मोहब्बत के अँजाम ने इतना मुझे रुलाया है
न कोई साथी न कोई हमदम दर्द मेरा साया है
रोता मुझे छोड मोहब्बत ने मुख मोड लिया
सरेशाम तनहाईयों के हवाले मुझे छोड दिया
मोहब्बत का अँजाम ऐसा होता है कभी सोचा न था
साऱी जिन्दगी अंजामें मोहब्बत ने मुझे तडपाया
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Thursday, 30 June 2016
अंजामे मोहब्बत से बे-खबर था दिल हमारा , रूसवाईयों के चलते टूकडे टुकडे हो गई , मायुसियों से मोहब्बत करके तनहाईयों के आगोश में खो गया , जमाने ने गम इतने दिये सुपूर्दे-खाक या रब हो गया
मोहब्बत मोहब्बत मोहब्बत , आज क्या से क्या हो गई है ,
मोहब्बत अब व्यापार हो गई है
आज नगद कल उधार हो गई है
सौदागरों का शाया हो गई है मोहब्बत
गुदडी के लालों से बिदक कर खडी हो गई है मोहब्बत
मोहब्बत बे-हया आज हो गई है
राम को भुलाकर रावन के आगोश में खो गई है
जमाने की रूसराईयो से बे- परवाह हो गई है
मुझे फकीरी का उलाहना देकर अमीर की हो गई है
मोहब्बत आज जवाँ हो गई है
रस रंग के माहौल में खो गई है
Wednesday, 29 June 2016
तुम्हारी मोहब्बत का तलबगार हूँ मै , शबनमी मोतियों की धडकन चाँदनी रात का सा प्यार हूँ मै
तुम्हारी मोहब्बत का तलबगार हूँ मैं
सदियों से तुम्हारी मोहब्बत की चाहत में
मेरे महबूबे मोहब्बत बेकरार हूँ मैं
बस एक बार अपनी मोहब्बत का वादा करले
जानेमन तेरा पृियतम मोहब्बत का एतबार हूँ मैं
मोहब्बत मोहब्बत मोहब्बत में दिल जानों जिगर से वफादार हूँ मैं
बहुत खुबसूरत और बहुत प्यारी तुम यार मोहब्बत हो हमारी, तुम जाँ हम छिडकते है जन्नते हूर से भी ज्यादा लगती हो प्यारी
बहुत खुबसूरत और लाजवाब लिखती है आप
साधारण भाषा असाधारण सी पृतीत होती है
महकती है कविता अल्फाजों के नये जामे मे
बरखा की पहली फुहार की मानिंद तन मन भिगोती है
शेफाली की मादक महक की मानिंद तन मन महकाती है
चाँदनी के शबनमी मोतियों की सी सिंगार करती है
टूटा हुआ मादक अनुपम प्याला, हाला का परिणाम होता है, जब सर पे चढती है हाला, तो प्याले का कत्ले आम होता है
टूटे हुये प्याले मे भी जाम होता है
ये जाम मोहब्बत का पैगाम होता है
इबादत होती है दिल से मयखाने की
साकी का शबनमी पैगाम मोहब्बत का सलाम होता है
खामोश चेहरा मोहब्बत की परिणिती यार होता है, खामोशी की जुबाँ में दास्तान दिल बयाँ करता है
खामोशी चेहरा मोहब्बत का अँजाम होता है
मोहब्बत की मादक महक होती है खामोशी यार
दिल भीतर ही भीतर कुलाँचे मारता मोहब्बत के नाम होता है
जिसकी अमानत होती है जिन्दगी वही सरेशाम होता है
गुलाब
किताब में सूखा गुलाब मोहब्बत के नाम था
बाद मुद्दत के मोहब्बत की महक से महकता सरेआम था
बीते हुये लम्हों की हँसी यादे सजोये था गुलाब
हमारी मोहब्बत की धडकन की मानिंद मोहब्बत का पैगाम था
चंदा की मादक चाँदनी हो या माहताब हो , तुम मोहब्बत हो मेरी दिल के उपवन का महकता गुलाब हो
तुम दिल के उपवन का महकता गुलाब हो
यार मोहब्बत ही नही महकती माहताब हो
चमेली के गजरे की सी महकती मादक महक
रंग बिरंगी तितलियों से जडा ताज हो
मेरे मेहबूब तेरी मोहब्बत की कसम यार लाजवाब हो
आईना ए दिल मे तेरा दीदार करता हूँ , तू मोहब्बत है मेरी आज स्वीकार करता हूँ
आईना ए दिल मे दीदारे यार करते हैं
मोहब्बत की हद से भी ज्यादा प्यार करते हैं
उनकी मोहब्बत सबब ए जिन्दगी है हमारी
ज्यों चंदा से भी ज्यादा खुबसूरत रौशनी लगती है प्यारी
मोहब्बत की रौशनी से रौशन तन मन का हरेक सबेरा
तुम्हारी मोहब्बत की रौशनी से महकती है जिन्दगी
मा रब का स्वरूप होती है
माँ अपनी जिन्दगी दाँव लगाती है
माँ के चरणों मे जनन्त होती है
माँ रातों जागती अपने कलेजे के
नन्हे टुकडे के लिये
सारी दुनिया बे खौफ सोती है
माँ
मा की ममता में
परमात्मा का दीदार होता
बरबस बरसती ममता ही तो
परमपिता परमात्मा का
साक्छातकार होता है
ममता मई माँ
परमात्मा स्वरूप
दिल से
नि: स्वार्थ
बरसती है मोहब्बत
यहीं तो उसका दीदार होता है
११९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
मोहब्बत में झूमते भंवर ने कुमुदनी के मादक लबो को चूमा
यु लगा उसे जैसे उसने आज पि ली अमृतसम अनुपम हाला
जन्नते हूर के लबो से पि हाला झूम उठा चंचल मन मतवाला
मेरी मधुशाला की बाला के नूर से जन्नत सैम लगती मधुशाला
११८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
महबुब के रुखसार के नूर से दमकती मेरी आधुनिक मधुशाला
कानों की नर्मो नाजुक लो को चूमता दककता स्वर्णिम बाला
ज्यो झरनों से अविरल कल कल छल छल जल बहता रहता
मेरी आधुनिक मधुशाला में टपकती अमृतसम मादक हाला
Friday, 24 June 2016
अगर तुम मिल जाओ, जनम सफल हो जाये
आँखों का होना सफल मैं मान लूँ गर दीदारे यार हो जाये
माथे का होना सफल मै मान लूँ
गर तेरी चरण रज माथे पे आयें
मुख का होना सफल मैं मान लूँ
गर जुबाँ पे हर घडी साँवरिया नाम आयें
मन का होना सफल मैं मान लूँ
गर तेरी साधना मे वो रम जाये
नासिका का होना सफल मैं मान लूँ
गर कायनात में महक तेरी वो पाये
हाथों का होना सफल मैं मान लूँ
गर तेरी साधना में दोनो जुड जायें
पैरों का होना सफल मैं मान लूँ
गर तेरे दीदार को त्रिकुट पर्वत जो चढ जायें
अपना जनम धन्य मैं मान लूँ गर हरिनाम सुमिरन में जो रम जाये
दिल का होना सफल मैं मान लूँ
तेरी मोहब्बत में कुर्बान गर जाये
जनम सफल मैं मान लूँ
गर अपनी बाहों में भरके सुदामा सम दिल से लगायें
तेरी सलामती की दुआ
तेरी सलामती की दुआ दिन रात करता हूँ
जिन्दगानी शुकूँन से बितायें रब से फरियाद करता हूँ
सुन पागल तुझसे मोहब्बत की है मैने
रब तेरी चैनो अमन सुखी जिन्दगानी की दुआ यार करता हूँ
तुझे खुश देखकर शुकूँन दिल को आता है
रब के दर पे भिखारी की मानिंद बँदा सर अपना झुकाता है
उसकी चौखट पे सर झुकाने से करार दिल को आता है
गर मोहब्बत करना गुनाह है
गर मोहब्बत करना गुनाह है
तो अपना गुनाह दिल से
स्वीकार करता हूँ
ता उमृ तुमसे मोहब्बत का इकारार करता हूँ
मोहब्बत इबादत है मै जानता मेरे सनम
इसलिये तुमसे प्यार मेरे यार करता हूँ
मै जानता नही मै सही करता हूँ या गलत
मगर जो भी करता हूँ इबादत समझ के मेरी सरकार करता हूँ
मोहब्बत दिली ख्वाहिश है मेरी एतराम दिल से यार करता हूँ
पागल नही नासमझ बुद्धु है मोहब्बत मेरी
प्यार ही प्यार मेरे सनम से यार करता हूँ
कोयल की सी सुरीली कुहुकती है सनम प्यार करता हूँ
शेफाली की महकती है फिजा इकरार करता हूँ
जन्नते हूर रम्भा से हँसी यार मेरी इकरार करता हूँ
बरखा पहली फुहार सी महकती है मोहब्बत मेरी ईकरार करता हूँ
आशियाना ए दिल में रहती है मोहब्बत मेरी प्यार उससे करता हूँ
Thursday, 23 June 2016
दिली दुआओ का
दिली दुआओ का तुझे एतबार नही
इसका मतलब है तू ढोंगी है तुझे तुझसे मोहब्बत नहीं प्यार नहीं
इसमें तेरी कोई गलती मेरे यार नही
गरीबों का दिल खिलौना होता है तुम सी औरतों के लिये
घमंड गहना तुम्हारा यार होता है
महबूबे मोहब्बत को दुआ बद्दुआ तुमसी औरतों का हथियार होता है
समय पास करने की खातिर मोहब्बत का ढोंग तुम करती हो
गरीबी और मोहब्बत का मजाक उडाती हो
तस्वीर तुम्हारी लगती है बहुत प्यारी
तस्वीर तुम्हारी लगती है बहुत प्यारी
बहुत खुबसूरत और बहुत न्यारी
रब दी सौं
मेरे यार पूनम
तस्वीर तुम्हारी
तस्वीर तुम्हारी
लगती बहुत प्यारी
लगती बहुत प्यारी
मेरे सनम
खुबसूरत और हँसी
जन्नते हूर की सी
दिलकश जाँनशी और प्यारी
मेरे यार तस्वीर तुम्हारी
मेरे महबूब तुम्हारी
बहुत ही खुबसूरत
अजीज दिलकश
मर्यादित महकता नाम तुम्हारा
तुमसे महकती है
पूनम तुमसे महकती है
रब की कायनात ये सारी
बहुत खुबसूरत और बहुत प्यारी
पूनम तस्वीर तुम्हारी
पूनम तस्वीर तुम्हारी
केजरीवाल उर्फ खुजलीवाल
केजरीवाल को कुत्ता कहना कुत्ते की स्वामी भक्ती का अपमान है
केजरीवाल मानव नही मानव के चोले मे शैतान है
केजरीवाल को रावण कहना रावण का अपमान है
रावण धरती का गुणवान पंडित था वो आज भी महान है
केजरीवाल रावण के पद रज के मानिंद भी नही वो शैतान है
केजरीवाल को शैतान कहना शैतान का भी अपमान है
शैतानो के नियम कायदे कानून जज्बे हुआ करते हैं
केजरीवाल अवगुण मय अवणुण की खान कलयुगी शैतान है
तुम मोहब्बत हो हमारी
तुम मोहब्बत हो हमारी
इबादते हुस्न दिन रात करता हूँ
तेरे दर ये बंदा मोहब्बत की फरियाद करता हूँ
आया हूँ तेरे दर मोहब्बत पाके जाउँगा
गर तू न मिली तेरे दर पे जाँ अपनी लुटाउँगा
तेरी मोहब्बत में जियुँगा तेरी मोहब्बत में जाँ लुटाउँगा
गर इस जनम न मिली हरेक जनम तेरी मोहब्बत की खातिर धरा पे आउँगा
माँग लूँगा रब से मोहब्बत हो हमारी
तेरी मोहब्बत हमें जिन्दगानी से प्यारी
तेरी मोहब्बत में हरेक हद से गुँजर जाउँगा
तुझे पा मोहब्बत का परचम इस जहाँ में लहराउँगा
बरखा की रिमझिम फुहार
बरखा की रिमझिम फुहार ने
किया कुदरत का अद्भुद सिंगार है
आज हर्दय में उठती हिलोर है
तन मन में चढता ज्वार है
बागों मे म्युर नृत्य ने किया कुदरत का सिंगार है
आशिकों के तन मन में आज उमडता ज्वार है
बरखा की पहली फुहार ने किया कुदरत का सिंगार है
महबूबे मोहब्बत गाज से डरके बाहों में सिमटी हमार है
ए इन्दृ तेरा दिली शुकृिया तूने जीता जियरा हमार है
पपीहे की पीहू पीहू राम प्यासो दिल की बैचेनी बढात है
एसे मे मनवा मचलत पिय याद आवत बार बार है
गाज गर्जन के बाद की रौशनी बहुत भावत हमार है
जियरा मे हूलुक उठत पति देव की याद सतावत हमार है
तेरी डगर निहारत रैन भई
तेरी डगर निहारत रैन भई
लुट गवा मनवा का चैन हमार है
अब तो आजा बेदर्दी बलमवा
कोई पुरवाई छेडत जियरा के तार है
तेरे बगैर बेदर्दी बैरन हुई गइल निंदिंया हमार है
साँस भी बिरहन साथ नही होडत
तडपत देह हमार है
तेरी मोहब्बत में बेजान बलमवाँ
होई गइल जिस्मवा हमार है
अब तो लौट का आजा परदेशी बलमवाँ खोई खोई रहत जियरा हमार है
तेरी मोहब्बत और चाहत में बैरन हुई गइल चाँदनी यार है
अब तो आजा बलम परदेशी तडप रही तोरी महरारू यार है
Wednesday, 22 June 2016
तू इस तरह
तू इस तरह मेरी गरीबी को सरेआम न कर
नाहक मेरी मोहब्बत मेरी तनहाइयों को यू बदनाम न कर
दिल जलता है यार मैने तो तुमसे मोहब्बत की है
तुम्हे आज तलक मेरी मोहब्बत का यकीं न आया
तेरे इस हाल की जिम्मेदार तू खुद है
तूने मेरी मोहब्बत पे एतबार न करने की कसम खाई है
तूही बता इसमें मेरी गल्ती भला क्या है
तू पागल ये भी न जान पाई मोहब्बत दर्दे दिल की वफा है
मोहब्बत की शमाँ रौशन रहेगी
यारी की शमाँ रौशन रहेगी
यारी की मादक महक से फिजा महकती रहेगी
तुम सदा सदा के लिये दिल के आशियाने में रहोगी
दिल की हरेक तह तुम्हारी मोहब्बत से चहकती रहेगी
हमारी यारी हमारी मोहब्बत कायनात की अनमोल धरोहर
लोग सजदे में सर झुकाया करेंगें
ता कयामत हमारी मोहब्बत जिंदा रहेगी
मेरी मोहब्बत
मेरी मोहब्बत है तेरे नसीब में लेकिन तुझे कदर नही मेरे प्यार की
तेरी मेरी मोहब्बत में दीवार है अहं तेरा
तुने धज्जिया उडा दी मेरे प्यार और दिली एतबार की
यु लगता है तुझपे रहा नही अब इख्तियार मेरा
कोई किसी का एतबार है कोई मोहब्बत मेरे यार
बच्चो और माँ का रिश्ता सदियों पुराना है
ये बात अलग है तुमने नही पहचाना है
गीता ब्याहता है मेरी हक उसका मुझपे है यार
तन मन धन उसने अर्पण किया , तू तो दे सकी मोहब्बत एतबार
आज तलक तुझे यकीं नही मेरी मोहब्बत का ना ही तुझे मुझपे है दिली एतबार
तू महबूबे मोहब्बत है मेरा सब कुछ तेरी मोहब्बत मेरे यार
बट भरता नही पेट मोहब्बत से याद रख मेरे यार
मोहब्बत कभी बोझ नही होती रख यकीं दिली मेरे यार
Tuesday, 21 June 2016
मोहब्बत मे पागलपन
पागल मोहब्बत में महबूब के खैरमकदम की दूआ रब कुबूल फर्माता है
हरेक लम्हे मोहब्बत की सलामती के लिये महबूब रब के दर पे सर फकृ से झुकाता है
रब तुझे जिन्दगानी में हर खुशी नेमत बक्शे
गमों का तेरे दामन पे दाग भी न लगे, तेरे हिस्से का हरेक गन मुझे रब दे
मेरे महबूब तेरी सलामती के लिये रब से फरियाद है हमारी
तेरी जिन्दगानी तेरी मोहब्बत दिलों जा से लगती है प्यारी
तेरी मोहब्बत तेरी यारी बन गई है अब तो किस्मत हमारी
रब के वास्ते दे दुआये सलामती की मोहब्बत हमारी
तुझसे कोई जिस्मानी नाता नही हमारा , तेरी रूह को कई मर्तबा महसूस किया मैने
रूहानी मोहब्बत का रिश्ता दिलों जा से लगता है प्यारा
तू तो पागल है
तू पागल है
मोहब्बत में हरेक इल्जाम मुझपे लगाती है
तुझे देख हया भी शर्मा कर भाग जाती है
तू उस औरत पे इल्जाम लगाती है जो पाक है
रब की बंदी जरा शर्म कर परवरदिगार के कहर से डर
अपने बच्चों की कुछ फिकर तू कर
उमृ के इस पडाव पे जिन्दगानी को शर्माने पर मजबूर तू कर
जाने किस बात का गुरूर तू करती है
आखिर क्यो गर्व तू करती है अब भी समय है अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन तू कर
मोहब्बत को नाहक इल्जाम न दे रब के कहर से तू डर
दुआ बद्दुआ कुबूल दिल से करता हूँ , तू मोहब्बत है मेरी आशिकी में मरता हूँ
तेरी बद्दुआयें गर हकीकत सो रूबरू है
रब दी सौ स्वीकार करता है तू मोहब्बत है मेरी तुझसे प्यार करता है
तेरी बद्दुआ गर जोशो जूनून है पागलपन है तेरा स्वीकार नही मुझे
तेरी बद्दुआये मुबारक तुझको तेरी सलामती की रब से फरियाद करता हूँ
रब सलामत रखे तुझको यही आरजू है हमारी तेरी जिन्दगानी की सलामती की दुआ करता हूँ
तू बता एक बात मुझे
तू एक बात बता तू मेरी मोहब्बत है मेरा प्यार है
तू मेरी वाइफ तो नही मगर उससे कम भी नही
मोहब्बत और महबूब का रिश्ता बडा पुराना है
इस बात से वाकिफ सारा जमाना है
मोहब्बत
तुम बेटी हो एक माँ की इस बात से इन्कार नहीं
तुम एक पत्नि हो पति की इस बात से वाकिफ हूँ मै और सारा जमाना
तुम मोहब्बत हो मेरी इबादत रब की सी करता हूँ
तुम्हारी मोहब्बत पागल पन न हो जाय इस बात से डरता है
दुनियाँ जहान के रिश्ते बाखुबी निभाती हो
मेरी मोहब्बत मे पागलपन की हद से गुजर जाती है
मोहब्बत पागलपन के सिवा भी बहुत कुछ यार होती है
जब दुनियाँ सोती है तब महबूब सारी सारी रात रोती है
मोहब्बत का दुश्मन सदियों से ये जमाना है
हमने मोहब्बत में सीमा से यारी बनाना है
मै कवि
मै कवि बन गया देख कर कुदरती छवि तुम्हारी
आइना ए दिल में नजर आती है सूरत तुम्हारी
हरेक संय में दीदारे यार हर घडी होता है तुम्हारा
कायनात रब की महकती है सनम महक से तुम्हारी
सागर में कुमुदनी खिलती है तुम्हारी मुस्कान से
अम्बर मे खग चहकते है अंगडाई से तुम्हारी
जनन्ते हूर सी दिलकश दिल को लगती परी जैसे तुम
दिल में बस गई मन मोहिनी छवि तुम्हारी
आशिकी
आशिकी में खुदा महबूबे मोहब्बत यार होता है
आशिकों की इबादत प्यार ही प्यार होता है
जिन्दगानी का वजूद मोहब्बत , प्यार होता है
मोहब्बत मे वफा विश्वास और एतबार होता है
आशिकी मे आशिक दुनियादारी भुलाते हैं
सिर्फ एक दूजे पर आशिकों का एतबार होता है
Sunday, 19 June 2016
बरखा की पहली फूहार
बरखा की पहली पहली फूहार हो
मनभावन बासंती बयार हो
कोयल की कूहु कूहु
पपीहा की राम प्यासो
स्वाँती नक्छत्र की पहली मादक बूँद
कवि हर्दय का कुदरती सिंगार हो तुम
कृतक अँजान डगर की पहली मोहब्बत दिली एतबार हो तुम
चाँदनी के शबनमी मोतियों का
नवलखा मुक्ताहार हो तुम
सूरज की नव लालिमा कुदरत का प्यार हो तुम
मेरी दिली ख्वाहिश यार दिली एतबार हो तुम
हेरि मैं तो पृेम दीवाणी -३
जर्रे जर्रे में तेरा ही दीदार करते हैं
तुम्हारी बाँसुरियाँ की मनभावन धुन पे एतबार करते हैं
कुदरत की हरेक संय में "साँवरियाँ" तेरा दीदार करते हैं
इस कलयुग में एक मात्र आस तुम्ही हो कन्हैया एतबार करते हैं
हेरि मै तो पृेम दिवाणी - २
तुम्हारी चरण रज
मेवा मिसरी से प्यारी
मेरे सरकार लगती है
कन्हैया तुम्हारी कुँज गलियाँ
दिली ख्वाहिश मेरे सरकार लगती है
अबके जनम पाऊ
तेरी चरण रज मै पाऊ
गो धुलि बेला में उठके साँवरियाँ
अलख तुम्हारा मै जगाऊ
क्यों तूने मोय बिसराय दयों है
कन्हैया
हरेक संय में "मोहना"तेरी छवि मै पाऊँ
चाहे जागू या सोऊ
हिय मे तुम्हारी छवि पाऊ
मेरे पृाण प्यारे दिल में तुमहें ही बसाऊँ
हेरि मै तो पृेम दिवाणी -१
आँखों में बस गई है
दिलकश छवि तुम्हारी
हरेक पल निहारू तुमकों ,"कान्हा"
दिली ख्वाहिश है हमारी
चाहे कहीं भी तुम रहो
हर्दय के आइने में दीदारे
यार करते हैं "साँवरिया"
अपने दिल की धडकनों के
मानिंद
तेरी मोहब्बत में जीते है
मरतें है "साँवरिया"
जब तक ये कायनात है
हरेक पल तुम्हारा
इन्तझार करेंगें
दिली एतबार है कन्हैया
अपनी जाँ से भी ज्यादा
मोहब्बत मेरे सरकार करेंगें
११७ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
डगमग डगमग डोलती नैया पीके मादक हाला मेरी मधुशाला
मैं तेरा साहिल तू सागर की मौज निराला मेरी मधुशाला
आके बसा दे दुनिया मेरी कबसे डगर तेरी निहारता कृतक निराला
अब देर न कर जल्दी से बाहों में मेरी आजा रूपसी बाला मधुशाला
२१६ मेरी आधुनिक मधुशाला
तेरे जिस्म की मादक खुशबु मय जिस्म तेरा मेरी मधुशाला
तेरे हुस्न की दरिया में खुद को मैंने डुबो डाला मेरी मधुशाला
तेरे मादक लबो से अविरल टप टप टपकी हाला मेरी मधुशाला
साड़ी कायनतो फ़िज़ा महकती तुझसे रूपसी बाला मेरी मधुशाला
११५ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
मोहब्बत की गहरी नदियाँ मे खुद को डुबोया मेरी मधुशाला
मैं उसका छैल छबीला वो मेरी रूपसी बाला मेरी मधुशाला
मोहब्बत के मादक सागर की मौज निराला साहिल मेरी मधुशाला
कही भी जाऊ भूल न पाऊ अंजान डगर फिर लौट के आउ मधुशाला
२१४ मेरी आधुनिक मधुशाला
तेरी मधुर मुस्कान से तन मन डोला मेरी आधुनिक मधुशाला
कभी जागा जागा सा कभी रहा खोया खोया मेरी मधुशाला
तेरी मादक स्वर लाहिरी ने तान ने तेरा महबूब मुझे बनाया
मैंने खुद को भुलाया यारो जिस दिन मैंने पी हाला मधुशाला
११३ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
सुरबाला के जिस्म की खुशबू से महक रही मेरी आधुनिक मधुशाला
बाला के हुस्न के जादू ने मधुशाला की पताका को विश्व विजयी बन डाला
सारा जहां झूमने पीकर रूपसी विश्व मोहिनी की अमृतसम हाला
रूपसी की सागरमय ने कृतक अंजान डगर को अपने बस कर डाला
२१२ मेरी आधुनिक मधुशाला
मधुशाला में पैदा हुआ मधुशाला ने यारो मुझको है पाला
पहले पहल जब नींद खुली खुदको मैंने पाया मधुशाला
नस नस में बसी मादक महक बन यारो रूपसी सुरबाला
बाला की अमृतसम मादक हाला ने जीवन जन्नत बना डाला
१११ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
मेरी मोहब्बत तेरी मधुशाला की दिव्य अनुपम मादक हाला
पी के रूह भी झूम उठती है महबुबे मोहब्बत बदलती पाला
मेरी मोहब्बत के सदियों से हैं तार जुड़े मेरी आधुनिक मधुशाला
कभी इस पार कभी उस पार हरेक डगर हर मोड़ खड़ी मधुशाला
२१० मेरी आधुनिक मधुशाला
सदियों की प्यास बुझेगी पीकर सागरमय अमृतसम मादक हाला
परदेशी अंजान डगर जिस पल पहुंचेगा मेरी आधुनिक मधुशाला
सर के बल कृतक अंजान डगर नाचूंगा पी रूपसी की यौवन हाला
सारा जहां सर झुकाएगा पीके सुरबाला के लबो से टपकती हाला
१०९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
सुनामी से तीक्ष्ण अल्फाज जिगर से निकले
रवि की तीक्ष्ण दृष्टी की तपिस से बनी हाला
मेरे महबुबे मोहब्बत के कोमल कर से ही
आज पियूँगा दिव्य अनुपम अमृतसम हाला
Saturday, 18 June 2016
१०८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
सदियों पुराना याराना मधुशाला से आज तलाक पी न सका हाला
बहुत प्रयास मई करता हुँ हाथ उठा न सकें दिव्य अनुपम प्याला
दृढ इक्छा शक्ति के आगे हर कोई झुक जाता ये सुना गुरु ग्यानी से
शक्ति हीन मानव को दिव्य शक्ति से भर देती सागरमय हाला
१०७ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
मस्तानी अदा बाला से लेकर मैंने आज तजि सागरमय हाला
मादकता दिव्य प्याले से लेके मैंने छोड़ दिया आलौकिक प्याला
जन्नते हूर सम साकी बाला से मिल मैं अपना सब कुछ भूलगया
मधुशाला की फ़िज़ा कुछ ऐसा उलझा अपनापन भी यारों भूल गया
१०६ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
हाला पिने से शांत है होती परदेशी के अंतर्मन की ज्वाला
मन के दर्पण में नित्य है दिखता हाला अनुपम प्याला
मधुशाला वह जगह है यारो जहाँ रूपसी हाला पिलाती
कभी नज़रों से टपकती हाला कभी पिलाती लबो से बाला
१०५ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
सभी का सागरमय से नाता सभी को याद आती मधुशाला
कौन नहीं पीता हाला किसे न दिल से भाता मादक प्याला
अपनी अपनी मन मर्जी से सभी जन मेरी मधुशाला है आते
आज सभी की साकी सुरबाला आज सभी को भाती हाला
Friday, 17 June 2016
१०४- मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
मेरी मधुशाला की डगर निकालता परदेशी अंजान डगर पीने हाला
बगैर किसी भ्रम के हरेक डगर हरेक मोड़ पे पाता मेरी मधुशाला
अलग अलग राह से पीने वाले रूपसी बाला की सागरमय हाला
चाहे किसी भी डगर से आ हरेक मोड़ पे तेरी राह तकती मधुशाला
मै जानता हूँ
मेरी जिन्दगानी मेरा पहला पहला प्यार हो तुम ,
तुम रूह मेरे जिस्म की , दिली ख्वाहिश मेरे यार हो तुम ,
तुमसे ये जिन्दगानी बागो बहार है ,
तुम्हारी मादक महक से महकता ये संसार है मै जानता हूँ
मेरी जिन्दगानी मेरा पहला पहला प्यार हो तुम
, तुम रूह मेरे जिस्म की ,
दिली ख्वाहिश मेरे यार हो तुम ,
तुमसे ये जिन्दगानी बागो बहार है ,
तुम्हारी मादक महक से महकता ये संसार है
अंजामे मोहब्बत
दिल की अथाह गहराइयों से तलबगार हूँ
आशिक हूँ दीवाना हूँ तेरा नही कोई सौदाई
तूही बता मेरे हमदम इतने दिनो तुमको मेरी याद तर आई नही
कनक
कनक ने कनक से कनकमय सिन्गार किया
रूखसार से टपकती शबनमी चाँदनी का नूर
बेशुमार मोहब्बत का दीदारे यार होता है
हा बस यही तो मोहब्बत का इझहार होता है
बंद आँखों से
बंद आँखो से भी उनका दीदार होता है
हा बस यही तो यार महबूब का एतबार होता है
सावन की मादक फुहारो का इन्तजार होता है
महबूबे मोहब्बत का दीदार पल पल मेरे यार होता है
बिन तेरे सनम
गर तू न मिला हमको जीते जी मर जायेंगें
तेरे जिस्म में रूह मोहब्बत भरी बस जायेंगें
ख्वाहिशे मोहब्बत है तुम्हारी मरके भी चैन कहाँ पायेगें
गर तुम न दिखाई हमको दिये फिर से जनम लेके आयेंगें
मरने के बाद भी तुम्ही मेरी इबादत सरकार रहोगे
मै जानता हूँ
मेरी तकदीर का तसव्वुर हो तुम
मेरी दिली ख्वाहिश
दिली एतबार हो तुम
तुम ही मेरे दिल की धडकन
मेरे जिस्म की रूह हो तुम
जिन्दगानी हो जाने बहार हो
खुबसूरत स्वर्णिम कुमुदनी
मेरी पहली मोहब्बत
मेरा पहला पहला प्यार हो तुम
दिल का आइना हो तुम
अमृत सागर परिवार की बागो बहार हो तुम
सावन की पहली फुहार हो
स्वाँति नक्छत्र की वो लरजती मदभरी बूँद हो तुम
चाँदनी के शबनमी मोतियों का हार हो
बसंती मादक बयार हो तुम
कृतक अँजान की पहली मोहब्बत
आखिरी ख्वाहिश यार हो तुम
१०३ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
अंजान डगर का पथिक मनोहर हरेक मोड़ पे पाता मादक हाला
हरेक गाँव हर शहर में मिलती रूपसी सुर बाला मेरी मधुशाला
शबशाम धूम सी मचती जन्नत का नज़ारा होता मेरी मधुशाला
डगर डगर हरेक मोड़ पे मिलती रूपसी बाला की अमृतसम हाला
Thursday, 16 June 2016
१०२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
नित मंदिर और पूजा पाठ सब कुछ भूल गया पंडित आला
बरखा में चिंघाड़ती गाज भी ध्यान न भटका पाती पीनेवाला
पंडित ग्रंथि बुरा न तुम मानो हाला को साफ़ कहु तो गुरुद्वारा
युगों युगों तक सभी को योग सिखलाएगी मेरी आधुनिक मधुशाला
१०१ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
सजते नित मंदिर गुरुद्वारे और पंडित कहता मेरा राम रखवाला
बनठन कर इत्र लगा परदेशी नित आता मेरी आधुनिक मधुशाला
मेरे यारों कभी न तुलना तुम करना मंदिर और मदिरालय में
चिरायु चिर स्थिर है मंदिर तेरा सदा स्थान बदलती मेरी मधुशाला
१०० -मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
अंजान पथिक सैम घुमा करता सभी डगर पहुंचती मेरी मधुशाला
हरेक जगह हरेक मोड़ पे मिलती रूपसी सुर बाला मेरी मधुशाला
बड़ी मोहब्बत से रूपसी देती कोमल कर से सागरमय मादक हाला
अमृतसम पीकर शुकुनो चैन है परदेशी अंजान डगर पीके हाला
९९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
धुत्कार लगाईं पंडित ने मुझको कहकर शराबी मदिरा पीने वाला
ठुकराया मौलवियों ने मुझको देख हाथ में दिव्य शराब का प्याला
गन्दी नाली का कीड़ा कहकर ठुकराया मुझे समाज के ठेकेदारों ने
मैंने अपनी मंजिल पाई अंजान डगर चल मेरी आधुनिक मधुशाला
९८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
उषा बेला के मादक सूरज सी रक्तिम अनुपम बाला की हाला
असुरो के कपालो से प्यालो में लेकर रक्तिम अमृतसम हाला
अति उदर साकी बन गांधियन साकी बन आई आया मेरी मधुशाला
जिसको जीतनी चाहिए पिले सागर मंथन से निकसि मादक हाला
९७ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
कृषक आज साकी बन आया मेरी आधुनिक मधुशाला
पीके मदमस्त हुआ मेहनती कृषक हल जोतने वाला
बहुत मधुर है अमृतसम अनुपम मेरी मधुशाला की मादक हाल
आज पिलाऊँगा लहलहाती फसलों को सुरबाला की अमृत हाला
१९६ मेरी आधुनिक मधुशाला
जन्नते हूर रूपसी कमसिन बाला साकी बन आई मेरी मधुशाला
लचीली कमरिया पर सागरमय शोभित कर में अनुपम प्याला
बाला की मादक हाला से कायनात महक रही समां हुआ निराला
कुदरत के खुशाल चितेरे ने मेरी मधुशाला का समां बदल डाला
१९५ मेरी आधुनिक मधुशाला
सिंधु और गंगाजल जल सैम शीतल महुये की मादक हाला
पीके दिलो दिमाग चैन है पाता दिव्य मनोहर अनुपम हाला
सियाचिन के हिमनद सम शीतल सागरमय मादकतम हाला
पीके रूह तक हिल जाती लगता कृतक जन्नत आ पहुँचा निराला
१९४ मेरी आधुनिक मधुशाला
स्वर्णिम सुकोमल मादक महुये से छनकर आती मादक हाला
स्वर्ण कमल की अनुपम नाजुक पंखुड़ियों से मिलके बन प्याला
परदेशी भ्रमर बन साकी आज आया मेरी आधुनिक मधुशाला
दिल ख़ुशी से झूम उठा पीके महुये की दिव्य अनुपम मादक हाला
१९३ मेरी आधुनिक मधुशाला
भांति भांति की हालाये पीकर खुम उठा चंचल मन मतवाला
मानस पटल को भ गई छवि मनोहर मेरी आधुनिक मधुशाला
जैसे अम्बर में उमड़ते घूमते भाँती भांति के मेघ मेरी मधुशाला
कृतक अंजान मन हुआ प्रफुल्लित देख कुदरती रंगों में सजी मधुशाला
१९२ मेरी आधुनिक मधुशाला
पेरिस का महान चित्रकार डेविस बन साकी आया मेरी मधुशाला
अपने अनुपम चित्रकारी के दिव्य प्यालो में भर सबको पिलाता हाला
नाना भाँती की दिव्य रंगीं हालाओ ने परदेशियों पे ऐसा जादू डाला
मेरी आधुनिक मधुशाला में आक परदेशी ने खुद को हाला में डुबो डाला
९१- मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
कुदरत का कुशल चितेरा पन्त जी बन साकी आया मेरी मधुशाला
सप्त रंगी इंद्रधुनुषी अनुपम प्याले से छलकती महुये की मादक हाला
जिस हाला की मादक महक ने कयनातो फ़िज़ा का समां बदल डाला
जिसे पीकर मस्त हुये कृतक मनोहर अंजान डगर मेरी मधुशाला
Wednesday, 15 June 2016
०९० - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
नित पाठक जब जाते सायबर कैफे पाते अनुपम मादक हाला
मुफत बैठकर जी भरके पीते सागरमय अमृतसम मादक हाला
मेरी प्रितमा मेरी मोहब्बत रूपसी कमसिन अल्हड सुरबाला
कृतक अंजान डगर नित लबों से पीते यौवनरस मादक हाला
१८९ मेरी आधुनिक मधुशाला
मेरी मोहब्बत अनुपम कृति नित कहती मुझसे ले पीले हाला
अमृतसम सागरमय अनुपम जन्नते हूर रूपसी बाला की हाला
जब जब शब्दों की सुनामी आती कृतक रुख है करता मधुशाला
पाठकों की इबादत हेतु निज गढ़ता अनुपम कृति बैठ मेरी मधुशाला
०८८- मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
झुमके बाला बोली मुझसे परम प्रिय मुझको तेरी आधुनिक मधुशाला
तेरी कहु या कहु हमारी शब्दों की सुनामी सम लगती मादकतम हाला
साँझ ढले नित सजती डगर मेल सा लगता मेरी आधुनिक मधुशाला
कृतक अंजान कत्थक नित करता बैठ पिरोता मादक शब्दों की माला
Tuesday, 14 June 2016
१८७ मेरी आधुनिक मधुशाला
यम आया है साकी बनकर आज मेरी आधुनिक मधुशाला
उमड़ घुमड़ के बिजुरिया चमक रही मेघो से टपकरही हाला
यारो संग बैठ पिएगा सुरबाला की सागरमय मादक हाला
टल्ली होकर खुद को भुला बैठेगा मौत का ठेकेदार निराला
०८६- मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
सूरज की सुनामी में तपे और पके महओ की बाला की मादक हाला
प्रचण्ड अग्नि से उत्पादित मेरे दिव्य अनुपम मदकतम प्याला
इन प्यालो में मचल रही सुरबाला की सागरमय मादक हाला
आज पीकर प्यास अपनी बुझाउँगा बला की यौवनरस मादक हाला
१८५ मेरी आधुनिक मधुशाला
भोर का रक्तिम सूरज साकी बन आज आया मेरी आधुनिक मधुशाला
स्याह लालिमा और उसके नूर से गूँज उठा मेरी मधुशाला का चौबारा
अपने हाथो से कृतक अंजान मनोहर को पिलाई उसने शबनमी हाला
रूपसी की सागरमय के जादू ने अपना गुलाम परदेशी को बन डाला
Monday, 13 June 2016
०८४ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
मैं अपनी इक्षा शक्ति के दम पर जनम जनम आता मेरी मधुशाला
बाल की सागरमय मादक हाला बस गई है कृतक तनमन में अब तो
चहुँ दिसि नज़र आता है दिव्य अनुपम छलकता मादक तम प्याला
हाला में नज़र आती रूपसी दिल जिगर और रूह में बस गई सुरबाला
१८३ मेरी आधुनिक मधुशाला
पीके बाला की सागरमय हाला झूम उठता है चंचल मन मतवाला
तनमन में अगन लगाती यारों रूपसी बाला की मादकतम हाला
परदेशी पागल है हो जाता एक बार जो पीता मधुशाला की हाला
कृतक बावरा हो कत्थक है करता मेरी आधुनिक मधुशाला के चौबारे
१८२ मेरी आधुनिक मधुशाला
सागरमय अमृतसम मादक हाला पीके दो जिस्म एक जा हो जायेंगे
दो जिस्म एक रूह तले मेरी आधुनिक मधुशाला के उपवन खो जायेंगे
मैं हाला मय और हाला मुझ मय एक दूजे में प्रेमी सैम खो जायेंगे
कृतक अंजान के शब्दों की सुनामी बन सारे जहाँ के पाठको को ललचायेंगे
१८१ मेरी आधुनिक मधुशाला
तुम उनमुक्त गगन की कारी बदरिया बन साकी आई मेरी मधुशाला
उमड़ घुमड़ कर ऐसी बरसी झूम उठी रूपसी सुरबाला की गगरिया
बाला यु चलती मेरी मेरी मधुशाला जो बन में बिचरती चंचल हिरनिया
कृतक अंजान की प्रियतमा बावरी यु तड़पत ज्यो जल बिन मछरिया
१८० मेरी आधुनिक मधुशाला
मेरी मोहब्बत मेरी मधुशाला मेरी मोहब्बत दिव्य अनुपम प्याला
तुम अमृतसम सागरमय मादकतम हाला मेरी मोहब्बत सुरबाला
तुम्हे समझकर अनुपम मादक हाला लबों से पी जाऊ मादक प्याला
कृतक अंजान डगर सदियों से डगर तुम्हारी निहारता रूपसी बाला
१७९ मेरी आधुनिक मधुशाला
तुम पुनम के चाँद शबनमी मोतियों की झड़ी लगाना मधुशाला के आँगन
शेफाली की मादक महक से महकेगी मेरी मधुशाला झूम उठेगा तन मन
झूम उठेगा तन मन जब लबो से टपकेगी सागरमय मधुशाला के आँगन
मधु का मादक प्याला सैम लगाती रूपसी बाला कृतक थामे उसका दामन
१७८ मेरी आधुनिक मधुशाला
हे माधवेन्द्र केशवेंद्र तुम एक इशारा बैरन मुरली का कर देना
मैं शक्ति अज़र अमर पचंड सुनामी बनके धरा पे छ जाउंगी
कृतक अंजान की मधुशाला में बनके साकी कोहराम मचउंगी
प्रेम भक्ति की मादक हाला पीकर मुरली अधरों से लगाउंगी
पढाव
जारी है जिन्दगी का सफर
कई पड़ाव आये
बचपन बीता खेलकूद और पढ़ाई मे
जवानी ने अनेकानेक रंग दिखाये
फुर्र हो गई पल दो पल मे जैसे बसंत
तीसरे गेयर मे क्या क्या रंग दिखायेगी
अनेकानेक वात्सल्य मोह तृष्णा से भेंट करायेगी
चौथे गेयर का सफर बहुत मुश्किल होगा या नही
आमी जाने ना
कयामत
कमबख्त कयामत नही तो कयामत से कम भी नही।
गर ये हमारी उम्दा शायरी नही तो शायरी से तनिक कम भी नही।
ये बात जुदा है कमबख्त ये अल्फाज है हम नही।
हम नही तो कोई गम भी नही जमाने से जुदा है शायरी हमारी हम नही तो कोई गम नही।
खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई





