करने
अपना आज खुद महकता बना रहा हूँ मै

एक जंग है जिन्दगी

एक जंग है जिन्दगी
जिये जा रहा हूँ मै
हलाहल मोहब्बत का
हर्षित हो पिये जा रबा हूँ मै

कच्चे धागे से बँधे
मजबूत सामाजिक बंधन
निभा रहा हूँ मै
अंजान डगर पे चलके
मंजिल भी पा रहा हूँ मै

जलजले आये चाहे सुनामी
पथ पे बढता जा रहा हूँ मै
मोहब्बत की डगर काँटों भरी है
महबूबे मोहब्बत की महक पा रहा हूँ मै

अपनों के दिये घावों को
मोहब्बत में भुला रहा हूँ मै
पोषित उन घावों से होके
जिन्दगी जिये जा रहा हूँ मै

बिते हुये स्वर्णिम पलों को याद करने
अपना आज खुद महकता बना रहा हूँ मै

दिली मुराद

अम्बर से टूटते हुयें तारों को देखके गर हरेक मुराद पूरी होतीं
रब दी सौ मेरी मोहब्बत मेरी महबूब आज हमारी होतीं

अम्बर से टूटते हुयें तारों को देख यही फरियाद करता हूँ
तुम हमें कभी न भुलाओं मैं तुम्हें बहुत याद करता हूँ

क्वार की मदभरी चाँदनी रात

क्वार के पूनम की शबनमी रात
छिटकती चाँदनी में
मादक शबनमी मोतियों की सौगात
अम्बर में चाँद आया
लेके असंख्य तारों की बारात
मुस्कुराई चाँदनी देख अम्बर में चँद
खिली खिली सी चाँदनी
ज्यों वसुन्धरा ने ओढी
चाँद तारों से सजी से सजी चुनरियाँ आज
चँदा से सतत हो रही शबनमी मोतियों की बरसात
चकवा चकवी के वियोग की
एक और दु:ख भरी रात
महबूबे मोहब्बत का रंगीन साथ
रूखसार के नूर से फबती वसुन्धरा
और पारिजात ने महकाई वसुन्धरा
क्वार के घनेरे मे मेघों की गोद खेलती गाज
सप्त रंगी इन्दृ धनुषी छठा खोलती मोहब्बत के राज
मेघों की गर्जन से उठते सप्तसुर
डरके दिल से लग जाती पृियतम
मिटती दिलों की दुरियाँ महकती कायनात
महबूब की पायलियाँ की तान

Saturday, 17 September 2016

नन्हें कदम मुस्कुराहट लिये

नन्हें कदम मुस्कुराहट लिये
डगमगाते हुये आगे बढने लगे
भोर की बेला मे जिन्दगी
कदम दर कदम बढाने लगी है
माँ के आँचल में छूपकर
वो अमृत रस पान करना तेरा
हौले से मुखडा आँचल से निकालकर
वो मुस्कुराहट बिखेरना
नन्हें पैरों पर स्वयं खडे होने की कोशिश करना
लडखडाकर आगे बढना गिरना और संभलना तेरा
उँगली थाम कर चलना वो मुस्कुराना तेरा
मेरे बुढापे की लाठी है तू
यही सोच मेरी जो तेरी भी है
तू थाम लेगा कुबडी मेरी और पकडके उँगली
तुझमें मै खुद का दीदार करता हूँ
ए मेरे बचपन तू फिर लौट आया
तुझसे बेपनाह मोहब्बत सरकार करता हूँ
जिन्दगी की अँजान डगर पे
आगे ही आगे तुम्हें बढते ही जाना
जिन्दगी की डगर पर कभी न तुम डगमगाना
मंजिल राह तकती कबसे तुम्हारी
कभी न पथ पर मेरे दिल के टुकडे घबराना
यौवन ढलता है चँदा की मानिंद
कभी न गुरुर तुम मेरे यार करना
जिन्दगी की डगर मे बदलेंगें मौसम
आंधियो तुफानो से कभी न घबराना
रितु आयेगीं और जायेंगी सदा तुम मुस्कुराहट लबों पे सजाना
जिन्दगी एतबार है एतबार है जिन्दगी
अपने अपनो का साथ सदा तुम निभाना
बहुत लंबी है डगर जिन्दगी की
मोहब्बत करना मोहब्बत तुम लुटाना
जिन्दगी नाम है मोहब्बत का दिल से मोहब्बत का रिश्ता निभाना
अपने अपनों को दिल में बसाकर जिन्दगी का नग्मा तुम गुनगुनाना
जब उमृ ढलने लगे तुम्हारी
जिन्दगी के नग्में तुम सुनाना
रब से करके पक्की यारी
पाक परवरदिगार को दिल में तुम बसाना
हँसते खेलते जिन्दगी के सफर पे तुम बढते ही जाना

मनोहर यादव " अमृत सागर "

आशियाना ए दिल

आशियाना ए दिल है
ठिकाना मेरे महबूब
जमाने का क्या
सजिशों और गुस्ताखियों का जन्म दाता है वो

उनकी मोहब्बत से
महकती है कायनात और सारा जहाँ
जिन्दगी अमानत है
मेरे हमदम मेरे महबूब की यारों

जब कभी सताती है यादें तुम्हारी
आशियाना ए दिल में उनका दीदार करते हैं
नजरों ही नजरों में मेरे यारों
अपनी मोहब्बत का इझहार करते हैं

Thursday, 15 September 2016

परवाज ए परिंदा

आजाद है परिंदा
सारा अम्बर है परिंदे की परवाज के लिये
ता उमृ जारी रहेगीं परवाज उसकी
मंजिल भी पाता है लौटके आता है नीड अपने
दुनियाँ नई बसाता है मोहब्बत लुटाता है
जहाँ को मुठ्ठी में रख उड जाता है वो
मेहनत से जहाँ है
मेहनत से जमीं और आसमाँ है
उमंग है हौसला है
संवक्छद परवाज हेतु नीला आसमाँ है

प्रभात की पावन बेल में, इजहारे मोहब्बत, नशीली टाँगे , मेरी ओर


प्रभात की पावन बेल में
इजहारे मोहब्बत
नशीली टाँगे
मेरी ओर

मोहब्बत में रातों की नींद
और दिन का चैन खोया
सारी सारी रात करवट बदलना
तकिये को बाँहो  में भरकर

घने गेसुओं में उंगली घुमाना
पूनम की चाँदनी में
शबनमी मोतियों की शैया
और दमकते रुखसार पे मोहब्बत की निशानी

मोहब्बत की मादक मुझे
वो शाहिल की बाँहो  में सिमटना
तड़पकर शाहिल के जिस्म  समाना
वो मोहब्बत की सुनामी शाहिल का प्यार

मरमरी जिस्म पे हथेली घुमाना
महबूब  का मचलकर बाँहो  में समाना
मोहब्बत की मादक महक के नशे में
फिज़ाओ  मचलकर नशे में झूमना

प्रभात की पावन बेल में
कुमुदनी की नशीली आँखों का खुलना
अंगड़ाई लेकर परदेशी भ्रमर का उठाना
वो निशा का मादक नशा कुमुदनी की नर्मो  नाज़ुक बांहे

प्रभात बेला में कोहीनूर सा
दमकता रुखशारे मेरे महबूब
भ्रमर का कुमुदनी के लबो को चूमना
अंगड़ाई लेकर यौवन का मचलना




Wednesday, 14 September 2016

अपहरण " बेटियों का "

मेरी कविता का अपहरण न कीजिये
मेरी दिल की चाहत मेरी मोहब्बत लौटा दीजिये
बेटियों की मोहब्बत से ये जहाँ है
बेटियों की मोहब्बत से महकता जमीं आसमाँ है
बडी बेदर्दी से हमारी मोहब्बत का गला घोटने वाले
तरस बेटियों की मोहब्बत पे खाईयें मेरी बेटियों की कविता लौटा दीजिये
सब कुछ फिरौती में देने को मैं तैयार हूँ
बेटियों की मोहब्बत दिली आरजू हमारी
बेटियाँ दिलों जाँ से लगती हमें प्यारी
मेरे हुजूर अब और न मेरी चाहत का इम्तहान लीजियें
मेरी बेटियों की मोहब्बत मेरी कविता लौटा दीजिये
तुम्हारी दोस्ती के लायक नही मैं कुबूल अपना गुनाह है
अब तो आप मुझपे हुजूर एहसान कीजिये
मेरी चाहत मेरी दिली मोहब्बत मेरी बेटियों की कविता लौटा दीजिये
सभी पाठकों से गुजारिश हजारो हजार है
मेडम से रिकमेन्डेशन हमारी कीजिये
बेटियों की मोहब्बत मेरी दिली कविता मुझे लौटवा दीजियें
बेटियों से कुदरत और जहाँ है बेटिया रब का वरदान है
शक्ति स्वरूप हैं बेटिया ये मान लीजियें
बेटियों की मोहब्बत का सम्मान दीजिये नंदिनी जी मेरी अपहरत कविता लौटा दीजिये

मनोहर यादव

" अमृत सागर "

Tuesday, 13 September 2016

बे- खौफ बाहों में मचलती थी अल्हड जबानी

मेरी किताब में रखा वह गुलाब का फूल
कैसे जाऊ मैं  भूल मोहब्बत की निशानी
जिसकी महक से महकती थी कायनात
बे- खौफ बाहों में मचलती थी अल्हड जबानी

याद है मुझे जब तेरे तेरी जुल्फों को गज़रे से सजाया था मैंने
काले घनियारे मेघों में मचलती बिजुरिया ने झुलसाया था
न थी किसी की मज़ाल कोई शांय या हवा छू ले तेरा दामन
अंजान  भ्रमरों की क्या मज़ाल कोई आये मेरे महबूब तेरी डगर

मेरे दिल में बसी है तस्वीर तुम्हारी
जो हरेक पल तेरा अहसास कराती है
मेरे दिल की हरेक धड़कन में हुस्ने यार
तेरी मोहब्बत तेरा प्यार मेरा एतबार

दिल के आसमान में इंद्रधनुष की मानिंद है छाई
अपनी ख्वाबगाह तेरी मोहब्बत भरी यादो से सजाई
बरसों  पहले किताब में सजोई  थी जो मोहब्बत भरी यादे
हमें आज तलाक याद हैं तूने किये थे बे- खौफ वादे 

Monday, 12 September 2016

जिन्दगी से मोहब्बत

रब की अजीमों करीम नेमत है जिन्दगी
जिसे अपनी जिन्दगी से मोहब्बत नही
उसें दुसरों से मोहब्बत है कहने में
आखिर क्यों हिचक नही होती मेरे यार
आखिर कब तक खुद को धोखा देती रहोगी तुम
और मोहब्बत है लेकिन अपनी जिन्दगी से नही प्यार
आखिर कब तक ये कहती रहोगी तुम
जिसे अपनी जिन्दगी से मोहब्बत नही
वह किस बिना पे मुझसे प्यार है कहती है
बिन तेरे जिन्दगी अधुरी है कहती है
बहुत मुश्किल है त्रिया चरित्र समझना मेरे यार
रब ही जाने क्या चीज है मोहब्बत क्या प्यार

Sunday, 11 September 2016

चाँद से भी ज्यादा प्यार करता हूँ

बहुत मिस तुम्हें  मेरे यार करता हूँ
कायनात में सबसे ज्यादा मोहब्बत सरकार करता हूँ

तुम ही मोहब्बत हमारी कसम तुम्हारी
दिल से सरे आम स्वीकार करता हूँ
चाँद से भी ज्यादा प्यार करता हूँ
तहेदिल से मोहब्बत यार करता हूँ

मैं  ज़ोरों  से चिल्लाना चाहता हूँ
तुम्ही हो मोहब्बत हमारी
जन्नते हर से भी खूबसूरत और प्यारी
दिल की दुनिया की मालिक जान से प्यारी

कायनात में सबसे हँसी
 मालिकाये  मोहब्बत हमारी
दिल के आशियाने में इंतज़ार करता हु
 ज्यादा  करता हूँ

ज़माने की भीड़ में खो गई है मोहब्बत हमारी

ज़माने की भीड़ में खो गई है मोहब्बत हमारी
लम्हा लम्हा हरेक पल तलाश ज़ारी है मेरे यार

खोई हुई मोहब्बत की खोज जारी है
वो कल भी हमारी थी आज भी हमारी है

ये लाचारी है मेरी वो करीब नहीं मेरे
मेरे नसीब में है वो दिल के करीब है जो

उसके गम में दुखी है दिल मेरा मेरे यार
और उसके गम में दुःखी  कायनात सारी है

अपना समझकर दिल में बसाया जिसको
एक ठोकर से तोड़ दी उसने उम्मीद हमारी है

 ये सराय है अपना घर समझने की भूल मत कारियो
सभी को है लौटना आज तुम्हारी कल हमारी बारी है

यु तो ज़माने में ज़माने सभी मरते है मौत आने पे यारों
लेकिन जीते जी जमाने में मरना हमारी लाचारी है

गैरो को बसाया दिल में हमने
यही तो होशियारी हमारी है उनके कंधे हमारी लाचारी है




तुम कौन हो ?

तुम कौन हो ?
सफेदपोष
काला बाज़ारी के उस्ताज़
स्मगलर चोर उचक्के
या डकैत
तुम्हारी परछाई से भी
ख़ौफ़ज़दा
मैं  हूँ  और ज़माना
कमरे में अँधेरे से भी
खौफ खा जाता हूँ  मैं
नंगा नाचता नज़र आता है तू
सफेदपोष
तेरे शरीर के उतार चढाव
से भली भांति वाकिफ हूँ
मैं  और वाकिफ है सारा ज़माना
उष्ण हवाओ में
तेरी महक का अहसास होता है
फ़िज़ा  चारों  और ख़ौफ़ है तेरा
सभी की आँखों में तेरा डर
साफ़ साफ़ दिखाई देता है
मैं  जब आइना देखता हूँ
मैं स्वयं को पहचान नहीं पाता
मैं  कौन
नहीं जानता मैं
अपने अस्तित्व को भुला बैठा हूँ  मैं








Saturday, 10 September 2016

झाँको मेरे दिल में

झाँको  मेरे दिल में
केशर की  सी महकती
मोहब्बत तुम सनम मेरे पाओगें
मोहब्बत की महक से तुम भी महकोगे
सारी  की सारी कायनात प्रिये महकाओगे
तुम सनम आओ एक बार पास मेरे दामन में
महकती चहकती रूह पाओगें
सब कुछ अर्पण सनम करके
चैनो शुकुन रूह पायेंगी
इस जनम की बात क्या है
हरेक जनम हरेक पल
तुम्हारे इंतज़ार में बितायेंगी
इस दिल में नहीं कोई शिवा तुम्हारे
झाँक कर एक बार मेरे दिल में
मेरे महबूब तुम देखों
अपनी मोहब्बत की सुनामी में
सराबोर सनम हमको पाओगें
झाँको  मेरे दिल में।  

जिंदगी से मुलाक़ात हो गई

बीती शब  तनहाइयो में
जिंदगी से मुलाक़ात हो गई
खामोश लब थे खामोश थी ज़ुबा
दिल ही दिल में जिंदगी से
दिली मुलाक़ात हो गई
दिल के हरेक कमरे से गुज़री जिंदगी
खामोश तनहाइयों  में जिंदगी  से
दिल में जो थी वही बात हो गई
बाहो में समां गई मरमरी  जिंदगी
साँसों से सांसे  टकराई और
जवा दिल की धड़कने टकराई और
मोहब्बत की सुनामी में हरेक दीवार  ढह गई
कसमसाती रही बाहों  में जिंदगी
शबनमी मोतियों की चादर बेज़ुबाँ रह गई
बादलों  की ओट से मुसकाई  चाँदनी देख
जिंदगी हया के मारे सहम कर रह गई
बासंती हवाओं  के थपेड़ो में
बाहों  में सिमटकर सब कुछ कह गई
दिल के शामियाने से जब गुज़री जिंदगी
भुली  बिसरी यादों की शमा प्रज्वलित रह गई
पीली सरसों के परागों से खेलती शबनमी बयार
 भूलकर सब कुछ साथ अपने ले गई
चूमकर कपोल सरसों  के महक साथ अपने ले गई
कुछ पल ठहरी पलकों  के शामियाने में
जिंदगी महबूबे रुखसार चूमके रह गई


खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव