बहुत खुबसूरत और बहुत प्यारी
नंदिनी ये काव्य पंक्तियाँ तुम्हारी
वो लडखडाते कदम
वो धुंधलाते शाये
कोहराम मचाता हुआ कोहरा
ठंड की ठिठुरन में
गरम चाये की चुस्किया
ताजे पेपर की हेड लाइन्स
वो काँगडी से उठता धुँआ
केशर की महक से
महकती फिजा
वो महकती शबनमी मोतियों की महक
वो लरजते दिली अरमाँ
मेरी महबूब ने
ली हो अँगडाई जैसे
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Saturday, 27 August 2016
अँगडाई
Tuesday, 23 August 2016
मोहब्बत की सरिता
जिन्दगी में कोई
अपना सा होना जरूरी है
जो जिन्दगी भर
चोली दामन सा सनम हो जाये
फुर्सत के लम्हों मे
जिन्दगी भर बाहों मे खो जाये
सावन की भीनी फुहारों की मानिंद
जिन्दगी की रंगी बनाये
प्यारा वो चित चोर हो
मोर के मानिंद मोरनी के दिल को भाये
भादों की घनेरी रैन के मानिंद
जिस्म को मोहब्बत से भिगोये
प्यार की सरिता के मानिंद
मोहब्बत की मौजें बने
मै बनके साहिल बाहों में समाऊ
हुस्न की सुरीली रागिनी बन
कायनात महकाऊ
यकीम है मोहब्बत पे कुमुदनी
यकीं है मोहब्बत पे कुमुदनी
मोहब्बत पे एतबार है
एतबार ही तो यकीं है
यकीं ही तो उनका प्यार है
पाक है मोहब्बत उनकी
पाक यार प्यार है
पाक है एतबार
पाक एहसास है
जिन्दगी है मोहब्बत
मोहब्बत एक एहसास है
प्यार का नाम है जिन्दगी
जिन्दगी मोहब्बत की आस है
मोहब्बत तुमको पुकारे
दर्दे दिल का एहसास
दिल को है हमारे
धडकते दिल की हरेक
धडकन मनमीत पुकारे
आजा रे परदेशी
आजा रे परदेशी
तेरी मोहब्बत में
तडपत है निसदिन नैन हमारे
चेन गवाँई
दिन रेन पिया प्यारे
आजा रे परदेशी
आदा रे परदेशी
एक तेरी मोहब्बत की खातिर
हम ने सनम खुद की पहचान गवाँई
अंजान हुये जग में
हुई चहु ओर हसाँई
दुनिया तेरी मोहब्बत मे भुलाई
लाज शरम त्याग आज डगर पे आई
अपने सैलाभे अश्क से गुहार लगाई
जाने तांडव करो सहराओ मे भाई
न तेरी मोहब्बत मे अब अश्क बहाउ
जमाने से यारी कर पृीत भुलाउँ
Saturday, 20 August 2016
आईना ए दिल
बुराईयों का आईना
अपना दिल यार होता है
पर कहा कोई
ये सब मानने को तैयार होता है
अपनी अपनी औकात से
वाकिफ हरेक मेरे यार होता है
अपना दिल स्वयं
हरेक हद से गुजरने को तैयार होता है
स्वयं के बोझ तले
दब गई जिन्दगी
एहसास होता है
हर कोई जानता है
बहुत वक्त है पास मेरे यार
दिल से एतबार तू कर
मोहब्बत की इनायत है
एतबार तू कर
पल पल हरेक पल
मोहब्बत का इझहार करता हूँ
सिर्फ तुम ही हो मोहब्बत हमारी
दिल से स्वीकार करता हूँ
आरजुये दिल है
दिल की अमानत है
जिन्दगी है तू
तमन्नाये जिन्दगी भी
बहुत खुबसूरत और लाजवाब लिखती है आप
उपवन
यही दिली आरजू हमारी
सींचू तेरे उपवन की क्यारी
मेरे महबूब तूही है मोहब्बत हमारी
तेरे नूर से रौशन है दुनियाँ हमारी
जिन्दगी से भी खुबसूरत और प्यारी
दिली उपवन की सबसे हँसीं कुमुदनी
तेरी मोहब्बत तेरी मुस्कुराहट लगती है प्यारी
तेरी यारी सबब ए जिन्दगी प्यारी
तूही तो है पहली मोहब्बत आखिरी ख्वाहिश हमारी
मादक हाला
मरमरी जिस्म तेरा कमसिन जैसे मेरी आधुनिक ई मधुशाला
तेरे मादकतम लबो से टप टप टपक रही अनुपम मादक हाला
सारा जग हुआ दीवाना तेरा इ जन्नते हूर अल्हड रूपसी बाला
आज प्यास बुझेगी रूपसी पीकर तेरी यौवन रास अनुपम हाला
Friday, 19 August 2016
बे हिसाब दर्द मैने पाया है
बे हिसाब दर्द मैने पाया है
उनसे मोहब्बत करके
गमों की दरिया में गोता लगाया है
उनसे मोहब्बत करने
जिन्दगी का चैनो अमन गंवाया है
उनसे मोहब्बत करके
सैलाभे अश्क में खुद को डुबोया है
उनसे मोहब्बत करके
जिन्दगी का एतबार मैने पाया है
उनसे मोहब्बत करके
दिली जख्मो को हौले से सहलाया है
उनसे मोहब्बत करके
खुद को खुदी के नजदीक पाया है
उनसे मोहब्बत करके
मेरे महबूब ने जीना किया दुश्वार
जब से हुई मोहब्बत उनसे
उनके हरेक गम को गले हमने लगाया है
उनसे मोहब्बत करके
३५३ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
जहाँ में हरेक जगह सागरमय हाला कोहराम मचाती है
अपने होने का अहसास सागरमय मादक हाला कराती है
आधुनिक मधुशाला का कृतक अंजान की शरण पाती है
३५२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
सागरमय पीने में बेशुमार मज़ा कृतक परदेशी को आता है
सागरमय की खुमारी में ज़माने के गिले शिकवे भुलाता है
अंजान डगर परदेशी मधुशाला में जन्नत सा शुकुन पाता है
Thursday, 18 August 2016
राखी : एक अनोखा बन्धन
सावन के सुहाने मौसम में
याद आती हैं साँवन की रिमझिम मादक फुहारें
सावन की फुहारों के बीच झुला झुलती बालिकायें
रक्छा बंधन के आने की खुशियों से दिल का झुमना
बहुत मिठाईयाँ मिलेंगी आज खाने को
खीर पुडियों का मादक महक का पुर्वानुमान
बहन ने सजाई राखी की थाली
मिठाई , कुमकुम , चावल और खुबसूरत रंगी राखियाँ
माथे पे कुमकुम तिलक का लगाना
तिलक में चावल हौले से सजाना
फिर अपने हाथ को आगे बढाना
राखी बँधवाना पैरो को छुना
आशिर्वाद पाकर
मिठाई देख मन ही मन मिठाई का स्वाद महसूस करना
मा से कुछ पैसे लेकर बहन की थाली में रखना
सब कुछ याद आता है
बहन के होते सुनी कलाई
या रब यही है मुकद्दर
यही तेरी खुदाई
बचपन ने कीमत जवानी की चुकाई
राखी आज हो गई पराई
कई वर्षो से सुनी है मेरी कलाई
यही खेल किश्मत का है मेरे भाई
दिन ब दिन दुरिया बढती ही जा रहीं है
मिलन के बीच दुश्वारियों की सुनामी नजर आ रहीं है
दिल में ख्याल नित ही बदल रहे हैं
आशंकाओ के बादल रंगत बदल रहे हैं
अब नहीं रहता कोई इन्तजार तुम्हारी राखी का
तुम्हारी रक्छा का वचन हो गया पुराना
बचपन की यादें न जाने कहाँ खो गई
बडी सी राखियाँ जमाने की गर्त में खो गई
दोस्ती FRIENDS राखियों ने जगह बनाई है
आज बहन की राखी की जगह दोस्ती ने पाई है
राखी का रिश्ता अब लगने लगा है पराया
आज इस कलियुग में बहन ने भाई को दुत्कारा
यंत्र नारी पुज्यते तत्र रमनंते देव:
नारी में सृष्टी समाहित
सारे जग में प्यारी है
नारी कोई भोग्य वस्तु नहीं
वह माँ बहन भी हमारी है
नारी से ये जहाँ है
नारी से जमीं आसमाँ है
नारी से मानवता का अस्तित्व
नारी से मानव का कल्याण है
नारी से नर है
नारी से वर है
नारी से धरती
नारी से अम्बर है
नारी से वेद पुराण है
नारी से मानव उत्थान है
Wednesday, 17 August 2016
३५२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
थाम लेता हूँ मचलती हुई हाला पैमाने में
मादक हाला की महक से करार आता है
उदर में जाती है करार रूह को आता है
झूमने लगाती है रूह मचलता है जिस्म
तेरे मादक लबो से पीकर सागरमय हाला
अनजान डगर से रोज़ ही आता है
परदेशी मेरी आधुनिक मधुशाला
३५० - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
करार दिल को आता है सनम तेरे मयखाने में
झूमता गाता दिल चैनोकरार पाता है
जब अनजान डगर से चलके तेरे मयखाने में आता है
पैमाने में मचलते मय का दीदार जब होता है
जन्नत का सा शुकू कृतक यार पाता है
सजती है महफ़िल रोज़ मेरी मधुशाला में
थिरकती है रूपसी और मचलती है हाला पैमाने में
३४९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
हमारी बात और है दिल में बसाया है तुम्हें
दिली जज़बात जवाँ होते है लबो को छूके
कोहराम मचाती है हाला उदर में जाके
पसीने से तरबतर होता है गिरेबा सावन में
सावन की फुहारे आग लगाती है साइन में
तन मन बहकाने लगता है मेरे यार
जब मेरी गालियों से गुज़रते कनखियों से होता दीदार
३४८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
मेरी महबूब तेरे दर पे सर झुकाऊँगा
तुही मोहब्बत है आखिरी आरजुएं दिल तुही
तेरी मोहब्बत के लिए जिंदगी दाँव पे लगाउँगा
सागरमे मादक हाला है चाहत मेरी
बिन अमृतसम हाला के मई जीने नहीं पाऊँगा
दिल में बसी है मोहब्बत तुम्हारी
हर हाल में कृतक मालिकाये दिल तुम्हें बनाउँगा
३४७ -मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
जवाँ कुमुदनी के लबो से मय पान किया
सारा ज़माना जाग गया जब कुमुदनी के
नूर से मछली कायनात और जवाँ हुई फ़िज़ा
मनचले परदेशी ने दमकते रुखसार को चूमा
झूम उठा बसंत और बहकाने लगी पुरवैया
कृतक के दिल के तार झनझना उठे यारों
बाहों में भरके भ्रमर ने कुमुदनी को चूम लिया
३४६ मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
परदेशी और रूपसी बाला दोनों समझदार है नहीं अंजान
सागरमय की सुनामी को हँसते हँसते पी जाने की दिल में ठान
परदेशी द्वारे मेरी मधुशाला के बैठा और कर रहा मय पान
Thursday, 11 August 2016
तूही मोहब्बत है हमारी
सुन हसीना ओ नाजनी
तेरे नूरे रूखसार से रौशन है
ये जहाँ ये कायनाक सारी
तडपते है तेरी मोहब्बत में
यकीं कर ले सनम
कसम तुम्हारी
तेरी मुस्कुराहट से
खिलती है कुमुदनी
महकती है शेफाली
खिलती है केशर
जिन्दगी लगती है प्यारी
तेरी मोहब्बत आरजूए जिन्दगी हमारी
अजनबी दिल ने मोहब्बत की है
पहले पहल सभी अजनबी
मेरे यार होते हैं
हेलो हाय होती है एतबार होते हैं
दो अजनबी दिल की महक से महकती है कायनात
शायद यही प्यार होता है
दिली आरजू होती है मोहब्बत हो एतबार हो
दो जवाँ दिल धडके एक साथ प्यार हो
मोहब्बत से जिन्दगी रंगीन हँसी यार होती है
मोहब्बत दो दिलों का एतबार और इकरार होती है
सदियों की अमानत भी होती है मोहब्बत
मोहब्बत जिन्दगी में शेफाली की महक यार होती है
चाँदनी पूनम की
आज भोर में पूनम की चाँदनी का दीदार हो गया
रब की महकती शबनमी कायनात पे एतबार हो गया
ज्यों शेफाली की मादक महक ने मचाई हलचल दिल में
मेरे हँसी यार तुम्हारी यारी पे "मनोहर" एतबार हो गया
कान्हा की इबादत
जब कभी जहाँ कहीं गुँजती है अरदास तुम्हारी
तेरे सजदें में सर अपने आप या "रब" झुक जाता है
दोनों हाथ उठते है इबादत में तुम्हारी
जिन्दगी में अमृत की बरसात होती है
तेरी महर से अपने आप सभी काम होते हैं
तेरी इबादत से मिलती है सफलता जहाँ में नाम होता है
जेठ के महीने में बरसती है सावन की शबनमी फुहारें या "रब "
सहराओं की मृगमरिचिकायें हकीकत में तब्दील होती है
केशर की महकती है हवायें जिन्दगी में
कलयुग के कल्प वृक्छ का एतबार होता है
पूनम की रात
पूनम की रात
शबनमी मोतियों की बरसात
तडपते मचलते दिली जजबात
बहुत बहुत आती है
शबनमी चाँदनी में
पूनम के दिन तुम्हारी याद
कैसे समझाऊ
दिले नादाँ मानता ही नही
चाँदनी पूनम की
पूनम का नूर
अमानत है सारे जहाँ की
नही सिर्फ तेरे गुलिस्ता के लिये
मै भृमर अंजान डगर
न कोई मंजिल है मेरी
ना ही कोई कारवाँ
दोनों जहान का बासिंदा
मै पूनम तुम्हारी यारी की
बेबाक चाहत है कुसूर मेरा
करबद्ध गुजारिश है तुमसे
बन जाओ सहराओ मे भटकते कारवाँ का हिस्सा
लौटा दो मुझे मेरी मोहब्बत
मेरा प्यार एतबार और एहसास
मेरी जिन्दगी ऩूरे रूखसार से रौशन कर दो
बेचेन रूह को आये करार
बस एक बार कह दो
हम पे है आपको एतबार
नसीब का खेल
न जाने तू मेरे मुकद्दर में है भी या नही
गर मेरे नसीब में है तू लिखी तब तो तुझे पाउँगा
गर तू नही मेरे मुकद्दर में रब से तुझे मांग लूँगा
अम्बर के सप्तरंगी सितारों से माँग तेरी सजाउँगा
तेरे कदमों में सर झुका के मोहब्बत की वादी बसाउँगा
साँवन की शबनमी मोतियों की चादर उढा के सपनों की मलिका दिल में तुझे बसाउँगा
सरिता "चम्बल"
जानापाव की गोद से निकली
चम्बल चंचल सुकुमारी
पहाडो का सीना चीरती
निकली अल्हड नार
धीर गंभीर अति पावन
सहराओ से निकली
अविरल चलती
जन जन की प्यास बुझाती
झुरमुट पेड झाडियों को जीवन देती
गम्भीरता के दामन में लिपटी
अविरल आगे बढती
महबूब की मानिंद मोहब्बत लुटाती
जन जन की वेदना हरती
जीवन दायिनी अति सुकुमारी
Tuesday, 9 August 2016
तू मोहब्बत है हमारी, तेरी महक से महकती है कायनात ये सारी
यही दिली आरजू हमारी
सींचू तेरे उपवन की क्यारी
मेरे महबूब तूही है मोहब्बत हमारी
तेरे नूर से रौशन है दुनियाँ हमारी
जिन्दगी से भी खुबसूरत और प्यारी
दिली उपवन की सबसे हँसीं कुमुदनी
तेरी मोहब्बत तेरी मुस्कुराहट लगती है प्यारी
तेरी यारी सबब ए जिन्दगी प्यारी
तूही तो है पहली मोहब्बत आखिरी ख्वाहिश हमारी
तेरा साथ है कितना प्यारा,
गर तेरा सहारा मिल जायें
सहराओं में कमल खिल जायें
बागों में बहारें आ जायें
मेरा यार रूखसार से जब चिल्मन हटायें
तेरी महक से फिजा सकुचायें
बेमौसम कुमुदनी खिल जायें
मेघों से मादक हाला बरसने लगे
मेरा महबूब जब मुस्कायें
Monday, 8 August 2016
३४५ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
हुस्न का जादू चला के तन मन पे कब्ज़ा मोहिनी ने जमाया है
बाद मुद्दत के राजे मोहब्बत समझ में मेरी आज यार आया है
मेरी मधुशाला की सागरमय ने दिलों पे कब्ज़ा जमाया है
३४४ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
रिमझिम सावन की मादक फुहारों में बाला का हुस्न गज़ब ढाता है
मयखानों में पैमानों में मचलती हाला दिलों में हलचल मचाती है
संगीत की मादक स्वर लहिरी पे थिरकती बाला क़यामत ढाती है
३४३ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
सारे ज़माने के गम भुलाने को परदेशी हाला पीने आता है
कमसिन की सुरमई अँखियों से टपकती हाला पी भुलाता है
अंजान डगर का परदेशी हरेक मोड पे मंजिल अपनी पाता है
Saturday, 6 August 2016
३४२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
अम्बर से बरस रही हो सोमरस अमृतसम हाला
मन के उपवन में खिली कुमुदनी महका तनमन
कूदती फुदकती चहक रही बाला गोरैया सी मधुशाला
३४१ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
दिल की उमंगें जवां हो उठी देखके सुरबाला का हुस्न मतवाला
मेरी आधुनिक मधुशाला का रूप श्रृंगार किया खुद चंदा ने यारों
कोटि कोटि शबनमी मोतियों की उढा के चुनरी अदभुद आला
३४० - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
अग्नि की तपिस में महुये की मादक महक ने समा बदल डाला
झूमी फ़िज़ा झूमी कायनात झूमने लगी मेरी आधुनिक मधुशाला
झूमने लगे कृतक मनोहर अनजान डगर और रूपसी सुरबाला
३३९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
बाला की सागरमय पी के चहकता मेरी आधुनिक मधुशाला
चहकती मेरी मधुशाला में अंजान डगर परदेशी ने डेरा डाला
सप्त सुरो की सुरमई थाप पे बाला के नृत्य ने समा बदल डाला
Wednesday, 3 August 2016
३३८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
मधुशाला द्वारे खड़ी बाट जोहती कमसिन रूपसी विश्वमोहिनी बाला
कभी कभी यौवन रस हाला को तड़पता अंजान डगर परदेशी मतवाला
मेरी मधुशाला का की डगर आ ने को तड़पता नवयुवक मतवाला
३३६ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
कभी न सर्व प्रिय पेय पेय का दर्जा सागरमय है पाती
समाज से बाहर दूर गाँव के जगह मेरी मधुशाला पाती
चुम्बक सा आकर्षण इसमें राजा रंक का प्यार ये पाती
३३५ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
अनजान डगर चलके झूमता गाता आता हूँ मेरी मधुशाला
रूपसी बाला की अमृतसम मादक सागरमय पीके मेरे यारो
भू-लोक में जन्नत सा असीम सुख परदेशी पाता हूँ मेरी मधुशाला
३३४ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
अंजान डगर निकालता हूँ मंज़िल आधुनिक मधुशाला पहुँचता हूँ
रूपसी की सागरमय पीके कमल की मानिंद मेरे यारों खिलता हूँ
सुरबाला के नूरे रुखसार का दीवाना मैं परदेशी भौरों सा मचलता हूँ
३३३ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
बगैर सागरमय प्याला छुये,कृतक अनजान हुआ मतवाला
रूपसी के गज़रे की मादक महक से फ़िज़ा हुई आज दीवानी
मेरी आधुनिक ई मधुशाला की फ़िज़ा लगती जानी पहिचानी
३३२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
Tuesday, 2 August 2016
३३१ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
कोमल कर से असुरो को पिला के भ्रमित कराती पिलाती हाला
रूपसी कमसिन बाला की सागरमय हाला ने भ्रमित कर डाला
नित नव परदेशी अंजान डगर ने मेरी मधुशाला चौबारे डेरा डाला
३३० - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
दिल का उपवन महकने लगता पीकर सागरमय अनुपम हाला
दिल की कली केशर सी खिल जाती आ के आधुनिक मधुशाला
मेरी जिन्दगी सागरमय अनुपम प्यार मेरा कमसिन सुरबाला
३२९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
जाति पाती के भेद मिटाती मेरी आधुनिक मधुशाला
एक ही पैमाना है होता सभी प्यार से पीते मादक हाला
नहीं कोई जाति धर्म ही पूछता साथ बैठ के पीते हाला
३२८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
ध्यान करूँगा धुनि रमाऊँगा और पियूँगा मादक हाला
जर्रे जर्रे में मेरा रब बसता है भोग लगाऊ मेरी मधुशाला
रब से सीधे बात है होती पीकर अंजली भर मादक हाला
३२७ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
राजा रंक सभी लोट लगाते पी अमृतसम सोमरस हाला
अपने अपनो को हाथ थामकर उठाते दिल से यार लगाते
अपने अपनो का और गैरो का भेद मेरी मधुशाला मिटाते
३२६ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
सहराओं में कुमुदनी खिलती मेघों से बरसती सोमरस हाला
परदेशी अनजान डगर चल नित नित आते मेरी मधुशाला
चहलकदमी करते अगणित जन अंजान डगर मेरी मधुशाला
Monday, 1 August 2016
३२५ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
सभी जगह मिलती रूपसी सुरबाला ,कोमल कर से पिलाती हाला
अपनी डगर मई चलते जाता नियत समय रोज़ पहुँचता मधुशाला
डगर डगर मस्जिद मंदिर मिलते,शीश झुकाता मैं अपनी मधुशाला
३२४ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
सदा हाथ में सागरमय होती राह पकड़ता मेरी अपनी मधुशाला
नहीं कोई ठौर जहां में पाता जो कोई कहलाता पियक्कड़ पीनेवाला
बड़े प्यार से शरणागत बनकर परदेशी को अपना लेती मधुशाला
३२३ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
सराबोर वह कंचन सम सागरमय पैमाना देती , मेरी मधुशाला
छलकती मोहब्बत मरमरीं जिस्म लबो से टपकती मादक हाला
चौबारे बैठ कृतक कुहुकता और गुण गाता मेरी अपनी मधुशाला
३२२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
अगणित परदेशी अंजान डगर से नित नित आते मेरी मधुशाला
आते मेरी मधुशाला साकी बाला से पाते सागरमय अनुपम हाला
अमृत हाला पीके सारे जहाँ के गमो से मुक्ति पाते मेरी मधुशाला
३२१ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
तमाम कोशिशों के बाद मैं भरता और उलट देता मैं प्याला
मानव श्रम से भाग्य बदलता यही पढ़ा सुना मैंने विद्यालया
प्रबल भाग्य के सम्मुख निर्बल आज का मानव कहती बाला
३२० -३२१ मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
मेरी अंतिम यात्रा में जो कोई आयेगा पायेगा जी भरके हाला
गमे जिन्दगी के सुहाने सफर में साथ निभायेगी मादक हाला
शिवके गिले यात्रा के भुलाके मोहब्बत लुटायेगी रूपसी बाला
सारे जहाँ में गूँजेगा डंका और फैरायेगी पताका मेरी मधुशाला
कृतक मनोहर बैठ चौबारे साथ पियेंगे शबनमी मादक हाला
रास रचाते हुये पूनम की चाँदनी में मेघों से बरसेगी मादक हाला
अंजान डगर से आयेंगे परदेशी मेरी अपनी आधुनिक मधुशाला
319 - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
मेरी जिव्या पर तेरा नाम मोहब्बत और टपकती हाला
मेरी यही ख्वाहिश आखिरी मेघों से बरसे अविरल हाला
और सागरमय की सुनामी पे आबाद हो मेरी मधुशाला
खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई