ये तेरी मोहब्बत का असर है सुखद अहसास है
महकती है कायनात तेरी महक से दिली जजबात है
तेरी मोहब्बत की दीवानगी में चंदा भी बहका सा लगता है
ये तेरी मोहब्बत का असर है जो जिन्दगी शबनमी रात है
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Monday, 31 October 2016
मोहब्बत
मोहब्बत
उनकी मोहब्बत में टूट गया दिल बेचारा
शीशे का सा दिल था चूर चूर हुआ मोहब्बत में यारा
यदी मिल गई मोहब्बत मेरी रब दी सौं सँवर जायेंगें
दिल से कहते हैं मेरे महबूब मोहब्बत में टूटने से बडी तकलीफ होती है
एक बार मोहब्बत में दिल गर टूट गया तो जुडने नामुमकिन हो जाता है
दिलों का एतबार है मोहब्बत , धडकने दिल प्यार है मोहब्बत
तुम्हारी मोहब्बत में सब कुछ गवाँया यार हमने
तुम्हारी कसम तुम्हारी मोहब्बत में मौत को दिल में बसाया हमने
Sunday, 30 October 2016
साँवरिया
साँवरिया की याद बहुत आती है जानलों
अपने साँवरिया को दिल से अपना मान लो
जर्रे जर्रे में मेरे साँवरिया का नूर समाया है
बडी लगन से मेरे साँवरिया ने कायनात बनाया है
महकाया है फिजा को साँवरिया ने अपनी महक से
चहकाया है खगों को साँवरिया ने अपनी खनक से
सजाया है तारों सें वसुन्धरा को साँवरिया ने
चंदा की चाँदनी से शीतल वसुन्धरा किया मेरे कन्हाई ने
जर्रा जर्रा थिरकता है साँवरिया बाँसुरी की तान पे
दिल झूम उठता है महक करूणा निधान से
साँवरिया को याद कर शुकूनों करार दिल को आता है
कन्हाई की मोहब्बत के नग्में गाकर करार दिल को आता है
साँवरिया - ३
तेरी मोहब्बत में सारा जहाँ भुलाया हमने साँवरिया
तू साहिल है समाँ ले मचलती मौंजों को अपनी बाहों में
कायनात के जर्रा जर्रा तेरे नूर से रौशन है साँवरिया
ऩजरे इनायत फर्मा रौशन मेरी जिन्दगी हो जाये तेरी मोहब्बत से साँवरिया
बारूद
अमावस्या की स्याह करती रात
चिरागों की रौशनी से रौशन वसुन्धरा
अँधेरा सिमट कर विलुप्त हुआ आज
वसुन्धरा से हो रही तारों की बरसात
बारूद की महक से महकती हरेक धडकन
ऐसे में तनहाईयाँ तडपती हमे लेके तेरा नाम
महकती पूर्वइया लेके आती मोहब्बत से तेरा नाम
जिन्दगी की मानिंद दिल की धडकन तुम्हीं
मोहब्बत भरा धडकता दिल हरेक पल लेता सिर्फ तुम्हारा ही नाम
Thursday, 27 October 2016
प्यार का दर्द है
मोहब्बत में ठोकर खाई हमने
जिन्दगी के मायने ही बदल गये
दिल में समाहित दर्द
अल्फाजों में ढलके सप्त सुरों में बदल गये
जुनूने जिन्दगी तनहाईयों में खो गया
मोहब्बत भरा आईना जो देखा दिल जाने कहा खो गया
गर गुनाह है मोहब्बत करना
गुनाहगार हूँ मैं
मोहब्बत में हरेक सजा का हकदार हूँ मैं
पृियतम की मोहब्बत की चाहत में
जिन्दगी का तो रंग ही बदल गया
जवानी खो गई लिहाफ में
बुढापा सवार हो गया
कबृ में पैर लटकायें कतृक खो गया
मोहब्बत की चाहत में यौवन खो गया
दर्द जब हद से बढा लफ्जों में ढलके गीतों गजल हो गया
निशा
निशा का तिमिर हरण किया
रवि की पावन किरणों ने
जिन्दगी जहाँ रौशन हुई
रौशन हुई कायनातों फिजा
मन के आँगन का तिमिर हरण हुआ
दिव्य ग्यान की पावन वाणी से
तनहाईयों से मन मुक्त हुआ
जब दीदारे यार हुआ पृभात बेला में
महबूबे मोहब्बत की डगर महक गई
बसंती पावन झोकों से
मन मस्तिष्क पसन्न हुआ
जब पाया साथ तेरा
संध्या की पावन बेला आई
हुई बिदाई रवि किरणो की
निशा ने दामन थाम संध्या को साथ लिया
फिर वही तनहाईयाँ
फिर चंदा का पावन साथ
मोहब्बत भरी जिन्दगी महकी
जब हुई पूऩम की चाँदनी से मुलाकात
शबनमी मोतियों से वसुन्धरा जगमगाई जब हुई चाँदनी से मुलाकात
महबूबे मोहब्बत का दीदार हुई दिल से दिल की बात
वफा
वफा मेेैने की सदा जफा मैने पाई
पत्थर से दिल लगाया, दिल पे चोट खाई
वफा की राह चलते चलते जिन्दगी गुजर गई
वफा की चाहत मे जिन्दगी की शाम ढल गई
उम्मीदे वफा मे जिये जा रहा हूँ मै
गरल मोहब्बते जिन्दगी का पिये जा रहा हूँ मैं
वफा की आरजू है जिन्दगी के सफर में
गर ना भी मिली सफर बदस्तूर जारी है
बे वफा से वफा की उम्मीद न कर दिलें नादाँ
जो उसके पास है ही नहीं कहाँ से तूझे देगी बेवफा
तुम्हारी वफा लगती है बहुत प्यारी
उम्मीदे वफा आरजुये जिन्दगी है हमारी
Saturday, 22 October 2016
मोहब्बतनामा
जिस्म की पाकीजगी नहीं
मोहब्बत में मसरूफ रूह का दीदार करता हूँ
दिल रूह जानों जिगर से
मोहब्बत मेरे सरकार करता हूँ
आदमियत का तकाजा है
इन्सानियत पे एतबार करता हूँ
दिल से सोचता हूँ
मोहब्बत भरे दिल से
मदहोश नही
होशों हवास मे स्वीकार करता हूँ
इबादते हुस्न तस्लीम करता हूँ
आशियाना ए दिल के
इबादत खाने में
महऱूज है
तस्वीर हुस्न यार की
गेसुओं का गजरा बनू
यही ख्वाहिश
मेरे महबूब है मेरी
तेरे जिस्म जहन में
खुशबू से मेरी
महके रूह कायनातों फिजा
Friday, 21 October 2016
मादरे वतन
मेरे मुल्क में सदियों से बह रही अमन की गंगधार है
मुझे अपने मुल्क की सौंधी माटी से बेपनाह प्यार है
अब तक बहुत सहा हमने अब और न हम सहेंगें
जिस किसी गद्दारे वतन ने आँख मादरे वतन पे उठाई उसे जमीं दरोंज करके ही दम लेंगें
हमने थाम लिया है तिरंगा आज अपने हाथ में
दुश्मन की चूले हिला देगें एक ही परवाज में
अब पूरी सिन्धू हिन्दुस्तान में बहेगी
अब हमारे मुल्क का जर्रा जर्रा नमों की महिमा बखान करेगा
सफेद हरे रंग के उपर केशरिया रंग स्थान पायेगा
मेरे मुल्क मेरे हिन्दुस्तान मे फिर से तिरंगा लहरायेगा
बच्चा बच्चा मुल्क का वंदे मातरम आज गायेगा
एक बार फिर से तिरंगा माउण्ट एवरेष्ट पर लहरायेगा
सारा विश्व जन गण मण जय गान करेगा बहती पूर्वईया में मादरे वतन का बखान करेगा
मनोहर यादव
" अमृत सागर "
Wednesday, 12 October 2016
शक्ति की भक्ति
तुमने हरेक अल्फाजों को सलीके से सरोयें
शक्ति सम तुम पावन शेफाली सम मनभावन
शक्ति हो तुम भक्ति हो तुम पवित्र पावन
कोई क्या तुम्हें दाग दार बनायेगा
भागीरथी में लगाके डुबकी पापों से मुक्ति पायेगा
जनम जनम के पापों से मुक्ति पायेगा जो तेरे कदमों में शीश झुकायेगा
सीता भी तुही तूही सती और सावित्री
कोई क्या तेरे दामन पे दाग लगायेगा
माँ अम्बे शक्ति तूही भक्ति तूही तेरे चरणोँ मे जन्नत पायेगा
मात तुमसे ये जहाँ ये कायनात सारी है
गंगा यमुना सरस्वती कृष्णा कावेरीं मुक्ति दायिनी हमारी है
तुमसे ये दुनियाँ ये सारा जहाँ है तुमसे वसुन्धरा आसमाँ है
मनोहर यादव
"अमृत सागर"
मोहब्बत जिन्दगी है
मोहब्बत जहर है
जहर है मोहब्बत
एक बार जो चख लेता है
जी जी मरता है मोहब्बत में
मर मरके जीता है मोहब्बत में
बुजुर्गो ने फर्माया है
कभी इष्क न करियों यार
ये वो फल है
जिसने खाया हुआ बेकार
जिसने न खाया वो बेचारा
रहा तडपता लाचार
हम तुम्हारी मोहब्बत के मारे है सनम
सदियों से कर रहे तुम्हारा इन्तजार
Tuesday, 11 October 2016
मोहब्बत तुम्हारी हमारी
कायनात मे सबसे खुबसूरत और प्यारी
मेरे महबूब मोहब्बत हमारी तुम्हारी
तुम्हारी चाहत
तुम्हारी मोहब्बत
जिन्दगी को बस
तुम्हारी जरूरत
महकती फिजा
महकती कायनात
निखरती कुमुदनी
ज्यों कारी स्याह रात
पूनम की शबनमी चाँदनी
मोतियों का शबनमी सिंगार
दामन दमकता चाँद तारोम से
पूनम की शबनमी चाँदनी रात
महबूबे मोहब्बत का साथ
दमकती चाँदनी रात
पहलू में महकती चाँदनी
जिन्दगी से मेरी मुलाकात
तुम्हारी मोहब्बत
जैसे दमकती चाँदनी
जैसे भोर में खिलती कुमुदनी
जैसे महकती शेफाली
जैसे तुम्हारा अनमोल प्यार
निस्वार्थ मोहब्बत हमारी
जैसे दमकते चाँद सूरज का साथ
Monday, 10 October 2016
विजियादश्मी का पर्व आप और आपके परिवार को विजयव्रत्ति प्रदान करे।
Sunday, 9 October 2016
लम्हें प्यार के
तलाश है उन अनमोल मोहब्बत भरे लम्हों की
जो तुम्हारें साथ बिताने की दिली ख्वाहिश है मेरे महबूब
रब से गुजारिश है या रब वो लम्हें लिख दे मुकद्दर में मेरे
हवा में उडू
दीदारे यार करू
बाहों में भरके जी भर के मोहब्बत का इझहार करू
साज भी मेरे ही हो
आवाज भी मेरी ही हो
दिल मेरा हो धडकन मेरे यार की
जिस्म मेरा हो रूह मेरे प्यार की
एतबार की इन्तहा न हो न इन्तजार की
ख्वाबगाह मे तुझसे मुलाकात हो
बरखा हो तेरे प्यार की
Saturday, 8 October 2016
अरदास
आदमियत की ख्वाहिश है या रब
दिली तमन्ना और एतबार है तुझपर
रहमों करम की इल्तजा है या परवरदिगार
तेरी रहमत बरसे तेरे पाक बंदों पे
हरेक आरजू हो पूरी मेरे महबूब हमारी
तुझसे बँधी है डोर जिन्दगी की
तेरी मोहब्बत की आरजू हमारी
दिल आशियाना हो गुजारिश है तुझसे
बनके रूह रहना मेहरबाँ हमारे
चाँद सूरज तेरे दो नैना कुछ छुपा नही या रब तुझसे
मेरी मोहब्बत भी तू दिली ख्वाहिश भी तूही
मेरी हर खुशी मेरी जिन्दगी सनम तूही
नहीं ख्वाहिश जमाने भर की दौलत की या रब
मेरी रूह मेरी जमाने भर की दौलत बस तूही
महकती है कायनात बस तेरी महक से
तेरी नेत्र खुलने से होता दिवस या रब
मेरा नाता रिश्ता मेरा प्यार मेरा यार तूही खुदावन
बस तेरी आरजू तेरी मोहब्बत है प्यारी
इन्सानियत और नेकी की बरकत या रब मुझे दे
तेरी मोहब्बत में हो साँझ और हर सबेरा
आँखे खोलू तो तेरा दीदार हो पलक झपकू तुझसे प्यार हो
जब मौत आये तो तू साथ हो तेरा एहसास हो
आदमियत लिये मनोहर ले रूखसत परवाज हो
तेरी मुरलियाँ की तान गुँजे मेरे कानों में सदा यही आखिरी आरजू है हमारी
या मेरे परवरदिगार तेरी मोहनी मूरत लगती है प्यारी
मनोहर यादव
" अमृत सागर "
Friday, 7 October 2016
अवसरवाद
हिन्दुस्तानी कहता मै खुद को
वतन हिन्दुस्तान हमारा है
वतन की रक्था हित जाँ की बाजी लगाने से नही हिचकता
हिन्दुस्तान से वजूद हमारा है
स्वयं हित हमने हिन्दू समाज अनेकानेक वर्णो में बाँट दिया
कोई मनुवादी कोई अंबेडकरवादी कोई गाँधीवादी कोई नेहरूवादी कहलाते है
अवसरवादियों की देन देखिये हिन्दू आज टुकडे टुकडे नजर आता है
१७ बार मोहम्मद गोरी को हराने वाला चौहान राजपूत कहलाता है
हम चारो संतान मनू की बृाह्मण छत्रिय वेश्य शुदृ कहलाते है
जातिय नही कर्मो के मुताबिक विश्व में जाने जाते हैं
हम चारों के चारों भाई जहाँ में हिन्दुस्तानी के नाम से जाने जाते हैं
समता और ममता के चौबारे अपना अपना फर्ज कर्तव्य निभाते है
हमें न तुम बाँटों जग वालों एक हमें तुम रहने दो भारत माता के चौबारे वन्दे मातरम कहने दो
अपनी एकता के बल पर हम सारे जहाँ को कदमों में झुकायेगें
आतंकवाद की क्यारी पाकिस्तान की ईंट से ईंट कंधे से कंधा मिलाके आज बजायेगें
मनोहर यादव
अमृत सागर
मेरे महबूब
तनहाईयों सबब ए जिन्दगी हो गई हैं
जिन्दगी महबूब ए मोहब्बत की यादों में खो गई है
आशियाना ए दिल में यादों को सजोयें है
पल पल हरेक पल महबूब की यादों में खोये हैं
महबूब की डगर में पलकें बिछाए बैठें हैं
आशियाना ए दिल में उनकी यादें सजायें बैठे हैं
भला कैसे भूल जाऊ वो स्वर्णिम लमहें
जो गुजारे थे उनकी जुल्फों के शामियाने में
अमावस्या की रात जब मेरे महबूब निकला चैबारे
यू लगा जैसे पूनम की चाँदनी ने शबनमी मोतियों से सजाया उनकों
Thursday, 6 October 2016
अदना सा सैनिक
सरहदें पहली मोहब्बत मेरी
मै सरहदों का रखवाला
अनुशासन में गठा बडा मैं
मादरे वतन का रखवाला
मैं वतन का अदना सा सेवक
हाथ में बंदूक निराली
मादरे वतन की रक्छा की कसम मैंने खाई
जाँ देकर भी मै अपना फर्ज निभाउँगा
मातृ भूमि रक्छा की खातिर मृत्यु को महबूबा बनाउँगा
कभी न झुकने दूँगा तिरंगा उसकी शान बनाउँगा
मातृभूमि का अदना सा सैनिक अपना कर्तव्य निभाउँगा
मेरा धर्म मातृभूमि है मेरा कर्म मातृभूमि है
अपने कर्म धर्म हिल बलि बलि जाउँगा
अपनी माँ का नन्हा बालक माके दूध का कर्ज निभाउँगा
आतंकवाद है दुश्मन मातृभूमि का जड से उसे मिटाउँगा
काश्मीर की केसर सम माटी का माथे तिलक लगाउँगा
काश्मीर मस्तक है वतन कभी न झुकने पायेगा
भारत मा का लाल मनोहर यादव जाँ की बाजी लगाकर अपना कर्तव्य निभाउँगा
आतंकवाद
कुत्ते की दुम टेडी बनाई रब ने टेडी ही रहेगी चाहे लगा दो जी जान
पाकिस्तानियों के डी एन ए बसा आतंकवादी प्लान
पाकिस्तान जहाँ में जाना जाता आतंकवादी राष्टृ महान
आतंकवाद की टेृनिंग सब करते लगा कर अपनी जान
आतंकवाद की नर्सरी पाक उगता फल फूलता आतंकवाद
आतंकवाद ही निर्यात है करता हमारा पडोसी पाकिस्तान
आतंकवाद पर इनकी अर्थव्यव्स्था निर्भर है करती
एटम बम प्यारा हथियार पाकियों का धमकाते बारंबार
Wednesday, 5 October 2016
गिरगिट
कलयुगी आदमी को देख हुआ गिरगिट भी हैरान
कितना तेजी से रंग बदलता ये आज का इन्सान
कभी हवा का रूख भाँपकर
कभी परिस्थियों के अनुशार
कभी मौसम के चलते रंग बदलता ये कलयुगी हैवान
गिरगिट रंग बदलते आदमियों को देख खुद भूल गया रंग बदलना
छोड कलयुगी आदमियों का साथ गिरगिट कर गया सहराओ मे पृस्थान
गिरगिट कर गया सहराओ मे पृस्थान
Tuesday, 4 October 2016
वतन मेरा हिन्दुस्तान
पाक अपनी ना-पाक हरकतों से बाज न आयेगा
गर अब भी नहीं सम्भला तो सुपुर्दे खाक हो जायेगा
अबकी इस धरा से तेरा नापाक नाम हम मिटायेंगें
धरती पे तेरी जगह बहुत बडा कबृिस्तीन बना देंगें
तेरे एटम बमों से हम तेरा ही सर्वनाश करेगें
२० वीं सदीं में एक नया इतिहास रहेंगें
सदियों तक तू एटमी दंश का दाग भुला न पायेगा
तेरी कई पिढियाँ तेरा दँश भुला न पायेगी
आने वाली तेरी आवाम एटम बम के नाम से थर्रायेगी
बच्चा बच्चा जहाँ में नमों को याद करेगा
मोहब्बत की गुजारिश करेगा फरियाद करेगा
हिन्दुस्तान नाम अमन का अमन का ही रहेगा
पाक तेरे ना पाक इरादों को नेस्तानाबूद करेगा
काश्मीर हमारा है था हमारा ही रहेगा
पाकिस्तान नाम जहाँ मैं इतिहास बनेगा
पाक दफन हो जायेगा इतिहास के पन्नों में
नवाज सहित सभी खो जायेगे सुपुर्दे खाक हो जायेगें
हम नग्मे वफा के गाते थे गाते ही रहेगें
हिन्दुस्तान में इद दिवाली मिलके मनाते थे मनाते ही रहेगें
मादरे वतन के करोडों मुस्लिम पहले हिन्दुस्तानी है
बाद में वे मुस्लिम बलूच पठान नूरानी है
मेरे वतन के मुस्लिमो का खू हिन्द पुकारेगा
सुबह की अजान में मंदिर की घंटियों में हम रमें रहेंगें
मिल जुल के रहते है मिल जुल के रहेगें
नापाक पाक को वसुन्धरा से हम मिटा के रहेंगें
हिन्दुस्तान नाम सदियों से अमर था है और अमर ही रहेगा
मगर पाक तू ना पाक खतम होके रहेगा
हिन्दुस्तान जिन्दाबाद
मनोहर यादव
" अमृत सागर "
नारी शक्ति
नारी माँ बहन हमारी है
बीबी अर्धागिंनी प्यारी है
रिश्ते नातों में बटा ये जहाँ है
नारी शक्ति है चण्डी है
जग जननी है
नारी ने रचा जहाँ है
नारी शक्ति के आगे त्रि शक्ति ने शीश झुकाया है
नारी ने माँ बनके अपने पुत्र पुत्रियों को असुरो से बचाया है
माँ सीता भी नारी थी मा पार्वती भी
इनका संदेश भारतिय नारियों के दिलों को आज भी भाता है
शक्ति के उपासक है हम
शक्ति का उपासक ये सारा जहाँ है
शक्ति ने अपनी शक्ति से रचा ये सारा जहाँ है
शक्ति से वसुन्धरा और अासमान है
शक्ति से असतित्व आदमी का
शक्ति से उतपन्न है कुदरत ये सर्वमान्य है
शक्ति की भक्ति में बसा जिन्दगी जहाँ है
कभी न तुम शर्मिन्दा होना अपनी शक्ति पे
शक्ति की अनुपम कृति पूनम की चाँदनी
और महकती कायनात फिजा सारा जहाँ है
शक्ति की शक्ति से शर्मिंदा मत होना
शक्ति से हमारा मान सम्मान है
नारी ही शक्ति है शक्ति ही नारी है
मित्र यही कुदरत का विधान है
अपनी शक्ति को तुम पहचानो
अपनी शक्तियों को तुम जानों
जिस रोज अपनी शक्ति को जान जाओगे
माँ बापू के चरणों में नतमस्तक होकर अपना शीश झुकाओगे
नारी को कोठे तक पहुँचाने वाला भी किसी माँ का लाल है
किसी माई की लाली है
शक्ति को अपशब्द कहना नही शक्ति की पहचान
शक्ति के आगे शीश झुका अपना वर्चस्व बचाओ
Monday, 3 October 2016
औरत
पिंक मूवी से पुन: समाज की द्वी मुखी नीती परिलक्छित होती है
औरत होना कोई पाप नहीं है
औरत होना कोई अभिषाप नहीं है
औरत सृष्टी का द्वार है
औरत से कायनात और संसार है
आखिर क्यों औरत पे सदियों से कानून थोपता आया है जहाँ
आखिर क्यों औरतों के जीरो फीगर की ताकीद करता है जहाँ
औरत आज बेबस लाचार और बेचारी नहीं है
औरत होना वर्तमान परिपेक्छ मे कोई अभिषाप नहीं है
औरत से ये जहाँ ये कायनात है
औरत से एक और अग्नी परीक्छा की दरकार नहीं है
है कोई इस जहाँ में जिसे औरत से प्यार नहीं है
आज लक्छमण रेखा से बहुत आगे बढ गई है औरत
वर्तमान में हरेक छेत्र की जरूरत है औरत
धरा से अम्बर तक आज औरत का अधिकार है
सदियों से शक्ति स्वरूपा हैं औरत इस बात से इन्कार नही है
शक्ति की बदौलत देव और इन्सान की है शोहरत
आज की औरत अंधेरों से आजाद है
आज की औरत रब की महकती फरियाद है
आज औरत की महक से महकती है ये कायनात
आज औरत के नूरे रूखसार से रौशन है ये कायनात
मा,बहन बेटियाँ के रूप में धर्म निभाती है औरत
बीबी बनके पति का साथ निभाती है औरत
संसार की सभ्यता को आगे बढाती है औरत
आदमी की सफलता का पर्याय कहलाती है औरत
हरेक पुरूष की सफस़लता के पीछे औरत का हाथ होता है
हरेक औरत की सफलता में बाप , भाई , बेटों और पति का साथ होता है
पाकिस्तानी आतंकवादी
हकीकत से रूबरू कराने मै आया
पाकिस्तानियों के छक्के छुडाने मै आया
मोहब्बत खूबी है अपनाने मेरे यार मै आया
गद्दारे वतन और पाकिस्तानी आतंकवादियों को जन्नत की सैर कराने मै आया
एक खबर काटजू की जुबानी
सहमत हैं हम आपसे
शुकृिया अदा करते हैं
इस हकीकत से अंजान है भारतवंशी
मैदानी हकीकत से रूबरू कराने वाले काटजू तेरा शुकृिया
मंजिले मोहब्बत
तेरी मोहब्बत की महक से महकती है कायनात
सारी जिन्दगी गुजर गई मेरे महबूब की तलाश में
जिश रोज हुई मुलाकात यार उनसे
सुपुर्दे खाक हेतु ताबुत में जमा था जिस्म यार
Sunday, 2 October 2016
मोहब्बत
मेरे नसीब में यारी है तेरी
दीदारे यार नहीं
इसके माइने ये नहीं ए दोस्त
हमें तेरी यारी पे एतबार नहीं
बहुत खुबसूरत और हँसी है महबूब
दूर है तो क्या हमें उससे प्यार नहीं
मोहब्बत भी एतबार भी है
दोस्ती का हक है अधिकार भी है
तेरी दोस्ती पे है नाज मुझे
तेरी यारी पे दिली एतबार भी है
शाम सुहानी सावन की
फिर आई शाम सुहानी सावन की
घिर आई शाम सुहानी सावन की
साँवन की मन भावन की पृियतम के आवन की
साँवन की फुहारों के बीत मचलते अरमाँ दिल के पृियतम संग पावन की
घिर आई फिर आई शाम सुहानी सावन की
मोहब्बत के मचलते अरमाँ दिल के
महबूब का संग अज फिर पावन की
घिर आई फिर आई सुहानी शाम सावन की
पृियतम प्यारे के ढिंग आवन की
दहेज
दहेज जैसी कुरीतियाँ बनाई हमने
समाज में व्यापक सर्व मान्यता दिलाई हमने
दोनों हाथ खोलकर दहेज देते है बापू
बेटियों के सारे अश्क पोंछ लेते हैं बापू
दहेज माँगने वाले भिकारी यार होते हैं
दहेज बाबुल का बेटी के पृति समर्पित प्यार होता है
अपनी हैसियत से कहीं ज्यादा तोहफे बाबुल बेटियों को प्यार से देता है
दहेज लोभी गर्व से स अधिकार लेता है
दहेज को लोभियों अपना अधिकार न तुम मानो
इसे बाबुल का बेटियों के पृति प्यार तुम जानों
पाप है मांग दहेज की भीख न तुम माँगों
बाबुल की मोहब्बत है बेटियाँ सबसे बडा दहेज इसे तुम जानों
Saturday, 1 October 2016
इन्तजार
कौन तेरा इन्तजार करेगा
जैसे सदियों से मैं करता आया
कौन तेरा एतबार करेगा
जैसे मैं करता हूँ
तेरी मोहब्बत का एतबार मैं करता हूँ
मेरी मोहब्बत का एतबार तुझे है
तू मेरे दिल की धडकन है दिली एतबार है
तू मेरी मोहब्बत मेरा प्यार है तुझे एतबार है मुझे इकरार है
गर एक बार मुझे तू मिल जाये
कसम खुदा की
सहराओं में कमल खिल जाये
मेरे जीने का सहारा तू है
मौंजों को साहिल की मोहब्बत का एतबार आये
खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई