Tuesday, 31 January 2017

जिन्दगी

मेरी साँस
जरा ठहर जा
हवा मेरे महबूब की
मादक महक लेके आई है
चहक उठा है दिल
कायनातों फिजा
आज मुस्काई है
अचानक पलक
जब झपकी
महबूबे मोहब्बत की महक से
ख्वाबगाह मुस्काई है
मेरे महबूब को अपने साथ लेके
निशा ख्वाबगाह मे जो आई
जिन्दगी महक उठी
फिजा चहक उठी
कायनात फिर मुस्काई है
सिर्फ तुम्ही तो हो जिन्दगी
एक आरजुये जिन्दगी
यह सबब ए मोहब्बत तुम्हारी
जिन्दगी ख्वाबगाह मे
तसरीफ मेरे महबूब लाई है

मनोहर यादव "अमृत सागर"

नूरे रूखसार

तुम्हारी मोहब्बत में बिताये वो स्वर्णिम पल याद आते हैं
दिल की बेचेनी बढाते हैं तनहाईयों में बहुत सताते हैं

गमें जिन्दगी हुई थी रौशन तुम्हारे नूरे रूखसार
वो मोहब्बत में लबरेज हँसी लम्हें दिल की धडकन बढाते हैं

दरियायें जिस्म की मोहताज मोहब्बत नही होती
आशिकी शक्लों सूरत की मोहताज नहीं होती

आज ख्वाबगाह महक उठी उनकी रूहानी महक से
बयार ओ बासंती महबूब के आने का सबब फकत होती हैं

जहाँ से कूच करने में तनिक भी देरी नही करते दीवाना ए मोहब्बत
उनकी मोहब्बत की महक से महकती है कायनातों फिजा यारों !

मनोहर यादव "अमृत सागर"

बसंत आगमन

नव बसंत आगमन महकने लगी कायनातों फिजा
महक लगी कुँज गलियाँ महक उठा वृन्दावन
नित नव कोंपल नित नव कलियाँ नित नव फूल
नव केशर मुस्कान महक उठी वसुन्धरा और धूल

अठखेलियाँ करती सी लगती वसुन्धरा महकती धूल
आमृ मंजरी खिलखिलाके हँस रही कुहूक उठी कोयल
कुमुदनी चहक उठी बासंती बेला बेला में
गुँज उठी कायनातों फिजा उठी भृमर हूक
रितुराज बसंत आगमन भयो री सखी मत अब भूल

मनोहर यादव "अमृत सागर"

Monday, 30 January 2017

तेरी मदहोश आँखें

तेरी आँखें है या छलकते हुये मय के पैमाने
सहराओं में दहकती उमस या मोहब्बत के अफसाने
तेरे लब ज्यों छलकते हुये मादक मयखाने
हम तो तेरे हो ही चुके अंजामें मोहब्बत रब जाने

रूह में बसी केशर सम मादक महक तेरे जिस्म की
उफ ये तिलिस्मी खजाना ए मोहब्बत मेरी जिन्दगी रब जाने
तुही मुकद्दर तुही चाहत ए मेरे महबूब मेरे सनम
तुझे भुलाना जिन्दगी को अलविदा कहना रब जाने !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Sunday, 29 January 2017

तनहाईयाँ

तनहाईयों में फकत तेरी यादों का ही सहारा है
वरना जिन्दगी ओ जहाँ ने कर लिया किनारा है

मौत सबब समापन जिन्दगी यार होती है
हमें जीते जी तेरी मोहब्बत ने मारा है

हम तो पहले ही जिन्दगी तेरे ही नाम लिख चुके है सनम
अब तो ये जिन्दगी फकत तेरी यादों के सहारे है

मोहब्बत में चालाकियों से अंजान है हम
इसके चलते महबूबे मोहब्बत ने कर लिया किनारा है

नूरे रूखसार से रौशन से रौशन थी जिन्दगी अपनी
अब तो मोहब्बत में गर्दिशों ने दामन पसारा है

यकीं हमकों था मौंजें एक दिन आयगीं जिन्दगी में
साहिल ने इसी उम्मीद में जीवन अपना गुजारा है

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Saturday, 28 January 2017

बेरूखी

उनकी बेरूखी जाने कैसे सबब ए मोहब्बत हो गई
सारी जिन्दगी महबूब की शबनमी मोहब्बत की नजर हो गई
मोहब्बत की पाकीजगीं का एतबार दिल को हुआ
माऩों शेफाली की शबनमी महक से जिन्दगी को प्यार हुआ

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Friday, 27 January 2017

मोहब्बत वरदान रब का

गमें जिन्दगी के अँधेरे हमें रास आने लगे है
ख्वाबगाह की तनहाईयों में बहुत अधिक सताने लगे हैं

मोहब्बत अजीमों करीम नेमत रब की मेहर यार होती है
ये इबादत ओ इनायत रब की मेरी सरकार होती है

मोहब्बत का शबब सैलाभे अश्क यार होता है
मोहब्बत में जाँ की बाजी खेलने को महबूब तत्पर सरकार होता है

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Tuesday, 24 January 2017

मोहब्बत इनायत रब दी

नजरों ने कहा दिल से
मिल गई जिसकी थी तलाश
जिसकी मोहब्बत का अहसास
आज वही मेरे दिल के पास

शेफाली महकती हवा
देती संदेश महबूबे मोहब्बत मेरे यार
नूरारी रंगो महताब से
चहकती है जिन्दगी मेरे महबूबे यार

सहराओं की महक कस्तूरी से
मृग वन वन भटकत मेरे सरकार
मोहब्बत की शबनमी महक से
महकती है जिन्दगी मेरा प्यार
मेरी यार चाँदनी पूनम मेरा प्यार

महुए की महक से मदमस्त है
सारी कायनातों फिजा मेरे यार
दिल दुनियाँ महक उठा है
मोहब्बत की मदभरी महक से
मेरे दिलबर मेरे सरकार

अजीमों करीम नेमत है
पाक परवरदिगार की मोहब्बत
जो उसकी नेमत ओ मोहब्बत
मेरी जिन्दगी शबनमी मोहब्बत प्यार !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

जिन्दगी

जिन्दगी की डगर बहुत काँटों भरी हमने जानी है
फिर भी हर हाल में मोहब्बत ऩिभानी है
विपत्तियों से टकराना ही जिन्दगी है हमने ठानी है
महबूबे मोहब्बत की फकत चाहत ही जिन्दगानी है
आँखों अश्के मोहब्बत जिन्दगी बितानी है
मोहब्बत की चाहत में डगर सुगम बनानी है
तेरी मोहब्बत में जाँ फकत हमने लुटानी है
ये बात दिलों दिमाग से हमने दिल में ठानी है
लबों पे शबनमी मुस्कान मोहब्बत भरी
मोहब्बत ही जिन्दगी हा ये बात हमने जानी है
दिली जजबात लबों बयाँ आज करेंगें हमने ठानी है
पाक परवरदिगार के रहमों करम से जिन्दगानी हमने बितानी है
हर हाल में अपनी माशुक को अपनी जिन्दगी बनानी है

मनोहर यादव " अमृत सागर "

कशिश

तेरी नजरों में कशिश है मोहब्बत भरी
जिन्दगी तुझमें जिन्दगी का दीदार किया मैनें
घायल दिल हुआ बगैर तीरों खंजर के
जिन्दगी तेरी मोहब्बत पर एतबार किया मैनें !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

खिडकी

पहले पहल इसी खिडकी से दीदारे यार किया मैनें
महकती वादियों में अपनी मोहब्बत का इझहार किया मैनें
इसी खिडकी में चुपके चुपके तेरा इन्तजार किया मैनें
दुनियाँ को मोहब्बत भरी नजरों से पहले पहल देखा यार मैनें
उमडते घुमडते घनियारे मेघों का एतबार किया मैनें
पूनम की शबनमी चाँदनी की मोहब्बत का दीदारे यार किया मैनें
शबनमी मोतियों की मरमरी चादर पर बेकरार हुस्न का दीदार किया मैनें
महकती शबनमी कायनातों फिजा का एतबार किया मैनें
कुदरत का सिंगार करते सप्तरंगी इन्दृधनुष का दीदार किया मैनें
बसंत को कुदरत का सिंगार करते दीदार किया मैनें
ये वही खिडकी है मेरी नजरो जिन्दगी का दीदार किया पहले पहल !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Sunday, 22 January 2017

मौंजो की अठखेलियाँ

मौंजों से मोहब्बत किश्ती की
मौंजें भव पार लगाती हैं
आवेग में मौजें जब आती हैं
साहिल की बाहों में समाती हैं

मौजें अठखेलियाँ करती किश्ती से
अपनी गोद खिलाती हैं
अंजान भंवर के चकृव्युह से
शक्तिशाली मौंजें ही किश्ती बचाती हैं भव पार लगाती हैं

जग जाहिर है मोहब्बत साहिल से मौंजों की
मौंजें सरेशाम साहिल की बाहों में समाती हैं
अंजान भृमर के शैतानी व्युह से किश्ती को बचाती हैं !

मौंजों का छेत्र अति विशाल है होता सागर में धमाचौंकडी मचाती हैं
थक हार जब बहकने लगती पृियतम साहिल की गोद समाती हैं !

माँझीं से मोहब्बत मौंजों की यार समझ नही आती है
माँझी की मोहब्बत में डूबके मौंजें किश्ती को किनारे लगाती हैं !

हरेक किश्ती को मिलता नही किनारा भृम जाल में कुछ फस जाती हैं !
एक बार भृमित भृमजाल में फसी किश्ती कभी किनारा नही पाती हैं अपना वजूद गँवाती है !

मौंजें बेपनाह मोहब्बत साहिल से हैं करती ,
वक्त बेवक्त बाहों साहिल की में समाती हैं
साहिल की मोहब्बत में एसे हैं डूबती
मौंजें अपना असतित्व गँवाती हैं साहिल की मोहब्बत पाती हैं

मनोहर यादव " अमृत सागर "

दीदारे यार

बादलों से दीदारे यार करते हैं चाँद की तरह
मोहब्बत तुमसे करते हैं अंजान भृमर जाल की तरह
याद तुम्हें करते हैं उपवन में बहार की तरह
मोहब्बत तुम्हें करते हैं दिले राजदार की तरह !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

तमन्ना ए मोहब्बत

तुमसे मोहब्बत करने की तमन्ना दिल में रखते हैं
मगर जब सामने पाते हैं कहना भूल जाते हैं
जब तुम्हारी महकती जुल्फें हवा में लहराती हैं
हम अपनी सुध बुध तक यार भूल जाते हैं भूल जातो है
जब तुम्हारे महकते शबनमी जिस्म की महक हवाओ से पाते हैं
तुम्हारी कसम चुम्बक की मानिंद हम खिचते हुये चले आते हैं
तुम्हारी नूरे रूखसार से उज्जवलित है कायनातों फिजा
तुम्हारे नुरे रूखसार में हम खुद को तुम्हारी मोहब्बत में कैदी पाते हैं !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

मोहब्बत का एतबार

पूनम की चाँदनी के शबनमी मोतियों में दीदारे यार करते हैं
ए फलक की चाँदनी हम अपनी मोहब्बत का एतबार करते हैं !

आँधी तुफाँ और मादक मौंजों का दिली एतबार है
सहराओं से मोहब्बत है जिन्दगी का एतबार है !

शबनमी चाँदनी के शबनमी मोतियों से सिंगार ए हुस्न यार करते हैं
हम अपनी मोहब्बत पे सरेशाम जाँ निशार करते हैं !

परवाना हूँ शमाँ ए मोहब्बत का मेरे महबूब मेरे यार
जान की बाजी लगाकर कर करता तुमसे मोहब्बत तुमसे प्यार !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

अदब

हर किसी के अदब की अदा अलहदा यार होती है
बा अदम निगाहें उनकी खिदमत में झुककर नतमस्तर होती हैं !

हम दिल से खिदमत औ अदब सरकार करतें हैं
उनकी रहनुमाई में सजदा ए सरकार करते हैं !

पाक परवरदिगार से यही इल्तजा मेरी सरकार करते हैं
मोहब्बत हैं जानशीं हैं हम उनकी मोहब्बत का एतबार करते हैं !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Friday, 20 January 2017

एतबार ए मोहब्बत

तेरी आँखों में आँखें जो डाली
खुदी का दीदार हुआ
दुनियाँ के तिलिस्म को भुलाया
तेरी मोहब्बत में दिल बेकरार हुआ
गुमाँ हुआ तुमसे मोहब्बत है हमें
जिन्दगी को तेरे होने का एतबार हुआ
गार्डन गार्डन हुआ दीवाना दिल
तेरी मोहब्बत भरी महक पे नजरों को इकरार हुआ
तुमसे मिलने हमने जाना
इबादत है मोहब्बत
तुमने दिल के दरवाजे पे दस्तक जो दिल
मोहब्बत में दिल दीवाना मेरे यार हुआ
गोकुल में खोजा तुझे
कुँज गलियों मे ढूँढा
बँस बिरह में तेरी मोहब्बत का दीदार हुआ
आशियाना ए दिल जब झाँका मैने
अपने दिल को गुमाँ फिर एक बार हुआ
तेरी मोहब्बत भरी महक से दिल
चाँदनी की सी शबनमी मोहब्बत
पर दिल को इकरार हुआ
अमृत सागर की मादक मौंजो को
फिर एक बार साहिल की मोहब्बत पर एतबार हुआ !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Sunday, 15 January 2017

शबनमी मोहब्बत


तुम्हीं को तुमसे चुरा लेंगें
महक शबनमी मोहब्बत की
दिल में हम बसा लेंगें
मोहब्बत में वफा करके

अपना तुम्हें बना लेंगें
मोहब्बत के बंधन में बाँध
आशियाना-ए-दिल में
सदा सदा के लिये बसा लेंगें

मोहब्बत के बंधन को
भला कैसे तोड पाओगें
जनम जन्मांतर तक
हमारे दिल में बस जाओगें

हरेक जनम तुम्हें पाने की
ख्वाहिश ऱब से यार करेंगें
तुम्हीं जिन्दगी हो हमारी
अपनी जाँ दिल में बसा लेंगें !

- मनोहर यादव " अमृत सागर "

मोहब्बत भरे अल्फाज

मोहब्बत भरे अल्फाजों से
उसने दिल पे वार किया
कसम पाक परवरदिगार की
एक ही झटके में दिल को
तार तार किया

उफ ना कर पाये थे हम
बाहों में भरकर लबों से
लबों को बे-अल्फाज किया
अमृत का स्वाद हमने चखा
जन्नते हूर के होने का एतबार किया

उनके खामोशी भरे वार से
घायल सदा के लिये यार हुये
महबूबे मोहब्बत की महक
पोर पोर में समाई गिरफ्तार हम हुए

चाँदनी के शबनमी मोतियों की मानिंद
दो जिस्म एक दूजे की मोहब्बत में गिरफ्तार हुये !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

दौलत

जहाँ की दौलत हमने पाई
शुकूँ अलविदा ए जिन्दगी हुयें
सब कुछ पाके भी
उनकी इनायत के मोहताज हम हुयें !
जिन्दगी में सब कुछ दौलत यार नही होती
महबूबे मोहब्बत दौलत की खनक में गिरफ्तार नही होती !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

प्यास नजरों की

नही बुझती प्यास नजरों की
पल पल हरेक पल !
दीदारे यार की ख्वाहिश दिल में रहती है !
हर पल हर घडी लुभाती
तान बाँसुरिया की !
जिस्म की रूह तुम्हीं हो
साँवरियाँ हर साँस कहती है !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

मोहब्बत दो

मोहब्बत में सियासत से अंजान नही हूँ मैं
तनिक भी विचलित और परेशाँ नही हूँ मै
मोहब्बत पाक परवरदिगार की अजीमों करीम नेमत यार होती है
जमाने की लख रूसवाईयों के बावजूद महबूब मोहब्बत में गिरफ्तार होती है

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Saturday, 14 January 2017

मोहब्बत

बासंती फिजा में नूरे रूखसार से आया ऩिखार
केशर सम मादक महक से महकी कायनातों फिजा

पूनम की चाँदनी से टपकती शबनमी मोतियों की फुहार
महबूबे मोहब्बत की महक से महकता ये जहाँ संसार

नूरे रूखसार से निखर गई है चाँदनी
चाँदनी के शबनमी मोतियों से निखरा हुस्नों शबाब

हुस्नों शबाब से महकती है  कायनातों फिजा
जिन्दगी रौशन होते हैं नूरे रूखसार से सरेशाम

मौसम ने ली अंगडाई चहक उठा हुस्नों शबाब
पल पल चाँदनी से टपकती शबनमी मोतियों की फुँहार !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

कभी कभी जिन्दगी में

कभी कभी जिन्दगी में ऐसा वक्त भी आता है
अपना शाया भी साथ छोड जाता है

दिली तमन्नायें लेती है अंगडाई
महबूबे मोहब्बत सरेशाम मुस्कुराता है

कभी कभी जिन्दगी में कोहरा यार छा जाता है
नूरे रूखसार से जिन्दगी में भोर यार आता है

मासुमियत भरी मुस्कान का वजूद है जिन्दगी
कभी सैलाभे अश्क कभी खुशियों की महक है जिन्दगी

वो पृेरणा है हमें जिनकी चाहत में डगर भटक गये थे हम
नई डगर बना कर उनकी महक से आज दो चार हैं !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Friday, 13 January 2017

श्याम सखा

कुँज गलिन में गूँजत किलकारी
नंदलला कान्हाई अवधबिहारी
महकत माटी चहकत हवाँ गुँजत
मोहनी धुन साँवरियाँ की बाँसुरिसा मतवारी
महकत माटी ज्यों माखन मिसरी
यु लगत जमुना के तट खेलत बाँके बिहारी
तरस गई मेरी दऊ अँखियाँ
दरस को तेरे गिरीधारी
अजहूँ निहारत डगर तिहारी
मनोहर सखा गिरीधारी
अब तो आजा मेरे साँवरियाँ
सुदामा सखा गिरीधारी

मनोहर यादव " अमृत सागर "

महकती यादें

तेरी यादों का सहारा न होता
दुनियाँ से किनारा कर लेते
दुनियाँ से किनारा कर लेते
हम छोड के दुनियाँ चल देते
हम छोड के दुनियाँ चल देते
आशियाना ए दिल अाज भी आबाद है तेरी हूँ सी यादों से
जिन्दगी चल रही है वादों की बैशाखी पर
तेरी यादों और यादों से आबाद है
गुलिस्ताँ ए जिन्दगी मेरे हँसी यार
तुम्ही हो मोहब्बत तुम्ही हो एतबार

मनोहर यादव " अमृत सागर "

यादें

जब कभी तुम्हारी
याद आती है
बहुत याद आती है
तनहाईयों में
एक वही तो है जो
हमेशा साथ निभाती है
कसम तुम्हारी
तुमसे पहले पहुँच जाती है
आशियाना ए दिल में
परत दर परत
पल पल हरेक पल
महकती है केशर की
मानिंद कायनातों फिजा में
चिडियों सी चहकती है
एक तुम्हारी याद ही तो है
जो सदैव मेरे दिल में
मेरे जिस्म में
तुम्हारी रूह की मानिंद
रहती है बचाती है
तनहाईयों की आहटों से
ख्वाहिशें ख्वाबगाहों से
तुम्हारी याद
मेरे दिल की धडकन की
मार्निंद
मेरी मोहब्बत मेरी दिली
आरजू यादे मेरी
महबूबे मोहब्बत की
महकती यादें !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

जर्रे जर्रे में समाई तेरी मोहब्बत तेरा ही नूर है
मेरे पृियतम साँवरिया इस दिल की धडकन है तू , तूही गुरूर है
अमृत सागर परिवार मे आपका हार्दिक स्वागत है
Friends aabhar please join amritsagar
मोहब्बत से लबरेज कविताओ का खजाना
साँझ ढले तो आ जाना
अमृत सागर मे डुबकी लगाना चले आना
https://m.facebook.com/amritsagarownsms/

जर्रा ए मोहब्बत

जर्रे जर्रे में समाई तेरी मोहब्बत तेरा ही नूर है
मेरे पृियतम साँवरिया इस दिल की धडकन है तू , तूही गुरूर है
अमृत सागर परिवार मे आपका हार्दिक स्वागत है
Friends aabhar please join amritsagar
मोहब्बत से लबरेज कविताओ का खजाना
साँझ ढले तो आ जाना
अमृत सागर मे डुबकी लगाना चले आना
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Wednesday, 11 January 2017

सुहानी शाम

सुहानी साँझ ढल गई
तुम्हारे इन्तजार में
शमाँ भी डगर बदल रही
तुम्हारे इन्तजार में
मायुसी फिजा में बढ रही
तुम्हारे इन्तजार में
अश्कों की बाढ लग रही
तुम्हारे इन्तजार में !
दिल की धडकन बढ रही
तुम्हारे इन्तजार में !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

नव भोर

रवि किरणों ने हरा तिमिर
लालिमा चहु दिशी है छाई
गुँज उठी पंक्छिीं कलरव
नव उर्जा जहन में है आई

माँझी साहिल छोड चले
मौंजों में नव उर्जा है आई
शमाँ की मोहब्बत में देखों
परवाने भृमर ने जाँ की बाजी लगाई !

Monday, 9 January 2017

मोहब्बत

तेरे ही ख्यालों में गुम है
दिल सुबह शाम
आठों पहर जुबाँ पर रहता है तेरा ही नाम

पूनम कहूँ तुझे या शबनमी चाँदनी मेरे यार
मोतियों से दमकती संगेमरमरी मेरी मोहब्बत मेरा प्यार

मरमरी जिस्म की मादक महक से महकती है कायनातों फिजा
आशियाना ए दिल में हरेक पल करता हूँ धडकने दिल हुस्ने यार !

थाम लो तुम दहकती साँसों को पृियतम
तुम्हीं तो हो मेरी मोहब्बत मेरे दिल का एतबार !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Sunday, 8 January 2017

इबादते हुस्न

उनकी सादगी दिल को भाने लगी
तनहाईयों में उनकी यादें सताने लगी

हरसिंगार की मादक महक फिजा महकाने लगी
वफा ए महबूबे मोहब्बत दिल लुभानो लगी

नूरे रूखसार से रौशन हो गई जिन्दगी हमारी
उनकी मोहब्बत की महक लगती है बहुत प्यारी

उनकी मोहब्बत अब तो है जिन्दगी हमारी
जिन्दगी उन्हीं से है उन्हीं से दुनियाँदारी !

आईना ए दिल में ऩित दीदारे यार करते हैं
उन्हें मोहब्बत का रब जानकर इबादते हुस्न यार करते हैं !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

Saturday, 7 January 2017

बातों ही बातों में

बातों ही बातों में बातों की शुरूवात होती है
बातों ही बातों में मोहब्बत में दो धडकते हुयें दिलों की मुलाकात होती है

फूँस के उमडते घुमडते घनियारे मेघों के साये में
दो धडकते दिलों की मुलाकात होती है

जब मोहब्बत परवान चढती है फिजा यारों मचलती है
जवाँ दिलों की मोहब्बत से जमानें वालों की भौंहें यारों सिकुडती हैं

मोहब्बत करने वाले नही जमाने की संगीनों की परवाह यार करते हैं
मोहब्बते महबूब को पाने के लिये आशिक हरेक हद से गुजरते हैं !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

वादा ए वफा

अमृत सागर का हाले दिल वही जानता है
मौंजों और साहिल की मोहब्बत को पहचानता है

साहिल के दर्दे दिल को अमृत सागर बखुबी समझता है
इसलिये मादक मौंजों की मोहब्बत कों बखानता है

महबूबे मोहब्बत के दर्दे दिल को अमृत सागर जानता है
तनहाईयों में मौंजों के दर्द भरे दिल की आहट जानता है

अमृत सागर में दिन रात मोहब्बत में मशगूल दिल यार होते हैं
मोहब्बत में तडपते हैं तनहाईयों में दर्दे दिल से ख्वाब सजोते हैं !
मनोहर यादव " अमृत सागर "

मोहब्बत

आखिर क्यों वफाओं का नतीजा जफा यार होता है
फिर भी आखिर क्यों उनसे मिलने को दिल बेकरार रहता है
हम तो उनकी जफाओं का भी दिली इस्तकबाल करते हैं
तनहाईयों में आशियाना ए दिल में सारी रात तडपते हैं !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव