Saturday, 31 December 2016

Alfazo Me Dhale


Alfazo me dhale shabd gazal suhani ban gai

Darde dil is kazar chhalaka preet shyani hui |

Machalati mauze shaahil ki mahaboob-ae-mohabbat shyani hui 

Kaayanaato fiza me hamaari mohabbat mahakati maadak kahaani hui ||  

- Manohar Yadav "Amritsagar "

Thursday, 29 December 2016

मोहब्बत मोहब्बत मोहब्बत

मोहब्बत करने वालों का अपना जहाँ होता है
इबादत है मोहब्बत नीचे जमीं उपर आसमाँ होता है

अँखियों ही अँखियों में मोहब्बत का इझहार होता है
दिली धडकनों से प्यार स्वीकार होता है

मोहब्बत रब की इबादत और इनायत यार होती है
आशिकों को मोहब्बत में हरेक हद स्वीकार होती है

मोहब्बते महबूब हुस्न परी यार होती है
आशिक की हरेक ख्वाहिश "रब की रजा" स्वीकार होती है

आशियाना ए दिल में बसाया है मेरे महबूब को !
जालिम जमाने की बुरी नजर से बचाने के लिये !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

नूरे रूखसार से

नूरे रूखसार से रौशन ये कायनातों फिजा
रब की अजीमों करीम नेमत नूरे रूखसार सदा
चाँद की दीवानगी अब कुछ समझ आई
वसुन्धरा पे नजर उसे आई जन्नते हूर महबूब मेरी

दीवानों की दीवानगी उजागर आज सरेशाम हो गई
जन्नते हूर हर दिल का गुरूर मेरी महबूबे मोहब्बत हो गई !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Wednesday, 28 December 2016

मोहब्बत का इझहार

गर वक्त है पास तुम्हारें
आओ पास मिलकर गुजारे
कुछ बातें जो है दिलों में
हमारे तुम्हारे हम तुम जानें
एक दूजे को पहचाने
क्या होती हैं मोहब्बत
क्या होते हैं माइने जिन्दगी के
इक दूजे के अरमाँ दिलों के
आओं हम तुम जाने
मोहब्बत बिन अधूरी है जिन्दगी
जिन्दगी अधूरी है बिन तुम्हारे
अधूरी है जिन्दगी की जो कहानी
आज जाने तुम्हारी जुबानी
कभी हमारी जुबानी
वो महकते मोहब्बत भरे लम्हें
जो तेरे गेसुओं के शाये मे थे गुजरे
जब मेरी चाहत को था तुमने जाना
जब ख्वाबगाह की ख्वाहिशे ऱंगी थी तुमसे
जब मेरी नींद में ख्वाब देखती थी तुम
तनहाईयों में अक्सर दीदारे यार होता था
महकती थी जिन्दगी तुम्हारी यादों की महक से
धूल भरी आंधियों में तुम्हारा दीदार होता था
हमारी मोहब्बत की बस एेसी ही कुछ कहानी थी
जो तुम्हारी जुबानी थी
अपने हाथों में हाथ तुम्हारा था
जब पहले पहल तुमने
मुझे मेरे नाम से नही
पृियतम प्यारे पुकारा था
बहुत हँसी वो नजारा था
चाँदनी ने वसुन्धरा का दामन
शबनमी मोतियों से सँवारा था
शेफाली ने महकाई कायनातों फिजा
मोहब्बत से चहका जर्रा जर्रा ए कायनातों फिजा
जब तुमने दिल पे मेरे हाथ रखा
बढ गई थी दिल की धडकन
अचानक पृियतम
मानों भूचाल आ गया हो
एक एक कोशिका ने ली थी अंगडाई पृियतम
मेरे कंधों को मिला
ऐक नया जोश
मोहब्बत का
जो ख्वाहिश थी जिन्दगी की
मानो पूरी हो गई थी आज
महकती हुई जिन्दगी
महकती हुई मोहब्बत
का दीदार किया मैने
जिन्दगी अपनी मोहब्बत का
इझहार किया मैंने
मनोहर यादव " अमृत सागर "

Monday, 26 December 2016

तुम्हारी कृति

इतना हक हे चाहत हमारी
ये कहने का हक कृतिका मुझे दे दो
चाहें बदले में ले लो जिन्दगानी हमारी
तुम्हारी रूबाईयाँ लगती है प्यारी
महकती सी लगती है जैसे फुलवारी
चाँदनी के शबनमी मोतियों की जैसे पूनम से यारी
हरेक संय मे नजर आती है मोहक छवि तुम्हारी
अब और दुरियों को पूर्ण विराम तुम दे दो
जिन्दगी में कोहरा घना छा गया है
इसे अल्प विराम तुम दे दो
महकती हुई जिन्दगी थी इसे वापस मुस्कान तुम दे दो
मनोहर यादव " अमृत सागर "

जिन्दगी की मुस्कान है मोहब्बत

बाद मुद्दत के दीदारे यार हुआ
धडकने बढ गई दिल को एतबार हुआ
मौसम के साथ दिल बदलने का इकरार हुआ
तेरे सदके माफी हम माँगते है जिन्दगी
सूरज के उगने का आज एतबार हुआ
नफरत सी गई थी जिन्दगी से हमें
रूठ गई थी लेखनी जो कभी थी पृियतम
आज दीदारे यार से लेखनीं को मिली साँसे एतबार हुआ
आइने में बदलती शख्सियत का इकरार
रब की इनायत जो बरसी हमपे इकरार हुआ
गुम हो चुकी थी मुस्कान लब से
तुम को देखा तो उसकी रहमत पे एतबार हुआ
गुम हो चुकी थी मुस्कान जिन्दगी से
तुम को देखा तो जिन्दगी का एतबार हुआ
करम यार हम पे करों हमरी पृरणा लौटा दो हमे
एक भटके हुये राही को डगर दिखा दो यार
अब और इम्तहाँ न लो करो एतबार सनम
पथराई आँखों को लौटा दो रौशनी सनम
जिन्दगी का नूर गुम हो चुका है नूरे रूखसार से
जिन्दगी में शबनमी नूर भर के जीने की आरजू दे दो !
मनोहर यादव " अमृत सागर "

बेटियाँ से दुनियाँ जहाँ है

बहुत उम्दा और लाजवाब लिखती हैं आप
बेटियाँ दिलों हमारी होती है
बेटियाँ रूह से प्यारी होती है
बेटियों से तीनों जहाँ है
बेटियों से धरती आसमाँ है
रब का वरदान है बेटियाँ
जिन्दगी का अरमान है बेटियाँ
पूजा और इबादत है बेटियाँ
इन्दृधनूषी छटा बेटियों से है
आंगन में खिली कुमुदनी है बेटियाँ
दिल में बसी शबनमी मुस्कान है बेटियाँ
बाबुल के दिल की पीर है बेटियाँ

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Monday, 19 December 2016

प्यार जिन्दगी है

अद्भुद अदम्य निडर छवि तुम्हारी
मुह ललाट जुल्फ अति शोभित भँवे न्यारी
नैनन से सब कछु कह देती पृतिभा प्यारी
नूरे रूखसार भव्य अनुपम भाव भंगिमा प्यारी !

नियति पतंगे की कुर्बानी मोहब्बत में
फिर फिर शमाँ लगती है बहुत प्यारी
जिन्दगी की बाजी दाँव लगाकर
अंजान भृमर को लगती नन्हीं कुमुदनी अति प्यारी !

Saturday, 17 December 2016

पृियतम प्यारे,

तुम्हारी बाँसुरिया की तान बहुत तडपाती है
बैरन विरहणी की निंदिया उठाती है
चहु ओर फिजा में मादक धुन है गुँजती
पृियतम हरेक पल तुम्हारी मोहब्बत याद आती है
तेरी याँदों के सहारे पल पल गुँजर दाते है
जग में रिपू बहु भाँति तडपाते है
तेरी मोहब्बत के प्यासे ये दो नैन
राह तकत दिन रैन, कहो कबहू मिलेगों चैन
अपनी मोहब्बत की नेमत माधव बरसाओ
तुरत फुरत पृियतम तुम आओ जीवन सफल बनाओ
मेरे जिस्म की रूह तुम्हीं साँवरियाँ
तुम बिन कैसे जिये पृियतम ये बावरियाँ
मनोहर यादव "अमृत सागर "

Friday, 16 December 2016

वक्त

वक्त ने जो कुछ सिखाया हमकों
गाँठ बाँध दिल में गाँठ बसाया उसको

सच्ची मोहब्बत की ख्वाहिश पूरी होती है
दिली आरजू कभी अधूरी नही रहती

मोहब्बत की महक से महकती है कायनात
चिडियों की चहक से महकती है जिन्दगी

मोहब्बत से लबरेज दिलों जिगर है हमारा
मेरा महबूब पूनम की चाँदनी से प्यारा

मोहब्बत की सागरमय से पीते है शबनमी हाला
छलकती सागरमय से शुकूँ दिल को मिलता है

मनोहर यादव " अमृत सागर "

सबब ए मोहब्बत

मोहब्बत में जख्म पायें महबूबे मोहब्बत से हमनें
जिन्दगी दरिया ऐ अश्क हो गई यादों में उनकी

अहसास इस बात का दिल को सदियों से है हमारें
जिन्दगी की चाहत मेरे हमदम चँंदा की शबनमी चाँदनी से प्यारे

दिल की धडकन है सबब ए मोहब्बत मेरे सनम
आरदुयें दिल मेरे महबूब दिलों जाँ से प्यारें

अश्कों को सिवा कुछ भी तो न पाया तुमसें
आरजुयें जिन्दगी में मौत को दिल में बसाया हमने

तेरी मोहब्बत की इन्तहा से वाकिफ यार हुयें !
तेरी मोहब्बत की इबादत के तलबगार हम हुयें !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

વહ મજદૂર હૈ

વહ મજદૂર હૈ


વહ મજદૂર હૈ
ગગનચુંબી ઇમારતો કો આકાર દેતા
વહ માનવ હૈ યા ક્યા હૈ વહ
મજદૂર અજબુર !લાચાર નહી વહ

મહાન આઝાદ હિન્દ કા વાસી વહ
 
ઉસકી મજદુરી ઉસકી મજબુરી હૈ ઉસકી મેહનત કા
કોઈ ક્યા મુલ્ય ચુકએગા
ઉસકે બહતે ખૂન પસીને કા
કોઈ ક્યા મુલ્ય ચુકયેગા !
દ્રઢ સંકલ્પિત હૈ વહ
 વહ ક્ર્તવ્ય્નીષ્ટ હૈ
કર્ત્વ્યપારાયનતા કા બોધ ઉસે હૈ

રાષ્ટ્ર કે પ્રતિ સમર્પિત દેશ કી શાન હૈ વહ
વહ મજબુર હૈ
ક્યોકિ વહ એક અદના સા મજદૂર હૈ
અપને પેટ કી ક્ષુદા શાંત કરને હેતુ
એક બંબુ પે લટક જાતા હૈ
વહ સ્વયં અનભીગ્ય હૈ વાપસ ધરા પે આયેગા
અપને માર્ગ પર અવિચલ !
અવિરામ અગ્રસર હૈ વહ

મજબુર હૈ વહ !ક્યોકિ મજદૂર હૈ વહ
આધુનિક હિંદ કા નીર્માતા હૈ વહ
કોટી કોટી નમન મૈ કરતા

ઉસકી મેહનત પે શિસ જ્હુકાતા હું
ભારત કે ભાગ્ય વિધાતા કો
મૈ હર પલ શીસ નવાતા હું

Thursday, 15 December 2016

सहराओं में खिली कुमुदनी

रब की अजीमों करीम नेमत है मोहब्बत
रब की इनायत है रब का फरमान है
नूरे रूखसार बदलती है मोहब्बत
टप टप टप लबों से टपकती है मोहब्बत
दीनाना ए मयखाना बनाती है मोहब्बत
जिन्दगी को शबनमी जिन्दगी बनाती है मोहब्बत
आशिकी में नित नये गुल खिलाती है मोहब्बत
जिन्दगी में चार चाँद लगाती है मोहब्बत
दीवानगी में अनेकानेक रंग दिखाती है मोहब्बत
बिछडे हुये,आशिकों को मिलाती है मोहब्बत
मोहब्बत के रंगों में रंगी जिन्दगी हँसीन लगती है
कभी मीठी कभी थोडी नमकीन लगती है
मुस्कुराती हुई जिन्दगी कमसिन लगती है
रूठी हुई महबूबे मोहब्बत नमकीन लगती है
कभी सैलाभे अश्क लगती है मोहब्बत
कभी सहराओं में कुमुदनी सी महकती है मोहब्बत
मनोहर यादव " अमृत सागर "

साहिल

साहिल को दरकार है
मोहब्बत की महक की
मौंजों बाँहों में समाहित
करने की उमंग में आज भी
बेकरार है दिल की हरेक धडकन हुजूर !
साहिल हूँ
नियती है इन्तजार मोहब्बत का
मौंजों का क्या मचलती है
साहिल की मोहब्बत में हुजूर !

चाँदनी महबुबे मोहब्बत है हमारी

चाँदनी अपना असर दिखाने लगी है
मोहब्बत की दीवानगी जहन पे छाने लगी है
शबनमी मोतियों की चादर बिछाकर
मोहब्बत में किये थे जो वादें निभाने लगी है
जिस्म पे मोहब्बत की खुमारी छाने लगी है
अब तो हरेक शंय में पृियतम चाँदनी नजर आने लगी है

Wednesday, 14 December 2016

bechen ruh hai ( बेचेन रूह है )




bechen ruh hai.... बेचेन रूह है
beqarar hai jism.... बेचेंन है जिस्म
tuhi yar bata.... तुहि यार बता
ijhhare mohabbat kaise karu..., इझहारे मोहब्बत कैसे करू
mumkin nahi kisi ki soch badalana..... मुमकिन नहीं हर किसी की सोच बदलना
tuhi bata mohabbat ka ijhhar kaise karu...., तुहि बता मोहब्बत का इझहार कैसे करू
dil ko yaki hai ek din maan jaoge.... दिल को यकिं है एक दिन मान जाओगें
ibadate husn yar kaise karu...., इबादतें हुस्न यार कैसे करू
chandani utar aai hai dharati par...., आज चाँदनी उतर आई है जमी पर
tuhi bata mohabbat ka ijhahar kaise karu..., तुही बता मोहब्बत का इजहार कैसे करू
jamana dushaman hai mohabbat ka...., यूं तो सदियों से ज़माना दुश्मन है मोहब्बत का
tuhi bata usase muqabala yar kaise karu.... तुही बता उससे मुलाक़ात यार कैसे करू

Tuesday, 13 December 2016

aashiqi






aashiqi me mohabbat ruh se hoti hai......,
jism ki parava kise yar hoti hai.....,
mohabbat me haya aur paakizagi ka saath....,
ibadate husn rab ki izazat yar hoti hai....,
bade hi furasat ke lamho me rab ashiqo ko gadhata hai......,
apani inayat aur pakizagi se ruh bharata hai...

मोहब्बत





शमाँ परवाने की मोहब्बत से वाकिफ है जमाना परवाने की नियति है शमाँ की मोहब्बत में कुर्बां हो जाना इझहारे मोहब्बत में कुर्बा होकर पर्वाने का रूतबा जाना ! शमाँ परवाने की मोहब्बत का गवाह है मोहब्बत से अंजान जमाना !




मोहब्बत की महक







.सहराओं में जिन्दगीं आबाद है तेरी महक से नित बरसती है मोहब्बत तेरी ऱहमों करम से वीरानाओं में भी खिलती है जिंदगी तेरी इनायत ! महफूज है जिन्दगी तेरी लीलाओं के फज्र से !


मोहब्बत की किश्ती



मोहब्बत की किश्ती में जिन्दगी का सफर आसाँ होता है
हैरान न हो मेरे यार देख मोहब्बत करने वालों को परेशाँ क्यों होता है
मोहब्बत के परिंदें परवाज करते है दिन रात और
सारा जमाना मोहब्बत करने वालों की राह में रोडा होता है

लम्हें प्यार के

हरेक लम्हें को सुहाना बनायें यारो
अपनी मोहब्बत से जमाना महकायें

महबूबे मोहब्बत की डगर गुलाब दलों से सजायें
अपनी मोहब्बत की महक से सहराओं को महकायें

पूनम की शबनमीं चाँदनी के मोतियों से तेरा सिंगारू करू
आ बैठ पास मेरे, तुझे देखू मोहब्बत करू तेरा एतबार करू

दिलों जाँ से तुमसे मोहब्बत करते हैं स्वीकार करते हैं
सिर्फ और सिर्फ तुम्ही तो हो मोहब्बत मेरी दिली इकरार करते हैं

शबेशाम तेरी ही आरजुये जिन्दगी इनायत ए मोहब्बत
यही ख्वाहिश लिये ख्वाबगाह में मेरे महबूब तेरा इन्तझार करते हैं

कारवाँओं में गुजर गई जिन्दगी तेरे इन्तजार में
इस जमीनी हकीकत को मेरे महबूब दिल से स्वीकार करते हैं

दिली गुलशन आबाद है तुम्हारी मोहब्बत की महक से
जिन्दगी रंगी है इन्दृधनुषी रंगों में तुम्हारी पायल की खनक से !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Monday, 12 December 2016

वफाये वक्त

वक्त के मुताबिक कायनातों फिजा रंग बदलती है
वफा ए मोहब्बत ता उमृ साये में यार मचलती है

जिन्दगी का करवाँ हरेक पल नित नये रंगों में ढलता है
महबूबे मोहब्बत के गेसुओं के तलें प्यार परवान चढता है

अंजान डगर का मुसाफिर तेरे नाल पथ पे बढ जाउँगा
हार कदापी नहीं मानूँगा मंजिल अवश्य ही पाउँगा

आदमियत को रंग बदलते देख आज गिरगिट भी हैरान है
नोटबंदी में मारी गई ममता कहती जनता परेशां है

केजरी के कजरारे नयन नित नई कवायत से परेशाँ हैं
कहते हैं नोटबंदी साजिश नरेन्द मोदी की जनता परेशाँ हैं

मनोहर यादव "अमृत सागर"

Sunday, 11 December 2016

नूरे रूखसार से रौशन है जिन्दगी

नूरे रूखसार से रौशन है जिन्दगी
फकत खामोशी सबब ए मोहब्बत यार होती है

नजरों ही नजरों में इकरार ए मोहब्बत होता है
दिल की ख्वाहिश महबूबे मोहब्बत प्यार होता है

आबाद है गुलशन उनकी मोहब्बत की महक से
जर्रा जर्रा ए कायनात मोहब्बत की महक से वाकिफ है

मोहब्बत अब इबादते हुस्न यार हो गई
जिन्दगी महबूबे मोहब्बत की महक में खो गई

उनकी मोहब्बत से बेकरार दिल को आता है करार
दिल की हरेक धडकन उनके सैलाभे मोहब्बत को बेकरार

यही तो मोहब्बत हा यही तो प्यार
इबादते हुस्न इनायते रब मेरे यार

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Saturday, 10 December 2016

गुड मार्निंग जिन्दगी

बहुत खुबसूरत सुबहों मुबारक हो तुम्हें !
शबनमी चाँदनी रातों में महबूब इन्तजार करते हैं !
मादक शेफाली की महक से महकती है फिजा !
बेसब्री से जिन्दगी तेरा ही इन्तजार करते हैं !

दास्तांने दर्दे दिल

दास्तांनें दर्दे दिल उनकों ही सुनायेगें !
मोहब्बत में हरेक हद से गुजर जायेगें !

मोहब्बत की सरगम जो छेडेगें
मोहब्बत भरे अल्फाजों में सरगम समायेगें

दरिया ए जिस्म में रूह बनके गोते लगायेंगें
उनकी मोहब्बत को इबादत समझके अपनायेंगें

तनहाईयों में ख्वाबगाह उनकी यादों से सजायेंगें
बाँसुरियाँ की मादक धुन को तन मन में बसायेंगें

सर्द सर्द सुबहों में कुमुदनी को गले लगायेंगें !
चाँदनी के शबनमी मोतियों की माला उम्हें पहनायेंगें !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Thursday, 8 December 2016

मेरे महबूब

बिखरे हुये गेसू नूरे रूखसार जब याद आता है
कसम पाक परवरदिगार की रातों की नींदे उडाता है

तनहाईयों में मचलने लगते है अरमाँ दिल के
जब मेरे महबूब का बूत ख्वाबगाह में आता है

कहावतें

कुछ कहावते हैं भाई
जो दुनियाँ वालों ने बनाई
आपकी बात पढके
हमें यक ब यक याद आई
कुदरत का करिश्मा है
या रब की खुदाई
महकती हुई कस्तूरी
रब ने
मृग की नाभी में छुपाई
महकती हुई कुमुदनी
चहकती हुई कायनात
दमकती हुई दुनियाँ
ठहाके मारती जिन्दगी
कभी सिसकते पल
किशान का हल
बादलों की गोद खेलती बिजुरियाँ
मेरे महबूब ने
मेरे साँवरिया ने है बनाई

रब की इबादत है जिन्दगी

जिन्दगी रब की इनायत है कभी इनायते रब
कभी इबादत रब की है जिन्दगी

दर्दे दिल दर्दे जिगर इनायत उनकी
जो महबूबे मोहब्बत बन दिल में बसे हैं हमारे

जिन्दगी मेरी बीत गई कारवाओं में
कभी सहराओ की मदमस्त हवाओं में

इस जिस्म की रूह पाक परवरदिगार कन्हाई
जिसकी मोहब्बत मे सारे जहाँ की दौलत बिसराई

मनोहर यादव " अमृत सागर "

समय

ये समय है
परिवर्तनशील
वक्त का पहिया चलता है
चलता ही रहेगा
वक्त का दरिया प्यारे बहेगा
एक दिन एसा आयेगा
जब पुन:मिलन निश्चत है
उस वक्त
शेफाली की मादक महक से
महकेगी कायनातों फिजा
जन्नत सी चहकेगी धरा
जिस्म की रूह हो तुम
दिल का गुरूर हो तुम
तुम्हारी साँसो से महक रहा है दिल
हमारा मिलन
नियती है कायनात की
अँखिंयों में नमी
लबों पे मुस्कुराहट
यही है पृियतम
तुम्हारी चाहत
शेफाली सी महकेगी
एक बार फिर जिन्दगी हमारी
तुम्ही हो मोहब्बत
जिन्दगी से प्यारी

मनोहर यादव" अमृत सागर "

हमसफर

हमसफर साथ हो तो सुहाना हो जाता है सफर
बगैर हमसफर के जिन्दगी भर उबाऊ हो जाता है सफर
हमसफर बदल जाय तो थम सा जाता है सफर
हम सफर थक जाय तो थम सा जाता है सफर

तपिश

आग में तपने से कुंदन में निखार आता है
काँटों के बीच खिलते गुलाब पे प्यार आता है
यू तो कुमुदनी खिलती है मेरे यार कीचड में
कुमुदनी की महक ओ रौनक से कायनातों फिजा सँवर जाती है

अपने कर्मो से इन्सान जन्नत ओ नरक सा फल पाता है
कठोर मेहनत ओ संघर्ष से इन्सान अादमी बन जाता है

जिन्दगी

कभी सैलाभे अश्क है जिन्दगी
कभी खुशियों का समुन्दर है
जियो हमसफर बनाके साँवरिया को
मेरे यारो जिन्दगी मौजों का मंदिर है

सहराओं के मानिंद गमें जिन्दगी यार होता है
महबूब की मोहब्बत में बासंती फिजाओं सा खुमार होता है

कारवाँओ में गुजर जाती है जिन्दगी यार
मोहब्बत की मादक महक से जिन्दगी मे आता है निखार

इस पिंजर में कैद रूह तुम्हारी ही तो है कन्हाई !
मेरे महबूब काहे तुमने सुध बुध महबूब बिबराई !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

जर्रे जर्रे में समाई तेरी मोहब्बत तेरा ही नूर है

जर्रे जर्रे में समाई तेरी मोहब्बत तेरा ही नूर है
मेरे पृियतम साँवरिया इस दिल की धडकन है तू , तूही गुरूर है
अमृत सागर परिवार मे आपका हार्दिक स्वागत है
Friends aabhar please join amritsagar
मोहब्बत से लबरेज कविताओ का खजाना
साँझ ढले तो आ जाना
अमृत सागर मे डुबकी लगाना चले आना

Wednesday, 7 December 2016

रब का वरदान है बेटियाँ

रब का वरदान है बेटियाँ
कायनात की शान है बेटियाँ
बेटियों से ये दुनियाँ ये जहाँ है
बेटियों से वसुन्धरा और आसमाँ है
बेटियों से वजूदे इन्सान है
बेटियाँ रब का वरदान है
हमारा वज़ूद है बेटियां 
हमारा प्यार है बेटियां 
दिल का इक़रार है बेटियां 
रब का आशीर्वाद है बेटियां  

बाबुल का आँगन

बाबुल का आँगन 
आज फिर सूना सा है
मोहब्बत की तडप में

दिल की धडकन डूबी सी है
जिस आँगन में मोहब्बत से
परवान हुई ममता बाबुल की
अँखिंयों के सैलाभे अश्क में
बाबुल का चौबारा भीगा है

बेताब है नजरें हमारी

बेताब है नजरें हमारी 
दीदारे यार के लिये
तडपता है दिल

मोहब्बत के इझहार के लिये
भीगा है ममता मयी आँचल
अँखिंयों में सैलाभे अश्क समाहित
खाली खाली है ममता मयी चौबारा
बाँहें पसारे फिर एक बार प्यार के लिये

महुए की नन्हीं कली

जब महुए की नन्हीं कली मुसकाती है 
दिल की धडकन बढने लगती और फिजा मचलती है
महुए की मादक महक से
दिल में खुमारी छाती है

एसे में तनहाईयों में पृियतम तुम्हारी याद बहुत तडपाती है
पृियतम के वियोग में महुए की मादक महक अगन लगाती है विरहाग्नि को हवा मादक महक देती है सोई उमंगे जगाती है
जब महुए की मादक हाला कंठ से नीचे जाती है
पोर पोर मचलने लगता है जिस्म में जान मानो आ जाती है
फिर चहु दिसी रूप सी सुरबाला सागयमय संग नजर आती है
प्यालों पे प्यालों का दौर जब चलता है खुमारी यौवन पर आती है 
निशा यौवन पर होती है कायनात बहकने लगती है
नजरों ही नजरों में सुरबाला मादक यौवनरस हाला पिलाती है
बाला की सागरमय से यारो अविरल सागरमय छलकती है
एसे मे रूपसी सुरबाला पल पल रंग बदलती है !

आईना बहुत रंगीन मिजाज



तुम कभी आइने मे खुद को निहारा न करों
गर वो तुम से मोहब्बत कर बैठा तो मेरा क्या होगा


ये आईना बहुत रंगीन मिजाज यार होता है
बखूबी इस बात से वाकिफ होता है कैसे प्यार होता है

नन्हीं कुमुदनी है तू परदेशी भृमर के गँजन से अंजान है
भृमर कई उपवनों में खेला खाया तू कुमुदनी नादाँ है

बेखबर हो तुम मोहब्बत दर्दे दिल बढाती है
तनहाईयों में यादें के शाये बहुत तडपाते हैं

परदेशी भृमर की रूसवाईयों से अभी अंजान हो तुम
अल्हड , कमसिन , भोली कुमुदनी अभी नादाँ हो तुम

मोहब्बत के परवानों के नसीब में बमुश्किल शुकूँ आता है
जब परदेशी भृमर कुमुदनी की मादक बाहों में रात बिता फुर्र हो जाता है

मनोहर यादव " अमृत सागर "

आशियाना ए दिल

अब भी आशियाना ए दिल आबाद है तुम्हारी हँसी यादों से !
ता कयामत तेरे इन्तजार में जिन्दगी गुजार देंगें हम ए सनम !
बचपन गुँजरा बीता यौवन तेरे ही शबनमी मादक ख्यालों में !

तनहाईयों में ख्वाबगाह सदा ही आबाद रही तुम्हारी मखमली यादों में !

samvariya bahut satave sakhi

मोहे पनघट पे नंदलाल की याद सतावे सखी
याद सतावे बडा तडपावें सखी नींद न आवे 
नंदबाबा को लाडलों कान्हा यशोमति को दुलारों

देवकी वसुदेव को नन्हों साँवरा दिल को बहुत तडपाये

टूटे हुये दिल पे शबनमी मोहब्बत की बरसात



 टूटे हुये दिल पे शबनमी मोहब्बत की बरसात
ये बसंत के मौसम पूनम की मादक चाँदनी रात


मोहब्बत की मादक महक से महकती जिन्दगी
जब से महबूबे मोहब्बत का मिला साथ

जिन्दगी की हरेक आरजू हर पल मिले महबूब का प्यार
ज्यों अवनी और अम्बर मिलते महकती शबनमी बरसात

दिलों के मिलने से महकती है फिजा चहकती है कायनात
जब चाँदनी के शबनमी मोतियों की चादर पर महबूब से होती मुलाकात

मोहब्बत और बेवफाई का चोली दामन का सा नाता है
उन्हें गुस्सा आता है हमारी मोहब्बत पर,हमें उनके गुस्से पे प्यार आता है

मोहब्बत में वफा से कतई अंजान नही है हम
हैरान है वफा ए महबूब से तनिक भी परेशां नहीं है हम

मनोहर यादव " अमृत सागर "

तेरी ही मोहब्बत का सहारा है

तेरी ही मोहब्बत का सहारा है
वरना दुनियाँ में कौन हमारा है
मतलब के लिये दुनियाँ यारी करती है

हमें तेरी मोहब्बत से मिलता सहारा है


तूही मोहब्बत है तू ही प्यार हमारा
तेरी यारी की शमाँ से रौशन जिन्दगी हमारी
तेरे नूरे रूखसार से रौशन ये दुनियाँ ये जहाँ
जर्रा जर्रा ए कायनात ये जमीं ये आसमाँ


तेरी मोहब्बत में सभी मौसम सुहाने लगते हैं
तेरी मोहब्बत तेरे नूर में सभी दीवाने से लगते हैं
चाँदनी की सी पाकीजगी से लबरेज है मोहब्बत तुम्हारी
दिल में दिलकश छवि मेरे महबूब लगती बहुत प्यारी


मेरी इन अँखिंयों में बसी महकती दिलकश छवि
मेरे महबूब लगती है बहुत अच्छी और बहुत प्यारी
मेरे महबूब तेरे दामन में कायनात समाई है
तेरी मोहब्बत की महक मैने दिल मे बसाई है


तेरे पीताम्बर से रौशन ये दुनियाँ ये जहाँ है
तेरी बाँसुरी की धुन में दीवाना जमीं आसमाँ है
मेरी अँखिंयाँ पथराई है दीदारे यार के इन्तजार में
जाने कब वो घडी आयेगी जिन्दगी में जब तेरा दीदार होगा


तेरी जमीं की माटी लगती है माखन मिसरी से प्यारी
तेरे दरश की भूखी ये दो अँखिंया हमारी
इतना ही काफी है मेरे महबूब तू मेरा है
तनहाईयाँ आबाद है क्योकि तेरी यादों का डेरा है

मनोहर यादव " अमृत सागर "

हौले हौले मोहब्बत बरस रही है

हौले हौले मोहब्बत बरस रही है
दिल की धडकन अहसासे मोहब्बत से चल रही है


पल पल हरेक पल जिन्दगी रंग बदल रही है
अरमानों की भट्टी में उनकी यादें पिघल रही हैं

दीवानगी के आलम में दुनियाँ जहाँ को भुलाया हमने
महबूबे मोहब्बत की शबनमी यादों को दिल में बसाया हमने

जर्रे जर्रे ए कायनात में उसकी मोहब्बत की महक समाई है
बाद मुद्दत के बात कृतक मनोहर की समझ आई है

ये मेरे महबूबे मोहब्बत की खुदाई है
बडी ही पाकीजगी से मेरे महबूब ने दुनियाँ बनाई है

शमाँ ए मोहब्बत से रौशन है जिन्दगी औ कायनात
मेरे महबूब के हँसी जलवे का दीदार जरूरी है जिन्दगी के लिये

मनोहर यादव " अमृत सागर "

रब से मिलती है रहमत

रब से मिलती है रहमत
दुआओ से मिलता एतबार
मेरी किश्ती का खेवनहार जब रब है

जिन्दगी को उसकी मोहब्बत पर तहेदिल से एतबार

नूरे रूखसार से रौशन ये कायनात
ये फिजा ये अम्बर ये चाँद तारे ये नजारे
दिल की हरेक धडकन रहबर तुझे पुकारे
इन्तजार की इन्तहा न हो जाये मेरे रहबर आजा रे

फूलों की तरह सदा मुस्कुराओ
अपनी महक से फिजा महकाओ
चिडियों की तरह चहकती रहों
भृमरों की तरह नग्में मोहब्बत के गुनगुनाओ

जिन्दगी

जिन्दगी रब की इनायत है
कभी इबादत रब की है जिन्दगी


दर्दे दिल दर्दे जिगर इनायत उनकी
जो महबूबे मोहब्बत बन दिल में बसे हैं हमारे

जिन्दगी मेरी बीत गई कारवाओं में
कभी सहराओ की मदमस्त हवाओं में

इस जिस्म की रूह पाक परवरदिगार कन्हाई
जिसकी मोहब्बत मे सारे जहाँ की दौलत बिसराई

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Tuesday, 6 December 2016

शुभ-प्रभात





शुभ-प्रभात 
जिस दिन से मोहब्बत की  डगर पे चलने लगा हूँ 
तुम्हारी मोहब्बत पाने को व्याकुळ रहने लगा  हु  
चोरी-चोरी /चुपके चुपके तुमसे मोहब्बत  करने लगा हु 
 कृती  गीत  मनोहर अपने ही  साये  से  डरने  लगा हु  

रहबर

रब से मिलती है रहमत
दुआओ से मिलता एतबार
मेरी किश्ती का खेवनहार जब रब है
जिन्दगी को उसकी मोहब्बत पर तहेदिल से एतबार

नूरे रूखसार से रौशन ये कायनात
ये फिजा ये अम्बर ये चाँद तारे ये नजारे
दिल की हरेक धडकन रहबर तुझे पुकारे
इन्तजार की इन्तहा न हो जाये मेरे रहबर आजा रे

फूलों की तरह सदा मुस्कुराओ
अपनी महक से फिजा महकाओ
चिडियों की तरह चहकती रहों
भृमरों की तरह नग्में मोहब्बत के गुनगुनाओ

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव