दिल की जवाँ हसरतों को
दफन सीने में करके
करवट बदली मैने
और उसके पैरो में सोने की कोशिश में
करवटें बदलते बदलते
दो पहर रात बीत गई
लघुशंका निवारण हेतु
बाहर निकला बिस्तर से
और दूर उसके बाजू में सो गया
रब दा रहम मैने पाया
मीठे खट्टे ख्वाबों में खो गया
मैने पूछ लिया
आखिर क्यों न वो सब तेरे साथ करू
तेरे साथ मोहब्बत का इझहार करू
तेरे साथ स्वर्णिम पलों को पाऊ
तेरे अनुपम झरनों का जल पाऊ
मै रखवाला तो नही पहरेदार हूँ
अपनी वफाओ से इमानदार हूँ
जाने क्यों तेरी मोहब्बत पाने को दिल बेकरार रहता है
इस बात का एतबार है मुझे
तूही मेरी मोहब्बत है एतबार है मुझे
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Sunday, 31 July 2016
मेरी मोहब्बत है तू , तू ही मेरा प्यार है , तूही ख्वाहिशे दिल है , सनम एतबार है मुझे
३१८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
बहुत मिस हमको करोगे मधुशाला को ठिकाना बनाओगे
कभी न दूर जाओगे मोहब्बत में मेरी हरेक रिश्ता भुलाओगे
शमा ए मधुशाला रौशन करोगे पीके हाला सदा मुस्कुराओगे
३१७ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
राजा को ये रंक बनाती फ़क़ीर को राजसी ख़्वाब दिखाती है
होश में आने ना देती जन्नत का सा अहसास हाला कराती है
मेरी मधुशाला मेरा ठिकाना रूह रूपसी बाला नज़र आती है
३१६ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
वादा करता हूँ जनम जन्मांतरों तक तेरा साथ निभाऊँगा
मेरी थी मेरी है तू मेरी ही रहेगी मरके भी जुदाई सह न पाऊँगा
हरेक रात कब्र से निकल सागरमय जाम पीने मधुशाला आऊँगा
३१५ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
जब उदर में जाती अंजलि भर केशरी शबनमी अमृत हाला
अच्छा बुरा कुछ भी ना सोचने देती दिल से जुबा पे लाती हाला
चूहा भी शेर बनके दहाड़ने लगता जब पी लेता रूपसी की हाला
३१४ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
तेरी शबनमी आँखों से टपटप टपकती अंगुरी अमृतसम मादक हाला
लबो से लब लगाकर आज पीने दे परदेशी को यौवनरस सोमरस हाला
मेरी मधुशाला है मंजिल मेरी तेरा प्यार अमृतसम अनुपम मादक हाला
आरजुयें जिन्दगी
तेरी हरेक सुब खुबसूरत दिलकश प्यारी हो
तेरी हरेक रात दमके दिवाली सी
महके जिन्दगी तेरी केशर की महक से यारा
तेरी हरेक आरजू रब की हमारी हो
चंदन का सा महके आँगन तेरा
मोहब्बत के उपवन में चाँदनी की यारी हो
शबनमी मोतियों सें महके उपवन मोहब्बत का
गोरइया की चहकती किलकारी हो
तेरे नूरे रूखकार से रौशन मेरा दिन
तेरी अँखियों की सी रौशन निशा दुलारी हो
मोहब्बत के आँगन की प्यारी कुमुदनी तू
हरेक रात तेरे दल में जीने की आरजू पूरी हमारी हो
Saturday, 30 July 2016
३१३ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
सागरमय मादक मौजे उदर में जाकर कोहराम मचाती
मादक हाला की सुनामी में यारों अंतर्मन तक को हिलाती
दिल से लगाती अपना बनाती यौवन रस हाला पिलाती बाला
३१२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
दिल की मादकता सम मादक सागरमय अमृतसम हाला
दिल के सम भावुक मेरी मोहब्बत कमसिन रूपसी बाला
मेरी दिली ख्वाहिश पहली मोहब्बत मेरी आधुनिक मधुशाला
३११ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
कभी न उदर परदेशी भरता ला और और पिला मुझको सुरबाला
दिल की इक्षाओं में पंख लगाती कमसिन बाला की अमृत हाला
सांझ ढले उदर फिर कहता उठ चल परदेशी डगर मेरी मधुशाला
३१० - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
रोज़ ही मिलती रूपसी प्रियतम कर में लेकर सागरमय हाला
सदियों से मोहब्बत मेरी प्रियतम और मेरी आधुनिक मधुशाला
दिल में बसी प्रियतमा मेरी मोहब्बत कमसिन साकी सुरबाला
३०९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
अनुपम पैमाना फर्श पे गिरकर चूर चूर मेरे यार हो जाता है
सच पूछिये तो यारों पैमाने के साथ साथ दिल टूट जाता है
जितनी पिलाई थी सागरमय उसने नशा पल में काफूर हो जाता है
३०७ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
३०८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
३०६ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
तेरा हाला पीकर जी खुश हो जाता प्रियतम साकी सुरबाला
ख्वाबगाह में नींद न आती सारी सारी रात तेरी याद सताती
मेरी मधुशाला मेरी जिन्दगी हरेक पल मुझे याद है आती
Friday, 29 July 2016
३०५ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
रिश्तों को कभी नहीं भुलाता पीकर सागरमय अमृत हाला
बाला की अपार मोहब्बत पाता आकर आधुनिक मधुशाला
चाहे जियु चाहे मरू मैं सदा ही मेरे दिल में बसती सुरबाला
३०४ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
तीन अमूल्य तत्वों हाला बाला और दिव्य अनुपम प्याला से
कृतक अंजान डगर मनोहर ने रच डाली मेरी आधुनिक मधुशाला
जन्नते हूर कमसिन बाला की मोहब्बत में कृतक ने पी आज हाला
Wednesday, 27 July 2016
जिन्दगी तुम्हारी मुस्कुराहट पे जाँ निशार करता हूँ, तुम्हारी जुदाई के अहसास मात्र से डरता हूँ
जिन्दगी बहुत प्यारी हो तुम जिन्दगी
तुम्हारी मुस्कुराहट दिल की बेचेनी बढाती है
तुमसे बिछुडने का सोचने मात्र से दिलों जान पे बन आती है जिन्दगी
जिन्दगी तुम्हारी यादों को आशियाना ए दिल में बसाया है मैने
अपनी सासों की बाजी लगाकर अपना बनाया मैने
तेरी मुस्कुराहट से दिल बाग बाग हो जाता है
दिल के उपवन में इन्दृ धनुष मुस्कुराते है
कृतक अंजान के दिल की धडकन तुम बहुत याद आती हो
३०३ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
ना जाने कब प्यास बुझेगी उदर की अंजान डगर पीके हाला
आगे बढाकर दिल से हाला पिलाती कमसिन रूपसी सुरबाला
मेरे लिए चौबीसों घंटे राह निहारती मेरी आधुनिक मधुशाला
३०२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
तिमिर के मेघ पलक झपकते छटते देख मेरी मधुशाला
गम कोषों दूर हो जाता यारों देख कमसिन हुस्न मतवाला
जिन्दगानी में नित नव अरमाँ जगाती मनोहर मधुशाला
३०१ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
कंचन सम अनुपम प्याले में रूपसी देती सागरमय हाला
रोज़ सोचता दिल में अपने अब यह होगा आखिरी प्याला
साँझ ढले नित मुझे पुकारती सी लगती बाला और मधुशाला
२९९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
साँझ ढले मैं नित समय पे आता शीश झुकाता मधुशाला
कमसिन की सागरमय पीकर करार यार दिल को आता
मेरे दिल जानो जिगर में बसती एक ही मूरत सुरबाला
३०० - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
कभी न ना ही कहता परदेशी मादक अमृत हाला पीनेवाला
रोज़ सोचता अब ना पियूँगा और न मैं आऊँगा मेरी मधुशाला
लेकिन साँझ ढले नित याद सताती कमसिन बाला की हाला
Tuesday, 26 July 2016
२९८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
जिन्दगी जीने की उमंग बढ़ाती सुरबाला की सागरमे हाला
सुखद अहसास रूह तक पाती आके मेरी आधुनिक मधुशाला
कृतक अंजान डगर संनिग्ध में अलख जगाती रूपसी बाला
२९७ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
दिल को अपनत्व का एहसास कराती मेरी आधुनिक मधुशाला
भटके हुये को राह दिखाती जिन्दगी की राह पे लाती रूपसी बाला
अनजान डगर के परदेशी को अपने दिल से लगाती मेरी मधुशाला
Monday, 25 July 2016
२९६ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
लब मिला दिए रूपसी कमसिन बाला ने मेरे लबो से ये कहकर
गर मादक मय पीना छोड़ दोगे तो ये अंगूरी जाम रोज़ पाओगें
दिल में खुशियों का सैलाभ आयेगा जिन्दगी खुशहाल बिताओगे
मधुशाला हरेक डगर तुम पाओगे मादक मय पीके होश में आओगे
२९५ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
रूपसी की मादक नज़रो से परदेशी होशों हवास अपने गंवाता
बाला की अमृत हाला पीने की ललक लेकर परदेशी मधुशाला आता
मेरी मधुशाला की जवां महफ़िल में हुस्न का ज़ाम पीके चकराता
२९४ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
मेरे आधुनिक मयखाने को ज़माने में कोई बंद न करने पायेगा
जो कोई कोशिश भी करेगा सागरमय पीके जश्न मधुशाला में मनायेगा
साकी की मादक हाला पीके वो काफ़िर होशो हवास अपने गवायेगा
२९३ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
सारे ज़माने को सुरबाला की खातिर सरेशाम मेरे रब मई भुलाऊँगा
फ़कीर की कश्ती के मानिंद अमृतसम मादक हाला में तैर जाउँगा
अपनी जिन्दगानी को मादक हाला पीकर मेरी मधुशाला में बिताउँगा
२९२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
परदेशी अनजान डगर मनोहर दीदारे यार की खातिर मदिना आया
तुझसे मोहब्बत भी नशा के ए सागरमय से कम नहीं यार होती है
जब तेरा दीदार होता है सहराओं में जिंदगी गुलज़ार मेरे यार होती है
२९१ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
Sunday, 24 July 2016
२९० - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
२८९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
२८८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
२८७ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
मेरी वफाओं का तमाशा बनाया उसने मोहब्बत में मिलाके मादक हाला
अंजाने तुम ये क्या कर बैठे हमारी नज़रों से खुद गिराने के लिए पिलाई हाला
तेरी मोहब्बत कैसे भुलाऊ तुही बता ऐ कमसिन अल्हड रूपसी सुरबाला
मेरी आधुनिक मधुशाला अब बनी आशियाना - ए -मोहब्बत जब चखी तेरी हाला
२८६ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
सावन के सुहाने मौसम में झूला झूलती रूपसी बाला मेरी मधुशाला
बसन्ती बहारो ने मेरी मधुशाला की कायनातो फ़िज़ा को बदल डाला
जो शाम गुजरी साकी सुरबाला के संग पीकर अमृतसम मादक हाला
जिन्दगानी की महकती शाम थी वो जब बाला के लबो से मादक हाला
२८५ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
कोयल की कुहुक मतवाली मोरों की रागिनी सुहानी सी लगती हाला
सावन की मादक फुहारों में जन्नते हूर हमें लगती कमसिन बाला
आमों की मञ्जरी की मादक महक लगती जैसे महुये की अमृत हाला
सावन के सुहाने मौसम में पपीहे की पीहू पीहू लगती ज्यों बाला की छलकती हाला
२८४ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
Saturday, 23 July 2016
२८२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
बाला की सागरमय पीके परदेशी झूम झुमके ठुमके लगाता है
मचलती है कमसिन जवानी मेरी मधुशाला में खुमार छाता है
होती है सप्तरंगी हसी राते मेरी मधुशाला में, दीवाना गीत गाता है
२८३ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
हम परदेशी तो रूपसी बाला की हाला से बेपनाह मोहब्बत करते हैं
बिन सुरबाला की मादक हाला के जीने की कल्पना से भी डरते हैं
मेरी मधुशाला में सरेशाम आकर सजदे में नाक तक रगड़ते है
२८१ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
मदहोशी के आलम में जमाने भर के रिश्ते नाते यारों भुलाता हुँ
सरेशाम बाला की महफ़िल में अमृतसम हाला में डुबकियाँ लगाता हुँ
मेरी मधुशाला में झूमता हू पी बाला की हाला जीवन का मज़ा पाता हुँ
२८० - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
तेरी सागरमय मादक हाला पीके परदेशी खुद को भुलाता है
जमाने की रुसवाइयों से परे जन्नत का शुकुन परदेशी पाता है
अमृतसम सागरमय हाला पीके झूमता है मचलता है गाता है
२७९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
कमसिन अल्हड जन्नते हूर के दीदार से झूमने लगता है बल खाता है
फिर होश उसे नहीं रहता मधुशाला की महफ़िल में जमाने को भुलाता है
कृतक अंजान मनोहर का शागीर्द बनकर मेरी मधुशाला में धुनि रमाता है
२७८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
अपने होशो हवास गवांकर परदेशी जन्नत में गोते लगाता है
कभी सागरमय जाम उठाता है कभी जाम छलक जाता है
साकी बाला की अमृतसम हाला की खुमारी में शहंशाह बन जाता है
२७७ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
कृतक अंजान डगर मनोहर की हिदायत से बगावत की मैंने
मेरी मधुशाला की साकी बाला की हाला ने हिला रखी दुनियाँ
हरेक गमज़दा मेरी मधुशाला में आके चैनों अमन पाता है
२७६ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
बाला की अमृतसम हाला का खुमार दुनियादारी उसे भूलाता है
जब नज़र साकी बाला की उसपर पड़ती है संभलने लग जाता है
मेरी मधुशाला की सागरमय हाला पीके रग रग ने खुमार छाता है
Friday, 22 July 2016
२७५ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
बे रहम वक्त के मारो को पीढ़ा से छुटकारा दिलाती मादक हाला
रूपसी सुरबाला के नूर से रौशन मेरी अपनी आधुनिक मधुशाला
कृतक अंजान की दिली ख्वाहिश जिन्दगी की तमन्ना मादक हाला
२७४ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
साकी बाला प्यार से भर भर देती सागरमय अनुपम हाला
दिल में आशा उमंग जगाता कंचन सम अनुपम प्याला
कृतक अंजान डगर सांझ ढले अलख जगाता मेरी मधुशाला
२७३ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
अमीर गरीब और राजा रंक का भेद मिटाती मेरी आधुनिक मधुशाला
सभी यहाँ सजदा करते बा- अदब शीश झुकाते कमसिन सुरबाला
सारे जहाँ से ज्यादा चैनो अमन सब पाते आकर मेरी मधुशाला
तुम्हारी मुस्कुराहट
रब दी सौ तुम्हारी मुस्कुराहट के चलते हमने दिल जानो जिगर
ए मेरे हसीन कातिल तेरे नाम कर दिया
बेटियों से ही है ये जहाँ
बेटियों से है ये जहाँ
जमीं तो जमीं आसमान
जननी है कल की
इन्हीं का है आसमान
मोहब्बत कीजिये इनसे
ये ही तो है ममता की खान
स्वर्ग है इनसे
इन्ही कायतान की शान
जननी है ये
आदमियत की खान
Wednesday, 20 July 2016
२७२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
जो भी परदेशी मेरी मधुशाला आता है होशो हवास गंवाता है
रूपसी सुरबाला की अमृतसम सागरमय हाला में गोते लगाता है
लाख कोशिश परदेशी है करता फिर भी संभलने नहीं पाता है
एक बार जो पी लेता है अमृतसम हाला वो फिर लौट के आता है
२७१ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
२७० - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
मेरी मधुशाला की कमसिन रूपसी बाला से मोहब्बत करता हुँ
बाला की सागरमय हाला अब बन गई है यारों जिंदगानी हमारी
कृतक अंजान डगर को मेरी आधुनिक मधुशाला लगती है प्यारी
२६९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
जब दीदार साकी का होता है तब परदेशी होशो हवास गंवाता है
अपनी मोहब्बत को दिल से याद करके प्याला परदेशी उठाता है
मेरे आधुनिक मयखाने में बड़े से बड़ा पीने वाला चकरा जाता है
२६८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
घूम घूम कर जाम पिलाती रूपसी बाला मेरी आधुनिक मधुशाला
सारे जहाँ से लोग है आते पिने सागरमय मादक हाला मेरी मधुशाला
नित साँझ ढले मेला सा लगता मधुशाला झुमती गाती रूपसी बाला
पीकर हाला झूमता गाता अलख जगाता परदेशी मेरी मधुशाला
२६७ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
घनियारी काली घटा के शाये में साकी की हाला अमृतसम लगती है
रब दी सौ अंजली भर पीने के बाद कायनात सतरंगी यार लगाती है
जैसे जैसे सागरमय से ख़ुमारी बढ़ती है सारी दुनियाँ हसीं लगती है
साकी के मादक लबों से टपकती हाला की महकसे कायनात मचलती है
२६५ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
दिल बाग़ बाग़ हो जाता जब पटियाला पैग नज़र आता है
सागरमय छलकती है शबनमी होठों से यार मज़ा आता है
जब यौवन पे होती है मेरी मधुशाला साकी हाला छलकता है
२६६ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
तेरे मयखाने में आकर दिल को करार बेशुमार आता है
जमीं पे ओर कोई जगह ऐसी नहीं जहाँ दिल करार पाता है
झूमता है परदेशी तेरे मयखाने में रंजो गम सारे भुलाता है
जन्नत सा शुकु पाने को अंजान डगर नित मयखाने आता है
Tuesday, 19 July 2016
तेरा साथ है इतना प्यारा, हम आयैगें जमीं पे दोबारा
क्या इस जनम में एक बार फिर से तुम्हारा साथ पायेंगें
इसी ख्वाहिश में जन्नत की सी हँसी दुनियाँ को यार ठुकरायेंगें
लगता है आप का साथ नही मुकद्दर मे हमारे
तुम क्या रूठी चाँदनी रूठ गयें ये सारे नजारे
जलजला
तुम्हे सामने पाकर अल्फाजों का जलजला सा सनम आता है
कसम से मेरे यार लिखते लिखते तुम्हारी चाहत में दिल मचल जाता है
आज तुम क्या रूठे सारे अल्फाज सुनामी मे बह गये
जितने चहकते थे कृतक अँजान तुम्हारी मोहब्बत में रूआँसे रह गये
मीठी कुहुक
आपकी कोयल की सी मीठी मदभरी आवाज सुनने को बेताब है दिल हमारा
क्या हमें हक है अपने यार की सुरीली आवाज सुनने को दोबारा
पैगामे मोहब्बत
मेरी मोहब्बत का पैगाम ये गुलाब आपके नाम
हम इन्तजार करेगें मरते दम मेरे यार तुझे मेरा सलाम
तू मोहब्बत है मेरी एतबार तो हम पे मेरे सनम मेरे यार
देख दिल आशियाना है सिर्फ तेरा धडकने दिल पे कर एतबार
बसंती फगुआ
बासंती फगुआ फरमाँ रही है धडी मिलन की करीब आ रही है
वाम अंगो के फडकने से महबूबे मोहब्बत की याद सता रही है
बेताब दिल की फरियाद को यु नजरअंदाज न कर
अपनी पहली मोहब्बत और दिली ख्वाहिश को बर्बाद न कर
पहली मोहब्बत
बेताब दिल की फरियाद को यु नजरअंदाज न कर
अपनी पहली मोहब्बत और दिली ख्वाहिश को बर्बाद न कर
खामोशी
तेरी खामोशिया मोहब्बत की मूक गवाह होतीं है
नम आँखें बीती शब का आईना यार होती है
तुम्हारी सुरीली आवाज की झन्कार सुनने को बेताब है दिल हमारा
अब और इन्तजार मुशि्कल है देखना शीशे सेभी नाजुक है बेचारा
वफा ए मोहब्बत
तेरी वफा ए मोहब्बत से वाकिफ हूँ यार में
वफा ए मोहब्बत का ता उमृ तलबगार हूँ में
जब तलक जिस्म में रूह बाँकी है सनम
मरते दम तेरे रूखसार के नूर से रौशन रहेंगी दुनिया हमारी
तुम यार हो मेरी मेरी मोहब्बत से बढके
आशियाना ए दिल में तडपते है हरेक पल
कदम कदम
कदम कदम पे तुम्हारी कमी महसूस करता हूँ
अल्फाजों में बयाँ करना मुमकिन नही मेरे यार
हरेक पल दिल की धडकन बयाँ करती है मोहब्बत तुम्हारी
आईना ए दिल में मेरे सनम सिर्फ तस्वीर तुम्हारी
मजबूरियाँ
वाकिफ हूँ तुम्हारी मजबूरियों से
अंजान नही मै हैरान हूँ मगर परेशाँ नहीं मै
दिल को अब भी तुम्हारा एतबार
तुम्ही रहती हो आशियाना ए दिल मे मेरी सरकार
नूरे रूखसार
तेरे रूखसार पे जो काला तिल है
सनम उसने चुराया मेरा दिल है
तेरे रूखसार का काला तिल
जनाबे हुस्न का पहरेदार है
तेरे रूखसार के नूर से रौशन है जमाना
सनम हमारे दिल को बनालों आशियाना
बेदर्द जमाने की रूसवाईयों का नही ठिकाना
मजाक नही हकीकत मे है हमारा दिल आपका आशियाना
बेरूखी
पूनम तुम्हारी बेरूखी अब सही नही जाती
तनहाईयों में भी तुम्हारी यारी याद आती
कमबख्त दिल को है ये एतबार मेरे यार
तुम्ही मेरी पहली मोहब्बत तुम्ही आखिरी ख्वाहिश मेरे यार
रूठे सनम
तुम्हारी नाराजगी का सबब गर हम जान जाते
रब दी पूनम तुम्हारे कदमों में सर अपना झुकाते
बडे ही नासमझ थे मेरे यार मेरे दोस्त
वरना सरेशाम हम अपनी पृेरणा युही न गवाँते
हम अपनी जिन्दगी से कीमती महकती चाँदनी यू ही न गवाँते
रब दी सौ करो हमपे एतबार
हमारी लेखनी से अल्फाज निकलना हुआ दुश्वार
खुदा के लिये न करना तुम इन्कार
आज उठाओ लेखनी और लिख दो हम पे तुमको एतबार
२६४ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
बाला संग छुपा छाई खेलने में कृतक अंजान बहुत मज़ा आता
जब मधुशाला के उपवन में साकी बन काला मेघ धूम मचाता
सागरमय मादक हाला की सुनामी में जल थल एक हो जाता
काले मेघ की ओट में यारों कृतक अंजान बाला संग रास रचाता
२६३ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
जुबां लालायित कबसे यारों चखने को स्वाद अनुपम निराला
हाला की मादक मौजे जब प्याले के साहिल से यारों टकराती
यकीन कृतक अंजान का मानों दिल में सूनामी भूचाल है लाती
२६२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
मेरी पसन्द की हाला मैं सदा ही पाता मेरी आधुनिक मधुशाला
मेरी पसन्द के कंचन प्याले में पीता अमृतसम मादक हाला
साकी बाला की मोहब्बत मैं पाता नित सांझ ढले मेरी मधुशाला
कृतक अंजान से यारी मेरी नित समीप बैठके पीता हाला
२६१ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
यम से यारी मैंने बनानी उसे मादक सागरमय हाला पिलानी
अमृतसम साथ में लेकर जन्नत में मेरी मधुशाला बनानी
सांझ ढले महफ़िल में धूम धाम से सागरमय हमने पिलानी
मेरी मधुशाला की सागरमय की महक से जन्नत महकानी
२६० - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
ढलने लगी है कृतक जिन्दगानी मेरी मधुशाला पहचान पुरानी
उम्र के इस पड़ाव पर बाला की हाला में नज़र आती जिन्दगानी
हमने किये थे मोहब्बत के जो वादे कभी मेरी प्रियतम बाला से
हरेक कीमत पर हरेक हाल में हमनें अपनी जुबां है निभानी
२५९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
एक यही ख्वाहिश है मेरी मरते दम पियु सागरमय हाला
गंगाजल सम पावन अमृतसम सागरमय अनुपम हाला
मेरी जिन्दगी का चैनो अमन यारों मेरी आधुनिक मधुशाला
कृतक यही आखिरी ख्वाहिश मरते वक्त पियु अनुपम हाला
२५८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
अपने तन मन को महुये सा फुला हमने भर ली मादक हाला
यम क्या तुम कहते हो स्वर्ग में हमें मिलेंगी कमसिन बाला
अपने कर में कंचन सा प्याला ले रूपसी हमें पिलाएगी हाला
हमें स्वर्ग के स्वर्णिम नूर में नज़र आयेगी अपनी मधुशाला
२५७ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
एक अदना सा पुतला हमें बनाकर उसने भर दी जीवन हाला
नशा लगा अति मादक हमको गले लगा लिया हमने प्याला
जीवन के सारे दुःख दर्द भुलाते कंचन सम मादक प्याले से
सभी पीने वालों के दुःख दर्द मिटाने को अविरल खड़ी मधुशाला
२५६ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
सारे जमाने के गम भुलाने के लिये मैं नित आता मेरी मधुशाला
प्यार तेरा पाने के लिये जीवन सुखी बनाने के लिये पीता हाला
अमृतसम हाला का मधुर स्वाद पाने के लिये मैं आता मधुशाला
मेरी नस नस में बसी हाला मेरे यारों मेरा दवाखाना मेरी मधुशाला
२५५ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
बीते कल को भुलाने के लिए मैं तो पिये जाऊँगा
बाला को अपना बनाने के मैं आता हुँ पीने हाला
तेरी एक झलक पाने के लिये मैं आता हुँ मधुशाला
अपनी मोहब्बत पाने के लिये पीता हुँ मादक हाला
Monday, 18 July 2016
२५४ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
मुझे नज़र आता है प्रियतम हरेक घड़ी कनक सम प्याला
सतत छलकती तेरी सागरमय से अमृतसम सोमरस हाला
कभी न जी है भरता रूपसी चाहे कितनी ही पी जाऊ हाला
दिल में उमंगें उठती है जब हाथ मेरे आती सागरमय हाला
२५३ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
तेरी सागरमय हाला पीने को तरसते सुर मुनि तपस्वी और ग्वाला
तेरी सोमरस अमृतसम मुझे भाति कमसिन हसीन रूपसी बाला
तेरे मादक लबों से अमृतसम हाला पीने की चाहत दिल में लिए
सदियों से हरेक हरेक जनम धरा पे आता बनके बनका ग्वाला
आज पियूँगा सागरमय मोहिनी तेरे मादक लबों से गाँव का ग्वाला
२५२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
रूपसी कमसिन बाला की अक्षय सागरमय से छलकती हाला
मेरी मोहब्बत जन्नते हूर पृथ्वी का गुरुर प्रियतमा सुरबाला
मेरी मधुशाला सदा से बसी दिल में मेरे और भाती मादक हाला
२५१ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
कृतक मेरी आधुनिक मधुशाला देख रहा चहुँ ओर मेरे मादक हाला
मादक हाला रूपसी कमसिन अल्हड मोहिनी सुरबाला मेरी मधुशाला
जन्नत हूर रम्भा से सुन्दर साकी बाला नित ही पिलाती मादक हाला
नित मेला सा यारो लगता है मेरी आधुनिक मधुशाला बरसती हाला
२५० - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
देख रहा हुँ सदियों से प्रियतम रूपसी कमसिन सुरबाला
सदियों से मैं पीता आया सुरबाला की ससगरमय हाला
पहली मोहब्बत आखिरी आरज़ू मेरी आधुनिक मधुशाला
जनम जनम यही पाने की ख्वाहिश बाला की यौवन हाला
२४९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
साँवरिया की बाँसुरिया की मदभरी तान ने मधुशाला भरमाई रे
चहुँ दिशि चहुँ ओर साँवरे ने मोहब्बत भरी हाला आज बरसाई रे
देखो वो देखों गोरी गोरी राधिका चहुँ दिशि चहुँ और नज़र आई रे
कृतक अंजान डगर ने भ्रमित होत सुध बुध आज बिसिराई रे
२४८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
झूमके झुमके सावन की मादक फुहारे बरस रही मेरी मधुशाला
टप टप टपटप बरस रही घनियारे कारे मेघों से अमृतसम हाला
कृतक तन मन झूम उठा पीकर मेघो से बरसती सागरमय हाला
कारी घटा कुछ ऐसे बरसी तन झूमा मन झूमा झूम उठी सुरबाला
२४७ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
जेठ की तपती दोपहर में जन्नत का सा मज़ा पाता मधुशाला
परदेशी जब अंजान डगर चलके आता मेरी आधुनिक मधुशाला
अंगार उगलते सूरज को ठेंगा दिखाता परदेशी पीकर मादक हाला
व्यथित हाँफता परदेशी नग्में मोहब्बत के गाता मेरी मधुशाला
२४६ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
सागरमय हाला पीके गुनगुनाने लाहा हुँ
नग्में मोहब्बत के शरेशाम गाने लगा हुँ
तेरी मोहब्बत में आहिस्ता आहिस्ता
सारे जमाने को भुलाने लगा हुँ
ये तो बाला की सागरमय हाला का करम है
रोज़ रोज़ मेरी मधुशाला सनम आने लगा हुँ
अपने दिल में मेरी मोहब्बत को पाने लगा हुँ
सोमरस के हरेक घूंट में यार नज़र आने लगा हुँ
तेरी मोहब्बत के उपवन का माली बन
तेरी महकती बगिया में गुनगुनाने लगा हुँ
ममता आज पराई हो गई है
कैसे नग्में मोहब्बत और वफाओं के गाऊ मैं
आज सारी कायनातो फिज़ाओ में
नफ़रतो का ज़हर घुल रहा है
कैसे सावन के झूलों में महबूब को झूलाऊ मैं
मेरे वतन का मस्तिष्क काश्मीर सुलग रहा है
वादी की आबो हवाओं में आतंक मचल रहा है
कैसे गीत प्यार के गाउ में
कैसे केशर की महक से महकती वादी में
हीर रांझणा को एक बार फिर आने को मनाऊ मैं
मेरे वतन के सैनिक जवानों ने जान की बाज़ी
लगाके सैलाब से आदमियत बचाई थी
कैसे भला बात ये भुलाऊ मैं
आज उन्हीं जवानों पर
वादिये काश्मीर में पत्थर बरसाये जा रहे है
जिन्होंने जान की बाज़ी लगाकर जान बचाई
वे अपने ही लहू से नहा रहे है
भला कैसे अपने दिल को आज बहलाउ मैं
आतंकवाद का रावण आज फिर
सीताहरण को बेताब है
भला हो भी क्यों ना
आज घर का भेदी दिग्गी उनके साथ है
आज केजरी टोपी पहन
सबको टोपी पहन रहा है
आज नितिन टोपी लगाके
ध्वज का मजाक बना रहा है
अब भला कैसे तराने अमन के होंगे यहाँ
आज एक बार फिर से घर का भेदी घर गिरा रहा है
उसे चिन्ता नहीं मादरे वतन की यारों
उसी प्रधानी का ख्वाब नज़र आ रहा है
जो कोई आज मादरे वतन पे उँगली उठा रहा है
मोहब्बत दिखा के केजरी नितिन और लालू उसे
माँ का लाल कहकर सहला रहा है
ममता आज पराई हो गई है
पडोसी की लुगाई हो गई है
काले घनियारे शाये में खो गई है
उसकी इंसानियत कही खो गई है
कुर्सी के लालच में वो पराई हो गई है
आज तुर्की की जनता ने दिखाके हिम्मत
लोकतंत्र बचाया है
मेरे वतन में काफिरों ने आज फिर शत्रु का ध्वज फहराया है
तुम्ही बताओ मेरे यारों
कहा से अलफ़ाज़ मोहब्बत के लाउ मैं
कैसे मादरे वतन की लाज बचाउ मैं
जय हिन्द जय भारत
मनोहर यादव
२४५ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
मेरी मधुशाला की मादक हाला पीके गीत नए गुनगुनाने लगा हु
अंजान डगर का एक परदेशी आसमां के ख्वाब सजाने लगा हुँ
जिस दिन से कमसिन रूपसी का दीदार किया है मेरे यारो मैंने
अपनी हस्ती को परदेशी अंजान भुलाने लगा हुँ मधुशाला आने लगा हुँ
Sunday, 17 July 2016
२४४ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
आज चाँदनी साकी बन अम्बर से आई मेरी आधुनिक मधुशाला
आते ही शबनमी मोतियों की चादर बिछाई और पिलाई हाला
चाँदनी की शबनमी अंजलीभर हाला ने दिल पे जादू कर डाला
अपने सब गिले शिकवे भुला अमृत सोमरस हाला पिलाई मधुशाला
२४३ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
मेरे हाथ में रोज़ थमाती अनुपम कंचन सैम हाला का प्याला
कभी न प्याला खाली होने देती भरती जाती प्याले पे प्याला
नज़रे जब कमसिन बाला से टकराती पल में नशा उतर जाता
ख्वाबगाह में स्वप्न लोक में लबों से टप टप टपकती हाला पाता
२४२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
जो भी हाला ख्वाहिश है होती वही हाला मैं पाता मेरी मधुशाला
जन्नते हूर साकी बन आती अपने कोमल कर से थमाती प्याला
दिल के जवां अरमान मचलने लगते देख रूपसी कमसिन बाला
मधुशाला के चौबारे हुजूम सा लगता जब रागनी छेड़ती सुरबाला
२४१ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
दिल रोज़ मचल उठता चलने को मेरी आधुनिक मधुशाला
कभी न दिल से ना न निकलती चाहे कितनी भी पियु हाला
नज़रे यौवन रस हाला को मचलती जन्नते हूर रूपसी बाला
मेरी मधुशाला का यौवन है निखरता जब कुहुकती सुरबाला
२४० - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
दिल की अगन बढाती हाला शांत ना होती अंतर्मन की ज्वाला
कभी न भरता दिल यारों चाहे कितनी ही पी जाऊ मैं हाला
रोज़ उदर में शूल से चुभते चलने को मेरी आधुनिक मधुशाला
दीदारे यार को नज़रे तड़पती हाला पीने को जिव्हा है मचलती
२३९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
नहीं कभी मन है करता सागरमय अमृत हाला पिनेवाला
आगे बढ़ बाला से परदेशी कहता ला और पिलादे प्याला
प्याले पे प्याला वह पीता जाता अंजान डगर से आनेवाला
धोक लगाता गुण गाता मेरी मधुशाला के चौबारे पीता हाला
२३८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
जिससे तुम पूछोगे डगर वह छोड़ तुम्हें आयेगा मेरी मधुशाला
अपने कोमल कर तुम्हें जी भरके पिलाएगी हाला रूपसी बाला
परदेशी के दिल को लुभाती कमसिन अल्हड विश्वमोहिनी बाला
संगीत की स्वर लाहिरी पे थिरकती मेरे दिल की धड़कन सुरबाला
२३७ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
जिन पथ हरेक मोड़ हरेक डगर तुम पाओगें मेरी मधुशाला
नित साँझ सबेरे डगर निहारेगी जन्नते हूर कमसिन बाला
आलौकिक आनंद जिंदगी में पाओगे गर आओगे मधुशाला
बाला की दिव्य सागरमय से सतत टपकती अमृतसम हाला
२३६ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
नित सांझ ढले हूक सी दिल में उठती नज़र आती डगर मधुशाला
चुम्बक सा आकर्षण बल जिसमें जन्नते हूर कमसिन सुरबाला
सारा ज़माना कदम चूमता और नित शीश झुकाता मेरी मधुशाला
मेरी मधुशाला चहक उठती मेरी मद्दुशाला में कदम रखती सुरबाला
२३५ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
उदर की प्यास है बढती ही जाती जितनी मैं पीता सागरमय हाला
कभी न पीकर दिल ही भरत रूपसी सुरबाला की यौवन रस हाला
यौवन रस हाला बहुत ही मादक चौबीसों घंटे लबों से लैब ना हटते
मेरी आधुनिक मधुशाला बहुत मनोहर मनोरम जी भर पीते हाला
२३४ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
एक गुज़ारिश सरकार से करता मई कृतक अंजान मेरी मधुशाला
हरेक कैदखाने में भी होनी चाहिये एक अदद आधुनिक मधुशाला
कमसिन विश्वमोहिनी रुपसी जहां नित पिलाती हो अनुपम हाला
सांझ ढले महफ़िल नित सजे और झूम उठे पीनेवाला मादक हाला
२३३ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
नहीं कोई दोष नज़र मुझको है आता पीने में सागरमय हाला
गुणों की खान है सागरमय हाला अमृतसम अनुपम मेर यारों
जिस्म के रक्षा तंत्र को मज़बूत बनाती कमसिन बाला की हाला
चाहे कितना ही दुःखी कोई हो सारे गम भुला देता मादक प्याला
२३२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
पुण्य है पीना नित भोर में सागरमय अनुपम दिव्य अनुपम प्याला
भाग्यशाली व्यक्ति नित चलके आते अंजान डगर मेरी मधुशाला
जनम जनम के पाप आकर कटते एक बार झुका सिर मेरी मधुशाला
अगला जनम बृह्म कुल है पाता जो नित उठ भोग लगाता मादक हाला
२३१ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
साथ नहीं तेरे यम जाऊंगा बिन सोमरस अमृतसम मादक हाला
और साथ में मेरे होंगी प्रियतम कमसिन अल्हड साकी बाला
यम लोक में पताका लहरायेगी कृतक मेरी आधुनिक मधुशाला
नित नित सजेगी महफ़िल मेरे यारों और चलेगी सागरमय हाला
२३० - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
यम यारी अदभुद लगती यमलोक बनाऊंगा मेरी मधुशाला
रोज़ रोज़ जन्नते हर रम्भा के कोमल कर से पियूँगा मादक हाला
कनक कलेवर दिव्य अनुपम प्याले में पीकर सागरमय अनुपम
झूम उठेगा तन मन मेरे यारों चहक उठेगी मेरी आधुनिक मधुशाला
યમ સે યારી અદભુદ લગતી ,યમલોક બનાઉંગા મેરી મધુશાલા
રોઝ રોઝ રંભા કે કોમલ કર સે કૃતક પિયૂનગા માદક હાલા
કનક કલેવર અનુપમ પ્યાલે મેં પીકર સાગરમય અનુપમ
ઝૂમ ઉઠેગા તં માં મેરે યારોં ચહક ઉઠેગી મેરી આધુનિક મધુશાલા
२२९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
यम को यार बनाया मैंने साथ बैठ पिलाई अनुपम मादक हाला
मदहोश हुआ नशे झूम उठा यम मेरी अपनी आधुनिक मधुशाला
रूपसी बाला के मरमरी जिस्म ने आग में घी का काम कर डाला
हुआ दीवाना याम यारों पीके कमसिन बाला की सोमरस हाला
२२८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
तेरे अश्कों की सुनामी में डूबकर स्वयम को अलग थलग पाया
जल थल सब सुनामी की भेंट चढ़ गये कुछ भी नज़र यारों आया
बाद अर्से के खंडहर कुछ उभरे मेरी आधुनिक मधुशाला सैम पाया
नये शिरे से कृतक अंजान डगर ने एक बार फिर से मधुशाला बनाया
Saturday, 16 July 2016
२२७ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
तेरे अश्कों की सुनामी ने ताण्डव मेरी मधुशाला में मचाया
कृतक अंजान डगर जीवन में भूचाल आज फिर से है आया
जीवन धन सब अस्त व्यस्त हो गया तेरे अश्कों की सुनामी में
कृतक अंजान डगर मनोहर ने महाकाव्य मेरी मधुशाला बनाया
मेरी पहली मोहब्बत मेरा पहला प्यार
सावन की पहली पहली मादक फुहार है तू
शेफाली की मादक महक जिन्दगी का एतबार है तू
तू ही मेरी आखिरी ख्वाहिश मेरी यार है तू
सावन के मेघों से बरसती मादक मय की धार है तू
तू ही मेरे दिल की धडकन मय की रसधार है तू
तू ही मेरे ख्वाबो की दिली ख्वाहिश मेरे यार है तू
आतंक की आग
आतंक का दावानल दिन बा दिन मानवता उऱ्फ आदमियत का कत्ल कर रहा है
रो रही है इन्सानियत संगीनों के शाये में
मानव ही मानव का हरेक पल कत्ल कर रहा है
इस दावानल का कोई उपाय नजर नही आता
ए पाक परवरदिगार क्यों नही आदमियत को बचाता
अमृत का मेघ बन मानवता को बचा या रब
सूखे प्यासे जलाशयों को अपनी मोहब्बत से आबाद तू कर
मन की उष्णता तू हर पूनम की शबनमी चाँदनी सा रहम तू कर
तेरी मोहब्बत की प्यासी आज आदमियत है या रब
मेघों से मोहब्बत और प्यार बरसा के धरा को आबाद तू कर
जेठ की गर्मी से जलती धरा पर अपनी मोहब्बत की बरसात तू कर
मोहब्बत की वर्षा तू कर दिमागों को आबाद कर
आतंक और आतंकवाद की फसलों को अपनी उष्णता से बर्बाद तू कर
आदमियत के पौधों की परवरिस तू कर
या रब कत्ल कर आतंकवाद के इस जूनुनी रा वन का
मानव मात्र कोें मोहब्बत की महक से आबाद तू कर
महबूब की मेहंदी रंग लाती है, सूनी हथेली को कुर्बान होके सजाती है
कई एक के सिर के बालों की रौनक बढाती है हिना
महबूब के पेरों को चार चाँद लगती है
महबूब की मेहेंदी से महकती है कायनातो फिजा
सूनी सूनी हथेलीं की रौनक बढाती है हिना
Friday, 15 July 2016
मोहब्बत यार एसी होती है
पागल है जिद्दी है
तुझे तो आदत
दुसरों पर हुकुम चलाने की
अपनी बादशाहत चलाने की
तुझे कभी अपनी गलती
नजर नहीं आती
सोच
तू भी गलती करती है
यदि दौलत मे ताकत होती तो
मोहब्बत तेरी गुलाम होती
लेकिन तेरी दौलत में
वो ताकत नही
जो मोहब्बत को खरीद सके
तुझे गुमाँ है
अपनी दौलत का
अपनी शोहरत का
हा मुझे भी गुमाँ है
अपनी मोहब्बत का
अपनी इबादत का
अपने प्यार का
अपने एतबार का
न जाने कब तुझे
होगा अहसास
अपने गुरूर का
अपने शुरूर का
अपनी मदहोशी का
अपने घमंड का
न जाने वो दिन कब आयेगा
झुमेगा आसमाँ जमीं पे
मोहब्बत बेशुमार
बरसायेगा
वो दिन कभी तो आयेगा
मोहब्बत के दो पल
महबुबे मोहब्बत के दो पल मे जिन्दगी जी ली
अब मौत भी आ जाये तो कोई गम नही
महबुबे मोहब्बत की अमृत घुटटी पी ली मैंने
महबुब से मोहब्बत का राज जान लिया मैंने
जिन्दगी महबुबे मोहब्बत को दिल से मान लिया मैंने
सुहानी रात आने दे
सुहानी ऱात आने दे
कुमुदनी मुस्कुराने दे
बसंत को पंख फैलाने दे
महबूब को नग्में मोहब्बत के गाने दे
कोयल को नग्में मोहब्बत के दे
कुमुदनी को जरा मुस्कुराने दे
पपीहे को पीहू पीहू गाने दे
भँवरों को गुनगुनाने दे
महबूब को कसमसाने दे
तेरे गाँव डगर कों महकने दे
चिडियों को चहकने दे
मैं एक दिन तेरे नाल आउँगा
नग्में मोहब्बत के गुनगुनाउँगा
करिश्मा रब दा नायाब और आला है
दिल करता है कोई मादक करिश्माई गजल लिखूँ
करिश्माई जन्नत सी हूर नीलकमल लिखूँ
चँदा की चाँदनी लिखूँ
तेरी करिश्माई मोहब्बत मेरे यार लिखूँ
रम्भा की खुबसूरती लिखूँ
तेरा करिश्माई एतबार मेरे यार लिखूँ
तेरे आगोश में महकती मोहब्बत का करिश्मा लिखूँ
तेरी जुल्फों के शाये में महकता करिश्माई प्यार लिखूँ
तेरे लबों से टपकती मादक हाला
महकता हुये जिस्म मे गुलाब की सी खुमारी है
तनहाईयों के आलम में महकती दुनिया सारी है
अंजली भर पी लेने दे आँखों से टप टप टपकती मादक मय
नशा तेरी लबों से टपकती हाला का अमृत जैसा है।
२२२ \ २२३ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
२२३
मरमरी जिस्म तेरा कमसिन जैसे मेरी आधुनिक ई मधुशाला
तेरे मादकतम लबो से टप टप टपक रही अनुपम मादक हाला
सारा जग हुआ दीवाना तेरा इ जन्नते हूर अल्हड रूपसी बाला
आज प्यास बुझेगी रूपसी पीकर तेरी यौवन रास अनुपम हाला
३२३
मेरी मधुशाला मेरी पहली मोहब्बत दिल में बसी रूपसी बाला
मरमरी जिस्म रूपसी जैसे अमृतसम अनुपम मादकतम हाला
शेफाली सम मादक महक से महकती फिजा दमकती सुरबाला
मेरी मधुशाला रूह रूपसी कमसिन विश्व्मोहिनी रूपसी बाला
२२१ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
मधुशाला आने जाने वालों की एक ही धर्म और एक ही जाति
सभी आगंतुकों की पहली मोहब्बत बाला की सागरमय थाती
सागरमय का अनुपम स्वाद जिव्ह्या स्वयम है जान जाती
मेरी आधुनिक मधुशाला की फ़िज़ा सागरमय सी महक जाती
२२० - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
सभी यारों को पिलाना तुम प्याले पे प्याला मेरी मधुशाला
कोई प्याला रहे न रीता जो कोई आया दूर से पीने को हाला
रूपसी तुम्हारी इबादत मेरी मधुशाला में जो आया पीनेवाला
मेरी पसन्द तुम सब हो क्योंकि तुम्हारी पसंद मेरी मधुशाला
२१९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
किसी को मृत्यु के बारे में ना तुम बताना कहना था एक दीवाना
जिसकी पहली मोहब्बत थी हाला और कंचनसम मादक प्याला
वह हालामय था या हाला थी परदेशी में ये कोई जान ना पाया
अंजान डगर चलके प्रियतम परदेशी यारों मेरी मधुशाला आया
२१८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
मेरी याद में न तुम रोना रुलाना सबको महुये की हाला पिलाना
मेरी समाधी के आहाते में मेरे यारों के लिए मधुशाला तुम बनाना
प्रियतम प्यारी श्राद्ध में यारों को बुलाके मेरी प्रियतम हाला पिलाना
मेरी आधुनिक मधुशाला को जन्नत के सदृश्य प्रियतम तुम सजाना
आतंकवाद का दावन ,आहिस्ता आहिस्ता सारे विश्व को अपने शिकंजे में जकड रहा है
आज आतंकवाद की आग में
फृांस जल रहा है
आतंक का दावानल
दिन बा दिन
मानवता उऱ्फ आदमियत
का कत्ल कर रहा है
रो रही है इन्सानियत संगीनों के शाये में
मानव ही मानव का हरेक पल कत्ल कर रहा है
इस दावानल का कोई उपाय नजर नही आता
ए पाक परवरदिगार क्यों नही आदमियत को बचाता
अमृत का मेघ बन मानवता को बचा या रब
सूखे प्यासे जलाशयों को अपनी मोहब्बत से आबाद तू कर
मन की उष्णता तू हर पूनम की शबनमी चाँदनी सा रहम तू कर
तेरी मोहब्बत की प्यासी आज आदमियत है या रब
मेघों से मोहब्बत और प्यार बरसा के धरा को आबाद तू कर
जेठ की गर्मी से जलती धरा पर अपनी मोहब्बत की बरसात तू कर
मोहब्बत की वर्षा तू कर दिमागों को आबाद कर
आतंक और आतंकवाद की फसलों को अपनी उष्णता से बर्बाद तू कर
आदमियत के पौधों की परवरिस तू कर
या रब कत्ल कर आतंकवाद के इस जूनुनी रा वन का
मानव मात्र कोें मोहब्बत की महक से आबाद तू कर
मनोहर यादव "अमृत सागर"
Thursday, 14 July 2016
२१७- मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
मेरी याद में सागरमय के दिए जलाना ख़ुशी मनाना मेरी मधुशाला
वादा करता हू ख्वाबों में सबके आऊँगा कभी न तुम मुझे भुलाना
सहराओं में मृगमरीचिका सा जीवन बहुत कठिन होता है यारों
सहराओं की भुलाके उषणता बाला की सागरमय पीके खुश हो जाना
२१६- मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
बाद मौत के मेरी यारों कभी ना अश्क तुम आँखों में लाना
चौराहे श्रृद्धांजली सभा तुम करना हाला पीना ख़ुशी मनाना
कभी न भूले से अश्क गिराना मुझे याद करना और याद आना
मेरी रूह सदा साथ तुम्हारे रहेगी भूले से भी मुझे ना भुलाना
२१५ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
मेरी अंतिम यात्रा में आने वालो को यारो पहले पिलाना हाला
जब पीके कदम डगमगाने लगे तब कन्धा मुझको देना आला
मेरी समाधी के चौबारे तुम एक अदद बनवाना मेरी मधुशाला
रूह मेरी झूम उठेगी पाकर फ़िज़ा महकती सागरमय हाला
२१४ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
नहीं जलाना लकड़ीयो में मुझकों नहीं तेल या गहि में आला
एक यहीं ख्वाहिश मेरी मुझे जलाना पिलाके सागरमय हाला
मेरी समाधी यारो बनाना सम्मुख मेरी आधुनिक मधुशाला
बाद मौत के भी आठों पहर महकती रहेगी रूह महक से हाला
२१३ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
सुनामी से निकले दमकते अल्फ़ाज़ों की आज बना लाया हाला
आज पिलाऊँगा तुझको दिव्य आलौकिक अमृतसम हाला
हाला पीके याद आयेगा तुझको पिछला जनम मेरे गोपाला
और याद आयेगा तुझको बिसरा हरेक लम्हा मेरी मधुशाला
Wednesday, 13 July 2016
२१२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
नदियों की धारा कलकल छलछल न करेंगी मौन हो जायेगी
मेघों में कौंधेंगी बिजुरिया कारी कारी बदरिया अश्क बहायेगी
अम्बर लाल हो जायेगा पूनम का चाँद शबनमी अश्क बहायेगा
अम्बर के तारे टिम टिमायेंगे टूट टूट कर शोक मनाने जमीं आयेंगे
२११ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
मेरी मृत्यु पर रोने वालों के नयनों से बहेगी सागरमय हाला
मेरी मौत पर कायनात रोयेगी और अम्बर से बरसेगी हाला
मेरी मौत पर गुल न खिलेंगे उपवन में ना ही भँवर जायेंगे
ना ही भोर मुस्काएगी ना ही पंक्षी नग्मे मोहब्बत के जायेंगे
२१० - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
सभी आने वालो से यारों तुम कहना सत्य है मेरी मधुशाला
सत्य नाम कृतक मनोहर सत्य है सागरमय अनुपम हाला
सत्य बचन सागरमय अमृतसम सत्य वचन कंचन प्याला
सत्य वचन रब दी कायनात सत्य है महुये की मादक हाला
२०९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
मेरी अन्तिम यात्रा में आने वाले साथ में लेके सागरमय आना
बारी बारी से अंजली भर अमृतसम हाला यारों सभी पिलाना
चाहे मुझे भुलाना पर मेरी मन्जिल मेरी मधुशाला न भुलाना
याद कभी जब मेरी आये पीने हाला मेरी मधुशाला तुम आना
२०८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
जब मौत मुझे आये टपका देना मुंह में अंजली भर हाला
मेरे लबों को छुआ भर देना कोमल कर से अनुपम प्याला
एक यही अन्तिम आरज़ू जिन्दगानी की यारों हमारी है
सागरमय बसती नस नस में सुरबाला हमें जान से प्यारी है
मोहब्बत का उपवन ८
मेरी जिन्दगानी है तू
मेरी मोहब्बत की कहानी है
मेरी जुबानी है
मेरे सपनों की रानी है
तेरी जिन्दगी अमानत है
मेरी मोहब्बत की
सहेज कर इसे रखियों मेरे यार
तू ही मेरी पहली मोहब्बत
तू मेरा पहला प्यार
मोहब्बत का उपवन ७
कैसी है रे तू
पागल
मेरी मोहब्बत
मेरा प्यार
दिल की धडकन
चँदा की चाँदनी
बरखा की पहली फुहार
साँवन के सेरे
पूनम की चाँदनी
शबनमी मोतियों की माला
पूनम की रात का उजाला
मेरी पहली मोहब्बत
मेरा पहला प्यार
जाने जिगर जानेबहार
चौदवी का चाँद
अंगूरी हाला
जन्नते हूर
दिल का गुरूर
भोर की कुमुदनी
मेरी चकोर
शबनमी भोर
मेरा प्यार
बासंती बहार
मोहब्बत का उपवन ६
तू झूठी है मक्कार है
मेरी मोहब्बत मेरा प्यार है
फृाड है
मोहब्बत तेरे बस की बात नही
तू तो पागल है
तुझे अच्छी बातों की आदत नही
हमेशा रोती रहती है
रोने के सिवा कुछ भी तुझे नही आता
फिर भी तू मेरा प्यार है
मेरी मोहब्बत मेरी यार है
मोहब्बत का उपवन ४
तेरा दिल हमारा है
तेरी मोहब्बत नही
पागल पन है
करले एतबार
सिर्फ एक बार जान ले
जिन्दगानी खुदा है उपहार
मोहब्बत का उपवन
जिन्दगी का एतबार
अम्बर से बरसती है
मोहब्बत
अम्बर से बरसता प्यार
बहार उपवन की
तेरी मोहब्बत
जिन्दगी का मिशन
तेरा प्यार
मोहब्बत का उपवन ५
मैं जानता हूँ
तू मेरी मोहब्बत में पागल है
बहुत प्यार करती है
इस बात से वाकिफ हूँ
मेरे यार
मोहब्बत इतनी आसाँ नहीं
आसाँ नहीं प्यार
रब की इनायत है मोहब्बत
रब की इबादत है प्यार
मैं मोहब्बत का पुजारी
मेरी पहली मोहब्बत
मेरा पहला प्यार
तेरे दिल को आयेगा करार
एक तू ही
मेरी मोहब्बत
मेरा प्यार
तेरी मोहब्बत
मेरा एतबार
तेरा प्यार
जिन्दगानी का करार
मोहब्बत का उपवन ३
तू समझ
सच्चाई को स्वीकार कर
हकीकत से मुह न मोड
सच्चाई ये है
कि तू डरती है
मोहब्बत करती है
पागलपन की हद तक
बट डर जाती है
समाज से
परिवार से
बेटी से
मोहब्बत सीमाओ मे
अच्छी लगती है मेरे यार
सरहदों मे फलती है मोहब्बत
महकता है प्यार
रब की इबादत
होती है मोहब्बत
रब की इनायत
होता है प्यार
कोशिश कर
सच्चाई से न डर
मेरे यार
मोहब्बत का उपवन २
जिस दिन
तू हकीकत को
दिल से करेगी स्वीकार
उसी दिन
जितेगी मोहब्बत
महकेगा प्यार
महकेगी फिजा
झूमेगी कायनात
जितनी जरूरी बिटियाँ
है तेरे लिये
उतनी ही जरूरी
मेरे लिये गीत मेरे यार
उससे तुलना है
बेबार
वो जिन्दगानी है
तू मोहब्बत मेरी
मेरा पहला प्यार
प्यार के लिये
जिन्दगानी जरूरी है
मेरे यार
वरना गर
जिन्दगानी ही न होगी
कैसे करूँगा प्यार
करल् अब तो एतबार
खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई







