- महबुब मोहब्बत के दो पल मे जिन्दगी जी ली अब मौत भी आ जाये तो कोई गम नही महबुबे मोहब्बत की अमृत घुटटी पी ली मैंने महबुब से मोहब्बत का राज जान लिया मैंने जिन्दगी महबुबे मोहब्बत को दिल से मान लिया मैंनेतहेदिल से आपका आभारहम है आपके शुक्र गुजार आपसे है यारी हमारी अब कवि मनोहर यादव को झेलने के लिये दिली दिमाग से आप अपना मित्र समजाति समझ हो जाईये बिनिता जी दिल से तैयार शिक्षिका है आप और मित्र थाने दार है वफादार जमेगी यारी की बिसात शानदार ।
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Tuesday, 22 September 2015
हरेक चीज का वक्त मुकर्रर होता है हरेक साँझ सबेरा होता है गुलशन मे यु तो बहुत फूल महकते है मोहब्बत का फूल सुनहरा होता है
हरेक चीज का वक्त मुकर्रर होता है
हरेक साँझ सबेरा होता है
गुलशन मे यु तो बहुत फूल महकते है
मोहब्बत का फूल सुनहरा होता है
आप का नूर दिल को बहुत प्यार लगता है। नीले आसमान मे भोर का तारा लगता है।।
आप का नूर दिल को बहुत प्यार लगता है।
नीले आसमान मे भोर का तारा लगता है।।
आपके सारगर्भित दोहो ने क्या खूब समा बंधाया है आपके दोहो ने दिल को हैले से स्नेह से हिलाया है
आपके सारगर्भित दोहो ने क्या खूब समा बंधाया है
आपके दोहो ने दिल को हैले से स्नेह से हिलाया है
बिनिता आप बहुत उम्दा लेखिका है
आपकी गीत शायरी दिल को खूब भाती है
तनहाईयो मे मीठी यादें दिल को गुदगुदाती है।
चैन दिल को आता है दीदारे यार से करार दिल पाता है रचनाओं के दुलार से
राधे राधे मे निहित कान्हा है हमारा
राधे राधे मे निहित कान्हा है हमारा
जमाना जाने ना जाने हमने है जाना
बाँसुरी की तान बसी है दिल मे हमारे
दिल की हरेक धडकन राधिकारमण ही पुकारे
आजा रे कान्हा
कमबख्त कयामत नही तो कयामत से कम भी नही।
कमबख्त कयामत नही तो कयामत से कम भी नही।
गर ये हमारी उम्दा शायरी नही तो शायरी से तनिक कम भी नही।
ये बात जुदा है कमबख्त ये अल्फाज है हम नही।
हम नही तो कोई गम भी नही जमाने से जुदा है शायरी हमारी हम नही तो कोई गम नही।
महबुब की आहट से महकती है फिजा
महबुब की आहट से महकती है फिजा
उनकी मासुमियत पर लरजती है हवा
मादक महक से उठती है उमंगो की सुनामी
या रब दिल गार्डन गार्डन हो जाता है उनकी महक से
aaj machal rahi hai fiza
Aaj machal rahi hai fiza
tera intazar hai
kal khwabgaah me machale the arama dil ke
jindagi ko gale lagane ke talabagar the
jindagi bahut khubsurat lagati hai
jis din se kiya tera didar hai
jindagi ki pahali khwaish hai tu
ab to dhadaklate dil ko
mere mahabub sirf tera intazar hai
यु अश्क ना बहाया ना करो
यु अश्क ना बहाया ना करो
दिल के जख्म हरे हो जाते है
यु ख्वाबो मे ना आया करो
दिल के सोये अरमां मचल जाते है
तुम्हारी जिद दर्दे दिल बढाती है
जिन्दगी गम के दरिया म तब्दीले हो जाती है
मोहब्बत का जोशो जुनून सिर पे सवार नजर आता
मोहब्बत का जोशो जुनून सिर पे सवार नजर आता
हरेक संय मे महबूब का साया नजर आता
महबूब की हरेक अदा मे मोहब्बत का सैलाभ नजर आता
महबूब की मोहब्बत मे खुशियो का भंडार नजर आता
फिजां इतनी बोझल क्यूं है
..फिजां इतनी बोझल क्यूं है..
ख़्वाब निगाहों से ओझल क्यूं है.. मौत से मिलने की तलबगार है.. ज़िन्दगी इतनी बेकल क्यूं है.. सही गलत की परख नही है.. ख़्वाहिशें इतनी चंचल क्यूं है.. चेहरे मासूमियत से भरे हैं.. दिलों मे इतना हलाहल क्यूं है.. सूकून भी सूकून नही देता.. बेचैनी से भरा हरपल क्यूं है.. अहंकार से लबालब है हर शख्स.. फिर हालात इतने निर्बल क्यूं है.. जब आखिरी अंजाम मिट्टी का मिट्टी है.. फिर हर इंसान पत्थर दिल क्यूं है
ख़्वाब निगाहों से ओझल क्यूं है.. मौत से मिलने की तलबगार है.. ज़िन्दगी इतनी बेकल क्यूं है.. सही गलत की परख नही है.. ख़्वाहिशें इतनी चंचल क्यूं है.. चेहरे मासूमियत से भरे हैं.. दिलों मे इतना हलाहल क्यूं है.. सूकून भी सूकून नही देता.. बेचैनी से भरा हरपल क्यूं है.. अहंकार से लबालब है हर शख्स.. फिर हालात इतने निर्बल क्यूं है.. जब आखिरी अंजाम मिट्टी का मिट्टी है.. फिर हर इंसान पत्थर दिल क्यूं है
Tuesday, 8 September 2015
बीती रात
शब ख्वाबगाह मे बरसी मोहब्बत और दिल को एतबार हो गया
बेकरार था दिल जिसकी चाहत मे वो मेरे आगोस मे थी और प्यार हो गया
मोहब्बत मे चाहत है चाहत ही मोहब्बत है
पाक परवरदिगार की अजीमो करीम नेमत है मोहब्बत
आज ख्वाबगाह मे मेरे महबुब को पाके ये दिल को एतबार हो गया।
बेकरार था दिल जिसकी चाहत मे वो मेरे आगोस मे थी और प्यार हो गया
मोहब्बत मे चाहत है चाहत ही मोहब्बत है
पाक परवरदिगार की अजीमो करीम नेमत है मोहब्बत
आज ख्वाबगाह मे मेरे महबुब को पाके ये दिल को एतबार हो गया।
ख्वाबगाह
ख्वाबगाह मे तेरा इन्तझार करूँगा
दिल से एतबार फकत यार करूँगा
तुम आज ना आये तो दिल टूट जायेगा
तुम ही सोचो भला कैसे ये दिल तुम्हें भुलायेगा।
बीती शब
बीती शब ख्वाबगाह मे बरसी मोहब्बत और दिल को एतबार हो गया
बेकरार था दिल जिसकी चाहत मे वो मेरे आगोस मे थी और प्यार हो गया
मोहब्बत मे चाहत है चाहत ही मोहब्बत है
पाक परवरदिगार की अजीमो करीम नेमत है मोहब्बत
आज ख्वाबगाह मे मेरे महबुब को पाके ये दिल को एतबार हो गया।
राधिका रानी
राधिका रानी ने कान्हा को दिल मे बसाया
बावरी राधिका ने साँवरिया की बाँसुरी लबो से लगाया
कान्हा की धुन मे मगन राधिका ने सब कुछ भुलाया
श्याम साँवरे को बावरी राधिका ने दिल मे बसाया
श्याम श्याम जपते जपते सारा जग भुलाया
बावरी राधिका ने साँवरे के दिल को अपना घर बनाया
राधिका रानी को सारे जग ने मन मे बसाया
गोरी राधिका रानी ने सारे जहाँ का प्यार पाया
कान्हा को पाने का जरिया जग ने राधिका रानी को बनाया
सारे जग श्री राधे राधे राधे राधे को अपने दिल मे बसाया ।
U r welcome please
स्वागत है आपका इस गरीब खाने में।।
आपने ही देर की मेरे सनम मुस्कराने में
मज़ा हमको भी आता है हक जताने में
बड़ा मुश्किल है यहाँ रूठो को मनाने में।।
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Saturday, 5 September 2015
साँवरा
जर्रे जर्रे से साँवरियाँ की महक आती
सारी कायनात दिन रात कान्हा को ध्याती
कृष्ण की बाँसुरी की तान दीवाना जहाँ को बनाती
दीवानी गोपिया कृष्ण मुरारी की मोहब्बत मे सुध बुध अपनी भुलाती।
Thursday, 3 September 2015
तेरा मेरा मिलन
तेरा मेरा मिलन
एक बंधन
अंजाना
अंजाम का है कोई ठिकाना
मिलन
महबुब और आंशिक
मोहब्बत फकत जरूरत
आजादी
चोरी
आरजु
जरूरी
गुलामी
पहचान
अजनबी
मेहमान
जिन्दगी
हुई
हैरान
भारतियता
फकत
बन ग ई मेरी पहचान
मोहब्बत
सात फेरी
अग्नि साक्षी
छिन ग ई
मेरी मुस्कान
हैरान
परेशान
मोहब्बत से
आज भी है
मेरी मुस्कान
जीनते खाब
जीनते ख्वाब को हकीकत मे सामने आज पाके
दिवाना ए दिल को रब पे एतबार आज आया
मेरी महबुबे मोहब्बत की पाकीजगी का सबब
मेरे रब ने मेरे लिये मेरी महबुबे मोहब्बत को बनाया
केसर सी महकती साँसे
केसर सी महकती साँसे उसकी
भाद्रपद के मेघो से स्याह जुलफे घनियारी
कोयल सा मादक स्वर कोकिला
मरमरी जन्नते हूर कंचन काया मतवारी
हिरनी जैसी चाल अनुपम
रूखसार गुलाबी रंगून मे
नागिन सी बलखाती जुल्फ लगती खूब प्यारी
काश्मीरी रंगत मे बाला
जन्नते हूर भी जाये बलिहारी
कृतक अंजान की मादक कृति
सबके दिलों को लगती प्यारी।
Wednesday, 2 September 2015
मोहब्बत का इझहार
मैंने तुमसे अपनी मोहब्बत का इझहार किया
फकत तेरा दर्दे ए दिल सबब ए मोहब्बत
तुही मेरी रातों का नूर तुही सागर मय सनम
तुझसे मेरी नसों मे छाई खुमारी
मेरी जिन्दगी मे गमो का शाया
मेरी जिन्दगी मे बागो बहार
मेरी जिन्दगी की महक
मेरी जिन्दगी का मकसद
तेरी आँखो मे मै
मेरी आँखों मे तू
तू ही मेरी जिन्दगी तूही आरजु
तेरा मरमरी जिस्म उपवन है और है बसंतो बहार
तेरे ही जुल्फो से बादलों चे छाता खुमार
तेरा हुस्ने रब की अनमोल कारीगरी
तेरी हरेक अदा मे यार वफा है शुमार
तू मेरी मोहब्बत है जिन्दगी की तमन्ना
मेरे अल्फाज दिल की चाहत मेरे महबुब
मोहब्बत की हमने खाई जो कसमे
वफा है मेरे दिल मे तेरी मोहब्बत का सबब
जर्रे जर्रे मे बसा कृष्ण मुरारी सुदर्शन चक्रधारी है
जर्रे जर्रे मे बसा सुदर्शन चक्रधारी है
मेरे जिस्म की रूह ब्रन्दावन बिहारी है
श्री राधिकारमण के श्री चरणों मे गुजरी उम्र सारी है
कृतक इस जिस्म की रूह ब्रन्दावन बिहारी कृष्ण मुरारी है
श्री राधिका रूह जिस्म बान्केबिहारी है
श्री राधिकारमण के श्री चरणों मे समर्पित उम्र सारी है
संध्या की बिदाई
संध्या की हुई बिदाई
चाँद ने ली अंगडाई
चाँद के नूर से कायनात हुई रौशन
अंधियारे ने दीवार की ओट पाई
मौसमे मोहब्बत
इष्क मेहरबान
चारों और सननाटे का मंजर
वादिये काश्मीर की जन्नत सी रौनक
आइना ए डलझील मे चाँदनी का यौवन
निखर के आया
महबुबे मोहब्बत को मोहब्बत मे शामिल पाके चाँद भी शर्माया
शालिमार उपवन भी आज मुस्कराते हुये शर्माया
मोहब्बत मे मशगुल महबुबे मोहब्बत के माथे पसीना आया
ये नजारा देख चाँद मुस्कराया ।
रात अशांत
रात अशांत खामोश
नींद गुमराह मदहोश
आलिशान महलो मे
नामों निशा नही चैनो अमन
दूर बहुत दूर चिरागो का नूर
वादी के मकानों मे जुगनू सी
झिलमिलाती शमाँ
मुस्कराते हुये मेरे महबुब
गगनचुम्भी अटटालिकाये
गुर्जर के मादक तरानो की गूँज
शिलाजीत सी महकती वादिये काश्मीर
जन्नत वसुन्धरा सबब ए जिन्दगी
खामोशी पैर पसारे जैसे कब्रगाह का आलम
जख्मी रूह की कराह बैचेनी का सबब
मेहबुबे मोहब्बत से जुदाई का गम
कैसे भुलाउ शिकारे मे गुजारे जन्नत से पल
बेबसी का आलम हवा भी ठहरी है कही
केसर की महक आरजुये जिन्दगी का सबब
खामोश मदहोश रातों की वीरानगी
डगर खामोश नगर खामोश
मदहोश मोहब्बत दिलो की उमंग
अंजान डगर
महबुबे मोहब्बत सबब ए जिन्दगी
खामोश शहर।
नाग्मात ए मोहब्बत फकत तेरे लिखता हू
तेरी मोहब्बत मे नग्मे लिखता हू
तेरी मोहब्बत मे मोहब्बत के नग्मे गुनगुनाता हूँ
तनहाईयो मे तेरी यादों के साये के तले
खुने जिगर की स्याही से मोहब्बत के नग्मे सजाता हू
मोहब्बत भरे ये अनमोल नग्मे मेरे दर्दे दिल का गुबार
मेरे इन गीतों से फिजा मे आती है बहार
हरश्रृन्गार की महक से महकती है फिजा
दिल की मादक उमंगो मे आता निखार
मेरे गीत मेरी गझल नग्मात मेरे दिल का अहसास फकत
मेरे इन गीतों पे आता महबुबे मोहब्बत को प्यार बेशुमार
पाया है महबुबे मोहब्बत से प्यार बेशुमार
देखा है महबुब की नजरों मे छलकता प्यार मेरे यार
मेहबुबे मोहब्बत के गुलाबी रूखसार से झलकता एतबार बेशुमार
तेरी मोहब्बत के इन्द्र धनुषी रंगों सजाया मैने प्यार बेशुमार
तेरी मोहब्बत सरमायादारो की मोहताज नही
इस पे है तेरी रूह पे है मेरा इख्तियार मेरे यार
मोहब्बत भरे पलो के हँसी नग्मात सिर्फ तेरे लिये मेरे यार।
इझहारे मोहब्बत
मैंने तुमसे अपनी मोहब्बत का इझहार किया
फकत तेरा दर्दे ए दिल सबब ए मोहब्बत
तुही मेरी रातों का नूर तुही सागर मय सनम
तुझसे मेरी नसों मे छाई खुमारी
मेरी जिन्दगी मे गमो का शाया
मेरी जिन्दगी मे बागो बहार
मेरी जिन्दगी की महक
मेरी जिन्दगी का मकसद
तेरी आँखो मे मै
मेरी आँखों मे तू
तू ही मेरी जिन्दगी तूही आरजु
तेरा मरमरी जिस्म उपवन है और है बसंतो बहार
तेरे ही जुल्फो से बादलों चे छाता खुमार
तेरा हुस्ने रब की अनमोल कारीगरी
तेरी हरेक अदा मे यार वफा है शुमार
तू मेरी मोहब्बत है जिन्दगी की तमन्ना
मेरे अल्फाज दिल की चाहत मेरे महबुब
मोहब्बत की हमने खाई जो कसमे
वफा है मेरे दिल मे तेरी मोहब्बत का सबब
महबुबे मोहब्बत का हरेक गम
महबुबे मोहब्बत के हरेक गम को सीने से लगाया हमने
उसके गमो को आरजुये जिन्दगी फकत बनाया हमने
मेरे महबुबे मोहब्बत के मानिन्द खुबसूरत और हँसी उसके गमो को पाया हमने
अपने गमो के बहुत करीब महबुबे मोहब्बत के गमो को पाया हमने
आरजुये जिन्दगी महबुब के गमो को जिन्दगी जीने का सबब बनाया हमने
मेहबुब के गमो को अपनाकर सीने से यारो लगाया हमने
जिन्दगी के हँसी सफर मे महबुबे मोहब्बत को हमसफर अपना बनाया हमने
सीने से अपने लगाकर मेहबुब के दिल की सुनामी को दिल मे समाया हमने।
महबुबे मोहब्बत
महबुबे मोहब्बत की दुर्दशा का फकत जिम्मेदार हू मै
उसकी बिगड़ती हुई सेहत का फकत गुनहगार हू मै
अपनी बेगुनाही साबित करने की जुरूरत क्या
इस वक्त महबुबे मोहब्बत के हरेक हाल का बवाल हू
महबुबे मोहब्बत के हरेक जवाब का मुस्तेद सवाल हू मै
उसके दिलों मे सुनामी बनके हिलोरे ले रहा उसके दिल का ख्याल हू मै
छोडिये ये पागलपन
छोडिये ये पागलपन उदासी का आलम
तेरे अश्को यु बेजार न कर
बेशकिमती अश्को का गुनाहगार हू मै
मै जिये जा रहा हू फकत अश्को को पी
महबुबे मोहब्बत तू भी जी उन्हीं अश्को के सहारे
अब तुम्हें खोना नही चाहत हो मेरी
जिन्दगी अब एक पल भी संभव नही तेरे बिन।
खतावार
बगैर खाता के खतावार करार दिये जाते है।
महबुब छब्बीस की उम्र मे सोलह के नजर आते है।
अब तो बर्बादी के आसार नजर आते है
महबुब मोहब्बत के तलबगार नजर आते है।
महबुब कातिल नजरों से वार पे वार किये जाते है।
तेरी महक
तेरी महक से रौशन ये कायनात सारी है।
शुकून दिल को मिलता है तू महबुब हमारी है।
उसकी कायनात मे सब से प्यारी है।
दिल ने फकत मान लिया तू जिन्दगी हमारी है।
तुझसे महकती ये कायनात सारी है।
तेरे नूर से रौशन फिजा ये सारी है।
पैगामे मोहब्बत
नजरों ही नजरों मे पैगामे मोहब्बत आया।
दिल ने महबुबे मोहब्बत पे फकत एतबार जताया ।
नूरे नजर से रौशन ये कायनात सारी है।
महबुबे मोहब्बत हमें जान से प्यारी है।
महबुबे मोहब्बत कुछ फिकमंद यार नजर आते है।
आइना ए दिल झलक एतबार की हुजूर पाते है।
फकत इष्क उन्हीं से है उन्हीं पे जाँ लुटाते है।
तनहाईयो मे उनके शाये से बा अदब बतियाते है।
बस इतने मे ही
बस इतने में ही कश्ती डुबा दी हमने;
जहाँ पहुंचना था वो किनारा ना रहा;
गिर पड़ते है लडखडा के कदमों से;
जो थामा करता था वो आज सहारा ना रहा।
इस दिल की बेइमानी
इस दिल की बेइमानी बयाँ करते है
इसमें यादों की इतनी तहे हो ग ई है
कुछ रखने के लिये
सुई की नोक मानिन्द
भी फकत स्थान नही
माफी का अरमान है
जो प्रस्तुत है लक्ष्मी जी
गद्दारे वतन
वो कौन था जिसने प्रशांत भूषण को याक़ूब के लिए HIRE किया ...
कम से कम याक़ूब के घरवालों ने तो प्रशांत भूषण को HIRE नहीं किया।
वास्तव मे प्रशांत भूषण देश का गद्दार है ...
ये देशविरोधी गतिविधियों मे संलिप्त हैं ...
ये कश्मीर से सेना हटाने की बात करता है
ये कश्मीर मे रेफरेंडम कराने की बात करता है
ये कसाब के लिए फांसी से माफी मांगता है
ये अफजल गुरु के लिए फांसी से माफी मांगता है
ये बातला हाउस एंकाउंटर को फर्जी बताता है, शहीद इंस्पेक्टर मोहन चन्द्र शर्मा की शहादत को अपमानित करता है।
आखिर इतनी गद्दारी करने के बाद भी ये सूअर दिल्ली मे आराम से कैसे घूम पाता है ... ?
क्या दिल्ली मे ऐसा कोई नहीं है जो इसकी चमड़ी उधेड़ सके ?
श्याही फेंकने, जूता फेंकने से या थप्पड़ लगाने से काम नहीं चलेगा....
ये गद्दार खुलेआम आतंकवादियों के हमदर्द बने हुए हैं और आराम से समाज मे रह भी रहे हैं ... इन्हे समाज की तरफ से सज़ा मिलनी बहुत जरूरी है।
दिल मे बसने को बेकरार
दिल मे बस जाने को बेकरार है जाने तमन्ना जाने बहार
जो किसी और की महबुबे मोहब्बत परवरदिगार
मेरी बाहो मे समाने को हर वक्त तैयार वो जाने चमन
जिस के दिल पे हुकूमत मेरे दुश्मन की मेरे यार
ये शेरो शायरी तडपते दिल की आरजुये बेशुमार
थियेटर की बेहतरीन अदाकारा मेरी महबुबे मोहब्बत मेरे यार
उसक हरेक लम्हा दिन रात दिल के हँसी जजबात मुझसे फकत मेरे यार
वो मेरी ख्वाबगाह की जीनत जन्नते हूर मेरे यार
बाजिये अंजामे मोहब्बत से कतई वाकिफ नही मै
जिन्दगी मेरे हिस्से मे महबुबे मोहब्बत या उसके हिस्से मे मै।
काश वो कातिल जन्नते हूर जीतने आगोस मेरी हो जाये
और रब मुझे महबुबे मोहब्बत की मोहब्बत निभाने की ताकत फर्माये।
हम भी
हा यार हम भी बार्डर पे युही वर्षों से
सुनी कलाई
खामोश नजर
खामोश जिगर
मदहोश नजर
गगनचुम्भी अटटालिकाओ से फकत यारी
वही मा वही बहन
जीने की आरजु हमारी
जिन्दगी ने उनसे करली यारी
हरेक राखी से ज्यादा
भारत माता प्यारी
मा बहन सभी कुछ है हमारी
वतन के लिये छोड़े सब कुछ
वतन ही सच्ची महबुबे मोहब्बत
हमारी ।
सरेशाम ख्वाबगाह मे महबुबे मोहब्बत को देखके
सरेशाम ख्वाबगाह मे महबुबे मोहब्बत को देखकर
ठिठक कर एकटक देखा
कुछ भी तो नही कहा मैंने
बाद मुद्दत के दीदारे यार किया
झुकी हुई नजरों को नजर भरके मेरी नजरों से देखा
दिल आन्दोलित नजर आया
दिल ने बाहो मे भरके महबुबे मोहब्बत
जी भरके बरसों की पिपासा शान्त करूँ
झुकी हुई नजरें धरती खोदती
फकत मौन समर्पण
अश्को का सैलाभ जो देख
जुनून को ठन्डक कुछ हद आई
परवरदिगार को बाद मुद्दत के रहम आज आया
तनहाईयो मे धडकते हुये दिलों की घडकन
बेकाबू दिलों की तडप और कसक
फिजा की खामोशियो को तोड़ने को बेकरार
या रब शुकू महबुबे मोहब्बत के दिल को
और जुनून फकत आशिक के दिल को बक्स
उसको गमो से राहत दे
खुशियों से झोली भरदे मेरे महबुब की
Amrit sagar
मित्रों आप अमृत सागर ज्वाइन करे मेरी और मित्रों की अद्वितीय काव्य रचनाओं का आनंद
लीजिये।
जर्रे जर्रे मे बसा सुदर्शन चक्रधारी है
मेरे जिस्म की रूह ब्रन्दावन बिहारी है
श्री राधिकारमण के श्री चरणों मे गुजरी उम्र सारी है
कृतक इस जिस्म की रूह ब्रन्दावन बिहारी कृष्ण मुरारी है
श्री राधिका रूह जिस्म बान्केबिहारी है
श्री राधिकारमण के श्री चरणों मे समर्पित उम्र सारी है
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Tuesday, 1 September 2015
माखन चोर नजर आवत है सखी टहु ओर
सखी माखन चोर की याद बहुत सतावत है
चहुओर चितचोर नंदकिशोर मुरलीमनोहर नजर आवत है
साँवरो सलोने नंदकुमार की याद सतावत है
उसके प्रेम मे जोगन हो ग ई तन मन की सुधार बुध बिसराई है
प्रेम विरह मे डुबी सखी जैसे जल मे गगरियाँ
विरहाग्नि मे यु तडपत है जैसे बिन जल मछुरिया
कैसे बताऊ कैसे बिछुडी जैसे कान्हा के लबो से बाँसुरिया
दुनिया कहती प्रेम दिवानी कोई न समझे विरह
साँवरा साँवरा साजन साँवरा रटते रटते हो ग ई बावरिया।
अच्छे दिन आने वाले है
अच्छे दिन आने वाले है
हमारे लालू नितिश सोनिया से महान नेता
यारो यु के जाने वाले है
अच्छे दिन आने वाले है
इस्ट इन्डिया ने 200 वर्षों तक गुलाम हमें बनाया ।
आज उसी कंपनी पर यारो
बड़े फक्र से एक भारतीय उद्ययमी ने तिरंगा फहराया।
भारत माता का सीना गर्व से बड़ा हुआ।
हमने भी इठलाकर जोश दिखाया
Do u know why?
अच्छे दिन आने वाले है
देश के सारे गददार धीरे धीरे युके भागने वाले है
अच्छे दिन आने वाले है
नमो राज मे सारे जहाँ मे तिरंगा जोशो खरोश से लहराया
हरेक भारतीय का सिर उँचा हुआ
वतन ने खोया सम्मान आज फिर पाया
अच्छे दिन आने वाले है
अमृत सागर
अमृत सागर मे
छलकती अमृत
दिल को भायेगी
तनहाईयो मे
महबुबे मोहब्बत
की यार खूब
सतायेगी
उस वक्त
अमृत सागर
दिल
मेरे
सनम फकत
बहलायेगी
दिवानगी के
आलम मे
गुलाबी रूखसार
और और
मोहब्बते महबुब
सुर्ख हो
जायेगी
महबुबे मोहब्बत की याद दिल लुभायेगी
इस लिबाज मे
इस लिबाज मे दीदार करके
चेनो शुकून
दिल के गँवाया
ए कायनात के कारीगर
कयो
आखिर क्यों
तुझे रहम
न आया
क्या
उम्र
और कैसे
सितम
मुकद्दर के
कुदरत के बाजीगर
क्यों
आखिर क्यों
तुझे
रहम
न आया
इतनी मासूम
भोली भाली
सीधी साधी
कमसिन
को
क्यों
आखिर क्यों
मुकद्दर
ने
फकत
मुकद्दर
ने
क्यों
आखिर
क्यों
आपना शिकार बनाया
क्या
यही है
करम तेरा
तुझे
एक पल को
लहम
रहम
आखिर क्यों न आया।
तस्वीर तेरी दिल मे
तस्वीर तेरी दिल मे बनाता मै रहूंगा...
यादो से तेरे घर को सजाता मै रहूंगा...
जुगनू मेरी पलको पे चमकते ही रहेंगे ,
रातो मे तुझे रस्ता दिखाता मै रहूंगा...
कभी न मोहब्बत करियो मेरे यार
कभी न करियो मोहब्बत
बुजुर्गो ने ये फर्माया
ये दरिया ए आग है
इसने आशिको को जलाया है
अंजामे मोहब्बत शब सामने आया
परवाने ने खुद को शमा मे पाया है
मोहब्बत कोई खेल नही
दो दिलों का फकत मेल प्यारे
जिसने की वो मजनु बनके रोया चिल्लाया
जिसने ना कि वो भी राझणा को देख पछताया है
कुदरत का कारीगर
कुदरत का कारीगर माटी से इन्सान बनाता और फकत माटी मे मिलाता
धरती का इन्सान माटी से भगवान बनाता और पानी मे बहता
ये वाकया कृतक अंजान डगर समझ नही पाता है
कुदरत के रचियता के चरणों मे शीश अपना झुकाता है
या खुदा तेरी खुदाई अंजान इन्सान समझ नही पाता है
जहाँ मानव निर्मित विज्ञान खत्म होता साक्षात महाँकाल नजर आता है।
मेरे महबुबे मोहब्बत 1
मेरे महबुब तेरे दूर जाने का
हमसे यार खफा हो जाने का
मेरे दिल को कोई अफसोस नही क्योकि
एक रोज सभी छूट जायेगे
अपने हो या बेगाने फिर न कभी नजर आयेगे
फिर भी उपवन मे पुष्प खिलेगे मुस्करायेगे
भँवरे मोहब्बत के नग्मे गुनगुनायेगे
मेरे महबुबे मोहब्बत 2
मेरे महबुबे मोहब्बत के लिये दिल आज रोता है
कैसे महबुब को बताऊ ये जिस्म किराए का घर होता है
महबुबे मोहब्बत मे रंगीन खाबो का महल था हमने
अपनी ख्वाबगाह को खूब सलीके से था सजाया
महबुबे मोहब्बत मे हमने था खुद को भी भुलाया
शिकवा है रब से हमारी ये दिन ही दिखाना था तो क्यों हमको मिलाया
यकबयक
बाद मुद्दत के यकबयक
सरेशाम हुई मुलाकात मेरे महबुब
यु लगा जैसे जन्नत को सरेआम पाया हमने
फिर एक दिन
जब हमको उसने बताया
हमारे दिल मे आज तलक
तेरी मोहब्बत की आरजु जवाँ
लब खामोश फकत नजरें बयाँ करतीं
हाले दिल
मोहब्बत का इझहार फकत नजरो से
यु लगा कि आँखों से बिदाई पाई उसने
चिलमन की ओट से महबुब का दीदार
नजरें डगर तकती मेरे महबुब
मेहबुबे मोहब्बत की दिलकश मुलाकात
झुकी नजरों से मोहब्बत का इझहार किया
खामोश लबो से नजरों ने महबुबे मोहब्बत को हमदम दिल ने स्वीकार किया।
घोर घने जंगल मे
उँचे घनेरे दरख्तो के घमासान बियाबान जंगल मे
भाग दौड़ भरी परिस्थितियों मे
लम्हा लम्हा गुजर रही है जिन्दगी मेरे महबुब
महबुबे मोहब्बत के दीदार से शुकून दिल को आया
कमसिन मासूम जन्नते हूर की झलक जैसे जेठ की तापती धूप मे सावन की बदरिया बरसी
दिल ही दिल मे नूरे नजर को आगोस मे लेके
सावन की बदरिया ने घमासान मचाया मेरे मैखाने के चौबारे
दिल को तसल्ली मिली मिला चौनो शुकून अपार
जन्नते हूर के बिखरे गेसू
जैसे देवराज की चतुरंगिणी सेना आ पहुँची मेरे द्वार
महबुबे मोहब्बत
दोस्ती का सागर
अमृत सागर
आपका हार्दिक स्वागत को बेताब
वेलकम दोस्तों
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जर्रे जर्रे मे उसका नूर है
कायनात मे बड़ा मशहूर है
नंदकिशोर माखनचोर
नटखट नंदलाल गोपाल
ब्रज की माटी मे खेला कन्हा मशहूर है
नंदकिशोर आप कृष्णमय कृष्ण आपमय है।
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जर्रे जर्रे मे मेरे महबुबे मोहब्बत का नूर समाया
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